विवाह पंचमी 2025 राम-सीता विवाह का पावन दिन

By पं. नीलेश शर्मा

मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी पर मनाया जाने वाला विवाह पंचमी राम-सीता विवाह स्मरण और विवाह-संबंधी बाधाओं को हल्का करने के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है

विवाह पंचमी 2025 तिथि शुभ मुहूर्त और विशेष पूजा

मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को विवाह पंचमी के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी शुभ तिथि पर भगवान श्रीराम और माता सीता का विवाह हुआ था इसलिए यह दिन राम-सीता विवाह महोत्सव के रूप में विशेष महत्व रखता है। राम को चैतन्य यानी शुद्ध चेतना का प्रतीक माना गया है और सीता प्रकृति तथा शक्ति की अभिव्यक्ति मानी जाती हैं अतः इन दोनों की दिव्य युग्म-पूजा चेतना और प्रकृति के पावन मिलन की साधना भी मानी जाती है।

जो लोग विवाह योग्य हैं परंतु किसी न किसी कारण से विवाह में बाधा महसूस कर रहे हों या जिनका वैवाहिक जीवन खिंचा हुआ और अशांत चल रहा हो उनके लिए विवाह पंचमी आस्तिक परंपरा में एक विशेष अवसर मानी जाती है। इस दिन श्रद्धा से राम-सीता की पूजा विवाह प्रसंग का स्मरण और एकाग्र मन से प्रार्थना करना विवाह-संबंधी उलझनों को हल्का करने वाला माना जाता है।

विवाह पंचमी 2025 की तिथि और पंचांग

पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी तिथि वर्ष 2025 में इस प्रकार रहेगी

  • पंचमी तिथि आरंभ 24 नवंबर 2025 रात 9 बजकर 22 मिनट
  • पंचमी तिथि समाप्त 25 नवंबर 2025 रात 10 बजकर 56 मिनट

चूँकि व्रत और उत्सव हमेशा उदयतिथि के आधार पर माने जाते हैं और 25 नवंबर की सुबह सूर्योदय के समय पंचमी तिथि विद्यमान रहेगी इसलिए विवाह पंचमी मंगलवार 25 नवंबर 2025 को मनाई जाएगी। इसी दिन राम-सीता विवाह उत्सव विशेष पूजा हवन और कथा-पाठ किए जाते हैं।

विवाह पंचमी के लिए तीन मुख्य शुभ मुहूर्त

विवाह पंचमी पर दिन भर में तीन प्रमुख समयखंड विशेष रूप से शुभ माने गए हैं जिनमें स्नान दान पूजा और विवाह प्रसंग का पाठ किया जा सकता है

  • ब्रह्ममुहूर्त प्रातः लगभग 4:20 से 4:59
    यह समय शुद्ध स्नान जप ध्यान दान और संकल्प के लिए अत्यंत पावन माना जाता है।

  • अभिजित मुहूर्त दोपहर के आसपास लगभग 11:47 से 12:29
    यह मध्याह्न का शुभ समय है जब कोई भी मंगलकारी कार्य विशेष पूजा संकल्प और पाठ किया जा सकता है।

  • गोधूलि मुहूर्त संध्या के समय लगभग 7:44 से 8:44
    सूर्यास्त के बाद यह समय दीपदान विवाह प्रसंग पाठ भजन और आरती के लिए विशेष शुभ माना जाता है।

इन तीनों में से किसी भी मुहूर्त में अपने सुविधा के अनुसार श्रद्धा और एकाग्रता के साथ पूजा की जा सकती है।

विवाह बाधा दूर करने के लिए यह दिन क्यों विशेष माना जाता है

परंपरा में माना गया है कि जिस तिथि पर स्वयं श्रीराम और सीता का विवाह हुआ उस दिन उनका स्मरण और संयुक्त पूजा करने से विवाह-संबंधी बाधाएँ कुछ हल्की होती हैं। यह बाधाएँ कई प्रकार की हो सकती हैं जैसे

  • उपयुक्त जीवनसाथी न मिल पाना
  • बार-बार बातचीत तक सीमित रह जाना संबंध तय न हो पाना
  • पारिवारिक असहमति या बार-बार रिश्ता टूट जाना
  • विवाह तय होने के बाद भी अनिश्चितता या अड़चनें

ऐसे समय में विवाह पंचमी पर राम-सीता विवाह की कथा का पाठ पूजा और सच्चे मन से किया गया प्रार्थना-भाव अपने भीतर भी सहारा और स्पष्टता लाता है। यह दिन केवल “चमत्कार” की आशा के लिए नहीं बल्कि अपने मन और कर्म को विवाह के लिए तैयार करने पुराने दुखों को छोड़ने और नए संकल्प के साथ आगे बढ़ने की साधना के लिए भी खूबसूरत अवसर है।

राम-सीता विवाह की विशेष पूजा-विधि

विवाह पंचमी के दिन राम-सीता विवाह के स्मरण के लिए एक सरल पूजा विधि इस प्रकार अपनाई जा सकती है

  1. प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थान को साफ कर सजाएँ।
  2. किसी चित्र या विग्रह रूप में भगवान राम और माता सीता का एक साथ स्थान तय करें राम के लिए पीतवर्ण वस्त्र या वस्त्राभूषण और सीता के लिए लाल या गुलाबी वस्त्र चुनरी अथवा पुष्प अर्पित करें।
  3. दीपक धूप अक्षत पुष्प और नैवेद्य अर्पित करते हुए मन ही मन यह संकल्प लें कि “मैं आज राम-सीता विवाह का स्मरण कर अपने या अपने परिवार के विवाह-संबंधी कष्टों को दूर करने का आशीर्वाद माँगता/मांगती हूँ।”
  4. संभव हो तो गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस के बालकांड में वर्णित विवाह प्रसंग का पाठ करें या कम से कम उस अंश की कुछ चौपाइयों का स्मरण करें।
  5. राम-सीता को प्रणाम करते हुए “ॐ जानकीवल्लभाय नमः” मंत्र का 108 बार जप करें।
  6. अंत में आरती करें परिवार और स्वयं के लिए सौभाग्य सद्भाव और मंगलमय दांपत्य जीवन की प्रार्थना करें।
  7. पूजा में अर्पित वस्त्र या चुनरी को सावधानी से सुरक्षित रखकर शुभ संकेत के रूप में घर में सहेजकर रख सकते हैं।

यदि किसी के लिए विस्तृत पाठ संभव न हो तो वे केवल सरल पूजा और मंत्र-जप के माध्यम से भी मन की भावना के साथ इस दिन की साधना कर सकते हैं।

विवाहित जीवन की समस्याओं में यह दिन कैसे सहायक माना जाता है

विवाह पंचमी केवल अविवाहितों के लिए नहीं बल्कि विवाहित दंपतियों के लिए भी महत्व रखती है। जिनके दांपत्य जीवन में निरंतर कलह संवाद की कमी अविश्वास या दूरी आ गई हो वे भी इस दिन राम-सीता को साक्षी मानकर संयुक्त पूजा कर सकते हैं।

इस दिन एक साथ बैठकर विवाह के समय लिए गए संकल्पों को याद करना एक-दूसरे के लिए आभार व्यक्त करना और अपने रिश्ते की रक्षा के लिए प्रयत्नशील रहने का निश्चय करना भीतर एक नया आधार देता है। राम-सीता विवाह का स्मरण यह याद दिलाता है कि दांपत्य केवल उत्सव नहीं एक साधना है जिसमें दोनों पक्ष की निष्ठा धैर्य और परिपक्वता की आवश्यकता होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. विवाह पंचमी 2025 में किस दिन मनाई जाएगी
मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी की तिथि 24 नवंबर की रात से शुरू होकर 25 नवंबर की रात तक रहेगी। उदयतिथि 25 नवंबर को पंचमी होने के कारण विवाह पंचमी मंगलवार 25 नवंबर 2025 को ही मानी जाएगी और इसी दिन पूजा-उत्सव किया जाएगा।

2. क्या विवाह पंचमी का व्रत केवल अविवाहितों को ही रखना चाहिए
नहीं यह दिन अविवाहितों के साथ-साथ विवाहितों के लिए भी मंगलकारी माना जाता है। अविवाहित विवाह में आ रही बाधा दूर होने और उचित जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए पूजा कर सकते हैं जबकि विवाहित दंपति अपने दांपत्य जीवन में सौहार्द प्रेम और स्थिरता के लिए राम-सीता से प्रार्थना कर सकते हैं।

3. यदि पूरी कथा पढ़ना संभव न हो तो क्या केवल मंत्र-जप से भी लाभ होगा
कथा-पाठ मन को रस और भाव से भर देता है लेकिन यदि समय कम हो या पाठ याद न हो तो भी श्रद्धा से “ॐ जानकीवल्लभाय नमः” मंत्र का जप साधारण पूजा और सच्चे मन की प्रार्थना पूरी तरह अर्थपूर्ण मानी जाती है। भावना और निष्ठा यहाँ मुख्य भूमिका निभाते हैं।

4. विवाह में देरी हो रही हो तो विवाह पंचमी पर और क्या किया जा सकता है
इस दिन पूजा के साथ स्वयं की तैयारी पर भी ध्यान देना उपयोगी है जैसे पुराने कष्ट और असफल संबंधों के प्रति भीतर से क्षमा और छोड़ने का अभ्यास अपने गुण-दोष पर ईमानदारी से चिंतन और आवश्यक हो तो उचित मार्गदर्शन लेना। पूजा के साथ-साथ व्यावहारिक कदम भी विवाह के मार्ग को सरल बनाते हैं।

5. क्या विवाह पंचमी पर किसी विशेष दान या संकल्प की भी परंपरा है
कई लोग इस दिन लड़की के विवाह में सहयोग कन्याओं की शिक्षा या दंपतियों की सहायता के लिए कुछ न कुछ दान का संकल्प लेते हैं। धर्म की दृष्टि से माना जाता है कि जब आप किसी और के विवाह-सुख में योगदान देते हैं तो आपके अपने जीवन में भी सौभाग्य के द्वार अधिक सहजता से खुलते हैं।

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पं. नीलेश शर्मा

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