By पं. संजीव शर्मा
सफल एकादशी 2025 की तिथि, मुहूर्त, नक्षत्र, योग, व्रत नियम और भगवान विष्णु को प्रिय विशेष भोगों की विस्तृत जानकारी

सफल एकादशी उन विशेष एकादशियों में गिनी जाती है जिन्हें शास्त्रों में अत्यंत पुण्यदायी और मनोवांछित फल देने वाली तिथि बताया गया है। जो भक्त उन्नति, ऋण मुक्ति, स्थायी सुख समृद्धि और राजयोग जैसी स्थितियों की कामना के साथ यह व्रत करते हैं, उनके लिए यह एकादशी बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
साल 2025 में सफल एकादशी की तिथि एवं मुख्य समय इस प्रकार है
उदयातिथि के नियम के अनुसार व्रत और मुख्य पूजा 15 दिसंबर को ही की जाएगी। इस दिन सूर्योदय से लेकर एकादशी तिथि समाप्ति तक व्रत के नियम और विष्णु उपासना का विशेष ध्यान रखने की परंपरा है।
| पक्ष | समय / विवरण |
|---|---|
| व्रत की तिथि | 15 दिसंबर 2025 |
| एकादशी तिथि प्रारंभ | 14 दिसंबर, 6:49 शाम |
| एकादशी तिथि समाप्त | 15 दिसंबर, 9:19 शाम |
| ब्रह्म मुहूर्त | 5:17 सुबह से 6:12 सुबह |
| अभिजित मुहूर्त | 11:56 दिन से 12:37 दिन |
| नक्षत्र | चित्रा नक्षत्र, 11:09 पूर्वाह्न तक |
| योग | शोभन योग, 12:31 दिन तक |
ब्रह्म मुहूर्त और अभिजित मुहूर्त को विशेष रूप से संकल्प, मंत्रजप और मुख्य पूजा के लिए श्रेष्ठ माना गया है। चित्रा नक्षत्र और शोभन योग के संयोग से यह एकादशी और भी फलदायी मानी जाती है।
साल भर में कुल 24 एकादशी आती हैं, जिनमें सफल एकादशी को विशेष फल देने वाली एकादशी के रूप में वर्णित किया गया है। “सफल” शब्द स्वयं संकेत देता है कि
इस व्रत के प्रमुख फलों में गिनी जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार
जन्म कुंडली में चल रहे कई प्रकार के अवरोधों को शांति देने में सहायक मानी जाती है। विशेष रूप से
इन्हें गतिमान करने के लिए यह तिथि शुभ मानी जाती है।
विष्णु तत्त्व मूल रूप से संरक्षण, स्थिरता और पालन से जुड़ा है। इसलिए जब यह एकादशी ग्रह योग, शुभ नक्षत्र और शोभन योग के साथ मिलती है, तो इसका प्रभाव जीवन में संतुलन और उन्नति की ओर ले जाने वाला माना जाता है।
सफल एकादशी का फल केवल भूखे रहने से नहीं बल्कि सजग उपासना से मिलता है। दिन की शुरुआत इस प्रकार रखी जा सकती है
इसके बाद विधिवत संकल्प लिया जा सकता है
संकल्प के समय अपने और परिवार के स्वास्थ्य, उन्नति और ऋण मुक्ति की कामना भी जोड़ी जा सकती है।
ब्रह्म मुहूर्त 5:17 सुबह से 6:12 सुबह तक रहेगा। इस समय
इस अवधि में
बहुत फलदायी माना जा सकता है।
यदि संभव हो तो इस समय
श्रद्धा से पढ़ना भी उत्तम माना जाता है।
अभिजित मुहूर्त 11:56 दिन से 12:37 दिन तक रहेगा। इस समय
जो भक्त अपने किसी महत्वपूर्ण कार्य, व्यापारिक सौदे, या कानूनी मामले के समाधान की कामना कर रहे हों, वे इस मुहूर्त में विशेष प्रार्थना कर सकते हैं कि
इस वर्ष सफल एकादशी के दिन
चित्रा नक्षत्र को
से जोड़ा जाता है। इस नक्षत्र में किया गया संकल्प
माना जा सकता है।
शोभन योग स्वयं नाम से संकेत देता है कि
होने की संभावना अधिक रहती है।
अतः
की योजना हो, वे इस दिन संकल्प लेकर शुरूआती पूजा कर सकते हैं, शर्त यह कि कोई अशुभ व्यक्तिगत योग न हो।
शास्त्रीय और लोक परंपरा दोनों में सफल एकादशी पर कुछ विशिष्ट नैवेद्य अत्यंत शुभ माने गए हैं।
पंचामृत सामान्यतः
से मिलकर बनता है।
सफल एकादशी पर
विशेष फलदायी माना जाता है। माना जाता है कि
इस एकादशी के लिए खास तौर पर सात्त्विक पंजीरी का उल्लेख मिलता है
का प्रयोग किया जाता है।
यह पंजीरी
के लिए विशेष रूप से शुभ मानी जाती है।
| भोग / प्रसाद | ज्योतिषीय संकेत और संभावित लाभ |
|---|---|
| केवल केले का भोग | जीवन की बाधाओं को शांत करने, अड़चनों को कम करने में सहायक |
| बेसन के लड्डू | गुरु ग्रह की शक्ति को बढ़ाने, संतान सुख और विद्या में लाभ |
| गुड़ और भुने चने | शाम के समय अर्पित करने पर संघर्षों को मधुर बनाने का संकेत |
| पीली बर्फी और तुलसी | विष्णु की विशेष कृपा, राजयोग और सम्मान से जुड़े संकेत |
इन प्रसादों के पीछे भाव यह है कि भोजन के माध्यम से
को अपने जीवन से जोड़ा जाए।
व्रत के पुण्य को स्थायी दिशा देने वाला कर्म माना जाता है।
| समय | अनुशंसित कार्य |
|---|---|
| ब्रह्म मुहूर्त | स्नान, संकल्प, विष्णु मंत्र जप, शांति प्रार्थना |
| प्रातःकाल | पंचामृत, पुष्प, तुलसी से पूजा, धनिया पंजीरी का भोग |
| दोपहर | अभिजित मुहूर्त में विशेष पूजन, गीता पाठ या विष्णु सहस्रनाम के कुछ श्लोक |
| संध्या | दीपदान, गुरुवार या गुरु तत्त्व से जुड़े प्रसाद जैसे बेसन लड्डू का नैवेद्य |
| रात्रि | दिनभर की कृतज्ञता, “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जप |
धार्मिक परंपरा और ज्योतिषीय दृष्टि से सफल एकादशी के संभावित फल
माने जाते हैं।
यह भी कहा जाता है कि जो व्यक्ति नियमित एकादशी व्रत नहीं रख पाते, वे भी केवल सफल एकादशी को श्रद्धा से पालन करें तो उन्हें विशेष पुण्य और उन्नति की संभावनाएं प्राप्त हो सकती हैं।
यदि स्वास्थ्य कारणों से कठोर उपवास न रख सकें तो क्या सफल एकादशी का फल मिलेगा
हां, यदि व्यक्ति स्वास्थ्य के अनुसार हल्का सात्त्विक भोजन लेते हुए भी मन से व्रत का संकल्प निभाए, असत्य और नकारात्मकता से बचे और ईमानदारी से विष्णु उपासना करे, तो व्रत का फल अवश्य प्राप्त हो सकता है। धार्मिक भावना में शुद्धता संख्या और कठोरता से अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है।
क्या सफल एकादशी पर रात्रि जागरण आवश्यक है
रात्रि में भजन, जप या कथा श्रवण का अतिरिक्त पुण्य माना जाता है, पर सभी के लिए अनिवार्य नहीं। जो साधक सक्षम हों वे थोड़ी देर तक भक्ति में जागरण कर सकते हैं, अन्यथा सोने से पहले कम से कम कुछ समय जप, प्रार्थना और कृतज्ञता में देना पर्याप्त है।
सफल एकादशी पर किन बातों से अवश्य बचना चाहिए
मांसाहार, नशा, झूठ, कटु वाणी, अनावश्यक वाद विवाद और क्रूरता से पूर्ण परहेज करना चाहिए। व्रत के दिन किसी का दिल दुखाना, अपमानित करना या जानबूझकर गलत व्यवहार करना व्रत के प्रभाव को कम कर सकता है।
क्या केवल केले का भोग चढ़ाने से भी लाभ हो सकता है
हां, परंपरा में केवल केले का भोग भी अत्यंत शुभ माना गया है, विशेषकर जब व्यक्ति जीवन की बाधाओं, कोर्ट केस, नौकरी या व्यापार में अड़चनों की शांति चाहता हो। भाव यह है कि सरल, सात्त्विक फल अर्पित कर के जटिल समस्याओं का बोझ ईश्वर के चरणों में सौंप दिया जाए।
सफल एकादशी और राजयोग के बीच क्या संबंध माना जाता है
राजयोग का संबंध केवल सिंहासन या राजनीतिक सत्ता से नहीं बल्कि जीवन में सम्मान, स्थिर पद, निर्णय क्षमता और प्रभावशाली स्थिति से भी है। सफल एकादशी पर किया गया व्रत और पूजा जीवन में ऐसे योगों को जाग्रत करने का एक आध्यात्मिक माध्यम माना जाता है, खासकर जब साधक परिश्रम, सत्यनिष्ठा और संयम के साथ जीवन जीने की कोशिश भी कर रहा हो।
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