मासिक शिवरात्रि दिसंबर 2025 तिथि पूजा समय और महत्व

By पं. सुव्रत शर्मा

हर महीने कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को आने वाली मासिक शिवरात्रि शिव-शक्ति के दिव्य मिलन की रात मानी जाती है और दिसंबर 2025 में यह पौष कृष्ण चतुर्दशी को पड़ेगी

मासिक शिवरात्रि दिसंबर 2025 तिथि निशीथ काल पूजा और आध्यात्मिक महत्व

मासिक शिवरात्रि हर महीने कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को आने वाला वह दिन है जो भगवान शिव को समर्पित होता है। इसे शिव और शक्ति के दिव्य मिलन की रात माना जाता है इसलिए इस दिन किया गया जप ध्यान और व्रत साधक के मन शरीर और कर्म पर गहरा असर डालता है। जो भक्त शांति स्थिरता साहस और अंतःकरण की शुद्धि चाहते हैं उनके लिए यह व्रत विशेष फलदायी माना जाता है।

शास्त्रों में कहा गया है कि शिवरात्रि केवल महाशिवरात्रि तक सीमित नहीं बल्कि मासिक रूप में भी मनाई जा सकती है। नियमित मासिक शिवरात्रि व्रत को भोलेनाथ को शीघ्र प्रसन्न करने वाला साधन कहा गया है इसलिए इसे अनुशासन भक्ति और आत्मजागरण का मार्ग भी माना जाता है।

मासिक शिवरात्रि दिसंबर 2025 तिथि और मुहूर्त

दिसंबर 2025 की मासिक शिवरात्रि पौष मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को पड़ेगी। पंचांग अनुसार समय इस प्रकार है

  • तिथि गुरुवार 18 दिसंबर 2025
  • चतुर्दशी तिथि प्रारंभ 18 दिसंबर 2025 प्रातः 2:32 बजे
  • चतुर्दशी तिथि समाप्त 19 दिसंबर 2025 प्रातः 4:59 बजे

शिव पूजा के लिए सबसे शुभ समय निशीथ काल माना गया है जो मध्य रात्रि के आसपास होता है

  • निशीथ काल (मध्यरात्रि पूजा समय)
    18-19 दिसंबर की रात 11:51 बजे से 12:45 बजे तक
  • कुल अवधि लगभग 55 मिनट

इसी अवधि में शिवलिंग पर जलाभिषेक दुग्धाभिषेक बेलपत्र अर्पण और मंत्रजाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

मासिक शिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व

वेद-पुराणों में शिव को शुद्ध चेतना और शक्ति को ऊर्जा का स्त्रोत बताया गया है। मासिक शिवरात्रि इस चेतना और शक्ति के मिलन का प्रतीक है। माना जाता है कि इस रात मन स्वभावतः शांत होता है और भीतर की गहराई में जाने का अवसर अधिक होता है इसलिए साधना अपेक्षाकृत जल्दी फल देती है।

नियमित मासिक शिवरात्रि व्रत से

  • बाधाएँ और मानसिक उलझनें धीरे-धीरे कम होने लगती हैं
  • इच्छाएँ संतुलित होती हैं केवल वास्तविक आवश्यकताएँ प्रमुख होती हैं
  • मन में वैराग्य और स्थिरता आती है जिससे निर्णय-शक्ति स्पष्ट होती है

इसी करुणा के कारण शिव को “भोलेनाथ” कहा जाता है जो भाव से किए गए छोटे-से पूजन से भी प्रसन्न हो जाते हैं।

महाशिवरात्रि से संबंध

शास्त्रों में बताया गया है कि

  • अमान्त परंपरा (जहाँ मास अमावस्या से अमावस्या तक गिना जाता है) के अनुसार माघ मास की मासिक शिवरात्रि को महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है।
  • पूर्णिमान्त परंपरा (जहाँ मास पूर्णिमा से पूर्णिमा तक गिना जाता है) के अनुसार यही पर्व फाल्गुन मास में आता है।

नाम-भेद के बावजूद महाशिवरात्रि की तिथि दोनों परंपराओं में एक ही दिन मानी जाती है। मासिक शिवरात्रि को आप महाशिवरात्रि की ओर जाने वाली मासिक साधना-शृंखला की तरह भी देख सकते हैं।

पौराणिक महिमा और लिंग-प्रकट होने की कथा

लोक-कथाओं और पुराणों में वर्णन आता है कि महाशिवरात्रि की रात मध्यरात्रि में भगवान शिव अनंत ज्योति-स्तम्भ (शिवलिंग) के रूप में प्रकट हुए थे। उस अनंत लिंग का आदि-अंत जानने के लिए ब्रह्मा और विष्णु प्रयास करते रहे पर अंततः उन्हें स्वीकार करना पड़ा कि शिव की महिमा असीम है।

इसीलिए शिवरात्रि को शिव-जन्म या शिव-प्रकट-तिथि के रूप में भी मान सम्मान दिया जाता है और शिवलिंग-पूजन इस व्रत का केंद्र बन जाता है। मासिक शिवरात्रि उस महाकथा की मासिक याद और साधना की तरह मानी जा सकती है।

शास्त्रों में किस-किस ने किया शिवरात्रि व्रत

पुराणों में उल्लेख मिलता है कि कई देवियों और देवताओं ने शिवरात्रि का व्रत किया

  • लक्ष्मी
  • पार्वती
  • सरस्वती
  • इन्द्राणी
  • गायत्री और सावित्री
  • सीता और रति

इनके शिवरात्रि व्रत-पालन का वर्णन इस बात की ओर संकेत करता है कि यह व्रत केवल किसी एक वर्ग के लिए नहीं बल्कि व्यापक रूप से सबके लिए आध्यात्मिक बल देने वाला माना गया है।

मासिक शिवरात्रि व्रत कैसे करें

1. आरंभ का संकल्प
संभव हो तो महाशिवरात्रि से व्रत शुरू करके लगातार 12 मासिक शिवरात्रियों तक व्रत करने का संकल्प लिया जाता है पर आप किसी भी मास से आरंभ कर सकते हैं।

2. उपवास
अपनी क्षमता अनुसार

  • निर्जला उपवास (केवल जल भी नहीं)
  • जल-फलों पर रहना
  • या केवल फल-फ्रूट/फालाहार लेना
    में से कोई एक विधि चुनें।

3. दिनभर साधना और संयम
दिन में “ॐ नमः शिवाय” का जप शिव-स्तुति और जितना हो सके सत्संग या पुण्य कर्म करने का प्रयास करें।

4. जागरण
यथासंभव रात्रि जागरण (जागरण) करें कम से कम निशीथ काल तक जागते हुए भजन जप या ध्यान में लगे रहें।

5. निशीथ काल पूजन

  • शिवलिंग या शिव-चित्र के सामने दीपक धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • जल या दूध से अभिषेक करें उसके ऊपर बिल्वपत्र अक्षत फूल चढ़ाएँ।
  • “ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का जप करें (108 या 5 माला अपनी क्षमता अनुसार)।

6. प्रार्थना
अंत में परिवार स्वयं और समस्त प्राणियों के लिए शांति स्वास्थ्य सद्बुद्धि और मोक्ष-मार्ग की प्रार्थना करें।

मासिक शिवरात्रि के लाभ

विश्वास और अनुभव के स्तर पर मासिक शिवरात्रि व्रत के कुछ प्रमुख फल

  • लंबे समय से अटकी इच्छाओं और कार्यों को गति मिलने की संभावना बढ़ती है।
  • मन और हृदय की बेचैनी धीरे-धीरे कम होकर भीतर शांति और स्थिरता आती है।
  • नकारात्मक ऊर्जा भय और पुराने कर्म-बंधन हल्के होने का भाव आता है।
  • अविवाहित कन्याएँ अच्छे जीवन-साथी की प्रार्थना के साथ यह व्रत रखती हैं।
  • विवाहित महिलाएँ दांपत्य में सौहार्द संयम और स्थिरता के लिए यह व्रत करती हैं।

यदि मासिक शिवरात्रि मंगलवार को पड़े तो उसे और भी प्रभावी माना जाता है क्योंकि मंगलवार मंगल और कई परंपराओं में शिव से भी जुड़ा दिन माना जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. दिसंबर 2025 की मासिक शिवरात्रि किस दिन और किस समय मनाएँ
दिसंबर 2025 की मासिक शिवरात्रि गुरुवार 18 दिसंबर को पड़ेगी। चतुर्दशी तिथि 18 तारीख सुबह 2:32 से 19 तारीख सुबह 4:59 तक है और निशीथ काल पूजन समय 18-19 दिसंबर की रात 11:51 से 12:45 के बीच रहेगा।

2. क्या मासिक शिवरात्रि का व्रत महाशिवरात्रि से ही शुरू करना ज़रूरी है
परंपरा में ऐसा कहा जाता है कि महाशिवरात्रि से शुरू करके लगातार 12 मासिक शिवरात्रियाँ करने से विशेष फल मिलता है लेकिन यदि आप पहले ही किसी मास में शुरू करें तो भी व्रत पूर्ण रूप से अर्थपूर्ण है। मुख्य बात नियमितता और श्रद्धा है।

3. क्या मासिक शिवरात्रि पर निर्जला व्रत ही करना चाहिए
निर्जला व्रत सबसे कठिन है और हर किसी के लिए उपयुक्त नहीं। स्वास्थ्य उम्र और दिनचर्या को ध्यान में रखकर ही व्रत की विधि चुनें आवश्यकता हो तो जल-फलों का सहारा लें। शिव उपवास से अधिक भाव और संयम को देखते हैं केवल कठोरता को नहीं।

4. यदि निशीथ काल में पूजा संभव न हो तो क्या दिन में पूजा कर सकते हैं
हाँ। यद्यपि निशीथ काल को सर्वोत्तम माना गया है फिर भी यदि परिस्थितियों के कारण मध्यरात्रि में जागना संभव न हो तो आप संध्या या रात्रि के पहले भाग में भी श्रद्धा से शिव-पूजन और जप कर सकते हैं। नियत समय से अधिक हृदय की निष्ठा को महत्व दिया गया है।

5. क्या मासिक शिवरात्रि केवल पुरुषों या केवल महिलाओं के लिए है
नहीं यह व्रत सभी के लिए है। पुरुष महिलाएँ गृहस्थ छात्र नौकरीपेशा कोई भी अपनी क्षमता के अनुसार इसका पालन कर सकता है। अंतर केवल संकल्प और साधना के तरीके में हो सकता है पर शिव-भक्ति का मार्ग सबके लिए खुला है।

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पं. सुव्रत शर्मा

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