By पं. नीलेश शर्मा
4 जनवरी से शुरू माघ मास 2026 में प्रयागराज माघ मेला, स्नान, दान और कृष्ण‑विष्णु उपासना के मुख्य नियम

जैसे ही 4 जनवरी 2026 की सुबह का सूर्य उदित होगा, उसी क्षण से माघ मास 2026 का शुभारंभ माना जाएगा। यह समय केवल कैलेंडर की तिथि नहीं है बल्कि पूरे भारत में नदियों, तीर्थों और घरों के भीतर एक विशेष आध्यात्मिक वातावरण के जन्म का संकेत है। प्रयागराज के संगम से लेकर छोटे‑छोटे गाँवों के कुंड और घरों की छतों पर रखे जलपात्र तक, हर जगह माघ मास की आहट महसूस की जाती है।
शास्त्रों में कहा गया है कि माघ मास में किया गया स्नान, जप, दान और उपासना सामान्य समय की अपेक्षा अनेक गुना फल देने वाली होती है। माघ मेला 2026 इसी दिव्य काल का सजीव रूप है, जिसमें प्रयागराज का संगम मानो पूरे मानव समुदाय को आत्मशुद्धि, पुण्य संचय और मोक्ष की दिशा में आमंत्रित करता है।
माघ मास 2026 की अवधि लगभग 4 जनवरी 2026 से लेकर 1 फरवरी 2026 तक मानी जाएगी। इसी अवधि में प्रयागराज में माघ मेला 2026 का आयोजन होता है। संगम क्षेत्र में कल्पवास, स्नान, साधना और सत्संग की धारा पूरे महीने प्रवाहित रहती है।
शास्त्रों में उल्लेख है कि जो व्यक्ति माघ मास में गंगा, यमुना या संगम जैसे पवित्र स्थलों पर स्नान नहीं कर पाता, वह घर पर ही पवित्र नदियों के नाम का स्मरण कर स्नान करे तो भी उसे विशेष फल मिलता है। माघ मेला 2026 इस पूरे सिद्धांत का बाहरी उत्सव जैसा है, जहाँ करोड़ों लोग एक साथ एक ही भावना के साथ उपस्थित होते हैं।
| तिथि | अवसर |
|---|---|
| 4 जनवरी 2026 | माघ मास आरंभ, माघ मेला 2026 प्रारंभ |
| 6 जनवरी 2026 | संकष्टी चतुर्थी (संकट चौथ) |
| 14 जनवरी 2026 | मकर संक्रांति, षटतिला एकादशी |
| 18 जनवरी 2026 | माघ अमावस्या |
| 23 जनवरी 2026 | बसंत पंचमी |
| 29 जनवरी 2026 | जया एकादशी |
| 1 फरवरी 2026 | माघ पूर्णिमा, माघ मास और मेला समापन |
इन तिथियों के बीच छोटे‑बड़े अनेक स्नान पर्व, साधना कार्यक्रम और कथा‑कीर्तन भी चलते रहते हैं, पर ऊपर दी गई तिथियाँ माघ मेला 2026 की रीढ़ कही जा सकती हैं।
प्राचीन ग्रंथों में माघ मास को तप, दान और स्नान के लिए सर्वोत्तम काल बताया गया है। वेद, पुराण और महाभारत जैसे ग्रंथों में वर्णन मिलता है कि माघ मास की प्रातःकालीन बेला में स्नान, देव‑पूजन और जप करने से उतना पुण्य प्राप्त होता है, जितना अन्य महीनों में लंबे अनुष्ठानों से भी कठिन होता है।
कहा गया है कि माघ में यदि कोई व्यक्ति केवल घर पर ही स्नान करते समय पवित्र नदियों के नाम का उच्चारण कर ले, तो भी उसे तीर्थ स्नान के समान फल मिल सकता है। इसका सार यह है कि माघ मास 2026 में बाहरी तीर्थ यात्रा के साथ‑साथ, भीतर के भाव‑तीर्थ पर भी उतना ही बल दिया जाता है। माघ मेला 2026 इसी भावना को बड़े रूप में सामने रखता है।
| कर्म | विशेषता |
|---|---|
| प्रातःकाल स्नान | ब्रह्ममुहूर्त या सूर्योदय के समीप, मंत्र स्मरण के साथ |
| देव-पूजन | विष्णु, कृष्ण, शिव और सूर्य की विशेष आराधना |
| दान | अन्न, वस्त्र, कंबल, तिल, गुड़, गौ, भूमि, स्वर्ण आदि |
| जप और ध्यान | भगवद्गीता, रामायण पाठ, नाम-संकीर्तन, मौन साधना |
| तीर्थ यात्रा | विशेष रूप से प्रयागराज संगम और अन्य पवित्र नदियाँ |
इन सभी के बीच माघ मेला 2026 प्रयागराज में इस परंपरा को सजीव करता है, जहाँ साधक और गृहस्थ दोनों मिलकर इस मास की ऊर्जा को अनुभव करते हैं।
प्रयागराज का संगम गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का मिलन‑स्थान माना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि माघ मास में संगम पर एक बार स्नान कर लेना भी अश्वमेध यज्ञ के समान फल देने वाला हो सकता है। यह केवल उपमा नहीं बल्कि इस बात का संकेत है कि इस काल और स्थान का संयुक्त प्रभाव कितना प्रबल माना गया है।
4 जनवरी से 1 फरवरी 2026 तक चलने वाला माघ मेला 2026 संगम के तट पर इसी आस्था को जीवंत रखता है। कल्पवास करने वाले साधक पूरे मास संगम तट के निकट तंबुओं में रहते हैं, प्रतिदिन स्नान, जप, हवन और सेवा में दिन व्यतीत करते हैं। गृहस्थ भी अपनी परिस्थितियों के अनुसार कुछ दिन का कल्पवास या बार‑बार आकर स्नान और दर्शन का संकल्प लेते हैं।
माघ मेला 2026 केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सामाजिक सेवा, आध्यात्मिक साधना और सांस्कृतिक एकता का अनूठा संगम भी है।
शास्त्र और संत दोनों माघ मास में कुछ सरल परंतु अत्यंत प्रभावी दैनिक अनुष्ठानों की प्रेरणा देते हैं। यदि कोई व्यक्ति माघ मेला 2026 में प्रयागराज न भी पहुँच पाए, फिर भी घर पर इन बातों का पालन कर इस काल का लाभ ले सकता है।
दैनिक क्रम को इस प्रकार समझा जा सकता है
इन सात‑आठ सरल कर्मों को यदि माघ मास 2026 में नियमित रखा जाए, तो भीतर की उदासी, निराशा और भारीपन धीरे‑धीरे हल्का होने लगता है और जीवन में मार्ग अधिक स्पष्ट दिखने लगता है।
माघ मास में दान को विशेष शक्ति वाला माना गया है।
| दान का प्रकार | संकेतित फल |
|---|---|
| अन्न और अन्नपूर्ण भोजन | भूखों की तृप्ति, गृहस्थ जीवन में अन्न-संपन्नता |
| कंबल, ऊनी वस्त्र | शारीरिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और करुणा की जागृति |
| तिल और गुड़ | पितृ शांति, ग्रह दोष की शांति, मानसिक संतुलन |
| गौ, भूमि या स्वर्ण | दीर्घकालीन पुण्य, वंश और कुल के लिए संरक्षण का भाव |
कहा जाता है कि माघ मास 2026 में जो व्यक्ति किसी भी रूप में सेवा और दान का संकल्प लेता है, उसके लिए आगे का समय अधिक संतुलित और संरक्षित महसूस होता है।
माघ मास को विशेष रूप से वासुदेव विष्णु और भगवान श्रीकृष्ण की स्मृति के लिए श्रेष्ठ माना गया है। भक्त इस समय सात्त्विक भोजन, व्रत, जप और भजन के माध्यम से अपने भीतर भक्ति और विवेक दोनों को मजबूत करने का प्रयास करते हैं।
इस प्रकार माघ मास 2026 में विष्णु और कृष्ण की उपासना केवल कर्मकांड नहीं बल्कि हृदय की दिशा को ईश्वर की ओर मोड़ने का सहज माध्यम बन जाती है।
पद्म पुराण, स्कंद पुराण और महाभारत जैसे ग्रंथों में माघ मास की महिमा अनेक प्रसंगों के माध्यम से बताई गई है। इन ग्रंथों का सार यह है कि
इसलिए माघ मेला 2026 को केवल मेलों की भीड़ नहीं बल्कि शास्त्रों में वर्णित उस “अद्भुत अवसर” के रूप में देखा जाता है, जिसमें साधारण व्यक्ति भी थोड़े‑से प्रयास से गहरे फल प्राप्त कर सकता है।
माघ मास के संदर्भ में कहा जाता है कि यह वह समय है जब थोड़ी‑सी आध्यात्मिक कोशिश भी असाधारण परिणाम दे सकती है। माघ मेला 2026 के संदर्भ में इसे तीन स्तरों पर समझा जा सकता है।
जो व्यक्ति माघ मास 2026 को इस तरह सचेत होकर जीता है, उसके लिए यह माह केवल कैलेंडर की तिथियों का क्रम न रहकर, एक गहरा अनुभव बन सकता है।
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