By पं. नरेंद्र शर्मा
माघ माह में दो शुक्रवार प्रदोष व्रत और उनके शुभ फल

जनवरी 2026 का महीना प्रदोष व्रत के साधकों के लिए अत्यंत शुभ माना जा रहा है, क्योंकि इसी माह में दो बार शुक्र प्रदोष व्रत रखने का पावन अवसर मिल रहा है। शुक्र प्रदोष व्रत भगवान शिव और देवी लक्ष्मी की संयुक्त कृपा प्राप्त करने वाला व्रत माना जाता है। यह व्रत गृहस्थ जीवन में सौहार्द, वैवाहिक सुख, आर्थिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, दोषों से मुक्ति और आध्यात्मिक प्रगति के लिए विशेष रूप से शुभ समझा जाता है।
माघ मास में आने वाले इन दोनों शुक्र प्रदोष व्रतों में पहला प्रदोष कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी पर और दूसरा प्रदोष शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी पर पड़ रहा है। दोनों ही दिन श्रद्धा के साथ व्रत करके प्रदोष काल में शिवपूजन करने से मनोकामनाएँ पूर्ण होने की मान्यता प्रबल रहती है।
व्रत की सही तिथि और प्रदोष काल का ज्ञान साधक के लिए अत्यंत आवश्यक होता है, क्योंकि प्रदोष व्रत की मुख्य पूजा संध्या के इसी समय में की जाती है। जनवरी 2026 में पड़ने वाले दोनों शुक्र प्रदोष व्रतों का सार इस प्रकार समझा जा सकता है।
| व्रत का प्रकार | तिथि और पक्ष | त्रयोदशी तिथि का आरंभ | त्रयोदशी तिथि का समापन | प्रदोष काल पूजन मुहूर्त |
|---|---|---|---|---|
| पहला शुक्र प्रदोष व्रत | 16 जनवरी 2026, माघ कृष्ण पक्ष | 15 जनवरी, रात 08:16 बजे | 16 जनवरी, रात 10:21 बजे | शाम 05:21 बजे से रात 08:00 बजे तक |
| दूसरा शुक्र प्रदोष व्रत | 30 जनवरी 2026, माघ शुक्ल पक्ष | 30 जनवरी, सुबह 11:09 बजे | 31 जनवरी, सुबह 08:25 बजे | शाम 05:32 बजे से रात 08:08 बजे तक |
इन दोनों व्रतों में प्रदोष काल के दौरान ही मुख्य पूजा की जाती है। त्रयोदशी तिथि प्रदोष काल तक विद्यमान रहने के कारण ही इन दिनों को शास्त्रों में शुक्र प्रदोष व्रत हेतु योग्य माना गया है।
प्रदोष व्रत हर पक्ष की त्रयोदशी को रखा जाता है, पर जब त्रयोदशी तिथि शुक्रवार के दिन आती है तो उसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है। शुक्र ग्रह का संबंध दाम्पत्य सुख, सौंदर्य, ऐश्वर्य और भोग से जोड़ा जाता है। जब प्रदोष के समय शिव उपासना के साथ शुक्र की प्रतीकात्मक ऊर्जा का संगम होता है तब यह व्रत विशेष फलदायी माना जाता है।
शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार शुक्र प्रदोष व्रत से
जो साधक नियमित रूप से या विशेष संकल्प के साथ शुक्र प्रदोष व्रत करते हैं, उनके लिए यह समय आध्यात्मिक रूप से भी अत्यंत सहायक बनता है।
माघ मास में एक बार कृष्ण पक्ष और एक बार शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी शुक्रवार को पड़ रही है। इस कारण जनवरी 2026 में दो शुक्र प्रदोष व्रत का संयोग बन रहा है।
इन दोनों ही दिनों में संध्या के समय प्रदोष काल पड़ रहा है, जो शिवपूजन के लिए अत्यंत मंगलकारी माना जाता है।
शुक्र प्रदोष व्रत को विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना गया है जिन्हें
माना जाता है कि श्रद्धा से यह व्रत रखने पर शिव और लक्ष्मी की संयुक्त कृपा से जीवन में सौम्यता, प्रेम और स्थिरता बढ़ती है। माघ मास में जब दो शुक्र प्रदोष व्रत एक ही महीने में मिल रहे हों तब यह समय संकल्प लेकर व्रत आरंभ करने के लिए भी शुभ माना जा सकता है।
व्रत रखने के लिए दृढ़ निश्चय और शुद्ध संकल्प अत्यंत आवश्यक माना जाता है। शुक्र प्रदोष व्रत के दिन साधक को प्रातःकाल से ही स्वयं को व्रत और पूजा के लिए तैयार करना चाहिए।
संकल्प के समय यह भावना रखी जाती है कि व्रत केवल इच्छा पूर्ति के लिए नहीं बल्कि आत्मशुद्धि और ईश्वर के प्रति समर्पण के लिए भी रखा जा रहा है।
हर क्षेत्र में व्रत की कुछ छोटी मोटी भिन्नताएँ हो सकती हैं, पर सामान्य रूप से प्रदोष व्रत में
महत्वपूर्ण यह है कि व्रत के दौरान सात्त्विकता और संयम बनाए रखा जाए। जो लोग स्वास्थ्य कारणों से कठोर उपवास नहीं कर सकते, वे चिकित्सक के सुझाव के साथ हल्का फलाहार रखते हुए भी संकल्पपूर्वक व्रत कर सकते हैं।
शाम के समय जब प्रदोष काल प्रारंभ हो, तभी मुख्य पूजा आरंभ करने की परंपरा मानी जाती है। शुक्र प्रदोष व्रत की सामान्य पूजा विधि इस प्रकार समझी जा सकती है।
पूजा के दौरान मन को भटकने से रोकने का प्रयास करें। प्रदोष व्रत में शिव के प्रति भाव और समर्पण को अधिक महत्व दिया जाता है।
शुक्र प्रदोष व्रत में शिवलिंग पर किए जाने वाले अभिषेक और अर्पण विशेष फल देने वाले माने जाते हैं। भक्त सामान्यतः
भोग में साधारण रूप से फल, मिठाई या घर का बना सात्त्विक प्रसाद अर्पित किया जाता है। ध्यान रखा जाता है कि शिवलिंग पर जो कुछ चढ़ाया जाए, वह शुद्ध, ताज़ा और श्रद्धापूर्वक अर्पित हो।
प्रदोष व्रत के दौरान शिव कथा और प्रदोष व्रत कथा सुनने या पढ़ने की परंपरा है। इससे मन में भक्ति जागती है और व्रत का भाव और गहरा होता है। पूजा के समय
आरती के बाद प्रसाद सभी घर के सदस्यों और भक्तों में बाँटा जाता है।
शास्त्रीय मान्यताओं और परंपरा के अनुसार शुक्र प्रदोष व्रत में कुछ नियमों का पालन अत्यंत शुभ माना गया है।
इन नियमों का उद्देश्य जीवन में अनुशासन और पवित्रता स्थापित करना है, ताकि व्रत केवल बाहरी कर्मकांड न रहकर आंतरिक रूपांतरण का माध्यम बन सके।
जब साधक नियमपूर्वक व्रत, संयम और पूजा का पालन करता है तब बाहरी लाभों के साथ साथ आंतरिक परिवर्तन भी महसूस होता है।
जनवरी 2026 में दो शुक्र प्रदोष व्रत का संयोग साधक के लिए ऐसा समय बन सकता है जब वह निरंतर अभ्यास से अपने भीतर स्थिरता और शांति को मजबूत कर सके।
जनवरी 2026 में कितने शुक्र प्रदोष व्रत पड़ रहे हैं
जनवरी 2026 में दो शुक्र प्रदोष व्रत पड़ रहे हैं। पहला माघ कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर 16 जनवरी 2026 को और दूसरा माघ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर 30 जनवरी 2026 को रखा जाएगा।
पहले शुक्र प्रदोष व्रत की त्रयोदशी तिथि और प्रदोष काल क्या रहेगा
पहले शुक्र प्रदोष व्रत के लिए माघ कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 15 जनवरी की रात 08 बजकर 16 मिनट से शुरू होकर 16 जनवरी की रात 10 बजकर 21 मिनट तक रहेगी। इस दिन प्रदोष काल में पूजन का मुहूर्त शाम 05 बजकर 21 मिनट से रात 08 बजे तक रहेगा।
दूसरे शुक्र प्रदोष व्रत की तिथि और पूजा का मुहूर्त क्या है
दूसरा शुक्र प्रदोष व्रत 30 जनवरी 2026 को रखा जाएगा। इस दिन माघ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि सुबह 11 बजकर 09 मिनट से शुरू होकर 31 जनवरी की सुबह 08 बजकर 25 मिनट तक रहेगी और प्रदोष काल पूजन मुहूर्त शाम 05 बजकर 32 मिनट से रात 08 बजकर 08 मिनट तक रहेगा।
शुक्र प्रदोष व्रत में किन वस्तुओं का सेवन और प्रयोग नहीं करना चाहिए
शुक्र प्रदोष व्रत में नमक, मांसाहार और शराब से दूर रहना चाहिए। शिवलिंग पर तुलसी पत्ता, सिंदूर, हल्दी और टूटा हुआ चावल चढ़ाने से बचना चाहिए और काले वस्त्र धारण नहीं करने की सलाह दी जाती है।
शुक्र प्रदोष व्रत किन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है
यह व्रत वैवाहिक जीवन में तनाव, आर्थिक अस्थिरता, विलंबित विवाह, मानसिक अशांति या पारिवारिक कलह का सामना कर रहे लोगों के लिए अत्यंत सहायक माना जाता है। श्रद्धा से व्रत, पूजा और नियम पालन करने पर भगवान शिव और देवी लक्ष्मी की कृपा से संबंधों में सौहार्द, धन की स्थिरता और मन में शांति बढ़ने की मान्यता है।
पाएं अपनी सटीक कुंडली
कुंडली बनाएं
अनुभव: 20
इनसे पूछें: पारिवारिक मामले, करियर
इनके क्लाइंट: पंज., हरि., दि.
इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें