स्कंद शष्ठी 2026: तिथि और सही व्रत समय

By पं. सुव्रत शर्मा

जानें 24 जनवरी 2026 को क्यों है स्कंद शष्ठी और व्रत का महत्व

स्कंद शष्ठी 2026 तिथि और व्रत

स्कंद षष्ठी 2026 की तिथि और सही समय

स्कंद षष्ठी एक शांत लेकिन गहराई से काम करने वाला आध्यात्मिक व्रत माना जाता है, जो साधक को आत्मसंयम और भीतर की सजगता की ओर ले जाता है। यह व्रत भगवान मुरुगन को समर्पित होता है, जिन्हें ज्ञान, साहस और अनुशासित कर्म के दिव्य स्वरूप के रूप में सम्मान दिया जाता है। विशेष बात यह है कि यह व्रत व्यक्ति को बाहर से कठोर नहीं बनाता बल्कि भीतर से स्पष्ट और स्थिर बनाता है, ताकि सच्ची शक्ति संयम और जागरूकता के माध्यम से विकसित हो सके।

जनवरी 2026 की स्कंद षष्ठी माघ मास के आध्यात्मिक रूप से विशेष समय में पड़ रही है, जो परंपरागत रूप से शुद्धि, साधना और एकाग्रता के लिए अनुकूल माना जाता है। इस वर्ष स्कंद षष्ठी शनिवार, 24 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी, क्योंकि शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि इसी दिन सूर्योदय के बाद तक विद्यमान रहेगी।

विवरणसमय और तिथि
स्कंद षष्ठी 2026 की तिथिशनिवार, 24 जनवरी 2026
पक्ष और तिथिमाघ शुक्ल षष्ठी
षष्ठी तिथि आरंभ24 जनवरी 2026, प्रातः 01 बजकर 46 मिनट
षष्ठी तिथि समाप्त25 जनवरी 2026, रात 12 बजकर 39 मिनट

वेदिक परंपरा के अनुसार किसी भी व्रत या पर्व की तिथि वही मानी जाती है जिस दिन संबंधित तिथि सूर्योदय के समय विद्यमान रहे। इस दृष्टि से 24 जनवरी 2026 को स्कंद षष्ठी व्रत रखना शास्त्रीय रूप से उचित माना जाएगा। सही तिथि और समय का पालन करने से साधक का व्यक्तिगत अनुशासन ब्रह्मांडीय लय के साथ जुड़ता है, जिससे संकल्प और साधना दोनों की प्रभावशीलता बढ़ती मानी जाती है।

स्कंद षष्ठी को आत्मसंयम की परीक्षा क्यों माना जाता है

भक्तों के बीच यह भावना बहुत सामान्य है कि स्कंद षष्ठी व्रत पहले आत्मसंयम की परीक्षा लेता है और उसके बाद ही विजय का अनुभव करवाता है। इसका कारण यह है कि भगवान मुरुगन का सम्पूर्ण स्वरूप ही जागरूकता, साहस और अनुशासित ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।

  • स्कंद षष्ठी व्रत साधक को अपनी इच्छाओं, प्रतिक्रियाओं और भावनाओं को ध्यान से देखने के लिए प्रेरित करता है
  • यह व्रत सजा या दमन के लिए नहीं बल्कि जागरूक चुनाव और आत्मनियंत्रण सिखाने के लिए माना जाता है
  • पहले मन और इंद्रियों को नियंत्रित करने की प्रक्रिया चलती है, फिर धीरे धीरे भीतर की शक्ति, धैर्य और स्थिरता प्रकट होती है

इसी अनुभव के कारण कई भक्त कहते हैं कि स्कंद षष्ठी पहले नियंत्रण की अभ्यास करवाती है, फिर विजय का फल देती है। भीतर की जीत जितनी गहरी होती है, बाहर की परिस्थितियाँ उतने ही संतुलित ढंग से सँभलती हैं।

स्कंद षष्ठी का आध्यात्मिक अर्थ क्या है

स्कंद षष्ठी का मूल संकेत भीतर के अंधकार पर जीत का है। भगवान मुरुगन का वेल तेजस्वी ज्ञान का प्रतीक माना जाता है, जो भ्रम, अहंकार और अनियंत्रित इच्छाओं पर प्रहार कर उन्हें काटने की शक्ति देता है।

यह व्रत

  • आत्मदमन नहीं बल्कि आत्मनियंत्रण सिखाने की ओर झुका हुआ माना जाता है
  • साधक को हर बार यह सोचने पर मजबूर करता है कि प्रतिक्रिया आवेग से दी जा रही है या स्पष्टता से
  • भावनात्मक संतुलन, मानसिक स्थिरता और साहसपूर्ण निर्णय क्षमता को धीरे धीरे मजबूत करता है

जब व्यक्ति बार बार स्पष्टता को चुनता है और आवेग को छोड़ने का अभ्यास करता है तब मन शांत और स्थिर होने लगता है। यही स्थिरता जीवन की चुनौतियों का सामना करते समय धैर्य और संतुलित निर्णय में परिवर्तित हो जाती है।

स्कंद षष्ठी 2026 पर क्या करना शुभ माना जाता है

स्कंद षष्ठी के दिन छोटे लेकिन सजग कदम ही इस व्रत को सार्थक बनाते हैं। पूजा और व्रत की सरल रूपरेखा इस प्रकार रखी जा सकती है।

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ, सादे वस्त्र धारण करें
  • मन में यह संकल्प लें कि आज के दिन शरीर, वाणी और मन तीनों को यथासंभव संयमित रखा जाएगा
  • व्रत की क्षमता के अनुसार या तो निराहार रहें या फल, दूध, जल जैसे सात्त्विक आहार पर रहें
  • यदि संभव हो तो किसी भगवान मुरुगन मंदिर में जाकर दर्शन करें, अन्यथा घर पर ही उनकी तस्वीर या प्रतिमा के सामने बैठकर प्रार्थना करें
  • ॐ सरवन भवाय नमः” या “ओम सरवन भव” नाम का कम से कम 108 बार जप करें, यह नाम स्मरण मन को एकाग्र और भावनाओं को संतुलित करने में सहायक माना जाता है
  • दिन भर जल पर्याप्त मात्रा में लेते रहें ताकि शरीर थका हुआ महसूस न करे
  • किसी भी रूप में दान और सेवा का अभ्यास करें, जैसे किसी जरूरतमंद को भोजन, वस्त्र या सहायता देना

इन साधारण दिखने वाले अभ्यासों के माध्यम से विनम्रता, स्पष्टता और भीतरी स्थिरता विकसित होने लगती है।

स्कंद षष्ठी पर किन चीजों से बचना चाहिए

स्कंद षष्ठी व्रत केवल क्या किया जाए, इतना ही नहीं सिखाता बल्कि यह भी याद दिलाता है कि किन प्रवृत्तियों से दूर रहना आवश्यक है।

  • मांसाहार, अधिक तले भुने, अत्यधिक मसालेदार, प्याज, लहसुन और बहुत भारी भोजन से दूर रहना अच्छा माना जाता है
  • मदिरा और किसी भी प्रकार के नशे को इस दिन विशेष रूप से वर्जित माना गया है, क्योंकि ये मन की स्पष्टता और आत्मसंयम को कमजोर करते हैं
  • विवाद, झगड़ा, कटु वचन और दूसरों की निंदा से बचना व्रत की आत्मा माना जाता है
  • अनावश्यक शारीरिक परिश्रम, दिखावा और विलासिता भी इस दिन संयम में रखनी चाहिए

सरल जीवन शैली और संयमित आचरण स्कंद षष्ठी के व्रत की शक्ति को भीतर गहराई तक जाने का अवसर देते हैं।

स्कंद षष्ठी व्रत के लाभ और ग्रहों से जुड़ी मान्यताएँ

परंपरा में माना जाता है कि स्कंद षष्ठी व्रत का नियमित पालन मानसिक और भावनात्मक संतुलन को मजबूत करने में सहायक होता है।

  • यह व्रत धैर्य, आत्मनियंत्रण और जागरूकता जैसे गुणों को धीरे धीरे स्थिर करता है
  • प्रार्थना और संयम से साधक के भीतर दबाव का सामना करने की क्षमता बढ़ने लगती है
  • कई श्रद्धालु अनुभव करते हैं कि घबराहट, चिंता और अनावश्यक भय में धीरे धीरे कमी आती है

ज्योतिषीय दृष्टि से भगवान मुरुगन का संबंध विशेष रूप से मंगल जैसे उग्र ग्रह से जोड़ा जाता है। परंपरागत मान्यता है कि स्कंद षष्ठी व्रत के माध्यम से अत्यधिक आक्रोश, आवेग और असंतुलित साहस में संतुलन आने लगता है। जब भीतर की प्रतिरोधकता घटती है तो शिक्षा, करियर और व्यक्तिगत प्रयासों में स्थिर प्रगति महसूस की जा सकती है।

स्कंद षष्ठी 2026 को भीतर की विजय का दिन कैसे बनाएं

स्कंद षष्ठी 2026 को केवल एक तिथि न मानकर, भीतर की जीत का छोटा लेकिन सच्चा आरंभ भी बनाया जा सकता है।

  • इस दिन किसी एक आदत पर ध्यान देकर उसे थोड़ा कम करने का संकल्प लिया जा सकता है, जैसे जल्द क्रोध आना, कटु शब्द बोल देना या हर बात पर तुरंत प्रतिक्रिया दे देना
  • एक छोटी डायरी में दिन भर की भावनाओं, प्रतिक्रियाओं और अनुभवों को लिखना भी स्कंद षष्ठी की साधना का हिस्सा बनाया जा सकता है
  • दिन के अंत में कुछ मिनट चुपचाप बैठकर यह देखना कि आज कहाँ संयम रखा और कहाँ उससे चूक हुई, भीतर की जागरूकता को बढ़ाता है

जब साधक इस व्रत को केवल नियमों की सूची न मानकर, आत्मपरिवर्तन की यात्रा के रूप में जीने लगता है तब स्कंद षष्ठी सच में पहले नियंत्रण सिखाती है और फिर धीरे धीरे जीवन के अलग अलग क्षेत्रों में विजय का अनुभव करवाती है।

सामान्य प्रश्न

स्कंद षष्ठी 2026 कब मनाई जाएगी
स्कंद षष्ठी 2026 माघ शुक्ल षष्ठी के दिन शनिवार, 24 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी। शुक्ल षष्ठी तिथि 24 जनवरी को प्रातः 01 बजकर 46 मिनट से शुरू होकर 25 जनवरी को रात 12 बजकर 39 मिनट तक रहेगी, इसलिए उदया तिथि के अनुसार 24 जनवरी को ही व्रत रखा जाएगा।

स्कंद षष्ठी को आत्मसंयम की परीक्षा क्यों कहा जाता है
इस व्रत में भोजन, वाणी, व्यवहार और भावनाओं चारों स्तर पर संयम की आवश्यकता रहती है। पहले साधक से अपेक्षा की जाती है कि वह अपने मन और इंद्रियों को नियंत्रित करे, फिर उसी नियंत्रण से धीरे धीरे भीतर साहस, स्पष्टता और विजय का अनुभव उत्पन्न होता है।

क्या स्कंद षष्ठी पर व्रत रखना अनिवार्य है
व्रत प्रेरित किया जाता है, बाध्यकारी नहीं माना जाता। जो साधक पूर्ण व्रत रख सकें, वे निराहार या फलाहार रह सकते हैं और जो स्वास्थ्य कारणों से पूरा व्रत न रख सकें, वे भी सात्त्विक आहार और मानसिक संयम के साथ आंशिक रूप से व्रत में सहभागिता कर सकते हैं।

स्कंद षष्ठी पर कौन सा जप करना लाभदायक माना जाता है
स्कंद षष्ठी पर “ॐ सरवन भवाय नमः” या संक्षेप में “ओम सरवन भव” नाम जप अत्यंत लाभकारी माना जाता है, जिसका अर्थ है भगवान मुरुगन के उस स्वरूप का स्मरण जो भक्तों की रक्षा और मार्गदर्शन करता है। इसे कम से कम 108 बार शांत मन से जपने की परंपरा रही है।

इस व्रत से जीवन में क्या परिवर्तन महसूस हो सकते हैं
परंपरागत मान्यता के अनुसार स्कंद षष्ठी व्रत से मानसिक स्थिरता, भावनात्मक संतुलन और आत्मविश्वास में धीरे धीरे वृद्धि हो सकती है। जब व्यक्ति आवेग के स्थान पर सजगता से निर्णय लेने लगता है तब शिक्षा, करियर और निजी संबंधों में अधिक स्थिर और संतुलित प्रगति दिखाई देती है।

पाएं अपनी सटीक कुंडली

कुंडली बनाएं

क्या आपको यह पसंद आया?

लेखक

पं. सुव्रत शर्मा

पं. सुव्रत शर्मा (63)


अनुभव: 20

इनसे पूछें: Family Planning, Career

इनके क्लाइंट: Punjab, Haryana, Delhi

इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें

ZODIAQ के बारे में

ज़ोडियाक (ZODIAQ) एक ऑनलाइन वैदिक ज्योतिष प्लेटफॉर्म है। जिन यूज़र्स को ज्योतिषीय सलाह की आवश्यकता है उन्हें ये अनुभवी ज्योतिषियों से जोड़ता है। हमारे यूज़र्स निशुल्क कुंडली भी बनाते हैं और कुंडली मिलान करते हैं। साथ ही ज़ोडियाक (ZODIAQ) ज्योतिषियों को भी कई उपयोगी सेवाएँ प्रदान करता है। ज्योतिषी ज़ोडियाक (ZODIAQ) की विभिन्न सुविधाओं का उपयोग कर अपने ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करते हैं।

यदि आप एक उपयोगकर्ता हैं

अनुभवी ज्योतिषियों से सलाह लें और उनका मार्गदर्शन प्राप्त करें। आप हमारे प्लेटफॉर्म से अनुभवी ज्योतिषियों द्वारा तैयार की गई हस्तलिखित जन्म पत्रिका और जीवन भविष्यवाणी रिपोर्ट भी मंगवा सकते हैं। सटीक कुंडली बनाएं, कुंडली मिलान करें और राशिफल व मुहूर्त की जानकारी प्राप्त करें। हमारी ऑनलाइन लाइब्रेरी का उपयोग करें जहां आपको सभी जरूरी ज्योतिषीय और आध्यात्मिक जानकारी एक जगह मिलेगी।

यदि आप एक ज्योतिषी हैं

अपने ग्राहकों के लिए सटीक कुंडली बनाएं और एक बार में 5 लोगों तक का कुंडली मिलान करें। ज़ोडियाक (ZODIAQ) की मदद से अपने ग्राहकों के लिए विस्तृत जन्म पत्रिका रिपोर्ट तैयार करें। क्लाइंट डायरेक्टरी में ग्राहकों का विवरण सेव करके किसी भी समय उन्हें एक्सेस करें। हर दिन आपने कितने लोगों को परामर्श दिया यह ट्रैक कर के अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाएं।

WELCOME TO

ZODIAQ

Right Decisions at the right time with ZODIAQ

500+

USERS

100K+

TRUSTED ASTROLOGERS

20K+

DOWNLOADS