By पं. अभिषेक शर्मा
जानें 23 जून को मासिक शिवरात्रि और सोम प्रदोष के दुर्लभ योग का प्रभाव, पूजन विधि और ज्योतिषीय लाभ

मासिक शिवरात्रि हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाने वाला वह पावन दिन है जब शिव तत्व की ऊर्जा अत्यंत प्रबल होती है। वर्ष 2025 में जून की मासिक शिवरात्रि 23 जून सोमवार को पड़ रही है और इस बार यह सोम प्रदोष के साथ दुर्लभ संयोग में बन रही है। वैदिक मान्यता है कि इस तिथि पर चंद्रमा की विशेष स्थिति साधक के मन को शुद्ध करती है और शिवलिंग की पूजा से शनि राहु केतु जैसे ग्रहों के अशुभ प्रभाव क्षीण होते हैं। सोम प्रदोष और मासिक शिवरात्रि का यह योग साधना को कई गुना फलदायी बनाता है और रोग भय कलह तथा मानसिक अशांति का नाश करता है।
तिथि: 23 जून 2025 सोमवार
प्रथम प्रहर: शाम 6 से 9 बजे तक
द्वितीय प्रहर: रात 9 से 12 बजे तक
तृतीय प्रहर: रात 12 से 3 बजे तक
चतुर्थ प्रहर: 24 जून सुबह 6 बजे तक
विशेष निशिथ काल: रात 12:03 से 12:44 बजे तक
• प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और शिवलिंग की सफाई करें
• पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें
• शिवलिंग पर जल दूध दही घी शहद से क्रमवार अभिषेक करें
• प्रत्येक प्रहर में अलग द्रव्य से अभिषेक करने का विशेष महत्व माना गया है
• बेलपत्र धतूरा शमी चंदन अक्षत पुष्प फल और मिठाई अर्पित करें
• ओम नमः शिवाय मंत्र का 108 बार जाप करें
• शिव चालीसा शिव तांडव स्तोत्र या प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें
• आरती कर प्रसाद वितरण करें
• दिनभर व्रत रखें संयम बरतें और अगले दिन पारण करें
• सात्विक आहार लें और मांसाहार मदिरा क्रोध विवाद से दूर रहें
• व्रत का संकल्प विधिपूर्वक करें और उसे पूर्ण निष्ठा से निभाएं
• जरूरतमंदों को भोजन वस्त्र और धन का दान करें
• घर में शांति स्वच्छता और सकारात्मकता बनाए रखें
इस वर्ष मासिक शिवरात्रि सोमवार के दिन पड़ रही है जिससे सोम प्रदोष और शिवरात्रि का दुर्लभ संयोजन बन रहा है। सोमवार शिवभक्ति के लिए अत्यंत प्रिय दिन माना गया है और प्रदोष व्रत भी शिव कृपा के लिए श्रेष्ठ फल देने वाला है। इन दोनों के एक साथ आने से साधक को मानसिक शांति रोग मुक्ति ग्रह दोष शांति संतान सुख दांपत्य आनंद और इच्छापूर्ति का दोगुना लाभ मिलता है। यह योग उन भक्तों के लिए विशेष रूप से शुभ है जो जीवन में नए उत्साह आध्यात्मिक उन्नति स्वास्थ्य या पारिवारिक सुख की कामना रखते हैं।
मासिक शिवरात्रि का व्रत केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि साधना संयम श्रद्धा और शिव तत्व से आत्मिक जुड़ाव का अवसर है। यह दिन साधक को जीवन के अंधकार से निकालकर शिव कृपा के प्रकाश में ले जाता है। पूजा जप आरती और दान के माध्यम से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और साधक को मानसिक स्थिरता आध्यात्मिक शक्ति और आंतरिक आनंद प्राप्त होता है।
• मासिक शिवरात्रि का व्रत क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है
यह व्रत चंद्रमा की ऊर्जा को शुद्ध कर मन को शांत करता है और शिव कृपा से ग्रह दोष पीड़ा और मानसिक तनाव दूर होते हैं।
• सोम प्रदोष और मासिक शिवरात्रि का संयोजन क्यों विशेष है
क्योंकि सोमवार शिव का प्रिय दिन है और प्रदोष काल शिव उपासना का सर्वश्रेष्ठ समय। दोनों के एक साथ होने से साधक को दोगुना फल मिलता है।
• इस दिन कौन से मंत्र का जाप करना चाहिए
सर्वोत्तम मंत्र ओम नमः शिवाय है। इसके अतिरिक्त शिव तांडव स्तोत्र और महामृत्युंजय मंत्र भी अत्यंत शुभ हैं।
• क्या मासिक शिवरात्रि पर रात भर जागरण करना आवश्यक है
हाँ जागरण को शुभ माना गया है क्योंकि यह शिव तत्व से गहरे जुड़ाव का प्रतीक है।
• क्या बिना व्रत रखे केवल पूजा करने से भी फल मिलता है
हाँ श्रद्धा से की गई पूजा मंत्र जप और आरती शिव कृपा प्रदान करते हैं परंतु व्रत करने से फल कई गुना बढ़ जाता है।
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