By पं. अभिषेक शर्मा
सकट चौथ 2026 पर तिल, घी, गुड़ दान से संतानों की रक्षा, करियर, सुख और समृद्धि कैसे बढ़ती है

माघ मास की कृष्ण चतुर्थी, जिसे सकट चौथ, माघी चतुर्थी, तिल चौथ और संकष्ट चतुर्थी के नाम से जाना जाता है, संतानों के संरक्षण, प्रगति और कुल समृद्धि के लिए अत्यंत प्रभावशाली व्रत मानी जाती है। वर्ष 2026 में यह शुभ व्रत 6 जनवरी को रखा जाएगा, जब माताएं दिनभर निर्जला रहकर रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही अपना व्रत खोलती हैं। इस दिन किए गए विशेष दान को संतानों के भाग्य, स्वास्थ्य और जीवन में आने वाले संकटों से रक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।
सकट चौथ पर तिल, घी और गुड़ का दान सामान्य दान नहीं माना जाता, बल्कि माघ मास के सबसे शक्तिशाली अर्पण के रूप में देखा जाता है। माना जाता है कि इन विशेष वस्तुओं के दान से न केवल पाप क्षय होते हैं, बल्कि बच्चों के जीवन से संकट दूर होकर घर में दीर्घकालिक सुख और समृद्धि का प्रवाह बढ़ता है।
माघ मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सकट चौथ के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह तिथि मंगलवार, 6 जनवरी को पड़ेगी। इस दिन प्रातः से ही महिलाएं सकट चौथ का निराहार या निर्जला व्रत रखती हैं और रात्रि में चंद्रोदय के पश्चात ही व्रत का पारण करती हैं।
इस व्रत का मूल भाव यह है कि माता अपने बच्चों के लिए संकटों से रक्षा, रोग निवारण, पढ़ाई और करियर में सफलता तथा जीवन के सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों में स्थिर प्रगति की प्रार्थना करती है। भगवान गणेश और देवी सकट की कृपा से बाल्यावस्था के संकट, दुर्घटनाएं, अकस्मात रोग और शिक्षा में अवरोध कम होने का विश्वास रखा जाता है।
हिंदू परंपरा में दान को केवल धन या वस्तु का त्याग नहीं, बल्कि अहंकार, भय और आसक्ति को छोड़ने की साधना माना जाता है। सकट चौथ के संदर्भ में यह मान्यता और भी प्रबल हो जाती है कि इस दिन किए गए दान का फल अनेक गुना बढ़कर लौटा है।
कहा जाता है कि जो भी व्यक्ति या विशेष रूप से माता सकट चौथ के दिन तिल, घी, गुड़ और अन्न जैसे पवित्र द्रव्यों का दान करती है, उसके घर में बच्चों की आयु लंबी होती है, उनके जीवन पथ से अनेक बाधाएं हटती हैं और परिवार में आर्थिक व मानसिक स्थिरता का संचार होता है। यह दान ब्राह्मणों, जरूरतमंदों, गौशाला या ऐसे स्थानों पर किया जाए जहां वस्तु का उपयोग वास्तविक आवश्यकता में हो, तो फल और भी बढ़ जाता है।
| दान का स्वरूप | मुख्य फोकस |
|---|---|
| तिल दान | बच्चों की दीर्घायु और सुरक्षा |
| घी दान | सौभाग्य, धन वृद्धि, ग्रह कृपा |
| गुड़ दान | करियर, शिक्षा और आर्थिक उन्नति |
| अन्य दान | कुल मिलाकर बाधाओं में कमी और शांति |
सकट चौथ पर तिल दान को सबसे महत्वपूर्ण अर्पणों में गिना गया है। विशेष रूप से काले तिल का दान या तिल से बने लड्डू, तिलगुल आदि का वितरण अत्यंत शुभ माना जाता है। तिल के बारे में परंपरा में वर्णन मिलता है कि इसमें देवतुल्य ऊर्जाएं निवास करती हैं और यह पापों के क्षय तथा दुर्दशा के निवारण में सहायक है।
जब माता सकट चौथ के दिन तिल दान करती है तो माना जाता है कि संतानों की जन्मपत्रिका में विद्यमान कई प्रकार के सूक्ष्म दोष शांत होने लगते हैं। बच्चों को अकस्मात रोग, चोट, दुर्घटना और जीवन के गंभीर संकटों से बचाव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। तिल से बने मिष्ठान्न गरीब बच्चों, ब्राह्मणों या जरूरतमंद परिवारों में बांटने से यह फल और भी सूक्ष्म रूप से कार्य करता है।
तिल का स्वभाव शीतल और स्थिर माना जाता है। यह केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि मन और प्राणशक्ति के संतुलन के लिए भी हितकारी माना जाता है। सकट चौथ जैसे व्रत में इसका दान बच्चों के जीवन में स्थिरता, संतुलन और दीर्घकालिक सुरक्षा का प्रतीक बन जाता है।
शुद्ध घी को वैदिक परंपरा में अत्यंत पावन माना गया है। यह यज्ञ, हवन, दीपक और देव पूजन का एक महत्वपूर्ण अंग है। सकट चौथ के दिन घी दान को विशेष रूप से शुक्र की कृपा, सौभाग्य और निरंतर समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है।
जो गृहस्थ इस दिन शुद्ध घी का दान करता है, उसके घर में अन्न, धन और सुख के प्रवाह में स्थिरता आने की मान्यता है। घी का संबंध तेज, ओज, स्वास्थ्य और सुंदर वातावरण से जोड़ा जाता है। जब इसे ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को दान किया जाता है तब ग्रहों में विशेष रूप से शुक्र की उर्जा संतुलित होने लगती है, जिससे परिवार में सौहार्द, दांपत्य सुख और आर्थिक स्थिति में सुधार की संभावना प्रबल होती है।
घी दान के साथ यदि घर में घी का दीपक प्रज्वलित कर भगवान गणेश और देवी सकट की आराधना की जाए, तो यह व्रत और दान दोनों की गहनता बढ़ा देता है। इससे व्रत का आध्यात्मिक प्रभाव और भी सुदृढ़ माना जाता है।
माघी चतुर्थी या सकट चौथ पर गुड़ दान का उल्लेख विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना गया है। गुड़ का स्वाद मधुर और स्वभाव उष्ण माना जाता है, जो जीवन में उत्साह, आनंद और सक्रियता का प्रतीक है।
जो माता पिता अपने बच्चों के करियर, उच्च शिक्षा, व्यापार या नौकरी में उन्नति की कामना रखते हैं, उनके लिए गुड़ दान अत्यंत शुभ माना जाता है। परंपरा में यह विश्वास है कि सकट चौथ पर गुड़ दान करने से भगवान गणेश अत्यंत प्रसन्न होते हैं और बच्चों के जीवन पथ में आने वाली बाधाएं, प्रतियोगी परीक्षाओं के अवरोध और कार्यक्षेत्र की रुकावटें धीरे धीरे हटने लगती हैं।
गुड़ को अक्सर तिल, आटा या मूंगफली के साथ मिलाकर लड्डू या विशेष पकवान बनाकर पहले भगवान गणेश को अर्पित किया जाता है, फिर प्रसाद रूप में घर, परिवार और जरूरतमंदों में बांटा जाता है। यह प्रक्रिया बच्चों के लिए मधुर भविष्य, आर्थिक स्थिरता और कार्यक्षेत्र में प्रगति का प्रतीक मानी जाती है।
तिल, घी और गुड़ के साथ साथ सकट चौथ 2026 पर कुछ अन्य दान भी अत्यंत फलदायी माने गए हैं, जो पूरे परिवार के लिए दीर्घकालिक कल्याण का आधार बन सकते हैं।
इन दानों से न केवल सकट चौथ व्रत का आध्यात्मिक प्रभाव बढ़ता है, बल्कि समाज में वास्तविक जरूरतमंदों की सहायता का भाव भी जागृत होता है। यह संयोजन व्रत, दान और करुणा को एक साथ जोड़ देता है।
सकट चौथ 2026 को केवल एक पारंपरिक व्रत भर नहीं माना जाना चाहिए। यह दिन उन माता पिता के लिए एक आध्यात्मिक अवसर बनकर आता है जो अपने बच्चों के लिए स्वस्थ, सुरक्षित और सफल जीवन की कामना करते हैं। निराहार व्रत, संध्याकालीन चंद्र पूजा और नियत दान के साथ यह व्रत संकल्प, श्रद्धा और त्याग का संयुक्त रूप बन जाता है।
जब तिल, घी और गुड़ जैसे विशिष्ट द्रव्यों का दान इस व्रत के साथ जुड़ता है तब यह केवल धार्मिक कर्मकांड न रहकर बच्चों की ऊर्जा, उनके ग्रहों की स्थिति और परिवार के सामूहिक भाग्य पर भी सूक्ष्म प्रभाव डालता है। इसी कारण इसे माघ मास के सबसे शक्तिशाली दान संयोगों में से एक कहा जाता है।
जो माता सकट चौथ 2026 पर पूरे भाव से व्रत, पूजा और दान को अपनाती है, उसके लिए यह दिन केवल उस वर्ष के लिए ही नहीं, बल्कि संतानों के दीर्घकालिक भविष्य के लिए एक मजबूत आध्यात्मिक आधार बन सकता है।
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