2026 में प्रदोष व्रत कब है और किस प्रकार करें शिव साधना

By पं. सुव्रत शर्मा

2026 मासिक प्रदोष व्रत तिथियाँ, प्रदोष काल समय और शिव पूजा विधि की संपूर्ण मार्गदर्शिका

2026 प्रदोष व्रत तिथियाँ और पूजा विधि

हिंदू पंचांग में जो साधक यह जानना चाहते हैं कि 2026 में प्रदोष व्रत कब है, उनके लिए यह वर्ष बहुत महत्त्वपूर्ण है। विक्रम संवत 2082-2083 के अनुसार मासिक प्रदोष व्रत वर्ष भर में शुक्ल और कृष्ण दोनों पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर आते हैं। प्रत्येक प्रदोष व्रत की अपनी अलग ग्राम्यता होती है, विशेषकर जब यह सोमवार, शनिवार या मंगलवार के दिन पड़े। सोम प्रदोष, शनि प्रदोष और भौम प्रदोष को शास्त्रों में अत्यंत फलदायी माना गया है, क्योंकि इन दिनों भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।

प्रदोष का अर्थ है सांध्यकाल का वह भाग जो सूर्यास्त के बाद लगभग दो से ढाई घंटे तक माना जाता है। इसी प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि के योग पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। जो लोग यह प्रश्न करते हैं कि प्रदोष का व्रत कब है, उनके लिए तिथियों के साथ‑साथ यह समझना भी आवश्यक है कि किस प्रकार इस समय शिव साधना की जाए ताकि व्रत का फल और भी गहरा हो सके।

2026 में मासिक प्रदोष व्रत कब है

नीचे दी गई सारणी 2026 के पूरे वर्ष में मुख्य प्रदोष व्रत की तिथियाँ, वार और प्रकार को दिखाती है। समय स्थानीय सूर्योदय‑अधारित पंचांग के अनुसार नई दिल्ली के लिए दिए गए हैं, अन्य स्थानों पर प्रदोष काल कुछ मिनट आगे‑पीछे हो सकता है।

2026 प्रदोष व्रत तिथि और समय सारणी

तिथि (2026)वार और प्रदोष प्रकारप्रदोष काल समयमाह और त्रयोदशी पक्ष
1 जनवरीगुरुवार - गुरु प्रदोष05:35 PM से 08:19 PMपौष, शुक्ल त्रयोदशी
16 जनवरीशुक्रवार - शुक्र प्रदोष05:47 PM से 08:29 PMमाघ, कृष्ण त्रयोदशी
30 जनवरीशुक्रवार - शुक्र प्रदोष05:59 PM से 08:37 PMमाघ, शुक्ल त्रयोदशी
14 फरवरीशनिवार - शनि प्रदोष06:10 PM से 08:44 PMफाल्गुन, कृष्ण त्रयोदशी
1 मार्चरविवार - रवि प्रदोष06:21 PM से 07:09 PMफाल्गुन, शुक्ल त्रयोदशी
16 मार्चसोमवार - सोम प्रदोष06:30 PM से 08:54 PMचैत्र, कृष्ण त्रयोदशी
30 मार्चसोमवार - सोम प्रदोष06:38 PM से 08:57 PMचैत्र, शुक्ल त्रयोदशी
15 अप्रैलबुधवार - बुध प्रदोष06:47 PM से 09:00 PMवैशाख, कृष्ण त्रयोदशी
28 अप्रैलमंगलवार - भौम प्रदोष06:54 PM से 09:04 PMवैशाख, शुक्ल त्रयोदशी
14 मईगुरुवार - गुरु प्रदोष07:04 PM से 09:09 PMज्येष्ठ, कृष्ण त्रयोदशी
28 मईगुरुवार - गुरु प्रदोष07:12 PM से 09:15 PMज्येष्ठ, शुक्ल त्रयोदशी
12 जूनशुक्रवार - शुक्र प्रदोष07:36 PM से 09:20 PMज्येष्ठ, कृष्ण त्रयोदशी
27 जूनशनिवार - शनि प्रदोष07:23 PM से 09:23 PMज्येष्ठ, शुक्ल त्रयोदशी
12 जुलाईरविवार - रवि प्रदोष07:22 PM से 09:24 PMआषाढ़, कृष्ण त्रयोदशी
26 जुलाईरविवार - रवि प्रदोष07:16 PM से 09:21 PMआषाढ़, शुक्ल त्रयोदशी
10 अगस्तसोमवार - सोम प्रदोष07:05 PM से 09:14 PMश्रावण, कृष्ण त्रयोदशी
25 अगस्तमंगलवार - भौम प्रदोष06:51 PM से 09:04 PMश्रावण, शुक्ल त्रयोदशी
8 सितम्बरमंगलवार - भौम प्रदोष06:35 PM से 08:52 PMभाद्रपद, कृष्ण त्रयोदशी
24 सितम्बरगुरुवार - गुरु प्रदोष06:16 PM से 08:39 PMभाद्रपद, शुक्ल त्रयोदशी
8 अक्तूबरगुरुवार - गुरु प्रदोष05:59 PM से 08:27 PMआश्विन, कृष्ण त्रयोदशी
23 अक्तूबरशुक्रवार - शुक्र प्रदोष05:44 PM से 08:16 PMआश्विन, शुक्ल त्रयोदशी
6 नवम्बरशुक्रवार - शुक्र प्रदोष05:33 PM से 08:09 PMकार्तिक, कृष्ण त्रयोदशी
22 नवम्बररविवार - रवि प्रदोष05:25 PM से 08:06 PMकार्तिक, शुक्ल त्रयोदशी
6 दिसम्बररविवार - रवि प्रदोष05:24 PM से 08:07 PMमार्गशीर्ष, कृष्ण त्रयोदशी
21 दिसम्बरसोमवार - सोम प्रदोष05:36 PM से 08:13 PMमार्गशीर्ष, शुक्ल त्रयोदशी

जो भी साधक यह जानना चाहते हैं कि 2026 में प्रदोष का व्रत कब है, वे इस सारणी को वर्ष भर के लिए आधार मान सकते हैं और अपने स्थानीय पंचांग से समय की सूक्ष्म भिन्नता देख सकते हैं।

प्रदोष व्रत क्या है और कब रखा जाता है

प्रदोष व्रत शिव और पार्वती को समर्पित एक विशेष तिथि‑आधारित उपवास है। यह व्रत उन दिनों रखा जाता है जब त्रयोदशी तिथि सूर्यास्त के बाद के प्रदोष काल के साथ संयुक्त होती है। प्रदोष काल सामान्यतः सूर्यास्त के लगभग डेढ़ से दो घंटे बाद तक का समय माना जाता है, जब दिन और रात की ऊर्जा एक‑दूसरे में घुलती है।

प्रदोष व्रत शुक्ल पक्ष त्रयोदशी और कृष्ण पक्ष त्रयोदशी दोनों पर रखा जा सकता है। इसलिए एक माह में सामान्यतः दो प्रदोष व्रत होते हैं, जिन्हें मासिक प्रदोष व्रत या मासिक प्रदोष कहा जाता है। जब यह व्रत किसी विशेष वार पर आता है, तो उसकी महत्ता और भी बढ़ जाती है।

वार के अनुसार प्रदोष व्रत की विशेषता

प्रदोष प्रकारवारविशेष फल की मान्यता
सोम प्रदोषसोमवारमानसिक शांति, रोग शमन, चंद्र संबंधी दोषों में राहत
भौम प्रदोषमंगलवारकर्ज निवारण, विवाद शांति, साहस की वृद्धि
बुध प्रदोषबुधवारबुद्धि, संवाद, व्यापार में संतुलन
गुरु प्रदोषगुरुवारगुरु कृपा, ज्ञान, संतान सुख, आध्यात्मिक उन्नति
शुक्र प्रदोषशुक्रवारदाम्पत्य सुख, सौंदर्य, भौतिक सुविधा
शनि प्रदोषशनिवारशनि दोष शमन, पुराने कर्म बंधन में राहत
रवि प्रदोषरविवारआत्मविश्वास, सूर्य दोष की शांति, मान सम्मान

इसीलिए अक्सर लोग अलग‑अलग प्रश्न करते हैं, जैसे कि किसी माह में सोम प्रदोष कब है, या शनि प्रदोष कब पड़ेगा, ताकि वे अपनी विशेष मनोकामना के अनुसार व्रत रख सकें।

प्रदोष व्रत कैसे करें: विधि और तैयारी

जो साधक पहली बार प्रदोष व्रत रखने की सोच रहे हैं, उनके लिए यह समझना उपयोगी है कि इस व्रत में क्या‑क्या मुख्य चरण होते हैं। प्रदोष व्रत की परंपरागत विधि को साधारण भाषा में तीन भागों में समझा जा सकता है।

प्रदोष व्रत से पहले की तैयारी

  • व्रत का संकल्प एक दिन पहले या उसी सुबह मन ही मन कर लें
  • उस दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ, हल्के और सादे वस्त्र धारण करें
  • दिन भर संयमित वाणी, क्रोध से बचाव और सात्त्विक भोजन या फलाहार रखें

जो लोग पूर्ण उपवास कर सकते हैं, वे सूर्य उदय से लेकर प्रदोष पूजा तक जल या फल के सहारे व्रत रखते हैं। जो ऐसा न कर सकें, वे हल्की सात्त्विक आहार व्यवस्था के साथ भी प्रदोष का व्रत कर सकते हैं।

प्रदोष काल में शिव पूजा विधि

प्रदोष काल आरंभ होने से कुछ समय पहले शिवलिंग या घर के देवस्थान की साफ‑सफाई कर लें।

  • दीपक, धूप, फूल, गंगाजल या स्वच्छ जल, दूध, दही, शहद, घी, शक्कर, बिल्वपत्र, चंदन और नैवेद्य की व्यवस्था करें
  • प्रदोष काल में भगवान शिव का ध्यान करके अभिषेक आरंभ करें
    • पहले सामान्य जल से स्नान
    • फिर दूध, दही, शहद, घी आदि से पंचामृत अभिषेक
    • पुनः स्वच्छ जल से स्नान कर चंदन और बिल्वपत्र अर्पित करें
  • “ॐ नमः शिवाय” या पंचाक्षर मंत्र का जप करें, शिव चालीसा या किसी भी प्रिय स्तुति का पाठ करें
  • अंत में प्रदोष व्रत कथा या शिव से जुड़े किसी पुराण प्रसंग को श्रद्धा से सुनें या पढ़ें

यह पूरा क्रम प्रदोष काल के भीतर ही संपन्न करने का प्रयास करना चाहिए, क्योंकि यही समय प्रदोष का वास्तविक आध्यात्मिक केंद्र माना गया है।

व्रत का पारण और दिन का समापन

पूजा के बाद परिवार के सदस्यों के साथ प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण किया जाता है।

  • पहले जल या पंचामृत से पारण, फिर हल्का सात्त्विक भोजन
  • उस दिन नशा, क्रोध, कटु वचन और अहितकारी विचारों से यथासंभव दूरी रखना शुभ माना जाता है

यदि लगातार दो दिन उपवास की स्थिति बनती हो, जैसे कि एक दिन एकादशी और अगले दिन प्रदोष, तो स्थानीय परंपरा के अनुसार जल के द्वारा प्रतीकात्मक पारण कर अगला व्रत आरंभ करने की सलाह कई पंचांग देते हैं।

प्रदोष व्रत के विशेष नियम और सावधानियाँ

कभी‑कभी चंद्र तिथि और सूर्यास्त के मेल के कारण प्रदोष व्रत की स्थिति कुछ जटिल हो जाती है। ऐसे में कुछ व्यावहारिक बिंदुओं को ध्यान में रखना उपयोगी है।

  • प्रदोष का व्रत उसी दिन रखा जाता है जब त्रयोदशी तिथि प्रदोष काल के समय विद्यमान हो
  • कुछ क्षेत्रों में यदि त्रयोदशी का अधिकांश भाग सूर्यास्त से पहले हो और प्रदोष काल में तिथि बदल जाए, तो स्थानीय परंपरा और पंचांग के अनुसार निर्णय लिया जाता है
  • यदि एकादशी और प्रदोष लगातार दो दिन पड़ें, तो एकादशी का पूर्ण अन्न पारण न करके जल या हल्के फल से प्रतीकात्मक पारण करने की परंपरा भी कुछ शास्त्रकार बताते हैं

इसीलिए “प्रदोष व्रत कब है” का उत्तर केवल तिथि देखकर नहीं, प्रदोष काल के साथ उसके योग को देखकर तय किया जाता है। स्थानानुसार पंचांग देखने की सलाह इसी कारण दी जाती है।

प्रदोष व्रत के आध्यात्मिक और व्यावहारिक लाभ

प्रदोष व्रत को केवल इच्छा‑पूर्ति का साधन नहीं बल्कि जीवन को अनुशासन और शांति से जोड़ने वाला साधन माना गया है। जो साधक नियमित रूप से मासिक प्रदोष व्रत करते हैं, वे धीरे‑धीरे अपने भीतर तीन स्तरों पर परिवर्तन अनुभव कर सकते हैं।

  • आचरण में संयम, वाणी में कोमलता और व्यवहार में धैर्य बढ़ता है
  • पुरानी आदतों, नकारात्मक प्रवृत्तियों और क्रोध के दौर में कमी आती है
  • शिव तत्त्व के निकटता के कारण जीवन की घटनाओं को स्वीकार करने की क्षमता गहरी होती है

व्यावहारिक स्तर पर भी प्रदोष व्रत को स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन, पारिवारिक सामंजस्य और करियर में स्थिरता के लिए सहायक माना जाता है, विशेषकर जब यह व्रत दीर्घकाल तक नियमित चलता रहे।

प्रदोष व्रत और जीवन‑योजना

पक्षसंभावित लाभ
आध्यात्मिकशिव तत्त्व के प्रति श्रद्धा, ध्यान में गहराई
मानसिकचिंता, भय और क्रोध में धीरे धीरे कमी
पारिवारिकआपसी संबंधों में मधुरता, क्षमा और सहयोग
कर्मिकपुराने कर्म फल को संतुलित करने और नये संकल्प बनाने की प्रेरणा

इस दृष्टि से 2026 में प्रदोष व्रत की इतनी अधिक तिथियाँ साधक को बार‑बार अपने जीवन की दिशा देखने और सही संकल्प लेने का अवसर देती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

  1. 2026 में प्रदोष व्रत कब‑कब है, संक्षेप में कैसे याद रखें
    हर चंद्र मास की शुक्ल और कृष्ण पक्ष त्रयोदशी को प्रदोष व्रत आता है। ऊपर दी गई सारणी में 1 जनवरी से 21 दिसम्बर 2026 तक की सभी मुख्य प्रदोष तिथियाँ दी गई हैं, जिन्हें पंचांग के साथ मिलाकर देखा जा सकता है।
  2. प्रदोष का व्रत कब है यह जानने के लिए क्या केवल तिथि देखना पर्याप्त है
    नहीं, प्रदोष व्रत तब रखा जाता है जब त्रयोदशी तिथि प्रदोष काल में हो। इसलिए सूर्यास्त के बाद के समय के साथ तिथि का मेल देखना आवश्यक है, जो स्थानानुसार पंचांग से ज्ञात होता है।
  3. क्या प्रदोष व्रत में केवल जल पर रहना आवश्यक है
    ऐसा अनिवार्य नहीं है। कई साधक केवल फलाहार या एक समय सात्त्विक भोजन लेकर भी व्रत करते हैं। मुख्य बात संयम, श्रद्धा और प्रदोष काल में शिव पूजा है।
  4. सोम प्रदोष, शनि प्रदोष और भौम प्रदोष में क्या विशेष अंतर है
    सोम प्रदोष चंद्र और मन से जुड़े दोषों की शांति के लिए, शनि प्रदोष शनि संबंधी कष्ट और पुराने कर्मों के बोझ में राहत के लिए और भौम प्रदोष कर्ज, विवाद और साहस से जुड़े विषयों के लिए अधिक महत्त्वपूर्ण माना जाता है।
  5. यदि किसी महीने में यह न समझ आए कि प्रदोष व्रत कब है तो क्या करें
    ऐसी स्थिति में विश्वसनीय पंचांग, स्थानीय मंदिर, या ज्ञानी पंडित से उस माह की शुक्ल और कृष्ण त्रयोदशी पर प्रदोष काल के योग की जानकारी लेकर ही व्रत का निर्णय करना श्रेयस्कर है।

पाएं अपनी सटीक कुंडली

कुंडली बनाएं

क्या आपको यह पसंद आया?

लेखक

पं. सुव्रत शर्मा

पं. सुव्रत शर्मा (63)


अनुभव: 20

इनसे पूछें: Family Planning, Career

इनके क्लाइंट: Punjab, Haryana, Delhi

इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें

ZODIAQ के बारे में

ज़ोडियाक (ZODIAQ) एक ऑनलाइन वैदिक ज्योतिष प्लेटफॉर्म है। जिन यूज़र्स को ज्योतिषीय सलाह की आवश्यकता है उन्हें ये अनुभवी ज्योतिषियों से जोड़ता है। हमारे यूज़र्स निशुल्क कुंडली भी बनाते हैं और कुंडली मिलान करते हैं। साथ ही ज़ोडियाक (ZODIAQ) ज्योतिषियों को भी कई उपयोगी सेवाएँ प्रदान करता है। ज्योतिषी ज़ोडियाक (ZODIAQ) की विभिन्न सुविधाओं का उपयोग कर अपने ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करते हैं।

यदि आप एक उपयोगकर्ता हैं

अनुभवी ज्योतिषियों से सलाह लें और उनका मार्गदर्शन प्राप्त करें। आप हमारे प्लेटफॉर्म से अनुभवी ज्योतिषियों द्वारा तैयार की गई हस्तलिखित जन्म पत्रिका और जीवन भविष्यवाणी रिपोर्ट भी मंगवा सकते हैं। सटीक कुंडली बनाएं, कुंडली मिलान करें और राशिफल व मुहूर्त की जानकारी प्राप्त करें। हमारी ऑनलाइन लाइब्रेरी का उपयोग करें जहां आपको सभी जरूरी ज्योतिषीय और आध्यात्मिक जानकारी एक जगह मिलेगी।

यदि आप एक ज्योतिषी हैं

अपने ग्राहकों के लिए सटीक कुंडली बनाएं और एक बार में 5 लोगों तक का कुंडली मिलान करें। ज़ोडियाक (ZODIAQ) की मदद से अपने ग्राहकों के लिए विस्तृत जन्म पत्रिका रिपोर्ट तैयार करें। क्लाइंट डायरेक्टरी में ग्राहकों का विवरण सेव करके किसी भी समय उन्हें एक्सेस करें। हर दिन आपने कितने लोगों को परामर्श दिया यह ट्रैक कर के अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाएं।

WELCOME TO

ZODIAQ

Right Decisions at the right time with ZODIAQ

500+

USERS

100K+

TRUSTED ASTROLOGERS

20K+

DOWNLOADS