By पं. अमिताभ शर्मा
माघ पूर्णिमा 2026 का मुख्य व्रत दिन, स्नान और पूजा मुहूर्त

माघ पूर्णिमा 2026 उन तिथियों में से एक है जिनको लेकर श्रद्धालुओं के मन में अक्सर यह प्रश्न रहता है कि व्रत और गंगा स्नान 1 फरवरी को करें या 2 फरवरी को। यह उलझन स्वाभाविक भी है, क्योंकि पूर्णिमा तिथि दो दिनों तक फैली रहती है, जबकि शास्त्रीय नियम उदया तिथि पर विशेष जोर देते हैं। ऐसे में सही पंचांगीय जानकारी और उदया तिथि का सिद्धांत समझ लेना बहुत उपयोगी हो जाता है।
पंचांग के अनुसार माघ पूर्णिमा 2026 में पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ और अंत इस प्रकार रहेगा और इन्हीं के आधार पर व्रत की मुख्य तिथि निश्चित की जाती है।
| विवरण | समय और तिथि |
|---|---|
| पूर्णिमा तिथि प्रारंभ | 1 फरवरी 2026, रविवार, प्रातः 05 बजकर 52 मिनट |
| पूर्णिमा तिथि समाप्त | 2 फरवरी 2026, सोमवार, प्रातः 03 बजकर 38 मिनट |
धार्मिक मान्यता है कि जिस दिन सूर्योदय के समय जो तिथि रहती है, उसी दिन उस तिथि के व्रत, स्नान और पूजा का मुख्य महत्व माना जाता है। 1 फरवरी 2026 की सुबह सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि ही विद्यमान रहेगी, इसलिए माघ पूर्णिमा 2026 को 1 फरवरी रविवार के दिन ही मनाया जाएगा। 2 फरवरी को भोर से पहले पूर्णिमा तिथि समाप्त हो जाएगी, इसलिए उस दिन माघ पूर्णिमा का स्नान और व्रत विशेष रूप से नहीं माना जाएगा।
माघ पूर्णिमा पर गंगा स्नान, दान और जप को अत्यंत शुभ माना गया है। इस दिन गंगा स्नान केवल एक धार्मिक कर्म नहीं बल्कि आत्मशुद्धि और मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ने की सामूहिक साधना भी है। यदि समय सही चुन लिया जाए, तो साधना का प्रभाव और भी गहरा महसूस हो सकता है।
माघ पूर्णिमा 2026 के प्रमुख स्नान और पूजा मुहूर्त इस प्रकार हैं।
ब्रह्म मुहूर्त को माघ पूर्णिमा स्नान का सर्वोत्तम समय माना गया है। इस समय गंगा, किसी पवित्र नदी या स्वच्छ जलाशय में स्नान करना अमृत के समान फलदायी कहा गया है। जो लोग अत्यधिक व्यस्तता या परिस्थिति के कारण सुबह जल्दी स्नान न कर सकें, उनके लिए अभिजीत मुहूर्त भी स्नान, दान और पूजा के लिए शुभ विकल्प माना जा सकता है।
हर साधक के लिए गंगा या बड़े तीर्थ तक पहुँचना संभव नहीं होता, फिर भी माघ पूर्णिमा को सार्थक बनाना पूर्णतः संभव है।
स्नान के तुरंत बाद सूर्य देव को अर्घ्य देना अत्यंत शुभ माना गया है। अर्घ्य देते समय शांति से खड़े होकर मन ही मन प्रार्थना की जा सकती है कि जीवन में ज्ञान, प्रकाश और स्पष्टता बढ़े।
हिंदू धर्म में माघ पूर्णिमा को माघी पूर्णिमा भी कहा जाता है और इसे विशेष धार्मिक तथा आध्यात्मिक दिवस माना गया है।
इस दिन का एक संदेश यह भी है कि बाहरी ठंडक के बीच भीतर की श्रद्धा और भक्ति को गर्म रखना ही सच्ची साधना है।
माघ पूर्णिमा 2026 पर किए गए कुछ कर्मों को विशेष फलदायी बताया गया है।
कल्पवास केवल संगम तट पर रहना ही नहीं बल्कि वेद श्रवण, जप, ध्यान, संयम और अहिंसा का सामूहिक संकल्प है। माघ पूर्णिमा का स्नान इस संकल्प की पूर्णाहुति का प्रतीक बन जाता है।
हर व्यक्ति अपने घर में भी माघ पूर्णिमा की साधना को सरल और अर्थपूर्ण रूप दे सकता है।
पूजा की वास्तविक शक्ति बाहरी सजावट से अधिक भीतर की सच्चाई और विनम्रता से अनुभव की जाती है।
माघ पूर्णिमा 2026 को केवल स्नान और दान तक सीमित रखने के बजाय, इसे भीतर के परिवर्तन के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है।
जब माघ पूर्णिमा स्नान, पूजा और दान के साथ साथ सोच में बदलाव का माध्यम बनती है तब यह तिथि केवल कैलेंडर पर अंकित दिन नहीं रहती बल्कि जीवन में दिशा देने वाली तिथि बन जाती है।
माघ पूर्णिमा 2026 की सही तारीख क्या है, 1 फरवरी या 2 फरवरी
माघ पूर्णिमा 2026 की पूर्णिमा तिथि 1 फरवरी 2026 को सुबह 05 बजकर 52 मिनट से शुरू होकर 2 फरवरी 2026 को सुबह 03 बजकर 38 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के नियम के अनुसार 1 फरवरी को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए माघ पूर्णिमा 1 फरवरी 2026 रविवार को ही मनाई जाएगी।
माघ पूर्णिमा पर गंगा स्नान का सबसे शुभ समय कौन सा है
माघ पूर्णिमा पर गंगा स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त सर्वोत्तम माना गया है, जो 1 फरवरी 2026 को सुबह 05 बजकर 24 मिनट से 06 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। यदि इस समय स्नान संभव न हो, तो दोपहर का अभिजीत मुहूर्त 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक भी स्नान और दान के लिए शुभ माना जाता है।
माघ पूर्णिमा पर कौन से दान विशेष फल देने वाले माने जाते हैं
माघ पूर्णिमा के दिन तिल, कंबल, घी और अन्न का दान अत्यंत शुभ माना गया है। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार इस दिन किया गया तिल और अन्न दान अश्वमेध यज्ञ के समान फल देने वाला सिद्ध हो सकता है, यदि वह बिना दिखावे के, श्रद्धा और करुणा के साथ किया जाए।
माघ पूर्णिमा पर किस देवता की पूजा करनी चाहिए
इस दिन मुख्य रूप से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देकर भगवान विष्णु की धूप दीप से आराधना करना, सत्यनारायण कथा का श्रवण या पाठ करना और शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देना अत्यंत शुभ माना जाता है।
कल्पवास और माघ पूर्णिमा का आपस में क्या संबंध है
प्रयागराज में माघ मेले के दौरान जो साधक पूरे माघ मास संगम तट के निकट रहकर जप, ध्यान, वेद श्रवण और संयमित जीवन जीते हैं, उनकी इस साधना को कल्पवास कहा जाता है। माघ पूर्णिमा के दिन त्रिवेणी संगम में स्नान करके उनका कल्पवास पूर्ण होता है, इसलिए माघ पूर्णिमा को कल्पवास की पूर्णाहुति का दिन भी माना जाता है।
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