By पं. सुव्रत शर्मा
जानें मासिक शिवरात्रि की सही तिथि, पूजा विधि, मंत्र और सोम प्रदोष के दुर्लभ संयोग का लाभ

मासिक शिवरात्रि भगवान शिव की उपासना का अत्यंत पवित्र अवसर है। यह प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है। ग्रंथों में बताया गया है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत करने से महाशिवरात्रि जितना फल प्राप्त होता है। इस दिन रात्रि जागरण जप उपवास और शिवलिंग का अभिषेक करने से साधक को मानसिक शांति रोग शमन ग्रह दोष शांति और मनोकामना सिद्धि प्राप्त होती है। वैदिक मान्यता है कि इस तिथि पर शिव तत्व की ऊर्जा अत्यंत प्रबल रहती है।
तिथि: 23 जून 2025 सोमवार
चतुर्दशी: ज्येष्ठ माह कृष्ण पक्ष
शुभ मुहूर्त: 24 जून की रात 12:07 से 12:48 (41 मिनट)
विशेष संयोग: इस बार मासिक शिवरात्रि सोम प्रदोष के साथ आ रही है जिससे व्रत का फल अनेक गुना बढ़ जाता है।
• प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
• शिवलिंग के सम्मुख व्रत का संकल्प लें और सात्विकता का पालन करें।
• दिनभर जप उपवास और संयम का पालन करें।
पहला प्रहर: शाम 6 से 9 दूध से अभिषेक
दूसरा प्रहर: रात 9 से 12 दही से अभिषेक
तीसरा प्रहर: रात 12 से 3 घी से अभिषेक
चौथा प्रहर: प्रातः 3 से 6 शहद से अभिषेक
हर प्रहर में जल बेलपत्र धतूरा शमी अक्षत चंदन सफेद पुष्प और नैवेद्य अर्पित करें।
प्रथम प्रहर: ऊं ह्रीं ईशानाय नमः
द्वितीय प्रहर: ऊं ह्रीं अघोराय नमः
तृतीय प्रहर: ऊं ह्रीं वामदेवाय नमः
चतुर्थ प्रहर: ऊं ह्रीं सद्योजाताय नमः
साथ ही ओम नमः शिवाय मंत्र का 108 बार जाप अवश्य करें।
पूजा के पश्चात शिव चालीसा शिव तांडव स्तोत्र और शिव पुराण की कथा पढ़ें।
भगवान शिव की आरती करें और रात्रि जागरण कर भजन स्तुति करें।
अगले दिन व्रत का पारण कर ब्राह्मण को भोजन कराएं।
यह तिथि चंद्रमा की विशेष स्थिति के कारण मन की शुद्धि भावनात्मक संतुलन और ग्रह दोष शांति के लिए अत्यंत प्रभावशाली है। सोम प्रदोष के संयोग से चंद्र और शिव दोनों का प्रभाव प्रबल होता है जिससे साधक को दोगुना आध्यात्मिक लाभ मिलता है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी है जिनकी कुंडली में चंद्र राहु केतु या शनि का दोष हो।
जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा
ॐ जय शिव ओंकारा
अर्थ
हे शिव आप ओंकार स्वरूप हैं और ब्रह्मा विष्णु और महेश के रूप में प्रकट होते हैं। माता पार्वती सदैव आपके साथ रहती हैं।
एकानन चतुरानन पंचानन राजे
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे
ॐ जय शिव ओंकारा
अर्थ
आप एक मुख चार मुख और पंचमुख स्वरूप में पूजित हैं। आप हंस गरुड़ और नंदी पर विराजते हैं।
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे
ॐ जय शिव ओंकारा
अर्थ
आपके अनेक भुजा रूप त्रिलोक को मोहित करते हैं। आप सत्व रज और तम तीनों गुणों के स्वामी हैं।
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी
ॐ जय शिव ओंकारा
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे
ॐ जय शिव ओंकारा
अर्थ
आप गले में रुद्राक्ष और मुंडमाला धारण करते हैं और चंद्रमा आपके भाल पर सुशोभित है। ऋषि सनकादिक गरुड़ और भूतगण आपके साथ रहते हैं।
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता
ॐ जय शिव ओंकारा
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका
ॐ जय शिव ओंकारा
अर्थ
आप कमंडल चक्र और त्रिशूल धारण करते हैं। आप सृष्टि के कर्ता पालक और संहारकर्ता हैं। ब्रह्मा विष्णु और महेश तीनों आपके ही स्वरूप हैं।
मासिक शिवरात्रि का व्रत केवल एक परंपरा नहीं बल्कि आत्मिक जागरण संयम और शिव से प्रेम का प्रतीक है। इस दिन की साधना से जीवन में शांति साहस सकारात्मकता और शिव कृपा का प्रकाश स्थापित होता है। जून 2025 की मासिक शिवरात्रि पर श्रद्धा और नियम से उपवास जप और पूजा करने से साधक को दिव्यता का अनुभव होता है।
• जून 2025 की मासिक शिवरात्रि किस दिन है
23 जून 2025 सोमवार को मनाई जाएगी।
• मासिक शिवरात्रि का विशेष मुहूर्त कितना है
24 जून की रात 12:07 से 12:48 तक कुल 41 मिनट।
• इस बार कौन सा संयोग विशेष है
मासिक शिवरात्रि और सोम प्रदोष एक ही दिन होने से पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।
• चार प्रहरों की पूजा क्यों महत्वपूर्ण है
प्रत्येक प्रहर शिव के एक विशेष रूप को समर्पित होता है और साधना का प्रभाव बढ़ाता है।
• यह व्रत किन लोगों के लिए अधिक लाभकारी है
जिनकी कुंडली में चंद्र राहु केतु या शनि का दोष हो उन्हें विशेष लाभ मिलता है।
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