By पं. अमिताभ शर्मा
स्कंद षष्ठी दिसंबर 2025 की तिथि, समय, ज्योतिषीय महत्व और सरल व्रत विधि

स्कंद षष्ठी का नाम लेते ही अनेक साधकों के मन में साहस, तपस्या और भगवान कार्तिकेय की कृपा की छवि उभरती है। यह व्रत केवल एक धार्मिक तिथि भर नहीं माना जाता, बल्कि वह दिन है जब मनुष्य अपने भीतर के भय, शंका और नकारात्मकता से मुक्त होने का संकल्प ले सकता है। विशेष रूप से स्कंद षष्ठी दिसंबर 2025 उन सभी के लिए महत्वपूर्ण है जो जीवन में शक्ति, संरक्षण, संतान सुख और शत्रुओं पर विजय की कामना के साथ भगवान मुरुगन की शरण ग्रहण करना चाहते हैं।
व्रत की सफलता के लिए तिथि और समय का सही ज्ञान आवश्यक माना गया है। दिसंबर 2025 की स्कंद षष्ठी के प्रमुख विवरण सरल रूप में इस प्रकार समझे जा सकते हैं।
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| व्रत का नाम | स्कंद षष्ठी दिसंबर 2025 |
| सम्बंधित देवता | भगवान कार्तिकेय अर्थात स्कंद या भगवान मुरुगन |
| चंद्र मास और पक्ष | पौष मास, शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि |
| व्रत की तिथि | गुरुवार, 25 दिसंबर 2025 |
| शुक्ल षष्ठी तिथि प्रारंभ | दोपहर 1 बजकर 42 मिनट, 25 दिसंबर |
| शुक्ल षष्ठी तिथि समाप्त | दोपहर 1 बजकर 43 मिनट, 26 दिसंबर |
| व्रत का मुख्य उद्देश्य | संतान सुख, शत्रु विजय, साहस, मानसिक शांति और समृद्धि |
| प्रमुख मंत्र | "Om Saravana Bhavaya Namaha" और स्कंद षष्ठी कवचम् का पाठ |
चूंकि शुक्ल षष्ठी तिथि 25 दिसंबर की दोपहर से 26 दिसंबर की दोपहर तक रहती है, इसीलिए अधिकतर साधक 25 दिसंबर की प्रातःकाल से ही संकल्प लेकर व्रत आरंभ करते हैं और शाम या रात्रि में पूजा के बाद व्रत का पारण करते हैं। जो साधक अधिक अनुशासन के साथ साधना करना चाहते हैं, वे अपने स्थान के अनुसार सूर्योदय और चंद्रोदय के समय देखकर पूजन का समय सूक्ष्मता से निर्धारित कर सकते हैं।
स्कंद षष्ठी को भगवान कार्तिकेय की विशेष उपासना का दिन माना जाता है। धर्म परंपरा के अनुसार भगवान कार्तिकेय भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र हैं और उन्हें देवताओं की सेना का सेनापति माना गया है। उनका स्वरूप युवावस्था, तेज और वीरता का प्रतीक है।
यह तिथि अच्छाई की बुराई पर विजय का संकेत भी मानी जाती है। मान्यता है कि इसी प्रकार की षष्ठी तिथि पर भगवान स्कंद ने तारकासुर जैसे दैत्यों को परास्त कर देवताओं और लोकों को भय से मुक्त किया था। इसलिए स्कंद षष्ठी को जीवन के संघर्षों में विजय प्राप्त करने और भीतर की नकारात्मक शक्तियों को शांत करने का दिन भी माना जाता है। भक्त इस व्रत के माध्यम से केवल बाहरी शत्रुओं के नहीं, बल्कि भीतर के आलस्य, क्रोध और संशय के भी नाश की प्रार्थना करते हैं।
स्कंद षष्ठी दिसंबर 2025 का व्रत अनेक स्तरों पर साधकों को शक्ति प्रदान कर सकता है। धार्मिक मान्यता यह है कि जो व्यक्ति इस दिन विधि पूर्वक व्रत रखता है और भगवान कार्तिकेय की स्तुति करता है, उसके जीवन में सुख, शांति और संतुलन का संचार होता है।
यह व्रत विशेष रूप से उन दंपतियों के लिए शुभ माना जाता है जो संतान की कामना कर रहे हों या जिनके मन में बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य को लेकर चिंता हो। भगवान कार्तिकेय को रक्षक की भूमिका में पूजा जाता है, इसलिए संतान के सुरक्षित और संतुलित जीवन के लिए यह व्रत बहुत प्रिय माना जाता है।
धार्मिक मान्यता के साथ साथ स्कंद षष्ठी का मनोवैज्ञानिक पक्ष भी गहरा है। जब कोई व्यक्ति एक दिन के लिए नियंत्रित आहार, अनुशासित दिनचर्या और मंत्र जप अपनाता है तो उसके भीतर दृढ़ता और सहनशीलता की भावना बढ़ती है। यही अभ्यास धीरे धीरे जीवन की अन्य चुनौतियों में भी सहारा देता है।
ज्योतिष के अनुसार स्कंद षष्ठी का व्रत मंगल ग्रह से जुड़े असंतुलन को संतुलित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। मंगल ग्रह साहस, पराक्रम, ऊर्जा और संघर्ष का प्रतिनिधि है। जब जन्मकुंडली में मंगल प्रतिकूल स्थिति में हो या उसका प्रभाव अत्यधिक कठोर रूप में दिखाई दे तब व्यक्ति को क्रोध, आवेग, दुर्घटनाओं या संबंधों में टकराव जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।
भगवान कार्तिकेय को मंगल जैसे ऊर्जा प्रधान ग्रह का दिव्य रूप माना जाता है। इसलिए स्कंद षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा, मंत्र जप और व्रत पालन से अंदर की असंतुलित उर्जा शांत होकर सकारात्मक दिशा में प्रवाहित होने लगती है। यह व्रत व्यक्ति के साहस को सही दिशा देता है और संघर्ष की प्रवृत्ति को साधना और कर्मयोग की ओर मोड़ने में सहायक बन सकता है।
| क्षेत्र | संभावित लाभ |
|---|---|
| मानसिक स्तर | क्रोध में कमी, निर्णय क्षमता में स्पष्टता, भय में कमी |
| पारिवारिक जीवन | दांपत्य संबंधों में संतुलन, संतान से जुड़ी चिंताओं में कमी |
| करियर और कर्म | प्रतिस्पर्धा में सफलता, साहस के साथ सही निर्णय लेने की क्षमता |
| स्वास्थ्य | ऊर्जा का संतुलित प्रयोग, असावधानी से होने वाले जोखिमों में कमी |
स्कंद षष्ठी दिसंबर 2025 का व्रत केवल किसी एक मनोकामना के लिए ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण जीवन की दिशा सुधारने के लिए भी उपयोगी माना जा सकता है। जब साधक पूरे भाव से उपवास, पूजा और जप करता है तो उसे अनेक स्तरों पर परिवर्तन दिखाई देना शुरू होता है।
ये सभी लाभ किसी त्वरित चमत्कार के रूप में नहीं बल्कि निरंतर अभ्यास और श्रद्धा के साथ धीरे धीरे प्रकट होते हैं।
भगवान कार्तिकेय को प्रायः मोर की सवारी करते हुए, हाथ में भाला लिए हुए तेजस्वी रूप में दर्शाया जाता है। यह भाला उनके संकल्प, स्पष्टता और बुराई के संहार की क्षमता का संकेत माना जाता है। मोर रूपी वाहन अहंकार पर नियंत्रण, सौंदर्य और विवेक का प्रतीक माना जा सकता है।
दक्षिण भारत की परंपरा में भगवान मुरुगन के छह मुखों वाले स्वरूप का भी विशेष महत्व है। इन छह मुखों को जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सजगता, ज्ञान, करुणा, शक्ति, संयम और संरक्षण का रूप समझा जाता है। जब साधक स्कंद षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय के स्वरूप का ध्यान करता है तो उसे यह स्मरण रहता है कि जीवन की हर दिशा में सजगता और संतुलन आवश्यक है।
स्कंद षष्ठी की पूजा कठिन नहीं है, परंतु इसे श्रद्धा और संयम के साथ करना आवश्यक माना जाता है। दिसंबर 2025 के इस विशेष व्रत के लिए एक सरल और व्यवहारिक विधि इस प्रकार अपनाई जा सकती है।
सुबह प्रातःकाल सामान्य से थोड़ा पहले उठना शुभ माना जाता है। स्नान कर स्वच्छ और सात्त्विक वस्त्र धारण किए जाते हैं। घर के पूजा स्थान को साफ कर, यदि संभव हो तो गंगाजल या स्वच्छ जल के छींटे डालकर उसे पवित्र किया जाता है। इसके बाद भगवान कार्तिकेय, स्कंद या मुरुगन की मूर्ति या चित्र को ऊंचे आसन पर स्थापित किया जाता है।
फिर व्रत का संकल्प लिया जाता है जिसमें भगवान से प्रार्थना की जाती है कि यह स्कंद षष्ठी दिसंबर 2025 का व्रत पूर्ण श्रद्धा से संपन्न हो और जो भी उचित मनोकामना हो वह धर्मसम्मत मार्ग से पूर्ण हो।
इसके बाद भगवान की मूर्ति या चित्र पर गंगाजल चढ़ाया जाता है और फिर पंचामृत से अभिषेक किया जाता है। पंचामृत में दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का मिश्रण कर शांत भाव से भगवान के चरणों पर अर्पित किया जाता है।
पूजा के समय पीले या लाल फूल, चंदन, हल्दी, कुमकुम, अगरबत्ती और दीप अर्पित करना शुभ माना गया है। केले, अनार, अमरूद, नारियल तथा अन्य मौसमी फल और शुद्ध मिष्ठान्न भी नैवेद्य के रूप में चढ़ाए जा सकते हैं। कुछ भक्त विशेष रूप से केले और सुगंधित चंदन को भगवान कार्तिकेय की प्रसन्नता के लिए उपयोग करते हैं।
इस अवसर पर "Om Saravana Bhavaya Namaha" मंत्र का जप अत्यंत शुभ माना जाता है। यह मंत्र भगवान मुरुगन की कृपा का आह्वान करने वाला है और माना जाता है कि इसके जप से भय, संशय और दुखों की तीव्रता कम होने लगती है।
जो साधक सक्षम हों वे स्कंद षष्ठी कवचम् का पाठ भी कर सकते हैं। यह रचना भगवान स्कंद से सुरक्षा, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक संरक्षण की प्रार्थना का रूप मानी जाती है।
व्रत के दिन भोजन को यथासंभव सात्त्विक रखना महत्वपूर्ण है। अनेक लोग फलाहार लेते हैं, कुछ केवल जल या दूध पर निर्भर रहते हैं और कुछ लोग हल्का एक समय का भोजन रखकर भी व्रत करते हैं। मुख्य बात यह है कि दिनभर मन और शरीर पर संयम रहे, अनावश्यक वाद विवाद से दूरी रखी जाए और वाणी को भी कोमल रखा जाए।
दिन के दौरान समय मिलने पर भगवान कार्तिकेय के नाम का जप, ध्यान या उनके किसी स्तुति पाठ का शांत भाव से पाठ किया जा सकता है। इससे मन बार बार उसी केंद्र पर लौटता है और बिखराव कम होता है।
शाम के समय पुनः दीप, धूप और पुष्पों के साथ विस्तृत पूजा की जाती है, आरती होती है और "Om Saravana Bhavaya Namaha" मंत्र का सामूहिक जप किया जा सकता है। पूजा के समाप्त होने के बाद व्रत का पारण किया जाता है और भगवान को कृतज्ञता के साथ प्रणाम किया जाता है।
स्कंद षष्ठी दिसंबर 2025 की भावना को समझने के लिए एक सरल कथा उपयोगी हो सकती है जो अनेक परिवारों के भीतर घटती वास्तविकताओं की झलक भी देती है।
एक शांत शहर में रहने वाला एक परिवार अपने युवा बेटे के भविष्य को लेकर बहुत चिंतित रहता है। पढ़ाई में मेहनत करने के बावजूद उसका आत्मविश्वास बार बार टूट जाता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की असफलता ने भीतर छिपे भय को और गहरा कर दिया है। परिवार की एक बुजुर्ग दादी सुझाव देती हैं कि इस वर्ष स्कंद षष्ठी दिसंबर 2025 का व्रत मिलकर रखा जाए और भगवान मुरुगन से मार्गदर्शन की प्रार्थना की जाए।
व्रत वाले दिन सुबह घर में थोड़ा अलग वातावरण रहता है। सफाई के बाद पूजा स्थान पर भगवान कार्तिकेय की सुंदर प्रतिमा स्थापित की जाती है। मां शांत भाव से पंचामृत बनाती हैं, पिता ताजे फूल और फल लेकर आते हैं, दादी मंत्र पुस्तिका निकालकर रख देती हैं और बेटा मन ही मन संकल्प करता है कि आज के दिन पूरी श्रद्धा से पूजा में शामिल रहेगा।
जब "Om Saravana Bhavaya Namaha" मंत्र का सामूहिक जप आरंभ होता है तो धीरे धीरे उस युवा के भीतर का तनाव कम होने लगता है। स्कंद षष्ठी कवचम् के शब्दों को सुनते हुए उसे यह अनुभव होने लगता है कि जीवन के संघर्षों से भागने के बजाय उन्हें साहस के साथ स्वीकार करना भी एक साधना है।
दिन भर साधारण फलाहार के साथ, घर में शांत वातावरण बनाए रखा जाता है। शाम की आरती के समय परिवार के सभी सदस्य दीपक की लौ को देखते हुए मन ही मन आने वाले समय के लिए स्थिरता और स्पष्ट दिशा की प्रार्थना करते हैं। कुछ महीनों बाद जब वही युवा फिर परीक्षा देता है तो इस बार उसका दृष्टिकोण बदल चुका होता है। परिणाम क्या होगा, यह चिंता पीछे चली जाती है और अभ्यास तथा प्रयास पर ध्यान बढ़ जाता है। कहीं न कहीं स्कंद षष्ठी दिसंबर 2025 की यह साधना उसके भीतर एक नई शक्ति जागृत कर देती है।
हर व्यक्ति के पास विस्तृत अनुष्ठान करने के लिए समान समय और सुविधा हो यह आवश्यक नहीं होता। फिर भी स्कंद षष्ठी दिसंबर 2025 को सरल और व्यावहारिक रूप से अपनाकर भी अच्छा फल प्राप्त किया जा सकता है।
इस प्रकार यह व्रत केवल नियमों का पालन न होकर पूरे घर के विचार और वातावरण को शुद्ध करने का माध्यम बन सकता है।
स्कंद षष्ठी दिसंबर 2025 जैसे अवसर याद दिलाते हैं कि बाहरी परिस्थितियां कितनी भी जटिल हों, मनुष्य के पास अपनी प्रतिक्रिया चुनने की स्वतंत्रता सदैव रहती है। भगवान कार्तिकेय का तेजस्वी और संतुलित रूप यह सिखाता है कि साहस का अर्थ केवल युद्ध नहीं, बल्कि सही निर्णय लेकर धर्मसम्मत मार्ग पर चलने की क्षमता भी है।
जब कोई साधक इस व्रत को नियमित रूप से अपनाता है तो उसे यह अनुभव होने लगता है कि ग्रहों के प्रभाव, विशेष रूप से मंगल से जुड़ी स्थितियां, केवल भय का कारण नहीं बल्कि सही दिशा में प्रयत्न बढ़ाने की प्रेरणा भी दे सकती हैं। इस दृष्टि से स्कंद षष्ठी दिसंबर 2025 का व्रत केवल एक दिन का अनुष्ठान न रहकर पूरे वर्ष के लिए आंतरिक संतुलन, तप और आध्यात्मिक शक्ति का स्रोत बन सकता है।
स्कंद षष्ठी दिसंबर 2025 की सटीक तिथि और षष्ठी तिथि का समय क्या है
दिसंबर 2025 की स्कंद षष्ठी गुरुवार, 25 दिसंबर 2025 को पड़ेगी। शुक्ल षष्ठी तिथि 25 दिसंबर दोपहर 1 बजकर 42 मिनट से 26 दिसंबर दोपहर 1 बजकर 43 मिनट तक रहेगी।
यह व्रत किन देवता के लिए रखा जाता है और विशेष रूप से कौन लोग इसे अपनाएं
स्कंद षष्ठी व्रत भगवान कार्तिकेय अर्थात स्कंद या भगवान मुरुगन की पूजा के लिए रखा जाता है। यह व्रत संतान की कामना करने वाले दंपतियों, बच्चों के स्वास्थ्य और उन्नति को लेकर चिंतित माता पिता, शत्रु भय से घिरे व्यक्तियों और मानसिक अस्थिरता से जूझ रहे साधकों के लिए विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।
स्कंद षष्ठी दिसंबर 2025 की सरल पूजन विधि क्या हो सकती है
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें, पूजा स्थान को साफ कर भगवान कार्तिकेय की मूर्ति या चित्र को ऊंचे आसन पर स्थापित करें। गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करें, पीले और लाल पुष्प, चंदन, हल्दी, फल और मिष्ठान्न अर्पित करें। "Om Saravana Bhavaya Namaha" मंत्र का जप करें, संभव हो तो स्कंद षष्ठी कवचम् का पाठ करें और शाम की आरती के बाद व्रत का पारण करें।
ज्योतिष के अनुसार स्कंद षष्ठी व्रत मंगल दोष में कैसे सहायक माना जाता है
मंगल ग्रह ऊर्जा, साहस और संघर्ष का कारक माना जाता है। जब मंगल प्रतिकूल स्थिति में हो तो क्रोध, दुर्घटना और संबंधों में टकराव बढ़ सकते हैं। स्कंद षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय की आराधना से इस उर्जा को संतुलित दिशा मिलती है, जिससे साहस सकारात्मक कर्म में बदलता है और मंगल दोष के कठोर प्रभाव कम होने लगते हैं।
यदि स्वास्थ्य कारणों से पूर्ण उपवास कठिन हो तो क्या आंशिक उपवास से भी स्कंद षष्ठी दिसंबर 2025 का लाभ मिल सकता है
यदि पूर्ण उपवास संभव न हो तो फलाहार या हल्के सात्त्विक भोजन के साथ भी संयमित दिनचर्या, ईमानदारी से की गई पूजा, "Om Saravana Bhavaya Namaha" मंत्र जप और भगवान कार्तिकेय के प्रति श्रद्धा से स्कंद षष्ठी दिसंबर 2025 के आध्यात्मिक लाभ ग्रहण किए जा सकते हैं।
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