By पं. नरेंद्र शर्मा
भगवान विष्णु को समर्पित पवित्र व्रत की तिथि, समय और लाभ

वैकुंठ एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित सबसे पवित्र एकादशी व्रतों में से एक है। यह धनु मास में मनाया जाता है और भक्तों के लिए गहन आध्यात्मिक महत्व रखता है। इस दिन भक्ति से व्रत रखने वाले भक्तों को वैकुंठ द्वार के खुलने का आशीर्वाद मिलता है, जो मोक्ष, शांति और समृद्धि की ओर ले जाता है।
वैकुंठ एकादशी 2025 का व्रत 31 दिसंबर 2025, बुधवार को रखा जाएगा। यह जानकारी भक्तों के लिए अत्यंत उपयोगी है। पारण समय और अन्य महत्वपूर्ण समय निम्नलिखित हैं।
| घटना | तिथि और समय |
|---|---|
| वैकुंठ एकादशी | बुधवार, 31 दिसंबर 2025 |
| पारण समय | 1 जनवरी को सुबह 07:14 से 09:18 तक |
| एकादशी तिथि प्रारंभ | 30 दिसंबर 2025 को सुबह 07:50 |
| एकादशी तिथि समाप्त | 31 दिसंबर 2025 को सुबह 05:00 |
| स्मार्त वैकुंठ एकादशी | मंगलवार, 30 दिसंबर 2025 |
| स्मार्त एकादशी पारण समय | 31 दिसंबर को दोपहर 01:26 से 03:31 तक |
| हरि वासर समाप्ति | सुबह 10:12 |
ये समय पंचांग के अनुसार निर्धारित हैं। भक्त इन्हें ध्यानपूर्वक पालन करें।
वैकुंठ एकादशी को मुक्तोति एकादशी भी कहा जाता है। यह धनु सौर मास में आता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु के दिव्य निवास वैकुंठ के द्वार खुल जाते हैं। भक्त जो पूर्ण भक्ति से व्रत रखते हैं, वे नकारात्मकता से मुक्ति पाते हैं। पुराने पापों से छुटकारा मिलता है। आध्यात्मिक उन्नति होती है।
यह त्योहार पूरे भारत में उत्साह से मनाया जाता है। विशेष रूप से तिरुमाला वेंकटेश्वर मंदिर, तिरुपति और श्री रंगनाथस्वामी मंदिर, श्रीरंगम में भव्य आयोजन होते हैं। केरल में इसे स्वर्ग वातिल एकादशी के नाम से जाना जाता है। वहीं तमिल पंचांग में मार्गजी महीने से जुड़ा होता है। भक्तों की संख्या लाखों में पहुंच जाती है।
पारण का अर्थ है एकादशी व्रत का समापन। इसे सही ढंग से करना आवश्यक है। पारण द्वादशी तिथि के सूर्योदय के बाद करें। द्वादशी समाप्त होने से पहले पूरा कर लें। हरि वासर के समय पारण न करें। सबसे उत्तम समय प्रातःकाल है। मध्याह्न में केवल बाध्यता होने पर ही पारण करें। गलत पारण से व्रत का फल नष्ट हो सकता है।
भक्त सुबह स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा करें। फिर फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण करें। यह विधि व्रत को पूर्ण करती है।
एक प्राचीन कथा सुनें। एक बार एक भक्त ने गलती से हरि वासर में पारण कर लिया। परिणामस्वरूप उसे पश्चाताप हुआ। ऋषियों ने उसे पुनः व्रत रखने की सलाह दी। तब जाकर उसे वैकुंठ प्राप्ति हुई। ऐसी कथाएं भक्तों को सावधान रहने की प्रेरणा देती हैं।
इस व्रत से भक्तों को भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। मोक्ष की प्राप्ति संभव हो जाती है। शांति और समृद्धि घर में बस जाती है। नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। पिछले जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। आध्यात्मिक प्रगति तेज होती है।
व्रत के दौरान भजन कीर्तन करें। दान पुण्य का विशेष महत्व है। भक्तों को अनाज, फल या वस्त्र दान करें। इससे पुण्य फल बढ़ता है। नियमित रूप से ऐसा करने से जीवन में स्थिरता आती है। कई भक्त बताते हैं कि इस व्रत ने उनके जीवन को बदल दिया। कठिनाइयां दूर हुईं।
व्रत एकादशी तिथि प्रारंभ से शुरू करें। निर्जला या फलाहार व्रत रख सकते हैं। भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करें। तुलसी पत्र अर्पित करें। दीप प्रज्वलित करें। पंचामृत से अभिषेक करें। रात्रि जागरण में भाग लें। भगवत पुराण या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
सुबह कथा सुनें। ब्राह्मण को भोजन कराएं। दान दें। ये विधियां व्रत को सिद्ध करती हैं। भक्त पूर्ण निष्ठा से इनका पालन करें।
पुराणों में वर्णित है कि वैकुंठ एकादशी पर स्वर्ग के द्वार भक्तों के लिए खुले रहते हैं। जो भक्त इस अवसर का लाभ उठाते हैं, वे भव सागर से पार हो जाते हैं। यह मान्यता सदियों से चली आ रही है। तिरुपति मंदिर में लाखों भक्त दर्शन के लिए उमड़ते हैं। द्वार पर विशेष सजावट होती है। जयकारों से वातावरण गुंजायमान रहता है।
व्रत के बाद भी भगवान विष्णु की भक्ति जारी रखें। दैनिक जीवन में सात्विकता अपनाएं। इससे लाभ स्थायी रहते हैं। परिवार के साथ इस पर्व को मनाएं। बच्चों को कथाएं सुनाएं। आने वाली पीढ़ी को परंपरा से जोड़ें।
सामान्य प्रश्न
वैकुंठ एकादशी 2025 कब है?
यह 31 दिसंबर 2025, बुधवार को मनाई जाएगी।
पारण समय क्या है?
1 जनवरी को सुबह 07:14 से 09:18 तक पारण करें।
स्मार्त और वैष्णव तिथि में अंतर क्या है?
स्मार्त 30 दिसंबर को और वैष्णव 31 दिसंबर को मनाते हैं।
व्रत में क्या खाएं?
फलाहार या निर्जला व्रत रखें। सात्विक भोजन ही ग्रहण करें।
क्या पारण में दूध पी सकते हैं?
हां, पारण के समय सात्विक भोजन जैसे दूध या फल ले सकते हैं।
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