By पं. अभिषेक शर्मा
पितृपक्ष के दौरान मघा नक्षत्र एवं त्रयोदशी श्राद्ध की शुभता और परंपरा

मघा श्राद्ध पितृपक्ष के सबसे पवित्र अनुष्ठानों में से एक है, जो 16 दिवसीय अवधि में मृत पूर्वजों के सम्मान हेतु किया जाता है। वर्ष 2025 में मघा श्राद्ध शुक्रवार, 19 सितंबर को मनाया जाएगा, जब मघा नक्षत्र त्रयोदशी तिथि के साथ अपराह्न काल में मेल खाता है।
| कार्यक्रम | तिथि एवं समय |
|---|---|
| मघा श्राद्ध | शुक्रवार, 19 सितंबर |
| मघा नक्षत्र प्रारम्भ | 07:05 पूर्वाह्न, 19 सितंबर |
| मघा नक्षत्र समाप्त | 08:05 पूर्वाह्न, 20 सितंबर |
| कुटुप मुहूर्त | 11:52 पूर्वाह्न - 12:40 अपराह्न |
| रोहिणा मुहूर्त | 12:40 अपराह्न - 01:29 अपराह्न |
| अपराह्न काल | 01:29 अपराह्न - 03:54 अपराह्न |
नोट: कुटुप और रोहिणा मुहूर्त के साथ अपराह्न काल श्राद्ध अनुष्ठान के लिए अत्यंत शुभ समय माने जाते हैं।
मत्स्य पुराण और अन्य धर्मशास्त्रों में मघा श्राद्ध के महत्व पर बल दिया गया है। यह श्राद्ध विशेष होता है क्योंकि त्रयोदशी तिथि और मघा नक्षत्र का योग पूर्वजों के आशीर्वाद का मार्ग खोलता है।
| चरण | विवरण |
|---|---|
| प्रातः शुद्धिकरण | ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान, स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूजा स्थल सजाना |
| आवाहन और पूजा | परिवार के पुरुष मुखिया द्वारा सर्वप्रथम इष्ट देव की पूजा और पितरों के लिए स्थान व्यवस्था |
| पिंडों की तैयारी | पके हुए चावल, घी, दूध, शहद, शक्कर से बने पिंडों को श्रद्धापूर्वक अर्पित करना |
| तर्पण | कुशा, काला तिल व जौ के साथ जल अर्पण कर पितृ मंत्रों का जाप |
| भोजन और दान | सात्विक भोजन ब्राह्मणों को दक्षिणा सहित देना; गाय, कुत्ते और कौओं को भोजन कराना |
| समापन प्रार्थना | पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना और परिवार में शांति के लिए प्रार्थना करना |
| करें | न करें |
|---|---|
| बिना प्याज-लहसुन के सात्विक भोजन दें | मांसाहारी एवं अप्राकृतिक भोजन न दें |
| ब्राह्मणों को दक्षिणा दें | अनुष्ठान में शॉर्टकट न लें |
| गाय, कुत्ते, कौए को भोजन कराएं | पूजास्थल या सामग्री का अपमान न करें |
| शुद्धता और अनुशासन बनाए रखें | अनुष्ठान जल्दी या लापरवाही से न करें |
| पितृ मंत्रों का जाप आवश्यक करें | अपमानजनक या अधीर व्यवहार न करें |
| त्रुटि | प्रभाव |
|---|---|
| अपराह्न काल में अनुष्ठान चूकना | विधि की शक्ति में कमी |
| अपवित्र या मांसाहारी भोजन उपयोग | पवित्रता प्रभावित होती है |
| तर्पण या दान छोड़ना | अनुष्ठान अधूरा रह जाता है |
| पशु भोज्य नहीं देना | आशीर्वाद प्राप्ति में बाधा |
मघा श्राद्ध 2025 (19 सितंबर) एक पावन अवसर है जिसमें तर्पण, पिंडदान एवं दान से पितरों का सम्मान कर सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक संतुलन सुनिश्चित किया जाता है।
प्रश्न 1: मघा श्राद्ध 2025 कब है और क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: यह 19 सितंबर 2025 को त्रयोदशी तिथि और मघा नक्षत्र के मिलन पर होता है और पितृश्री के लिए अत्यंत शुभ दिन माना जाता है।
प्रश्न 2: मघा श्राद्ध में कौन-कौन से मुख्य अनुष्ठान किए जाते हैं?
उत्तर: तर्पण, पिंडदान, सात्विक भोजन और पशुओं को भोजन कराना मुख्य अनुष्ठान हैं।
प्रश्न 3: मघा श्राद्ध में पशुओं को भोजन क्यों दिया जाता है?
उत्तर: गाय, कुत्ता और कौए पितृों के संदेशवाहक माने जाते हैं और इन्हें भोजन कराने से आशीर्वाद प्राप्त होता है।
प्रश्न 4: किन बातों से बचना चाहिए श्राद्ध के दौरान?
उत्तर: मांसाहार, अपवित्रता, नियत समय की अनदेखी और जल्दबाज़ी से बचना चाहिए।
प्रश्न 5: क्या श्राद्ध से केवल पूर्वजों को लाभ होता है या जीवितों को भी?
उत्तर: श्राद्ध से पूर्वज शांति पाते हैं और जीवित परिवारकर्ता सुख-शांति, समृद्धि प्राप्त करते हैं।
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