मोक्षदा एकादशी 2025 30 नवंबर या 1 दिसंबर

By पं. नरेंद्र शर्मा

मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की मोक्षदा एकादशी इस वर्ष उदयतिथि के अनुसार सोमवार 1 दिसंबर को मनाई जाएगी

मोक्षदा एकादशी 2025 सही तिथि तिथि अवधि और पारण समय

हिन्दू पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहा जाता है। यह व्रत विष्णु भक्ति पितृ शांति और मोक्ष की कामना के लिए विशेष रूप से माना जाता है। वर्ष 2025 में तिथि को लेकर यह भ्रम था कि व्रत 30 नवंबर को रखा जाए या 1 दिसंबर को।

पंचांग का मूल नियम सीधा है एकादशी व्रत उदयतिथि के आधार पर रखा जाता है। 2025 में मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी की तिथि 30 नवंबर 2025 को रात 9:29 पर शुरू होकर 1 दिसंबर 2025 को शाम 7:01 पर समाप्त हो रही है। क्योंकि 1 दिसंबर की सुबह सूर्योदय के समय एकादशी तिथि है इसलिए मोक्षदा एकादशी का व्रत सोमवार 1 दिसंबर 2025 को रखा जाएगा।

तिथि अवधि और पारण

  • एकादशी तिथि आरंभ 30 नवंबर 2025 रात 9:29
  • एकादशी तिथि समाप्त 1 दिसंबर 2025 शाम 7:01
  • व्रत तिथि 1 दिसंबर 2025 सोमवार

द्वादशी तिथि में व्रत का समापन पारण से होता है

  • पारण तिथि 2 दिसंबर 2025 मंगलवार
  • पारण का समय सुबह लगभग 6:51 से 9:04 के बीच

इस समय द्वादशी भी विद्यमान रहती है इसलिए इसी अवधि में स्नान विष्णु पूजा दान और फिर फलाहार या भोजन से व्रत तोड़ना शास्त्रोक्त माना जाता है।

मोक्षदा एकादशी का महत्व

मान्यता है कि मोक्षदा एकादशी के व्रत से अपने पापों का बोझ हल्का होने के साथ साथ पितरों को भी ऊँचे लोक प्राप्त करने में सहारा मिलता है। कथा में उल्लेख है कि एक राजा ने ऋषि की आज्ञा से यह व्रत करके उसका पुण्य अपने नरक भोग रहे पिता को समर्पित किया और उन्हें मुक्ति मिली। इसी कारण इसे पितृ शांति के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।

कई परंपराओं में यही दिन गीता जयंती के रूप में भी मनाया जाता है क्योंकि मान्यता है कि कुरुक्षेत्र में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को ही दिया था। इस दिन श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

1 दिसंबर 2025 के प्रमुख शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त 5:11 AM से 6:05 AM
  • दोपहर का मध्य शुभ समय लगभग 12:14 PM से 12:59 PM
  • विजय मुहूर्त 1:57 PM से 2:39 PM
  • गोधूली मुहूर्त 5:23 PM से 5:50 PM
  • निशीथ काल 11:46 PM से 12:40 AM

ब्रह्म मुहूर्त में स्नान जप ध्यान और गीता पाठ विजय और गोधूलि में दीपदान और विष्णु पूजा तथा निशीथ काल में शांत ध्यान या नामस्मरण उत्तम माना जाता है।

व्रत के सामान्य नियम

  • दशमी की शाम से ही तामसिक भोजन मांसाहार मद्य लहसुन प्याज़ आदि से परहेज़ रखना अच्छा माना जाता है।
  • एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
  • क्षमता के अनुसार निराहार फलाहार या केवल अनाज का त्याग करते हुए सरल उपवास किया जा सकता है।
  • दिन भर यथाशक्ति भगवान विष्णु के नाम जप भजन गीता या विष्णु सहस्रनाम का पाठ और सेवा भाव में समय बिताएँ।
  • क्रोध झूठ निंदा विवाद और अत्यधिक मनोरंजन से बचकर मन को जितना हो सके सात्त्विक रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. 30 नवंबर की बजाय 1 दिसंबर को ही मोक्षदा एकादशी क्यों मानी जा रही है
एकादशी तिथि 30 नवंबर की रात से शुरू होती है लेकिन उस दिन सूर्योदय दशमी पर पड़ता है। व्रत हमेशा उस दिन रखा जाता है जब सूर्योदय के समय एकादशी रहे इसलिए इस वर्ष व्रत 1 दिसंबर को होगा।

2. क्या कोई साधक 30 नवंबर की रात से ही उपवास शुरू कर सकता है
हाँ यदि किसी को सुविधा हो तो दशमी की रात से हल्का उपवास शुरू कर सकता है लेकिन मुख्य संकल्प पूजा जप और व्रत का दिन 1 दिसंबर ही रहेगा क्योंकि वही वास्तविक उदयतिथि है।

3. क्या मोक्षदा एकादशी केवल पितृ तृप्ति के लिए रखी जाती है
नहीं यह व्रत स्वयं साधक के लिए भी अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है। इससे मन की शुद्धि पाप क्षय विष्णु कृपा और वैराग्य में वृद्धि होती है और अलग से संकल्प करके इसका पुण्य पितरों को भी समर्पित किया जा सकता है।

4. अगर स्वास्थ्य ठीक न हो तो व्रत कैसे करें
बीमार बुज़ुर्ग या दवाइयाँ लेने वाले लोग फलाहार दूध या बिना अनाज वाले हल्के आहार से भी एकादशी कर सकते हैं। मूल बात यह है कि शरीर को नुकसान पहुँचे बिना अपनी क्षमता के अनुसार संयम और भक्ति रखी जाए।

5. पारण के समय किन बातों का विशेष ध्यान रखें
द्वादशी के भीतर सूर्योदय के बाद ही पारण करें बहुत देर न करें। पहले स्नान फिर विष्णु पूजा और संभव हो तो थोड़ा दान उसके बाद शांति से फल या हल्के भोजन से व्रत तोड़ें एकदम भारी और अधिक भोजन से बचें।

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लेखक

पं. नरेंद्र शर्मा

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