By पं. नीलेश शर्मा
2026 में अमावस्या के बाद पहले चंद्र दर्शन का महत्व और अनुकूल समय

अमावस्या के ठीक बाद पहली बार आकाश में प्रकट होने वाला कोमल चाँद हमेशा से भक्तों के लिए आशा, नए आरंभ और सौभाग्य का संकेत माना गया है। इसी पहले दर्शन को चन्द्र दर्शन कहा जाता है और फाल्गुन मास के चन्द्र दर्शन की आध्यात्मिक शक्ति हिंदू परंपरा में विशेष मानी जाती है।
फाल्गुन चन्द्र दर्शन 2026 की तिथि और समय इस प्रकार हैं।
| विवरण | तिथि | वार | समय |
|---|---|---|---|
| फाल्गुन चन्द्र दर्शन 2026 | 18 फरवरी 2026 | बुधवार | सायं 06 बजकर 13 मिनट से 07 बजकर 05 मिनट तक |
चन्द्र दर्शन का सबसे शुभ समय प्रायः सूर्यास्त के तुरंत बाद माना जाता है, जब आकाश हल्का अंधकार लिए होता है और चंद्रमा की पतली रेखा पहली बार दिखाई देती है। वर्ष 2026 में फाल्गुन चन्द्र दर्शन के लिए यह अवधि विशेष रूप से पूजन, व्रत मोचन और चन्द्र देव के ध्यान के लिए उपयुक्त मानी गई है।
अमावस्या के बाद पहली बार दिखाई देने वाले चंद्रमा के दर्शन को चन्द्र दर्शन कहा जाता है। परंपरा यह है कि अमावस्या की पूर्ण अंधेरी रात के बाद जब पहली बार चाँद का कोमल प्रकाश दिखाई दे, तो उसे आदर से निहारा जाए, नमस्कार किया जाए और प्रार्थना की जाए।
फाल्गुन चन्द्र दर्शन उसी क्रम का एक महत्वपूर्ण चरण है। फाल्गुन मास स्वयं ही आनंद, उत्सव और होली जैसे पर्वों से जुड़ा होता है, इसलिए इस मास के चन्द्र दर्शन को नए सौभाग्य और उन्नति के संकेत के रूप में देखा जाता है।
अलौकिकता से अधिक यह एक बहुत सहज और भावनात्मक क्षण होता है, जब साधक भीतर से यह स्वीकार करता है कि अंधकार कितना भी घना हो, भीतर और बाहर दोनों तरफ धीरे धीरे प्रकाश लौटता ही है।
चन्द्र दर्शन का उत्सव चन्द्र देव के सम्मान में मनाया जाता है।
चन्द्र दर्शन के लिए सबसे अनुकूल समय सूर्यास्त के तुरंत बाद माना जाता है, क्योंकि इसी समय पतले से चंद्रमा को देख पाना सबसे सरल होता है। पंचांगकारों के लिए भी सही समय का अनुमान लगाना सहज नहीं होता, इसलिए सामान्य रूप से सूर्यास्त के बाद की यह अवधि ही मार्गदर्शक मानी जाती है।
फाल्गुन चन्द्र दर्शन 2026 के लिए शाम 06 बजकर 13 मिनट से 07 बजकर 05 मिनट तक का समय विशेष रूप से उल्लेखित है।
इस अवधि में आकाश में चाँद की पतली रेखा को देखने की संभावना सर्वाधिक रहती है। जो श्रद्धालु व्रत रखते हैं, वे इसी समय चन्द्र दर्शन करके अपना व्रत खोलते हैं और जल या प्रसाद ग्रहण करते हैं।
मुहूर्त का पालन करने के पीछे भाव यह है कि मन समय के प्रति सजग रहे, साधना में लापरवाही न आए और उस क्षण को सचेत रूप से जिया जाए जब पूर्ण अंधकार के बाद चंद्रमा का प्रथम प्रकाश प्रकट होता है।
चन्द्र दर्शन की परंपरा का मूल सूत्र भाद्रपद शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से भी जोड़ा जाता है।
कई स्थानों पर वर्णन मिलता है कि चन्द्र दर्शन भाद्रपद मास की शुक्ल प्रतिपदा तिथि से संबंधित उत्सव माना जाता है, जहाँ अमावस्या के बाद पहली तिथि पर चंद्र दर्शन के साथ नई शुरुआत का संकेत देखा जाता है।
चन्द्र दर्शन से जुड़े सारांश में यह भी उल्लेख मिलता है कि इसकी शुरूआत भाद्रपद शुक्ल प्रतिपदा से मानी जाती है और इसे चन्द्र देव से संबंधित एक विशेष अवसर के रूप में देखा जाता है, जो वर्ष में एक बार अवश्य आता है।
फाल्गुन चन्द्र दर्शन के दिन पूजा विधि सरल पर गहन भावना के साथ बताई गई है।
कथन है कि जो व्यक्ति पूर्ण श्रद्धा के साथ चन्द्र देव की पूजा करता है, उसे दीर्घकालिक सौभाग्य और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है।
चन्द्र दर्शन से जुड़े प्रमुख कर्मों में दान भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना गया है।
इस प्रकार चन्द्र दर्शन व्यक्ति को लेने वाले से देने वाले की दिशा में भी धीरे धीरे मोड़ता है।
हिंदू परंपरा में चन्द्र देव को अत्यंत आदरणीय देवता माना गया है।
वे नवग्रहों में एक महत्त्वपूर्ण ग्रह हैं और मानव जीवन के मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक पक्ष पर गहरा प्रभाव रखने वाले माने जाते हैं। चंद्रमा को सामान्यतः शुभ ग्रह माना जाता है और उसे प्रज्ञा, पवित्रता और सद्भावना से जोड़ा गया है।
जिनकी कुंडली में चंद्रमा शुभ स्थिति में हो, उनके लिए मानसिक संतुलन, सफल संबंध और जीवन में सौम्यता की संभावना अधिक मानी जाती है। चन्द्र दर्शन के दिन चन्द्र देव की पूजा इसी लिए की जाती है कि मन अधिक स्थिर, निर्मल और संयमित बन सके।
हिंदू मान्यता में चन्द्र देव को वनस्पति और प्राणी जगत के पालनकर्ता के रूप में भी देखा गया है।
कहा जाता है कि चंद्रमा की शीतल किरणें धरती पर जीवन को पोषण देती हैं। चन्द्र देव 27 नक्षत्रों से विवाह संबंध में बताए गए हैं, जो प्रजापति दक्ष की पुत्रियाँ हैं।
चन्द्र देव को बुद्ध ग्रह के पिता के रूप में भी जाना जाता है। इस प्रकार वे केवल एक ग्रह नहीं बल्कि नक्षत्रों और ग्रहों के बीच एक सेतु के रूप में देखे जाते हैं, जो मन, बुद्धि और प्रकृति के बीच गहरा संबंध स्थापित करते हैं।
फाल्गुन चन्द्र दर्शन को घर परिवार की सुख शांति से भी जोड़ा जाता है।
इस दिन की गई प्रार्थना में लोग अपने घर के सदस्यों के लिए मानसिक स्थिरता, भावनात्मक संतुलन और आपसी समझ की कामना करते हैं। चन्द्र देव का संबंध मन और भावनाओं से है, इसलिए उनकी कृपा से घर में अनावश्यक तनाव, चिड़चिड़ापन और असंतोष धीरे धीरे कम होने की आशा रखी जाती है।
यदि किसी परिवार में बार बार मनमुटाव या भावनात्मक असंतुलन का अनुभव हो रहा हो, तो ऐसे घर के लोग फाल्गुन चन्द्र दर्शन जैसे अवसरों पर शांतिपूर्वक पूजा, दान और प्रार्थना करके अपने भीतर के वातावरण को भी बदलने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।
चन्द्र दर्शन का उत्सव वर्ष में एक बार ही नहीं बल्कि अमावस्या के बाद आने वाले पहले चन्द्र दर्शन के रूप में अलग अलग मासों में भी स्मरण किया जाता है।
प्रासंगिक सूची में कुछ हाल की तिथियाँ भी दी गई हैं।
इन तिथियों से यह संकेत मिलता है कि चन्द्र दर्शन की परंपरा वर्ष दर वर्ष निरंतर चलती रहती है और हर मास या अवसर पर चंद्रमा के पहले दर्शन को साधना और प्रार्थना के साथ जोड़ा जाता है।
फाल्गुन चन्द्र दर्शन 2026 को केवल एक औपचारिक पूजा की तरह देखकर छोड़ देना इस अवसर की गहराई को कम कर देता है।
इस दिन कोई व्यक्ति चन्द्र दर्शन से पहले अपने भीतर के असंतुलन, चिंता और भ्रम को पहचानकर मन ही मन यह निश्चय कर सकता है कि आगे से भावनाओं और वाणी पर अधिक संयम रखेगा। चन्द्र देव के सामने यह प्रार्थना की जा सकती है कि मन अधिक शांत, स्थिर और निर्मल रहे, ताकि निर्णय भी अधिक संतुलित और स्पष्ट हो सकें।
जब चन्द्र दर्शन के साथ व्रत, दान और प्रार्थना के अलावा सोचने और जीने के तरीके में भी छोटा सही, पर वास्तविक परिवर्तन शुरू हो तब फाल्गुन चन्द्र दर्शन 2026 जीवन में सौभाग्य के साथ साथ आत्मिक स्थिरता का भी सुंदर अवसर बन जाता है।
फाल्गुन चन्द्र दर्शन 2026 कब है और उसका समय क्या है
फाल्गुन चन्द्र दर्शन 2026 बुधवार, 18 फरवरी को होगा। इस दिन चन्द्र दर्शन का शुभ समय शाम 06 बजकर 13 मिनट से 07 बजकर 05 मिनट तक बताया गया है और इसी अवधि में चन्द्र देव के दर्शन, पूजा और व्रत मोचन करना श्रेष्ठ माना जाता है।
चन्द्र दर्शन के दिन लोग व्रत क्यों रखते हैं
चन्द्र दर्शन के दिन कई भक्त पूरे दिन कड़ा व्रत रखते हैं और न अन्न लेते हैं, न जल ग्रहण करते हैं। उनका व्रत चंद्रमा के दर्शन के बाद ही खोलते हैं, क्योंकि मान्यता है कि इस प्रकार किया गया व्रत और पूजा व्यक्ति के लिए दीर्घकालिक सौभाग्य, समृद्धि और मानसिक शांति का आधार बन सकता है।
चन्द्र दर्शन पर दान में क्या देना शुभ माना जाता है
चन्द्र दर्शन के दिन वस्त्र, चावल, शक्कर और अन्य आवश्यक सामग्री का दान ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को देना शुभ माना जाता है। दान के समय चन्द्र देव का ध्यान रखते हुए प्रार्थना की जाती है कि जीवन में शीतलता, करुणा और संतुलित भावनाएँ बनी रहें।
चन्द्र देव को नवग्रह में इतना महत्त्वपूर्ण क्यों माना जाता है
चन्द्र देव मन, भावनाओं और मानसिक संतुलन के कारक माने जाते हैं। उन्हें प्रज्ञा, पवित्रता और सद्भावना से जोड़ा गया है। जब कुंडली में चंद्रमा शुभ स्थिति में हो, तो व्यक्ति के लिए संबंध, निर्णय क्षमता और जीवन की सहजता में वृद्धि की संभावना अधिक होती है, इसलिए चन्द्र दर्शन पर उनकी पूजा को विशेष महत्त्व दिया जाता है।
फाल्गुन चन्द्र दर्शन 2026 को व्यक्तिगत स्तर पर कैसे उपयोगी बनाया जा सकता है
फाल्गुन चन्द्र दर्शन 2026 के दिन व्यक्ति यह संकल्प ले सकता है कि आगे से भावनात्मक प्रतिक्रियाओं के बजाय स्थिरता और समझदारी से व्यवहार करेगा। व्रत, दान, चन्द्र देव की पूजा और शांत प्रार्थना के साथ यदि हर महीने चन्द्र दर्शन जैसे अवसरों पर थोड़ी देर आत्मचिंतन और जप भी जोड़ा जाए, तो धीरे धीरे जीवन में मानसिक संतुलन, सौहार्द और आंतरिक विश्वास मजबूत होने लगता है।
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