By पं. अभिषेक शर्मा
गुरु प्रदोष के शुभ मुहूर्त, विधि और लाभ एक जगह

2026 का पहला दिन शिव भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। यह गुरुवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत के साथ शुरू हो रहा है। इस दुर्लभ संयोग में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा से सभी कष्ट दूर होते हैं। नए साल की शुरुआत में यह व्रत शुभ फल प्रदान करता है। भक्तों को मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद मिलता है।
वैदिक पंचांग के अनुसार, 2026 का पहला प्रदोष व्रत 1 जनवरी गुरुवार को है। त्रयोदशी तिथि सुबह 1 बजकर 47 मिनट से आरंभ होकर रात 10 बजकर 22 मिनट तक रहेगी। प्रदोष काल शाम 5 बजकर 35 मिनट से रात 8 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। इस समय पूजा करना अत्यंत फलदायी होता है। शास्त्रों में इस काल को शिव पूजा के लिए सर्वोत्तम बताया गया है।
यह संयोग इसलिए भी खास है क्योंकि गुरुवार भगवान विष्णु का दिन है। प्रदोष व्रत शिव को समर्पित होता है। दोनों देवताओं की कृपा एक साथ प्राप्ति का योग बनता है।
गुरु प्रदोष दुर्लभ होता है। शास्त्रों के अनुसार, इस व्रत से शत्रुओं का नाश होता है। व्यक्ति को ज्ञान और सौभाग्य की प्राप्ति मिलती है। नए साल के पहले दिन यह संयोग दोगुना फल देता है। कई शुभ योग इस दिन प्रभावी रहेंगे। शिव भक्तों के लिए यह अवसर जीवन में नई ऊर्जा भरने वाला है।
मान्यता है कि प्रदोष व्रत में शिव पूजा से पाप नष्ट होते हैं। भक्त सुख समृद्धि प्राप्त करते हैं। गुरु प्रदोष विशेष रूप से बुद्धि विवेक प्रदान करता है। यह व्रत जीवन की बाधाओं को दूर करने में सहायक सिद्ध होता है।
प्रदोष व्रत की कथा सुनाने का भी विशेष महत्व है। एक बार भगवान शिव ने देवताओं को बताया कि प्रदोष काल में पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस कथा का पाठ व्रत को पूर्णता प्रदान करता है।
प्रदोष व्रत की पूजा सरल लेकिन विधिपूर्वक करनी चाहिए। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लें। सूर्यास्त से पहले पुनः स्नान या हाथ पैर धो लें।
| सामग्री | उपयोग |
|---|---|
| दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल | अभिषेक के लिए |
| बिल्व पत्र, धतूरा, अक्षत, सफेद फूल | अर्पण के लिए |
| शिवलिंग या शिव प्रतिमा | मुख्य पूजन के लिए |
| अगरबत्ती, दीपक, कपूर | आरती के लिए |
प्रदोष काल में शिवलिंग का अभिषेक करें। दूध दही घी शहद और गंगाजल से स्नान कराएं। बिल्व पत्र धतूरा अक्षत और सफेद फूल चढ़ाएं। ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें। जाप की संख्या 108 हो तो उत्तम है।
शिव चालीसा और प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें। अंत में आरती उतारें। पूजा में हुई किसी भी गलती के लिए क्षमा प्रार्थना करें। व्रत अगले दिन द्वादशी या चतुर्दशी पर पारण करें।
इस व्रत से भक्तों को अनेक लाभ मिलते हैं। कष्ट दूर होते हैं। वैवाहिक जीवन में सुख आता है। आर्थिक समृद्धि प्राप्त होती है। विशेष रूप से गुरु प्रदोष से करियर में उन्नति होती है। शास्त्रों में इसे मोक्षदायी व्रत कहा गया है। नियमित प्रदोष व्रत से जीवन में स्थिरता आती है।
नए साल के पहले प्रदोष व्रत से वर्ष भर शुभ फल की कामना करें। भक्त इसे अवसर के रूप में ग्रहण करते हैं।
प्रदोष व्रत 2026 का पहला व्रत कब है?
1 जनवरी 2026 को गुरुवार। त्रयोदशी सुबह 1:47 से रात 10:22 तक।
प्रदोष काल क्या होता है?
शाम 5:35 से रात 8:19 तक। इस समय शिव पूजा सर्वोत्तम है।
गुरु प्रदोष व्रत के लाभ क्या हैं?
शत्रु नाश, ज्ञान और सौभाग्य प्राप्ति। दोगुना फल मिलता है।
प्रदोष व्रत पूजा में क्या चढ़ाएं?
दूध दही घी शहद गंगाजल से अभिषेक। बिल्व पत्र धतूरा सफेद फूल।
व्रत कब तोड़ें?
अगले दिन द्वादशी या चतुर्दशी पर पारण करें।
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