By पं. नीलेश शर्मा
मकर संक्रांति 2026 कब और क्यों मनाई जाती है

मकर संक्रांति को भारत के सबसे प्राचीन और अर्थपूर्ण सूर्य पर्वों में गिना जाता है। यह वह समय होता है जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है और दक्षिणायण से उत्तरायण की ओर अपनी नई यात्रा शुरू करता है। इस कारण इसे केवल धार्मिक नहीं बल्कि खगोलीय दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है।
अधिकांश हिंदू त्योहार चंद्र पंचांग के अनुसार बदलते रहते हैं, जबकि मकर संक्रांति सौर गणना पर आधारित होती है। इसलिए इसकी तिथि अपेक्षाकृत स्थिर रहती है और हर वर्ष लगभग 14 जनवरी के आसपास आती है। वर्ष 2026 में इस तिथि को लेकर 14 और 15 जनवरी के बीच कुछ भ्रम दिखाई देता है, जिसे समझना आवश्यक है।
सवाल अक्सर यही उठता है कि 2026 में मकर संक्रांति 14 जनवरी को मानी जाए या 15 जनवरी को। स्पष्ट रूप से कहा जाए तो धार्मिक गणना के अनुसार मुख्य मकर संक्रांति 2026 बुधवार, 14 जनवरी 2026 को ही मनाई जाएगी। यही वह दिन है जिसे अधिकांश प्रमुख पंचांग, पंडित और धर्मग्रंथों की परंपरा स्वीकार कर रही है।
वर्ष 2026 में सूर्य का मकर राशि में प्रवेश समय दोपहर लगभग 03 बजकर 13 मिनट पर आएगा। चूंकि यह परिवर्तन दिन के समय होता है और सूर्यास्त से पहले हो जाता है, इसलिए सभी मुख्य पर्व, स्नान दान और पूजा विधियाँ 14 जनवरी को ही मानी जाती हैं, न कि अगले दिन। इस स्थिति में 15 जनवरी को अलग से मकर संक्रांति व्रत या मुख्य पर्व की आवश्यकता नहीं रहती।
बरसों से मकर संक्रांति की तिथि को लेकर हल्का भ्रम बना रहता है। इसका मुख्य कारण यह है कि अलग अलग क्षेत्रों में पंचांग गणना और सूर्योदय आधारित नियमों की परंपरा थोड़ी भिन्न है। कुछ पारंपरिक पंचांग यह मानते हैं कि यदि सूर्य संक्रांति देर रात या सूर्यास्त के बाद हो, तो कई महत्वपूर्ण कर्म अगले दिन के सूर्योदय के साथ किए जाएँ।
लेकिन वर्ष 2026 में ऐसा नहीं है, क्योंकि सूर्य का मकर प्रवेश दोपहर 03 बजकर 13 मिनट पर हो रहा है। यह समय न तो रात में आता है और न ही सूर्योदय के बाद वाले अगले दिन में। इसलिए इस वर्ष शास्त्रीय नियमों के अनुसार संक्रांति की पूजा, पुण्य काल का स्नान और दान कार्य उसी दिन, यानी 14 जनवरी को ही करना उचित माना जाता है। इसी कारण 15 जनवरी को मुख्य पर्व मानने का आधार नहीं बनता।
मकर संक्रांति से जुड़े प्रमुख समय को एक सारणी में देखना आसान रहता है, ताकि पूजा और दान की योजना स्पष्ट हो सके।
| विवरण | समय और तिथि |
|---|---|
| मकर संक्रांति 2026 की तिथि | बुधवार, 14 जनवरी 2026 |
| सूर्य का मकर प्रवेश (संक्रांति क्षण) | दोपहर लगभग 03:13 बजे |
| प्रमुख पर्व दिन | 14 जनवरी 2026 |
| 15 जनवरी की स्थिति | सामान्य दिन, मुख्य पर्व 14 जनवरी को ही |
ध्यान देने योग्य बात यह है कि संक्रांति क्षण के आसपास कुछ घंटे पुण्य काल के रूप में माने जाते हैं। स्नान, दान और सूर्य अर्घ्य के लिए यही समय सबसे अधिक शुभ माना जाता है। इस वर्ष यह पूरा पुण्य काल 14 जनवरी के भीतर ही आता है, इसलिए सभी प्रमुख धार्मिक कार्य उसी दिन करने चाहिए।
पुण्य काल मकर संक्रांति जैसे सूर्य पर्वों पर वह अवधि होती है जिसे विशेष रूप से शुभ और फलदायी माना जाता है। यह काल संक्रांति क्षण के बाद शुरू होता है और कुछ समय तक चलता है। शास्त्रों में संकेत मिलता है कि इस समय में किया गया स्नान, सूर्य अर्घ्य, जप, तिल दान और अन्न दान सामान्य दिनों की अपेक्षा अधिक फलदायी माना जाता है।
वर्ष 2026 में सूर्य का मकर प्रवेश दोपहर 03:13 बजे है, इसलिए पुण्य काल भी 14 जनवरी की दोपहर और संध्या के समय आता है। लोग प्रायः
जैसे कर्म इसी समय में करने का प्रयास करते हैं। चूंकि संक्रांति और पुण्य काल दोनों 14 जनवरी को ही हैं, इसलिए 15 जनवरी पर इन्हें खिसकाने की आवश्यकता नहीं रह जाती।
मकर संक्रांति वह क्षण है जब सूर्य अपनी दक्षिणायण गति से निकलकर उत्तरायण की ओर मुड़ता है। इसे केवल राशिचक्र पर सूर्य के मकर में प्रवेश के रूप में ही नहीं बल्कि आशा, उत्थान और नए प्रारंभ के संकेत के रूप में भी देखा जाता है। माना जाता है कि उत्तरायण के साथ प्रकृति में प्रकाश, ऊष्मा और सकारात्मकता का संतुलन धीरे धीरे बढ़ता है।
भारत के विविध भागों में इस दिन कुछ सामान्य परंपराएँ देखी जाती हैं। जैसे
इस दिन किए गए दान को दीर्घकालिक पुण्य देने वाला माना जाता है। साथ ही यह समय परिवार के साथ बैठकर नए वर्ष के संकल्पों, योजनाओं और आंतरिक सुधारों पर भी सोचने का सुंदर अवसर बन सकता है।
मकर संक्रांति की भावना पूरे भारत में समान है, लेकिन उसका नाम, रूप और उत्सव शैली क्षेत्र के अनुसार बदल जाती है। मूल केंद्र सूर्य की आराधना और फसल के प्रति आभार रहता है।
भले नाम अलग हों, लेकिन सभी जगह इसकी मूल भावना यही है कि सूर्य, प्रकृति और अन्न के प्रति कृतज्ञता प्रकट की जाए और परिवारों के बीच प्रेम और सहयोग बढ़ाया जाए।
मकर संक्रांति की विशेषता यह है कि यह जीवन के तीन महत्वपूर्ण आयामों को एक साथ जोड़ती है। एक ओर यह खगोल विज्ञान से जुड़ा पर्व है, जहाँ सूर्य की स्थिति और ऋतु परिवर्तन का सम्मान किया जाता है। दूसरी ओर यह गहरी आध्यात्मिक साधना का समय है, जब स्नान, ध्यान, जप और दान को विशेष फलदायी माना जाता है। तीसरी ओर यह कृषि और प्रकृति के प्रति आभार का पर्व है, जो फसल की समृद्धि और अन्न की महत्ता की याद दिलाता है।
कम शब्दों में कहा जाए तो मकर संक्रांति वह दिन है जो यह संकेत देता है कि अंधकार और ठंड के बाद प्रकाश और ऊष्मा अवश्य आती है। यह संदेश केवल मौसम के स्तर पर नहीं बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक स्तर पर भी लागू होता है। इसीलिए इस दिन किए गए संकल्प, सुधार और सकारात्मक निर्णय लंबे समय के लिए प्रभावी माने जाते हैं।
वर्ष 2026 के संदर्भ में यदि सीधी बात की जाए तो
जो भी व्यक्ति स्नान, तिल दान, सूर्य अर्घ्य, हवन या विशेष पूजा की योजना बना रहा हो, वह अपना पूरा कार्यक्रम 14 जनवरी पर ही केंद्रित रखे। इस प्रकार तिथि का भ्रम दूर होकर साधना अधिक स्पष्ट रूप से की जा सकती है।
क्या 2026 में मकर संक्रांति 14 जनवरी को है या 15 जनवरी को
वर्ष 2026 में मकर संक्रांति का मुख्य पर्व बुधवार, 14 जनवरी 2026 को ही है। सूर्य का मकर प्रवेश भी इसी दिन दोपहर में होने के कारण सभी प्रमुख कर्म इसी तिथि पर किए जाएँगे।
सूर्य का मकर में प्रवेश किस समय होगा
सूर्य 14 जनवरी 2026 को लगभग दोपहर 03 बजकर 13 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेगा। यही संक्रांति क्षण माना जाता है और इसी के बाद पुण्य काल की शुरुआत होती है।
पुण्य काल में क्या करना सबसे अधिक शुभ माना जाता है
पुण्य काल में स्नान, सूर्य को तिल मिश्रित जल से अर्घ्य, तिल, गुड़, अन्न, वस्त्र और जरूरतमंदों को भोजन या दक्षिणा देना अत्यंत शुभ माना जाता है। साथ ही जप और ध्यान भी इस समय किए जा सकते हैं।
यदि कोई 15 जनवरी को ही मकर संक्रांति मानता हो तो क्या करें
स्थानीय परंपराओं का सम्मान करते हुए भी यह समझना महत्वपूर्ण है कि 2026 में संक्रांति और पुण्य काल दोनों 14 जनवरी को ही हैं। इसलिए शास्त्रीय दृष्टि से मुख्य कर्म 14 जनवरी को करना अधिक उचित रहेगा।
मकर संक्रांति के दिन कौन से सरल उपाय किए जा सकते हैं
सुबह स्नान के बाद सूर्य को तिल गुड़ सहित जल से अर्घ्य देना, कंबल या अन्न का दान करना, तिल और गुड़ से बनी मिठाइयाँ बाँटना और दिन भर सकारात्मक सोच एवं संयमित व्यवहार रखना इस पर्व को सरल और सार्थक बना सकता है।
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