By पं. सुव्रत शर्मा
जानिए सावन 2025 की तिथियां, सोमवार व्रत और भगवान शिव की भक्ति का महत्व

सावन का महीना वैदिक परंपरा में उस पवित्र समय के रूप में माना जाता है जब शिवत्व पूरे वातावरण में विद्यमान रहता है। देवाधिदेव महादेव को समर्पित यह मास श्रद्धा उपवास और आत्मशुद्धि का काल माना जाता है। वर्ष 2025 में सावन का आगमन क्षेत्रीय पंचांगों के अनुसार अलग अलग तिथियों पर होगा किंतु भक्ति का भाव हर दिशा में समान रहेगा। इस महीने का प्रत्येक सोमवार विशेष फलदायी माना जाता है क्योंकि सोमवार शिव आराधना का प्रिय दिन है। इस समय भक्त रुद्राभिषेक जप ध्यान और सेवा के माध्यम से शिव कृपा को आमंत्रित करते हैं।
सावन के आरंभ और समाप्ति में भिन्नता मुख्यतः अलग अलग पंचांगों के आधार पर होती है। उत्तर भारत में पूर्णिमांत पंचांग मान्य है जबकि दक्षिण और पश्चिम भारत में अमांत पंचांग का पालन किया जाता है। नेपाल और हिमालयी क्षेत्रों में सौर पंचांग की परंपरा प्रचलित है। इससे सावन की तिथियों में क्षेत्रीय अंतर दिखाई देता है किंतु आध्यात्मिक महत्व सर्वत्र एक समान रहता है।
सावन के आरंभ और समाप्ति की तिथियाँ कई क्षेत्रों में भिन्न हैं। नीचे दी गई तालिका यह अंतर स्पष्ट करती है।
| विषय | आरंभ तिथि | समाप्ति तिथि |
|---|---|---|
| उत्तर भारत | 11 जुलाई 2025 | 8 अगस्त 2025 |
| दक्षिण और पश्चिम भारत | 25 जुलाई 2025 | 22 अगस्त 2025 |
| नेपाल और हिमालयी क्षेत्र | 16 जुलाई 2025 | 15 अगस्त 2025 |
उत्तर भारत में यह समय उत्तर प्रदेश बिहार राजस्थान हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश में मान्य है। दक्षिण और पश्चिम भारत में महाराष्ट्र कर्नाटक गुजरात तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में अमांत पंचांग चलता है। नेपाल सहित हिमालयी क्षेत्रों में सौर गणना पर आधारित मास प्रणाली अपनाई जाती है।
नीचे क्षेत्रीय आधार पर सोमवार व्रत की सूची दी जा रही है।
| क्षेत्र | पहला सोमवार | दूसरा सोमवार | तीसरा सोमवार | चौथा सोमवार |
|---|---|---|---|---|
| उत्तर भारत | 14 जुलाई | 21 जुलाई | 28 जुलाई | 4 अगस्त |
| दक्षिण और पश्चिम भारत | 28 जुलाई | 4 अगस्त | 11 अगस्त | 18 अगस्त |
| नेपाल और सौर पंचांग | 21 जुलाई | 28 जुलाई | 4 अगस्त | 11 अगस्त |
दो चंद्र पंचांगों के उपयोग के कारण तिथियों में यह अंतर आता है।
पूर्णिमांत पंचांग में माह पूर्णिमा के अगले दिन से आरंभ होता है।
अमांत पंचांग में माह अमावस्या के अगले दिन से आरंभ होता है।
इसी कारण उत्तर भारत में सावन दक्षिण भारत की तुलना में लगभग पंद्रह दिन पहले प्रारंभ हो जाता है।
सावन शिव भक्ति का विशेष समय है जब प्राकृतिक ऊर्जा अत्यंत शांत और अनुकूल मानी जाती है। इस मास में सोमवार का व्रत रखने से मन संयमित होता है और जीवन में नई दिशा प्राप्त होती है। शिवलिंग पर जल और रुद्राभिषेक करने से मन की शुद्धि और आत्मिक संतुलन बढ़ता है।
अविवाहित कन्याएं उत्तम जीवनसाथी की प्रार्थना से व्रत रखती हैं।
अन्य लोग स्वास्थ्य धन और मानसिक शांति के लिए शिव आराधना करते हैं।
यह समय भक्तिभाव को गहराई से अनुभव करने का अवसर देता है।
फलाहार या दूध के उपवास का पालन
शिवलिंग पर जल दूध शहद बेलपत्र और अक्षत अर्पित करना
कांवड़ यात्रा के माध्यम से गंगाजल चढ़ाना
भजन कीर्तन और मंत्रजाप से मन को पवित्र करना
हर सोमवार शिवलिंग का अभिषेक करें
ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करें
जरूरतमंदों को भोजन वस्त्र या जल दान दें
परिवार और समाज में प्रेम और सद्भाव बनाए रखें
मन वचन और कर्म से शुद्धता का पालन करें
सावन केवल एक महीना नहीं बल्कि मन की निर्मलता और भक्ति का पथ है। यह वह समय है जब जीवन की गति थोड़ी धीमी होती है और अंतर्मन की आवाज स्पष्ट सुनाई देती है। शिव अपने भक्तों को त्याग श्रम और धैर्य की शिक्षा देते हैं। भक्ति के इस मास में जब व्यक्ति अपने भीतर की शांति को पहचानता है तो उसका जीवन नई दिशा ग्रहण करता है।
सावन के इन दिनों में जल पूजा और रुद्राभिषेक प्रकृति और ब्रह्म के बीच संवाद का सुंदर रूप है। जब भक्ति विश्वास और सेवा एक साथ मिलते हैं तो जीवन का हर कठिन मोड़ सरल हो जाता है।
सावन 2025 हमें याद दिलाता है कि भक्ति का अर्थ केवल पूजा नहीं बल्कि मन की शुद्धि और कर्म की श्रेष्ठता भी है।
1. सावन 2025 कब शुरू होगा
यह तिथियाँ क्षेत्रीय पंचांगों पर निर्भर करती हैं और अलग अलग क्षेत्रों में भिन्न हैं।
2. सोमवार व्रत क्यों रखा जाता है
यह व्रत शिव कृपा स्वास्थ्य और मन की शांति के लिए फलदायी माना जाता है।
3. क्या सावन में रुद्राभिषेक आवश्यक है
रुद्राभिषेक मन की शुद्धि और आत्मिक संतुलन को बढ़ाता है इसलिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
4. क्या अविवाहित कन्याओं के लिए सोमवार व्रत लाभकारी है
हाँ यह उत्तम जीवनसाथी की कामना के लिए किया जाने वाला महत्वपूर्ण व्रत है।
5. क्या सावन में दान करना आवश्यक है
दान श्रेयस्कर कर्म माना जाता है और इससे मन की शुद्धि तथा पुण्य की वृद्धि होती है।
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