मासिक कार्तिगई व्रत जनवरी 2026: कृत्तिका नक्षत्र और महत्व

By पं. नरेंद्र शर्मा

जानें मासिक कार्तिगई व्रत की तारीख, कृत्तिका नक्षत्र अवधि और पारंपरिक लाभ

मासिक कार्तिगई व्रत 2026: तारीख और कृत्तिका नक्षत्र

जनवरी 2026 मासिक कार्तिगई की तिथि और कृतिका नक्षत्र समय

मासिक कार्तिगई व्रत उन दिनों में से एक माना जाता है जब साधक अपने जीवन में मार्गदर्शन, सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए भगवान मुरुगन की ओर विशेष श्रद्धा से मुड़ते हैं। यह व्रत केवल संकल्प या नियमों का समूह नहीं बल्कि ऐसा अवसर है जब व्यक्ति भीतर से स्वयं को साफ करके सही दिशा की खोज करता है और दिव्य संरक्षण को आमंत्रित करता है।

जनवरी 2026 में आने वाला मासिक कार्तिगई व्रत एक महत्वपूर्ण मंगलवार को पड़ रहा है, जब कृतिका नक्षत्र का संयोग इस व्रत को और अधिक प्रभावशाली बनाता है। तिथि और नक्षत्र की सूक्ष्म जानकारी जानना इसलिए आवश्यक है ताकि पूजा और व्रत सही समय के निकट रहे और साधना का भाव अधिक केंद्रित हो सके।

विवरणसमय और तिथि
मासिक कार्तिगई व्रत की तिथि27 जनवरी 2026, मंगलवार
कार्तिगई या कृतिका नक्षत्र प्रारंभ27 जनवरी 2026, प्रातः 11 बजकर 08 मिनट
कार्तिगई या कृतिका नक्षत्र समाप्त28 जनवरी 2026, प्रातः 09 बजकर 26 मिनट

यह व्रत सामान्यतः उसी दिन रखा जाता है जब कृतिका नक्षत्र दिन के प्रमुख हिस्से में विद्यमान हो। जनवरी 2026 में 27 जनवरी को दिन के समय कृतिका नक्षत्र का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिख रहा है, इसलिए इस दिन मासिक कार्तिगई व्रत रखना शुभ माना जाता है।

मासिक कार्तिगई व्रत इतना पवित्र क्यों माना जाता है

मासिक कार्तिगई व्रत भगवान मुरुगन की शक्ति और विजय के प्रतीक रूप की याद दिलाता है। परंपरा बताती है कि भगवान मुरुगन का बालरूप छह कृतिका बहनों ने पोषित किया, इसीलिए कृतिका नक्षत्र को उनका जन्म नक्षत्र भी माना जाता है।

इस व्रत की महत्ता को कुछ बिंदुओं में इस प्रकार समझा जा सकता है।

  • हर मास कृतिका नक्षत्र के दिन रखा जाने वाला यह व्रत मुरुगन की जीत और प्रकाश का स्मरण है
  • यह व्रत अच्छा स्वास्थ्य, दीर्घायु और रोगों से रक्षा की कामना के साथ रखा जाता है
  • शत्रुओं पर विजय, बाधाओं से सुरक्षा और जीवन में स्थायी शांति तथा संतुलन की प्रार्थना भी इसमें शामिल रहती है

विश्वास यह भी रहा है कि यह व्रत जितनी श्रद्धा और नियमितता से रखा जाए, उसके प्रभाव से व्यक्ति जीवन में सही मार्ग चुनने में अधिक सक्षम बनता है।

भगवान मुरुगन की कृपा और शिव पार्वती का आशीर्वाद

मासिक कार्तिगई व्रत का एक गहरा पक्ष यह भी है कि यह केवल भगवान मुरुगन तक सीमित नहीं रहता बल्कि शिव और पार्वती के आशीर्वाद से भी जुड़ जाता है।

परंपरा के अनुसार

  • जो भक्त इस दिन भगवान मुरुगन की विधिपूर्वक पूजा करते हैं, उन पर भगवान शिव और माता पार्वती दोनों की कृपा भी मानी जाती है
  • मुरुगन को ज्ञान, शौर्य और मार्गदर्शक शक्ति का प्रतीक माना जाता है, जो साधक के भ्रम, डर और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करते हैं
  • यह व्रत केवल बाहरी शत्रुओं से नहीं बल्कि भीतर के संदेह, आलस्य और भ्रम से भी मुक्ति की दिशा में सहायक माना जाता है

इस प्रकार मासिक कार्तिगई को एक ऐसा अवसर समझा जा सकता है जब साधक पूरे परिवार और स्वयं के लिए स्वास्थ्य, संरक्षण और सही दिशा की सामूहिक प्रार्थना करता है।

मासिक कार्तिगई व्रत से जुड़े पारंपरिक लाभ

मासिक कार्तिगई के बारे में मान्यता है कि यह व्रत शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक तीनों स्तरों पर सकारात्मकता बढ़ाता है।

  • यह व्रत गंभीर से गंभीर रोगों के निवारण के लिए भी प्रार्थना का सशक्त माध्यम माना जाता है
  • जो लोग लंबे समय से किसी बीमारी या कमजोरी से जूझ रहे हों, वे इस दिन विशेष भक्ति के साथ मुरुगन की शरण लेते हैं
  • शत्रु, बाधा और नकारात्मक ऊर्जा से बचाव के लिए भी यह व्रत उपयोगी माना जाता है
  • सही निर्णय, उचित मार्ग और जीवन में आगे बढ़ने की दिशा समझने के लिए भगवान मुरुगन की कृपा विशेष रूप से स्मरण की जाती है

इन सबका आधार यह विश्वास है कि जब व्यक्ति संयम, व्रत और भक्ति के साथ जीवन जीने की कोशिश करता है, तो भीतर का डर कम होकर आत्मबल और स्पष्टता बढ़ने लगती है।

मासिक कार्तिगई व्रत कैसे करें

जनवरी 2026 के मासिक कार्तिगई व्रत को सरल और श्रद्धा पूर्ण तरीके से करना ही अधिक सार्थक माना जाता है। यह व्रत घर पर भी किया जा सकता है और मंदिर में भी।

  • व्रत के दिन प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ, सादे वस्त्र धारण करें
  • यदि संभव हो तो हल्के पीले, केसरिया या सफेद रंग के कपड़े पहनें जो पवित्रता और सादगी का संकेत देते हैं
  • भगवान मुरुगन की मूर्ति या चित्र को स्वच्छ स्थान पर स्थापित करें, यदि पहले से स्थान हो तो उसे थोड़ा साफ कर लें
  • पूजा स्थल पर दीपक, जल, फूल, फल और प्रसाद की सरल व्यवस्था करें

इस प्रकार दिन की शुरुआत से ही वातावरण को पवित्र और शांत बनाना व्रत की तैयारी का भाग माना जाता है।

क्या मासिक कार्तिगई में घी का दीपक आवश्यक है

मासिक कार्तिगई व्रत की विशेषता घी के दीपक से भी जुड़ी है। दीपक का प्रकाश केवल बाहरी अंधकार को नहीं बल्कि भीतर की उलझन और भय को भी कम करने का प्रतीक माना जाता है।

  • भगवान मुरुगन के समक्ष घी का दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है
  • दीपक की लौ को स्थिर और शांत रखने की कोशिश करना मन के स्थिर होने की साधना भी बन सकता है
  • यदि संभव हो तो शाम के समय कृतिका नक्षत्र के उदय के आसपास दीपक की लौ के सामने बैठकर थोड़ी देर मंत्र जप या मौन ध्यान किया जा सकता है

घी का दीपक परिवार के द्वार पर या मुख्य प्रवेश द्वार के पास जलाना भी शुभ माना जाता है, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश की भावना बढ़ती है।

मासिक कार्तिगई व्रत की विस्तृत पूजन विधि

पूजा को अत्यधिक भड़कीला बनाने की आवश्यकता नहीं होती, सादगी और भाव ही इसकी आत्मा हैं।

  • सुबह स्नान कर सबसे पहले भगवान मुरुगन के सामने बैठकर आज के व्रत का संकल्प लें
  • संकल्प में स्वास्थ्य, सही मार्गदर्शन, शत्रु बाधा से रक्षा और परिवार की शांति की कामना की जा सकती है
  • घी का दीपक प्रज्वलित करें और भगवान मुरुगन को पुष्प, फल और यदि संभव हो तो कोई सरल नैवेद्य अर्पित करें
  • ॐ सरवन भवाय नमः” या “Om Saravana Bhavaya Namah” जैसे मुरुगन मंत्र का जप किया जा सकता है, जिसका भाव है भगवान मुरुगन को प्रणाम और उनके संरक्षण की प्रार्थना
  • दिन भर यथाशक्ति व्रत रखें, कई भक्त फलाहार या केवल जल और फल पर रहते हैं, कुछ भक्त कठोर व्रत भी करते हैं
  • शाम को कृतिका नक्षत्र के उदय के समय या उसके आसपास फिर से दीपक जलाकर आरती करें, मंत्र जप करें और फिर व्रत खोलें

इस पूरी प्रक्रिया में अधिक जोर मन की एकाग्रता, विनम्रता और संयम पर दिया जाता है।

कृतिका नक्षत्र उदय के समय क्या विशेष करें

कृतिका नक्षत्र को भगवान मुरुगन का जन्म नक्षत्र माना जाता है, इसलिए इस समय की साधना को विशेष रूप से शुभ समझा जाता है।

  • नक्षत्र उदय के समय भगवान मुरुगन के सामने खड़े होकर या बैठकर छोटी सी प्रार्थना करें
  • यदि कोई विशेष बाधा या दिक्कत हो, तो मन ही मन उसे दूर करने की प्रार्थना करें
  • इस समय गायत्री, मुरुगन मंत्र या शांत नाम जप मन को बहुत स्थिर कर सकते हैं
  • परिवार के सदस्यों के नाम लेकर उनके स्वस्थ और सुरक्षित जीवन की कामना भी की जा सकती है

कृतिका के समय की यह साधना पूरे व्रत की ऊर्जा को केंद्रित करने जैसा कार्य करती है।

घर के मुख्य द्वार पर दीप जलाने का महत्त्व

मासिक कार्तिगई व्रत में घर के मुख्य द्वार पर दीप जलाने की भी परंपरा रही है। यह संकेत देता है कि घर केवल चार दीवारें नहीं बल्कि एक ऊर्जा क्षेत्र है जिसे प्रकाश और सकारात्मकता से भरने की आवश्यकता रहती है।

  • मुख्य द्वार पर घी या तिल के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है
  • यह दीप आसपास के वातावरण को भी शांत और पवित्र बनाने में सहायक माना जाता है
  • परिवार के सदस्यों के लिए यह दीप यह स्मरण बन सकता है कि घर में प्रवेश और बाहर जाना दोनों सजगता के साथ हो

यह छोटा सा अभ्यास दिन के अंत में भी मन को एक विशेष शांति देता है।

मासिक कार्तिगई व्रत से जीवन में क्या परिवर्तन महसूस हो सकते हैं

जो लोग नियमित रूप से या श्रद्धा के साथ मासिक कार्तिगई व्रत करते हैं, वे समय के साथ धीरे धीरे कुछ परिवर्तन अनुभव कर सकते हैं।

  • स्वास्थ्य को लेकर डर, चिंता और अस्थिरता में कुछ कमी महसूस हो सकती है
  • शत्रु, नकारात्मक लोगों या परिस्थिति के प्रति अतिशय भय कम होकर भीतर की स्थिरता बढ़ सकती है
  • निर्णय लेने में स्पष्टता, रास्ता चुनने में विश्वास और गलत दिशा में भटकने का डर कम हो सकता है
  • जो लोग आध्यात्मिक यात्रा पर हैं, उनके लिए यह व्रत अनुशासन और नियमितता का मजबूत साधन बन सकता है

इन परिवर्तनों को धीरे धीरे आने वाली अनुभूति के रूप में समझना अधिक संतुलित दृष्टि होगी।

सामान्य प्रश्न

मासिक कार्तिगई जनवरी 2026 में कब है
जनवरी 2026 का मासिक कार्तिगई व्रत मंगलवार, 27 जनवरी 2026 को रखा जाएगा। इस दिन प्रातः 11 बजकर 08 मिनट पर कृतिका नक्षत्र प्रारंभ हो रहा है और 28 जनवरी को प्रातः 09 बजकर 26 मिनट तक रहेगा।

कृतिका या कार्तिगई नक्षत्र को भगवान मुरुगन से कैसे जोड़ा जाता है
परंपरा के अनुसार भगवान मुरुगन का पालन पोषण छह कृतिका बहनों ने किया, इसलिए कृतिका नक्षत्र को उनका जन्म नक्षत्र माना जाता है। इसी कारण कृतिका नक्षत्र के दिन रखा गया व्रत मासिक कार्तिगई या कार्तिगई व्रतम कहलाता है।

इस व्रत से स्वास्थ्य और रोग निवारण के बारे में क्या मान्यता है
मासिक कार्तिगई व्रत को अत्यंत पवित्र और शुद्धि देने वाला माना गया है। विश्वास है कि भगवान मुरुगन की कृपा से यह व्रत गंभीर से गंभीर रोगों की अवस्था में भी साहस, सही उपचार तक पहुँच और भीतर की शक्ति बढ़ाकर राहत देने में सहायक हो सकता है।

मासिक कार्तिगई के दिन व्रत कैसे रखा जाता है
इस दिन प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनकर भगवान मुरुगन की पूजा की जाती है, घी का दीपक जलाया जाता है, फल फूल अर्पित किए जाते हैं और दिन भर संयमित रहकर व्रत रखा जाता है। शाम को कृतिका नक्षत्र के उदय के समय आरती और मंत्र जप के बाद व्रत खोला जाता है।

घर के मुख्य द्वार पर दीप जलाना क्यों शुभ माना जाता है
मासिक कार्तिगई पर मुख्य द्वार पर दीप जलाना घर में प्रकाश, सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा का आमंत्रण माना जाता है। यह संकेत देता है कि साधक नकारात्मक शक्तियों से बचकर भगवान मुरुगन के संरक्षण में जीवन जीने की प्रार्थना कर रहा है।

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लेखक

पं. नरेंद्र शर्मा

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