By पं. नीलेश शर्मा
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी व्रत, तिथि और बाल गोपाल पूजा का महत्व

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ माना जाता है और इसी दिन को हर वर्ष श्रद्धा के साथ श्री कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। बाल गोपाल के भक्त इस जन्मोत्सव को बड़े भाव और स्नेह से मनाते हैं, क्योंकि यह केवल एक पर्व नहीं बल्कि प्रेम, भक्ति और लीला के स्मरण का पावन अवसर भी है।
इसी जन्म तिथि के आधार पर हर मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी या मासिक कृष्ण जयंती मनाई जाती है। इस विशेष व्रत और पूजन के माध्यम से साधक पूरे वर्ष भगवान कृष्ण की कृपा अपने जीवन में बनाए रखने का प्रयास करते हैं और बाल गोपाल के साथ एक निकट संबंध अनुभव करते हैं।
| शीर्षक | विवरण |
|---|---|
| व्रत का नाम | फाल्गुन कृष्ण जन्माष्टमी, मासिक कृष्ण जन्माष्टमी |
| संबंधित नाम | मासिक कृष्ण जयंती |
| संबंधित देवता | भगवान श्रीकृष्ण, लड्डू गोपाल |
| तिथि का आधार | हर मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि |
| पर्व का स्वरूप | व्रत, मंदिर पूजा, घर पर पूजन और भजन कीर्तन |
फाल्गुन कृष्ण जन्माष्टमी भी इसी मासिक परंपरा का एक महत्त्वपूर्ण कड़ी है। जैसे माघ कृष्ण जन्माष्टमी 10 जनवरी 2026 को रही, वैसे ही फाल्गुन मास में भी कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मासिक जन्माष्टमी का विशेष व्रत रखा जाएगा। मासिक जन्माष्टमी का यह क्रम पूरे वर्ष भक्तों को कृष्ण भक्ति से जोड़कर रखता है।
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी वह पर्व है जो हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। जिस प्रकार भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को मुख्य जन्माष्टमी के रूप में मान्यता मिली है, उसी भाव को हर मास पुनः जागृत करने के लिए मासिक जन्माष्टमी व्रत का विधान माना गया है।
हिंदू धर्म में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा को अत्यंत शुभ माना गया है। मासिक जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल या बाल रूप के श्रीकृष्ण की विशेष पूजा की जाती है। कई भक्त इस दिन उपवास रखकर, रात्रि में भगवान की आरती और जन्म की लीला का स्मरण करके ही व्रत का पारण करते हैं। इससे मन में भक्ति की निरंतरता बनी रहती है और घर का वातावरण भी अधिक सौम्य और आध्यात्मिक बनता है।
फाल्गुन कृष्ण जन्माष्टमी को समझने से पहले माघ कृष्ण जन्माष्टमी की तिथि जान लेना उपयोगी है, क्योंकि इससे मासिक क्रम स्पष्ट होता है।
माघ मास में मासिक कृष्ण जन्माष्टमी 2026 में इस प्रकार रही।
| विवरण | समय और तिथि |
|---|---|
| माघ कृष्ण अष्टमी तिथि प्रारंभ | 10 जनवरी 2026, सुबह 08 बजकर 23 मिनट |
| माघ कृष्ण अष्टमी तिथि समाप्त | 11 जनवरी 2026, सुबह 10 बजकर 20 मिनट |
| माघ कृष्ण जन्माष्टमी पर्व दिवस | 10 जनवरी 2026, शनिवार |
| मासिक कृष्ण जन्माष्टमी काल | 11 जनवरी 2026, रात्रि 12 बजकर 02 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक (मध्य रात्रि काल) |
माघ कृष्ण जन्माष्टमी पर मध्य रात्रि 12 बजकर 02 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक का समय विशेष रूप से भगवान कृष्ण जन्म की स्मृति और भोग आरती के लिए शुभ माना गया। यही परंपरा फाल्गुन कृष्ण जन्माष्टमी सहित अन्य मासिक जन्माष्टमी पर भी भाव के स्तर पर बनी रहती है, जहाँ अष्टमी तिथि और रात्रि का समय विशेष महत्त्व रखता है।
धर्म ग्रंथों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत की अपार महिमा बताई गई है। यह केवल एक उपवास नहीं बल्कि संकल्प, संयम और भक्ति का अनुष्ठान है।
इस दिन कृष्ण भक्त पूरे दिन व्रत रखते हैं और रात्रि में लगभग 12 बजे, जब भगवान के जन्म की लीला स्मरण की जाती है तब प्रसाद ग्रहण करके व्रत का समापन करते हैं।
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी को बाल गोपाल की आराधना के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
इस प्रकार मासिक कृष्ण जन्माष्टमी केवल व्यक्तिगत साधना नहीं बल्कि परिवार के भावनात्मक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य के लिए भी शुभ मानी जाती है।
मासिक जन्माष्टमी व्रत की विधि अपेक्षाकृत सरल है, परंतु नियम और श्रद्धा इसमें मूल आधार माने गए हैं।
पूजा के साथ साथ श्रीकृष्ण के भजन, कीर्तन और लीला कथा का श्रवण या पाठ करना भी इस व्रत की महिमा को और गहरा बना देता है।
जन्माष्टमी व्रत में मध्य रात्रि का समय विशेष माना जाता है।
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी व्रत की एक विशेषता इसकी नियमितता है।
| शीर्षक | विवरण |
|---|---|
| आवृत्ति | मासिक, हर कृष्ण पक्ष की अष्टमी |
| व्रत की अवधि | 1 दिन |
| तिथि | हर मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि |
| मुख्य उत्सव | भजन कीर्तन, व्रत, मंदिर दर्शन, घर पर श्रीकृष्ण पूजन |
जो साधक पूरे वर्ष मासिक जन्माष्टमी का व्रत रखते हैं, उनके जीवन में अनुशासन, स्थिरता और भक्ति की धारा अधिक गहराई से अनुभव की जा सकती है। यह व्रत केवल फल पाने का माध्यम नहीं बल्कि साधना को नियमित और संतुलित रखने का मार्ग भी है।
फाल्गुन कृष्ण जन्माष्टमी और अन्य मासिक जन्माष्टमी को केवल एक धार्मिक तिथि मानकर छोड़ देने के बजाय, इसे जीवन की दिशा से भी जोड़ना बहुत उपयोगी होता है।
जब मासिक जन्माष्टमी साधक के व्यवहार में भी परिवर्तन लाने लगे तब समझें कि श्रीकृष्ण की कृपा केवल पूजा स्थान तक सीमित नहीं रही बल्कि जीवन के हर क्षेत्र तक पहुँचने लगी है।
फाल्गुन कृष्ण जन्माष्टमी किस आधार पर तय की जाती है
फाल्गुन कृष्ण जन्माष्टमी भी अन्य मासिक जन्माष्टमी की तरह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर ही तय की जाती है। जिस मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी आती है, उसी दिन मासिक कृष्ण जन्माष्टमी या मासिक कृष्ण जयंती के रूप में व्रत और पूजन किया जाता है।
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी और मुख्य जन्माष्टमी में क्या अंतर है
मुख्य श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को मनाई जाती है, जो भगवान के अवतरण दिवस की वार्षिक स्मृति है। मासिक कृष्ण जन्माष्टमी हर महीने कृष्ण अष्टमी को मनाई जाती है, जिसका उद्देश्य पूरे वर्ष कृष्ण भक्ति, व्रत और साधना को निरंतर बनाए रखना है।
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी व्रत से क्या लाभ होने की मान्यता है
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जन्माष्टमी व्रत से मनोकामनाएँ पूर्ण होने, जीवन की परेशानियों में कमी, अकाल मृत्यु से रक्षा और पाप कर्मों के प्रभाव से मुक्ति की प्रार्थना की जाती है। यह व्रत अनेक एकादशी व्रतों के बराबर फलदायी माना गया है, यदि श्रद्धा, नियम और संयम के साथ किया जाए।
संतान सुख के लिए मासिक कृष्ण जन्माष्टमी कैसे सहायक मानी जाती है
जो दंपति संतान प्राप्ति में बाधा अनुभव कर रहे हों, वे मासिक कृष्ण जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल की विशेष सेवा, स्तुति और व्रत कर सकते हैं। परंपरा में माना गया है कि बाल गोपाल की प्रसन्नता से घर में बाल सुख, आनंद और वंश वृद्धि के लिए अनुकूल वातावरण बनता है।
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी पर कौन से मंत्र जप करना शुभ रहता है
मासिक जन्माष्टमी पर “Om Namo Bhagwate Vasudevaya” मंत्र जप अत्यंत मंगलकारी माना जाता है, जिसका अर्थ है भगवान वासुदेव को नमस्कार। साथ ही “Om Krishnaya Vasudevaya Govindaya Namo Namah” मंत्र के जप से मन में भक्ति, आनंद और आंतरिक शांति का अनुभव गहरा होता है।
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