By पं. संजीव शर्मा
जानें कब है जून का अंतिम प्रदोष व्रत, क्या है मासिक शिवरात्रि का संयोग और कैसे मिलेगा दोगुना लाभ

प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का अत्यंत शुभ अवसर है। जून 2025 का अंतिम प्रदोष व्रत 23 जून सोमवार को रखा जाएगा जिसे सोम प्रदोष कहा जाता है। इस बार यह व्रत और भी विशेष है क्योंकि सोम प्रदोष के साथ मासिक शिवरात्रि का दुर्लभ संयोग बन रहा है जो साधक को दोगुना पुण्य प्रदान करने वाला माना गया है। यह संयोजन शिव कृपा प्राप्ति और मनोकामना पूर्ण होने के लिए अत्यंत मंगलकारी है।
त्रयोदशी प्रारंभ: 22 जून 2025 रात 1:22
त्रयोदशी समाप्त: 23 जून 2025 रात 10:09
व्रत तिथि: 23 जून 2025 सोम प्रदोष
प्रदोष काल: शाम 7:15 से 9:15 (स्थानीय पंचांग के अनुसार)
यह समय सूर्य और चंद्रमा की संयुक्त ऊर्जा का काल माना गया है जिसमें शिव साधना से अत्यधिक पुण्य प्राप्त होता है।
सोम प्रदोष व्रत मानसिक शांति पारिवारिक सौहार्द संतान सुख और रोग मुक्ति के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है। मासिक शिवरात्रि के संयोग के कारण व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है। यह व्रत जीवन से पाप रोग ग्रह बाधा और शत्रु बाधा समाप्त कर सुख समृद्धि और दांपत्य सौहार्द प्रदान करता है। साधक के मन में गहरी आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।
• ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ सात्विक वस्त्र पहनें।
• सूर्य देव को अर्घ्य दें और शिवलिंग का ध्यान करें।
• व्रत का संकल्प लें।
• गंगाजल दूध दही शहद घी और जल से अभिषेक करें।
• बेलपत्र धतूरा भांग शमी चंदन अक्षत और सफेद फूल अर्पित करें।
• शिवालय जाएं या घर में दीपक जलाकर पूजा आरंभ करें।
• ओम नमः शिवाय या श्री शिवाय नमस्तुभ्यं मंत्र का 108 बार जाप करें।
• शिव चालीसा और प्रदोष व्रत कथा पढ़ें।
• महिलाएं माता पार्वती का श्रृंगार कर सकती हैं।
• अंत में शिव पार्वती की आरती और प्रसाद वितरण करें।
• जरूरतमंदों को भोजन वस्त्र अथवा धन का दान करें।
• व्रत का पारण अगले दिन करें और ब्राह्मण को भोजन कराएं।
सोम प्रदोष चंद्रमा की ऊर्जा को संतुलित करता है जिससे मानसिक स्थिरता भावनात्मक शांति और पारिवारिक सुख बढ़ता है। मासिक शिवरात्रि का प्रभाव शिवतत्व को अत्यंत प्रबल करता है जिससे ग्रह दोष शांति आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष का मार्ग सुगम होता है।
प्रदोष व्रत केवल एक अनुष्ठान नहीं बल्कि श्रद्धा संयम और शिवभक्ति का पवित्र अवसर है। जून 2025 का यह विशेष सोम प्रदोष और मासिक शिवरात्रि का संयोग साधक के जीवन में सुख शांति समृद्धि और दिव्यता का प्रकाश भर सकता है। यही सच्ची शिव भक्ति का सार है।
• जून 2025 का अंतिम प्रदोष व्रत किस दिन है
23 जून 2025 सोमवार को सोम प्रदोष के रूप में मनाया जाएगा।
• इस दिन मासिक शिवरात्रि का संयोग क्यों विशेष माना जाता है
दोनों की संयुक्त उपासना से दोगुना पुण्य और शीघ्र मनोकामना सिद्धि का फल मिलता है।
• प्रदोष काल में पूजा क्यों महत्वपूर्ण है
इस समय सूर्य और चंद्रमा की ऊर्जा संतुलित होती है जिससे शिव साधना अत्यंत फलदायी बनती है।
• सोम प्रदोष व्रत किसके लिए विशेष शुभ होता है
मानसिक शांति संतान सुख दांपत्य सौहार्द और स्वास्थ्य सुधार के लिए श्रेष्ठ है।
• व्रत का पारण कब करना चाहिए
अगले दिन प्रातःकाल ब्राह्मण भोजन और दान के साथ व्रत पारण करें।
पाएं अपनी सटीक कुंडली
कुंडली बनाएं
अनुभव: 15
इनसे पूछें: पारिवारिक मामले, आध्यात्मिकता और कर्म
इनके क्लाइंट: दि., उ.प्र., म.हा.
इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें