By पं. नीलेश शर्मा
2026 की सभी मासिक शिवरात्रि तिथियाँ और महाशिवरात्रि से संबंध

मासिक शिवरात्रि उन साधकों के लिए अत्यंत पवित्र व्रत माना जाता है जो पूरे वर्ष भगवान शिव की कृपा अपने जीवन में बनाए रखना चाहते हैं। हर मास कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाने वाली यह शिवरात्रि बाधाओं को दूर करने, वैवाहिक जीवन को सुदृढ़ करने, समृद्धि बढ़ाने और सच्चे मन की मनोकामना पूर्ण करने वाली मानी जाती है। पूरे वर्ष नियमित रूप से मासिक शिवरात्रि व्रत करने से साधक के जीवन में आध्यात्मिक बल और मानसिक स्थिरता दोनों में वृद्धि देखी जा सकती है।
वर्ष 2026 में भी बारहों मास और एक अतिरिक्त अधिक मास में मासिक शिवरात्रि मनाई जाएगी। फाल्गुन मास में आने वाली मुख्य शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है, जबकि अन्य सभी महीनों में जो शिवरात्रि आती है उसे मासिक शिवरात्रि के रूप में पूजा जाता है। इस वर्ष की सभी तिथियों के साथ साथ व्रत की विधि और महत्व को जानना साधक के लिए उपयोगी रहेगा।
मासिक शिवरात्रि हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को पड़ती है। वर्ष 2026 में मासिक शिवरात्रि की तिथियाँ इस प्रकार हैं।
| मास | तिथि और वार |
|---|---|
| माघ मास | 16 जनवरी 2026 |
| फाल्गुन मास महाशिवरात्रि | 15 फरवरी 2026, रविवार |
| चैत्र मास | 17 मार्च 2026 |
| वैशाख मास | 15 अप्रैल 2026 |
| ज्येष्ठ मास | 15 मई 2026 |
| अधिक मास | 13 जून 2026 |
| आषाढ़ मास | 12 जुलाई 2026 |
| श्रावण मास | 11 अगस्त 2026 |
| भाद्रपद मास | 9 सितम्बर 2026 |
| आश्विन मास | 8 अक्टूबर 2026 |
| कार्तिक मास | 7 नवम्बर 2026 |
| मार्गशीर्ष मास | 7 दिसम्बर 2026 |
इन तिथियों पर श्रद्धा से व्रत रखकर प्रदोष काल और रात्रि में भगवान शिव की उपासना करने से वर्ष भर शिव कृपा का सूक्ष्म संरक्षण जीवन में बना रहता है।
शास्त्रों के अनुसार फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी को मनाई जाने वाली मुख्य शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है। इसी रात्रि को भगवान शिव के शिवलिंग रूप में प्रकट होने की मान्यता है। मान्यता यह भी है कि इसी दिव्य रात्रि में भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा ने सर्वप्रथम उस अनंत ज्योतिर्मय शिवलिंग की पूजा की थी।
महाशिवरात्रि के अतिरिक्त हर महीने जो कृष्ण पक्ष चतुर्दशी की रात्रि आती है उसे मासिक शिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। ऐसी धारणा है कि भगवान शिव की कृपा से यह मासिक शिवरात्रि
अविवाहित युवतियाँ योग्य जीवनसाथी की कामना से यह व्रत रखती हैं और विवाहित महिलाएँ दांपत्य जीवन में शांति, सामंजस्य और शक्ति के लिए मासिक शिवरात्रि का व्रत करती हैं।
वर्ष 2026 में मासिक शिवरात्रि की तिथियाँ इस प्रकार पड़ी हैं कि लगभग हर महीने साधना की एक निश्चित लय बनी रहती है। माघ से मार्गशीर्ष तक चलते हुए ये सभी व्रत साधक के लिए एक प्रकार का वार्षिक आध्यात्मिक अनुशासन बन सकते हैं।
नियमितता से इन तिथियों का ध्यान रखकर व्रत और पूजा करने से स्त्री पुरुष दोनों के लिए जीवन के अनेक क्षेत्र संतुलित हो सकते हैं।
मासिक शिवरात्रि व्रत के दिन की शुरुआत सूर्य उदय से पहले की जाती है। व्रत की सिद्धि के लिए आचार शुद्धि और मन की एकाग्रता अत्यंत आवश्यक मानी जाती है।
यह स्मरण रखते हुए कि व्रत केवल इच्छा सिद्धि के लिए ही नहीं बल्कि स्वयं को संयम और भक्ति में गढ़ने के लिए भी किया जा रहा है, साधक पूरे दिन की साधना में दृढ़ रह सकता है।
मासिक शिवरात्रि व्रत में भोजन व्यवस्था जितनी सरल और सात्त्विक रहे, उतना अच्छा माना जाता है।
सामान्यतः मासिक शिवरात्रि में अनाज से बनी चीजों का सेवन नहीं किया जाता। स्वास्थ्य की स्थिति देखते हुए साधक निर्णय कर सकते हैं, पर उद्देश्य यही रहता है कि शरीर हल्का रहे और मन शिवभक्ति में स्थिर रह सके।
मासिक शिवरात्रि व्रत में रुद्राभिषेक का विशेष महत्व माना गया है। रुद्राभिषेक का अर्थ है भगवान शिव के रुद्र रूप की स्तुति और जल सहित विभिन्न पवित्र द्रव्यों से शिवलिंग का अभिषेक।
रुद्राभिषेक के दौरान “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करते रहने से मन भी मंत्रमय बना रहता है और पूजा की ऊर्जा सहज रूप से गहरी होती जाती है।
मासिक शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर अर्पण की गई वस्तुएँ साधक की भावनाओं का प्रतीक भी होती हैं। इस दिन
अर्पण के समय यह ध्यान रखना आवश्यक है कि वस्तु शुद्ध, ताज़ा और यथासंभव सात्त्विक हो। श्रद्धा और विनम्रता के साथ अर्पित की गई छोटी सी वस्तु भी मन को भगवान शिव से गहराई से जोड़ सकती है।
शिवभक्ति में पाठ और मंत्र जप का महत्त्व बहुत गहरा है। मासिक शिवरात्रि के दिन साधक अपनी सामर्थ्य और समय के अनुसार कुछ या सभी अनुशंसित पाठ अपना सकते हैं।
इन सभी साधनों का उद्देश्य मन को शिवतत्त्व में स्थिर करना है, ताकि व्रत केवल बाहरी औपचारिकता न रहकर आंतरिक साधना में बदल सके।
मासिक शिवरात्रि में अधिकांश भक्त रात्रि तक व्रत रखते हैं और अगले दिन प्रातःकाल के बाद व्रत खोलते हैं।
दान में अन्न, वस्त्र या आवश्यक वस्तुएँ जरूरतमंदों को दी जा सकती हैं। इससे व्रत में करुणा और साझा भाव भी जुड़ जाता है।
मासिक शिवरात्रि व्रत का फल केवल व्यक्तिगत इच्छा पूर्ति तक सीमित नहीं माना जाता। नियमित रूप से व्रत रखने से
अविवाहित युवतियों के लिए योग्य वर की प्राप्ति और विवाहित महिलाओं के लिए दांपत्य सुख में वृद्धि की मान्यता तो है ही, साथ ही पुरुषों के लिए भी यह व्रत कर्म और विचार दोनों स्तर पर शुद्धि का मार्ग खोलता है।
यदि कोई व्यक्ति 2026 की मासिक शिवरात्रि को अधिक अर्थपूर्ण बनाना चाहता है, तो कुछ सरल संकल्प अपनाए जा सकते हैं।
जब इस प्रकार व्रत के साथ जीवन शैली में भी छोटे छोटे सकारात्मक परिवर्तन आने लगते हैं तब मासिक शिवरात्रि वास्तव में साधक के लिए संपूर्ण वर्ष की आध्यात्मिक यात्रा का आधार बन सकती है।
मासिक शिवरात्रि 2026 की सभी प्रमुख तिथियाँ कौन कौन सी हैं
माघ मास में 16 जनवरी 2026, फाल्गुन मास की महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026, चैत्र में 17 मार्च, वैशाख में 15 अप्रैल, ज्येष्ठ में 15 मई, अधिक मास में 13 जून, आषाढ़ में 12 जुलाई, श्रावण में 11 अगस्त, भाद्रपद में 9 सितम्बर, आश्विन में 8 अक्टूबर, कार्तिक में 7 नवम्बर और मार्गशीर्ष में 7 दिसम्बर 2026 को मासिक शिवरात्रि मनाई जाएगी।
महाशिवरात्रि और मासिक शिवरात्रि में क्या अंतर है
फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी को आने वाली शिवरात्रि महाशिवरात्रि कहलाती है, जिस दिन शिवलिंग प्रकट होने की मान्यता है। अन्य महीनों की कृष्ण चतुर्दशी की रात्रि को मासिक शिवरात्रि कहा जाता है, जो नियमित साधना और शिव कृपा के लिए मानी जाती है।
मासिक शिवरात्रि व्रत में क्या खाना उचित होता है
मासिक शिवरात्रि में सामान्यतः फलाहार रखा जाता है। फल, दूध, दही, मेवा और सरल सात्त्विक प्रसाद लिया जा सकता है। अनाज और भारी भोजन से बचने की सलाह दी जाती है और कई लोग अगले दिन सुबह ही व्रत का पारण करते हैं।
मासिक शिवरात्रि पर शिवलिंग की पूजा कैसे करें
सुबह और रात्रि में शिवलिंग को जल और गंगाजल से स्नान कराकर दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से रुद्राभिषेक करें। बेलपत्र, धतूरा, फल और दीप धूप अर्पित करें, शिव पुराण, शिव स्तुति या शिव चालीसा का पाठ करें और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करते हुए आरती करें।
मासिक शिवरात्रि व्रत अविवाहित और विवाहित महिलाओं के लिए कैसे लाभकारी है
अविवाहित महिलाएँ मासिक शिवरात्रि व्रत से योग्य जीवनसाथी की कामना करती हैं और विवाहित महिलाएँ दांपत्य जीवन की शांति, स्थिरता और शक्ति के लिए यह व्रत रखती हैं। नियमित व्रत, संयम और पूजा से संबंधों में सौहार्द, मानसिक संतुलन और पारिवारिक वातावरण में सकारात्मकता बढ़ने की मान्यता है।
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