By पं. नरेंद्र शर्मा
मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की मोक्षदा एकादशी इस वर्ष उदयतिथि के अनुसार सोमवार 1 दिसंबर को मनाई जाएगी

हिन्दू पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहा जाता है। यह व्रत विष्णु भक्ति पितृ शांति और मोक्ष की कामना के लिए विशेष रूप से माना जाता है। वर्ष 2025 में तिथि को लेकर यह भ्रम था कि व्रत 30 नवंबर को रखा जाए या 1 दिसंबर को।
पंचांग का मूल नियम सीधा है एकादशी व्रत उदयतिथि के आधार पर रखा जाता है। 2025 में मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी की तिथि 30 नवंबर 2025 को रात 9:29 पर शुरू होकर 1 दिसंबर 2025 को शाम 7:01 पर समाप्त हो रही है। क्योंकि 1 दिसंबर की सुबह सूर्योदय के समय एकादशी तिथि है इसलिए मोक्षदा एकादशी का व्रत सोमवार 1 दिसंबर 2025 को रखा जाएगा।
द्वादशी तिथि में व्रत का समापन पारण से होता है
इस समय द्वादशी भी विद्यमान रहती है इसलिए इसी अवधि में स्नान विष्णु पूजा दान और फिर फलाहार या भोजन से व्रत तोड़ना शास्त्रोक्त माना जाता है।
मान्यता है कि मोक्षदा एकादशी के व्रत से अपने पापों का बोझ हल्का होने के साथ साथ पितरों को भी ऊँचे लोक प्राप्त करने में सहारा मिलता है। कथा में उल्लेख है कि एक राजा ने ऋषि की आज्ञा से यह व्रत करके उसका पुण्य अपने नरक भोग रहे पिता को समर्पित किया और उन्हें मुक्ति मिली। इसी कारण इसे पितृ शांति के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।
कई परंपराओं में यही दिन गीता जयंती के रूप में भी मनाया जाता है क्योंकि मान्यता है कि कुरुक्षेत्र में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को ही दिया था। इस दिन श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
ब्रह्म मुहूर्त में स्नान जप ध्यान और गीता पाठ विजय और गोधूलि में दीपदान और विष्णु पूजा तथा निशीथ काल में शांत ध्यान या नामस्मरण उत्तम माना जाता है।
1. 30 नवंबर की बजाय 1 दिसंबर को ही मोक्षदा एकादशी क्यों मानी जा रही है
एकादशी तिथि 30 नवंबर की रात से शुरू होती है लेकिन उस दिन सूर्योदय दशमी पर पड़ता है। व्रत हमेशा उस दिन रखा जाता है जब सूर्योदय के समय एकादशी रहे इसलिए इस वर्ष व्रत 1 दिसंबर को होगा।
2. क्या कोई साधक 30 नवंबर की रात से ही उपवास शुरू कर सकता है
हाँ यदि किसी को सुविधा हो तो दशमी की रात से हल्का उपवास शुरू कर सकता है लेकिन मुख्य संकल्प पूजा जप और व्रत का दिन 1 दिसंबर ही रहेगा क्योंकि वही वास्तविक उदयतिथि है।
3. क्या मोक्षदा एकादशी केवल पितृ तृप्ति के लिए रखी जाती है
नहीं यह व्रत स्वयं साधक के लिए भी अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है। इससे मन की शुद्धि पाप क्षय विष्णु कृपा और वैराग्य में वृद्धि होती है और अलग से संकल्प करके इसका पुण्य पितरों को भी समर्पित किया जा सकता है।
4. अगर स्वास्थ्य ठीक न हो तो व्रत कैसे करें
बीमार बुज़ुर्ग या दवाइयाँ लेने वाले लोग फलाहार दूध या बिना अनाज वाले हल्के आहार से भी एकादशी कर सकते हैं। मूल बात यह है कि शरीर को नुकसान पहुँचे बिना अपनी क्षमता के अनुसार संयम और भक्ति रखी जाए।
5. पारण के समय किन बातों का विशेष ध्यान रखें
द्वादशी के भीतर सूर्योदय के बाद ही पारण करें बहुत देर न करें। पहले स्नान फिर विष्णु पूजा और संभव हो तो थोड़ा दान उसके बाद शांति से फल या हल्के भोजन से व्रत तोड़ें एकदम भारी और अधिक भोजन से बचें।
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