By पं. सुव्रत शर्मा
18 जनवरी 2026 को माघ अमावस्या और मौनी व्रत का आध्यात्मिक महत्व

माघ मास की अमावस्या, जिसे माघ अमावस्या या मौनी अमावस्या कहा जाता है, पूरे वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण अमावस्यों में गिनी जाती है। यह दिन स्नान, दान, मौन व्रत, पितृ कर्म और मन की शुद्धि के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
वर्ष 2026 में माघ अमावस्या की तिथि और मुहूर्त इस प्रकार हैं।
| विवरण | समय और तिथि |
|---|---|
| माघ अमावस्या तिथि आरंभ | 18 जनवरी 2026, रात्रि 00:06:41 |
| माघ अमावस्या तिथि समाप्त | 19 जनवरी 2026, रात्रि 01:24:09 |
| माघ अमावस्या पर्व तिथि | 18 जनवरी 2026, रविवार |
| स्थान संदर्भ | न्यू दिल्ली, भारत के पंचांग अनुसार |
क्योंकि 18 जनवरी की सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए उदया तिथि के अनुसार माघ अमावस्या या मौनी अमावस्या का व्रत और सभी प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान रविवार, 18 जनवरी 2026 को ही किए जाएँगे।
हिंदू पंचांग के अनुसार कृष्ण पक्ष में जब माघ मास की अमावस्या आती है तो उसे माघ अमावस्या कहा जाता है। इसी माघ अमावस्या को मौन व्रत की विशेष परंपरा के कारण मौनी अमावस्या भी कहा जाता है। मान्यता है कि
धार्मिक मान्यता के अनुसार माघ मास का स्नान और इस दिन का दान पूरे वर्ष के पुण्य को मजबूत आधार देते हैं।
शास्त्रों में माघ अमावस्या को विशेष रूप से पवित्र स्नान और मौन साधना का दिन बताया गया है। इस दिन साधक को जितना संभव हो सके उतना संयमित रहकर दिन बिताने की सलाह दी जाती है।
माना जाता है कि माघ अमावस्या पर मौन व्रत रखने से मन की चंचलता कम होती है और विचारों पर नियंत्रण बढ़ता है। संत और साधक इसी कारण इस दिन विशेष मौन साधना का संकल्प लेते हैं।
माघ अमावस्या के दिन किए जाने वाले व्रत और धार्मिक अनुष्ठान सरल होते हुए भी अत्यंत प्रभावकारी माने जाते हैं। सामान्य पूजा विधि को क्रम से इस प्रकार समझा जा सकता है।
यदि कोई साधक उपवास का संकल्प ले, तो वह फलाहार या सरल सात्त्विक भोजन के माध्यम से भी व्रत रख सकता है, फिर भी ध्यान यही रहे कि पूरे दिन संयम और श्रद्धा बनी रहे।
माघ अमावस्या के दिन कुछ विशेष नियमों का पालन करने से व्रत का फल अधिक शुभ माना जाता है।
इन नियमों का उद्देश्य यह है कि अमावस्या के दिन मन का जो स्वाभाविक असंतुलन होता है, वह साधना और संयम के सहारे स्थिरता में परिवर्तित हो सके।
माघ अमावस्या को दान के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। इस दिन किए गए दान और सेवा को दीर्घकालीन शुभ फलदायी कहा गया है। परंपरा के अनुसार इस दिन
यदि कोई आर्थिक रूप से समर्थ हो तो गौदान, सुवर्णदान या भूमि दान जैसे विशिष्ट दान भी शास्त्रों में वर्णित हैं परन्तु सामान्य गृहस्थ के लिए अपनी क्षमता के भीतर किया गया छोटा दान भी अत्यंत मूल्यवान होता है।
हर अमावस्या की तरह माघ अमावस्या पर भी पितृ तर्पण का विशेष महत्व बताया गया है, पर माघ मास की अमावस्या को अनेक विद्वान वर्ष की महत्वपूर्ण तिथियों में गिनते हैं।
ऐसा माना जाता है कि माघ अमावस्या पर किया गया तर्पण और दान पितरों तक शीघ्र पहुँचता है और परिवार में सद्भाव, आयु और समृद्धि का आशीर्वाद आकर्षित करता है।
वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को मन और भावनाओं का कारक माना जाता है। अमावस्या के दिन आकाश में चंद्रमा प्रकट रूप से दिखाई नहीं देता, इसलिए मानसिक स्थिति में भी संवेदनशीलता और असंतुलन की संभावना बढ़ जाती है।
इसी कारण शास्त्रों में माघ अमावस्या सहित अमावस्या के दिन
की सलाह दी गई है। यह अभ्यास धीरे धीरे व्यक्ति को अपने भावनात्मक उतार चढ़ाव से ऊपर उठकर स्थितप्रज्ञता की ओर ले जा सकता है।
माघ अमावस्या पर मुख्य रूप से
किया जाता है। कुछ परिवार केवल भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, कुछ केवल भगवान शिव की और कुछ दोनों का संयुक्त स्मरण करते हैं। महत्वपूर्ण यह है कि पूजा श्रद्धा, कृतज्ञता और विनम्रता के साथ की जाए।
जो लोग माघ अमावस्या 2026 को अधिक अर्थपूर्ण बनाना चाहते हैं, वे कुछ छोटे पर गहरे संकल्प अपना सकते हैं।
इस प्रकार माघ अमावस्या केवल पंचांग की तिथि न रहकर, आत्मशुद्धि, पितृ कृतज्ञता और करुणा से भरी जीवन शैली का प्रेरक उत्सव बन सकती है।
माघ अमावस्या 2026 की तिथि और अमावस्या तिथि का समय क्या है
माघ अमावस्या 2026 की अमावस्या तिथि 18 जनवरी 2026 को रात्रि 00 बजकर 06 मिनट 41 सेकंड पर शुरू होकर 19 जनवरी 2026 को रात्रि 01 बजकर 24 मिनट 09 सेकंड पर समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार माघ अमावस्या का पर्व 18 जनवरी 2026, रविवार को मनाया जाएगा।
माघ अमावस्या को मौनी अमावस्या क्यों कहा जाता है
माघ अमावस्या पर मौन व्रत की विशेष परंपरा के कारण इसे मौनी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन मौन रहते हुए स्नान, जप और दान करने से मुनि समान शांति और संयम प्राप्त होने की भावना मानी जाती है।
इस दिन किन नदियों या जलाशयों में स्नान करना शुभ होता है
गंगा, यमुना या किसी भी पवित्र नदी, सरोवर, तीर्थस्थ कुंड या तालाब में स्नान शुभ माना जाता है। जो लोग तीर्थ तक नहीं जा सकते, वे घर में स्नान के जल में गंगा जल की कुछ बूंदें मिलाकर भी श्रद्धा से स्नान कर सकते हैं।
माघ अमावस्या पर कौन सा दान विशेष फलदायी माना गया है
इस दिन तिल, अनाज, आंवला, गुड़, वस्त्र, कंबल, बिस्तर और गौसेवा से जुड़ा दान विशेष फलदायी माना गया है। अपनी क्षमता के अनुसार भोजन, कपड़े या आवश्यक वस्तुओं का दान भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
माघ अमावस्या पर किस देवता की पूजा करें और कौन सा मंत्र जपें
माघ अमावस्या पर भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों की पूजा का विधान है। “ॐ नमो नारायणाय” या “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप अत्यंत सरल और प्रभावकारी माना जाता है। साधक जिस इष्ट देव में श्रद्धा रखता हो, उसी का नाम स्मरण और जप कर सकता है।
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