नर्मदा जयंती 2026: तिथि, सप्तमी तिथि और प्रमुख समय

By पं. अमिताभ शर्मा

25 जनवरी 2026 नर्मदा जयंती, स्नान, पूजा और पुण्यकारी अनुष्ठानों का शुभ समय

नर्मदा जयंती 2026: तिथि, सप्तमी तिथि और शुभ मुहूर्त

भारत की पावन नदियों में नर्मदा नदी को जीवित देवी के रूप में मानने की परंपरा बहुत पुरानी है। नर्मदा जयंती के दिन इस दिव्य नदी के प्राकट्य का उत्सव मनाया जाता है और श्रद्धालु नर्मदा मैया के चरणों में अपना कृतज्ञ भाव अर्पित करते हैं।

नर्मदा जयंती 2026: तिथि, सप्तमी और विशेष मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार नर्मदा जयंती माघ मास की शुक्ल पक्ष सप्तमी तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में नर्मदा जयंती का पूरा तिथि क्रम और शुभ समय इस प्रकार है।

विवरणतिथिसमय
नर्मदा जयंती 2026 का दिनरविवार, 25 जनवरी 2026पूरे दिन पर्व मान्य
शुक्ल पक्ष सप्तमी तिथि प्रारंभ25 जनवरी 2026रात 12 बजकर 39 मिनट
शुक्ल पक्ष सप्तमी तिथि समाप्त25 जनवरी 2026रात 11 बजकर 10 मिनट

पूरी सप्तमी तिथि 25 जनवरी के सूर्योदय से लेकर रात्रि तक विद्यमान रहने के कारण इस पूरे दिन को स्नान, पूजन और दान के लिए शुभ माना जाता है।

नर्मदा जयंती 2026 के प्रमुख शुभ मुहूर्त

नर्मदा जयंती पर विभिन्न साधना और पूजन के लिए कुछ विशेष मुहूर्त अत्यंत महत्वपूर्ण माने गए हैं।

मुहूर्तसमयावधिउपयोग
ब्रह्म मुहूर्तप्रातः 05 बजकर 26 मिनट से 06 बजकर 19 मिनट तकध्यान, जप, संकल्प और आरंभिक स्नान के लिए
अभिजीत मुहूर्तदोपहर 12 बजकर 12 मिनट से 12 बजकर 55 मिनट तकमुख्य पूजन, हवन, दान और संकल्प के लिए
सायंकालीन पूजन समयशाम 05 बजकर 54 मिनट से रात 07 बजकर 14 मिनट तकदीपदान, आरती और नर्मदा स्तुति के लिए

जो साधक इन मुहूर्तों में से किसी भी समय को चुनकर श्रद्धा के साथ नर्मदा जयंती का पूजन करते हैं, उनके लिए यह दिन और भी अधिक फलदायी हो जाता है।

नर्मदा जयंती क्या है और कब मनाई जाती है

नर्मदा जयंती उस पावन दिवस का उत्सव है जिसे नर्मदा नदी के प्राकट्य दिवस के रूप में स्मरण किया जाता है।

मान्यता है कि नर्मदा नदी का अवतरण भगवान शिव के दिव्य अंग से हुआ, जिसके कारण इसे विशेष आध्यात्मिक स्थान प्राप्त है। भारत की नदियों में नर्मदा को केवल जल धारा नहीं बल्कि जीवित देवी के रूप में पूजा जाता है।

माघ शुक्ल सप्तमी को नर्मदा जयंती मनाने की परंपरा इस भाव से जुड़ी है कि इस ऋतु में वातावरण शुद्ध, आकाश निर्मल और साधना के लिए अनुकूल होता है। इसलिए इस दिन नर्मदा तट पर किया गया स्नान, जप और दान विशेष पुण्य फलदायी माना जाता है।

नर्मदा नदी का दिव्य स्वरूप और शिव से संबंध

पुरातन मान्यताओं के अनुसार नर्मदा नदी का उद्गम भगवान शिव के दिव्य शरीर से माना जाता है।

कथाओं में वर्णन मिलता है कि नर्मदा मैया शिव के तप, धैर्य और स्थिरता की प्रतीक हैं। जिस प्रकार शिव का स्वरूप एक ओर गंभीर और शांत है, उसी प्रकार नर्मदा की धारा भी पहाड़ों, जंगलों और धरती के मध्य से प्रवाहित होकर अनगिनत प्राणियों को जीवन देती है।

इस संबंध के कारण नर्मदा नदी के जल को विशेष रूप से पवित्र समझा जाता है। अनेक साधक नर्मदा परिक्रमा जैसे कठिन व्रत धारण करके इस नदी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं और जीवन में स्थिरता, शांति और आंतरिक बल की कामना करते हैं।

नर्मदा जयंती 2026 पर स्नान और पूजन कैसे करें

नर्मदा जयंती के दिन किया गया स्नान और पूजन अत्यंत मंगलकारी माना जाता है।

  • जो लोग नर्मदा तट के समीप रहते हैं, वे प्रातःकाल नदी में स्नान कर नर्मदा मैया को जल, फूल और दीप अर्पित कर सकते हैं
  • जो साधक दूर रहते हैं, वे घर पर ही स्नान कर तांबे या स्वच्छ पात्र में जल लेकर उसे नर्मदा का स्मरण करके पूजें और फिर तुलसी, पुष्प और दीप के साथ आरती करें
  • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर कुछ समय शांत बैठकर नर्मदा मैया का नाम जपना मन को स्थिर करने में सहायक होता है
  • सायंकाल दीपदान विशेष रूप से शुभ माना गया है, इसलिए इस समय एक या अधिक दीपक जलाकर नर्मदा स्तुति या सरल प्रार्थना की जा सकती है

पूजन की बाहरी विधि जितनी महत्वपूर्ण है, उससे अधिक आवश्यक भीतर का विनम्र भाव है, जिससे भक्त नर्मदा मैया से क्षमा, शुद्धि और मार्गदर्शन की प्रार्थना करता है।

नर्मदा जयंती का आध्यात्मिक और व्यावहारिक महत्व

नर्मदा जयंती केवल उत्सव का दिन नहीं बल्कि आत्मशुद्धि की दिशा में एक स्पष्ट संकेत है।

मान्यता है कि नर्मदा में किया गया स्नान पापों को शांत करने, मन को हल्का करने और भीतर जमी हुई नकारात्मकता को धोने में सहायक होता है। जो लोग नर्मदा तट तक नहीं पहुँच पाते, वे भी श्रद्धा से नर्मदा का स्मरण कर जल अर्पित करके इस भाव से जुड़ सकते हैं।

आध्यात्मिक रूप से यह दिन इस बात की याद दिलाता है कि प्रकृति केवल संसाधन नहीं बल्कि ईश्वर का साक्षात् रूप है। नर्मदा जयंती पर नदी के प्रति कृतज्ञता, पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता और जल संरक्षण का संकल्प भी साधना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।

नर्मदा जयंती पर दान और सेवा की क्या भूमिका है

नर्मदा जयंती पर दान और सेवा को विशेष पुण्यदायी माना गया है।

इस दिन गरीबों को अन्न, वस्त्र और आवश्यक सामग्री दान करने की परंपरा है। भोजन के रूप में खिचड़ी, फल या सरल प्रसाद बनाकर जरूरतमंदों में बाँटना शुभ माना जाता है।

दान करते समय मन में यह भाव रखा जाता है कि नर्मदा मैया केवल जल नहीं, जीवन की धार हैं, इसलिए उनके सम्मान में भी जीवन से जुड़े जीवों की सेवा करना स्वाभाविक कर्तव्य है। जो व्यक्ति सेवा और दान के माध्यम से नर्मदा जयंती मनाता है, उसके लिए यह पर्व केवल व्यक्तिगत साधना नहीं बल्कि समाज के साथ संतुलित संबंध का अभ्यास भी बन जाता है।

नर्मदा जयंती और मानसिक शांति की साधना

नर्मदा जयंती के दिन मन को शांत करने की साधना पर विशेष ध्यान देना उपयोगी रहता है।

नदी की शीतल धारा की तरह यदि विचारों के प्रवाह को थोड़ा धीमा किया जाए, तो भीतर की उलझनें स्पष्ट होने लगती हैं। कुछ समय मौन रहना, गहरी श्वास के साथ मंत्र जप करना और प्रकृति के बीच बैठकर नर्मदा का स्मरण करना मानसिक तनाव को कम करने में सहायक हो सकता है।

यह दिन उस संकल्प के लिए भी उपयुक्त है कि आगे से जीवन में अनावश्यक क्रोध, ईर्ष्या या चिंताओं को धीरे धीरे छोड़ा जाएगा और उसकी जगह सरलता, कृतज्ञता और धैर्य को जगह दी जाएगी।

नर्मदा जयंती 2026 को जीवन में कैसे उतारें

यदि नर्मदा जयंती केवल एक तिथि के रूप में मनाई जाए और अगले दिन सब कुछ पहले जैसा ही हो जाए, तो इस पर्व की गहराई पूरी तरह नहीं खुल पाती।

नर्मदा जयंती 2026 के अवसर पर कोई भी साधक यह निश्चय कर सकता है कि वर्ष भर में कुछ समय प्रकृति के निकट बिताने, जल संरक्षण के छोटे छोटे प्रयास करने और अपने भीतर की अशुद्धियों को पहचानकर उन्हें कम करने की दिशा में सचेत कदम उठाएगा।

जब नर्मदा जयंती के साथ यह आंतरिक और बाहरी दोनों स्तर का परिवर्तन जुड़ता है तब इस पावन नदी की पूजा केवल एक कर्मकांड न रहकर जीवन में शांति, संतुलन और आध्यात्मिक प्रगति का सुगम मार्ग बन जाती है।

सामान्य प्रश्न

नर्मदा जयंती 2026 कब मनाई जाएगी और सप्तमी तिथि का समय क्या है

नर्मदा जयंती 2026 रविवार, 25 जनवरी को मनाई जाएगी। माघ शुक्ल सप्तमी तिथि 25 जनवरी 2026 को रात 12 बजकर 39 मिनट पर शुरू होकर उसी दिन रात 11 बजकर 10 मिनट पर समाप्त होगी, इसलिए पूरे दिन स्नान, पूजन और दान के कार्य किए जा सकते हैं।

नर्मदा जयंती पर स्नान और पूजन का सबसे शुभ समय कौन सा माना जाता है

नर्मदा जयंती के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त, अर्थात 05 बजकर 26 मिनट से 06 बजकर 19 मिनट तक का समय ध्यान और प्रारंभिक स्नान के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। दोपहर का अभिजीत मुहूर्त 12 बजकर 12 मिनट से 12 बजकर 55 मिनट तक मुख्य पूजन और दान के लिए उपयुक्त है, जबकि शाम 05 बजकर 54 मिनट से 07 बजकर 14 मिनट तक दीपदान और आरती की जा सकती है।

नर्मदा नदी को भगवान शिव से कैसे जोड़ा जाता है

प्रचलित मान्यता के अनुसार नर्मदा नदी का उद्गम भगवान शिव के दिव्य शरीर से माना जाता है। इस कारण नर्मदा को केवल एक नदी नहीं बल्कि शिव की शक्ति और करुणा का स्वरूप माना गया है और नर्मदा के जल को विशेष रूप से पवित्र और कल्याणकारी समझा जाता है।

नर्मदा जयंती पर कौन से दान और सेवाएँ विशेष रूप से शुभ मानी जाती हैं

इस दिन अन्न, वस्त्र और आवश्यक वस्तुओं का दान गरीबों या जरूरतमंदों को करना अत्यंत शुभ माना जाता है। भोजन, फल या प्रसाद बाँटना, किसी तीर्थ या मंदिर में सेवा करना और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता के साथ जल संरक्षण का संकल्प लेना भी नर्मदा मैया की कृपा के लिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

नर्मदा जयंती 2026 को व्यक्तिगत स्तर पर कैसे सार्थक बनाया जा सकता है

नर्मदा जयंती 2026 के दिन व्यक्ति संतुलित जीवन, जल और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, मन की शुद्धि और क्रोध, ईर्ष्या या नकारात्मक विचारों को कम करने का संकल्प ले सकता है। नियमित रूप से थोड़े समय के लिए मंत्र जप, मौन साधना और ईमानदारी से आत्मचिंतन से नर्मदा जयंती का प्रभाव पूरे वर्ष मानसिक शांति और आध्यात्मिक प्रगति के रूप में अनुभव किया जा सकता है।

पाएं अपनी सटीक कुंडली

कुंडली बनाएं

क्या आपको यह पसंद आया?

लेखक

पं. अमिताभ शर्मा

पं. अमिताभ शर्मा (63)


अनुभव: 20

इनसे पूछें: Family Planning, Career

इनके क्लाइंट: Punjab, Haryana, Delhi

इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें

ZODIAQ के बारे में

ज़ोडियाक (ZODIAQ) एक ऑनलाइन वैदिक ज्योतिष प्लेटफॉर्म है। जिन यूज़र्स को ज्योतिषीय सलाह की आवश्यकता है उन्हें ये अनुभवी ज्योतिषियों से जोड़ता है। हमारे यूज़र्स निशुल्क कुंडली भी बनाते हैं और कुंडली मिलान करते हैं। साथ ही ज़ोडियाक (ZODIAQ) ज्योतिषियों को भी कई उपयोगी सेवाएँ प्रदान करता है। ज्योतिषी ज़ोडियाक (ZODIAQ) की विभिन्न सुविधाओं का उपयोग कर अपने ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करते हैं।

यदि आप एक उपयोगकर्ता हैं

अनुभवी ज्योतिषियों से सलाह लें और उनका मार्गदर्शन प्राप्त करें। आप हमारे प्लेटफॉर्म से अनुभवी ज्योतिषियों द्वारा तैयार की गई हस्तलिखित जन्म पत्रिका और जीवन भविष्यवाणी रिपोर्ट भी मंगवा सकते हैं। सटीक कुंडली बनाएं, कुंडली मिलान करें और राशिफल व मुहूर्त की जानकारी प्राप्त करें। हमारी ऑनलाइन लाइब्रेरी का उपयोग करें जहां आपको सभी जरूरी ज्योतिषीय और आध्यात्मिक जानकारी एक जगह मिलेगी।

यदि आप एक ज्योतिषी हैं

अपने ग्राहकों के लिए सटीक कुंडली बनाएं और एक बार में 5 लोगों तक का कुंडली मिलान करें। ज़ोडियाक (ZODIAQ) की मदद से अपने ग्राहकों के लिए विस्तृत जन्म पत्रिका रिपोर्ट तैयार करें। क्लाइंट डायरेक्टरी में ग्राहकों का विवरण सेव करके किसी भी समय उन्हें एक्सेस करें। हर दिन आपने कितने लोगों को परामर्श दिया यह ट्रैक कर के अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाएं।

WELCOME TO

ZODIAQ

Right Decisions at the right time with ZODIAQ

500+

USERS

100K+

TRUSTED ASTROLOGERS

20K+

DOWNLOADS