By पं. नीलेश शर्मा
जानें रोहिणी व्रत की तारीख, रोहिणी नक्षत्र समय और पारंपरिक महत्व

रोहिणी व्रत 2026 जैन धर्म के साधकों के लिए विश्राम का नहीं बल्कि गहरी साधना और शुभ संकल्प का दिन है। यह व्रत भगवान वासुपूज्य स्वामी को समर्पित माना जाता है और सुख, सौभाग्य तथा शुभ विवाह की कामना के साथ रखा जाता है। स्त्री और पुरुष दोनों वर्ग के लोग इस व्रत को समान श्रद्धा से करते हैं ताकि जीवन में स्थिर आनंद, पारिवारिक सुख और रिश्तों में मधुरता आ सके।
वैदिक और जैन परंपरा दोनों की दृष्टि से माघ शुक्ल दशमी इस व्रत के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण मानी जाती है। वर्ष 2026 में रोहिणी व्रत माघ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर रखा जाएगा, जब रोहिणी नक्षत्र और अनेक शुभ योग इसका प्रभाव बढ़ा रहे होंगे।
| विवरण | समय और तिथि |
|---|---|
| व्रत की तिथि | 28 जनवरी 2026 |
| वार | बुधवार |
| पक्ष और तिथि | माघ शुक्ल दशमी |
| दशमी तिथि का समय | 28 जनवरी, प्रातः से शाम 04 बजकर 35 मिनट तक |
| एकादशी तिथि का प्रारंभ | 28 जनवरी, शाम 04 बजकर 35 मिनट के बाद |
| रोहिणी नक्षत्र का प्रारंभ | 28 जनवरी, सुबह 09 बजकर 27 मिनट से |
माघ शुक्ल दशमी पर रोहिणी नक्षत्र का यह संयोग जैन परंपरा में रोहिणी व्रत के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। दशमी के भीतर नक्षत्र के उदय के कारण इस दिन भगवान वासुपूज्य स्वामी की पूजा, व्रत और संकल्प को विशेष फलदायी माना गया है।
रोहिणी व्रत 2026 की एक खास विशेषता यह है कि इस दिन केवल रोहिणी नक्षत्र ही नहीं बल्कि कई शुभ योग भी बन रहे हैं जो व्रत की शक्ति को और बढ़ा देते हैं।
माघ मास के रोहिणी व्रत पर ब्रह्म और इंद्र योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। ब्रह्म योग का प्रभाव रात 11 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। परंपरा कहती है कि ब्रह्म योग में ईश्वर की पूजा, जप और संकल्प से व्रती की मनोकामनाएँ अधिक आसानी से फलित हो सकती हैं।
इसी दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का भी संयोग है, जिसे सभी प्रकार के कार्यों की सिद्धि के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है। ऐसे योग में किए गए शुभ कार्य, व्रत और पूजा जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सकारात्मक परिणाम देने वाले माने जाते हैं।
जैन धर्म में रोहिणी व्रत केवल एक तिथि नहीं बल्कि व्रत, संयम और भक्ति का विशेष पर्व है। यह व्रत भगवान वासुपूज्य स्वामी को समर्पित होता है, जिनकी पूजा से साधक धर्म, अनुशासन और करुणा की भावना में स्थिर होता है।
इस व्रत के बारे में मान्यता है कि
इस व्रत का मूल भाव यह है कि जब साधक अपने आहार, वाणी और मन को नियंत्रित करता है तब उसके भीतर का संतुलन बढ़ता है और जीवन के रिश्तों में भी सौहार्द की संभावना अधिक होती है।
रोहिणी व्रत उन लोगों के लिए विशेष उपयोगी माना जाता है जिनके जीवन में
जैन परंपरा में यह भी माना जाता है कि जो साधक इस व्रत को नियमित रूप से और श्रद्धा के साथ रखते हैं, उनके जीवन में धर्म के प्रति लगाव, संयम और आंतरिक संतोष बढ़ता जाता है। यही संतुलित दृष्टि बाद में वैवाहिक और सामाजिक जीवन को भी स्थिरता देती है।
रोहिणी व्रत में महत्त्व केवल उपवास का नहीं बल्कि श्रद्धा और पूजन की शांत प्रक्रिया का है। माघ शुक्ल दशमी के इस व्रत में कुछ प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान रखा जा सकता है।
व्रती अपनी सुविधा के अनुसार 28 जनवरी को दिन में किसी भी उपयुक्त समय पर भगवान वासुपूज्य स्वामी की पूजा कर सकते हैं, जब तक दशमी तिथि जारी रहे। रोहिणी नक्षत्र प्रातः 09 बजकर 27 मिनट से प्रारंभ हो रहा है, इसलिए इस समय के बाद पूजा और संकल्प लेना अधिक शुभ माना जा सकता है।
रोहिणी व्रत पर भगवान वासुपूज्य स्वामी की पूजा श्रद्धा से की जाए तो बहुत सरल भी रह सकती है और गहरी भी।
पूजा की गहराई आवाज या बाहरी सजावट से नहीं बल्कि भीतर की एकाग्रता और नम्रता से मापी जाती है।
रोहिणी व्रत को मनोकामना पूर्ण करने वाला व्रत भी कहा गया है, लेकिन इसका भाव केवल भौतिक इच्छाओं तक सीमित नहीं रहता।
ब्रह्म योग, इंद्र योग और सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे संयोजन इस दिन की प्रार्थना को और गहराई दे देते हैं, इसलिए संकल्प लेते समय मन को स्थिर रखकर और स्पष्ट भाव से प्रार्थना करना अधिक उपयोगी माना जाता है।
समय के साथ जो लोग रोहिणी व्रत को श्रद्धा से अपनाते हैं, वे अपने जीवन में कई तरह के परिवर्तन महसूस कर सकते हैं।
इन परिणामों को हमेशा तत्काल चमत्कार के रूप में नहीं बल्कि धीरे धीरे बदलती सोच, निर्णय और व्यवहार के रूप में समझना अधिक संतुलित दृष्टि होगी।
रोहिणी व्रत 2026 का दिन, माघ शुक्ल दशमी, रोहिणी नक्षत्र और ब्रह्म, इंद्र तथा सर्वार्थ सिद्धि योग के संयोग के कारण बहुत शुभ माना जा सकता है। जो साधक इस दिन व्रत रखने का विचार कर रहे हों, उनके लिए यह एक अच्छा अवसर है कि वे अपने वैवाहिक जीवन, रिश्तों और अंदरूनी शांति की दिशा में एक गंभीर और शांत शुरुआत करें।
रोहिणी व्रत 2026 कब और किस तिथि को रखा जाएगा
रोहिणी व्रत 2026 माघ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर रखा जाएगा। यह तिथि 28 जनवरी 2026, बुधवार को पड़ रही है। इसी दिन रोहिणी नक्षत्र सुबह 09 बजकर 27 मिनट से शुरू होगा और दशमी तिथि शाम 04 बजकर 35 मिनट तक रहेगी।
रोहिणी व्रत किस देवता को समर्पित है और यह किन लोगों के लिए उपयोगी माना जाता है
जैन धर्म में रोहिणी व्रत भगवान वासुपूज्य स्वामी को समर्पित है। यह व्रत स्त्री और पुरुष दोनों के लिए शुभ है। विवाहित महिलाओं के लिए सौभाग्य और दांपत्य सुख में वृद्धि, जबकि अविवाहित युवक युवतियों के लिए शीघ्र और शुभ विवाह की संभावना से यह व्रत जोड़ा जाता है।
रोहिणी व्रत 2026 के दिन कौन से शुभ योग बन रहे हैं
माघ मास के इस रोहिणी व्रत पर ब्रह्म योग, इंद्र योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है। ब्रह्म योग रात 11 बजकर 54 मिनट तक रहेगा और सर्वार्थ सिद्धि योग भी इस दिन को सभी प्रकार के शुभ कार्यों के लिए अनुकूल बनाता है।
रोहिणी व्रत की पूजा का सही समय और तरीका क्या माना जा सकता है
पूजा माघ शुक्ल दशमी के भीतर, विशेष रूप से रोहिणी नक्षत्र के शुरू होने के बाद करना शुभ माना जाता है। व्रती स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें, भगवान वासुपूज्य स्वामी की प्रतिमा या चित्र के सामने धूप, दीप, पुष्प और नैवेद्य अर्पित करें, नवकार मंत्र या अन्य जैन मंत्र का जप करें और फिर व्रत का संकल्प लेकर दिन भर संयमित रहें।
इस व्रत से विवाह और पारिवारिक जीवन पर क्या प्रभाव पड़ने की मान्यता है
परंपरा के अनुसार रोहिणी व्रत विवाहित महिलाओं के लिए सौभाग्य और स्थिरता, पति पत्नी के बीच समझ और स्नेह में वृद्धि से जुड़ा है। अविवाहित जातकों के लिए यह व्रत जल्दी और अच्छे विवाह के योग मजबूत करने वाला माना जाता है। परिवार के लिए भी यह व्रत शांति, समन्वय और रिश्तों में मधुरता बढ़ाने की दिशा में सहायक देखा जाता है।
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