पुत्रदा एकादशी 2025: 04 या 05 अगस्त को व्रत का शुभ मुहूर्त और योग

By पं. नीलेश शर्मा

जानिए 2025 में पुत्रदा एकादशी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, व्रत की विधि और उसका महत्व

पुत्रदा एकादशी 2025: व्रत की तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व

सावन मास शिव और विष्णु दोनों की संयुक्त उपासना का पावन काल माना जाता है। सोमवार शिव को समर्पित है और एकादशी भगवान विष्णु की आराधना का श्रेष्ठ अवसर। पुत्रदा एकादशी विशेष रूप से संतान प्राप्ति, गृहस्थ सुख, मानसिक शांति और परिवार की उन्नति के लिए लाभकारी है।

पुत्रदा एकादशी कब मनाई जाएगी?

सावन शुक्ल पक्ष की दशमी के बाद आने वाली एकादशी को यह व्रत रखा जाता है।
साल 2025 में पुत्रदा एकादशी 5 अगस्त को मनाई जाएगी।

महत्वपूर्ण तिथियाँ और शुभ मुहूर्त

एकादशी प्रारंभ: 4 अगस्त 2025, सुबह 11:41 बजे
एकादशी समाप्त: 5 अगस्त 2025, दोपहर 1:12 बजे
सावन का अंतिम सोमवार: 4 अगस्त 2025

शुभ योग

योग समय
इन्द्र योग सुबह 7:25 तक
रवि योग सुबह 5:18 से 11:23 तक
शिववास योग दोपहर 1:13 बजे से

पुत्रदा एकादशी का महत्व

• यह व्रत संतान प्राप्ति का वरदान देता है।
• दंपतियों के जीवन में सौहार्द, सुख और उन्नति आती है।
• सावन में शिव और विष्णु की संयुक्त कृपा इसे और पवित्र बनाती है।

पूजा विधि

  1. प्रातः स्नान और शुद्धता।
  2. पूजा स्थल की सफाई।
  3. भगवान विष्णु और शिव का आवाहन।
  4. जल, चावल, पुष्प लेकर संकल्प।
  5. लक्ष्मी-नारायण की पूजा, दीप अर्पण।
  6. मंत्र जाप: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
  7. प्रसाद वितरण।

व्रत रखने के लाभ

लाभ प्रभाव
संतान प्राप्ति दंपतियों के लिए अत्यंत शुभ
सौभाग्य दांपत्य जीवन में सामंजस्य
सुख-शांति मानसिक स्थिरता
आर्थिक उन्नति संपन्नता में वृद्धि
आध्यात्मिक विकास मन की शुद्धि

सारणी: पुत्रदा एकादशी 2025

विषय विवरण
तिथि 5 अगस्त 2025
शुभ मुहूर्त 4 अगस्त 11:41 से 5 अगस्त 1:12 तक
महत्व संतान सुख, समृद्धि
पूजा विधि स्नान, संकल्प, मंत्र जाप
प्रमुख योग इन्द्र योग, रवि योग, शिववास योग

प्रमुख शब्द

शब्द अर्थ
एकादशी मास का ग्यारहवाँ दिन
सावन पवित्र मास
संकल्प मनोकामना
अक्षत बिना टूटा चावल
प्रसाद पवित्र भोजन

FAQs

1. क्या पुत्रदा एकादशी केवल संतानहीन दंपतियों के लिए है?
नहीं, यह व्रत परिवार की उन्नति और शांति के लिए भी रखा जाता है।

2. क्या इस दिन शिव और विष्णु दोनों की पूजा की जा सकती है?
हाँ, सावन में दोनों की उपासना शुभ मानी जाती है।

3. क्या व्रत निर्जल रखना आवश्यक है?
अनिवार्य नहीं। फलाहार या जलाहार भी कर सकते हैं।

4. कौन सा मंत्र सर्वोत्तम है?
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” सर्वोत्तम माना जाता है।

5. क्या नियम टूट जाए तो दोष लगता है?
केवल क्षमा प्रार्थना करें और पुनः संकल्प लें।

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लेखक

पं. नीलेश शर्मा

पं. नीलेश शर्मा (63)


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इनके क्लाइंट: Punjab, Haryana, Delhi

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