By पं. नरेंद्र शर्मा
जानिए जून 2025 के पहले प्रदोष व्रत की तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि, साथ ही इसका धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व

प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्ति का अत्यंत शुभ साधन है। यह प्रत्येक माह के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है और जीवन में सुख समृद्धि स्वास्थ्य मानसिक संतुलन वैवाहिक सौख्य संतान सुख तथा ग्रह दोष शांति के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। जून 2025 में प्रदोष तिथि को लेकर उत्पन्न भ्रम को दूर करने के लिए इसका सही समय मुहूर्त और संपूर्ण पूजा विधि यहां प्रस्तुत है।
हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी तिथि 8 जून 2025 को सुबह 7:17 पर प्रारंभ होती है और 9 जून 2025 तक रहती है। उदयातिथि के नियम से प्रदोष व्रत 8 जून 2025 रविवार को रखा जाएगा। इस दिन रवि प्रदोष का श्रेष्ठ संयोग बन रहा है जिससे सूर्यदेव और भगवान शिव दोनों की कृपा प्राप्त होती है।
प्रदोष काल: 8 जून 2025
समय: शाम 7:18 से रात 9:19 तक
यह 2 घंटे 1 मिनट का पवित्र काल शिव उपासना मंत्र जप और अभिषेक के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।
• ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और सात्विक वस्त्र धारण करें।
• घर के पूजा स्थान को शुद्ध करें।
• शिवलिंग पर गंगाजल दूध दही शहद घी और शुद्ध जल से अभिषेक करें।
• बेलपत्र धतूरा आक के फूल सफेद पुष्प भस्म और चंदन अर्पित करें।
• दीपक जलाकर धूप अर्पित करें।
• फल मिठाई नैवेद्य अर्पित करें।
• ॐ नमः शिवाय मंत्र का 108 बार जाप करें।
• शिव चालीसा का पाठ करें और आरती करें।
• व्रत के दिन सात्विकता संयम और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
• जरूरतमंदों को वस्त्र भोजन धन आदि का दान करें।
• अगले दिन व्रत का पारण करें और ब्राह्मण को भोजन कराएं।
• ॐ नमः शिवाय
• ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्
श्री गणेश गिरिजा सुवन मंगल मूल सुजान
कहत अयोध्यादास तुम देहु अभय वरदान
जय गिरिजा पति दीन दयाला सदा करत संतन प्रतिपाला
भाल चंद्रमा सोहत नीके कानन कुण्डल नागफनी के
… (पूरी चालीसा का पाठ करें)
• प्रदोष काल सूर्य और चंद्र दोनों की संयुक्त ऊर्जा का समय है जो साधना का परिणाम कई गुना बढ़ा देता है।
• रवि प्रदोष स्वास्थ्य आत्मबल और सूर्य संबंधी ग्रह दोष शांति के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
• वैदिक ज्योतिष के अनुसार इस तिथि की साधना मानसिक तनाव पारिवारिक कलह शत्रु बाधा और पाप प्रभाव को शांत करती है।
प्रदोष व्रत केवल उपवास या अनुष्ठान नहीं बल्कि समर्पण विश्वास और शिव भक्ति का वह पावन क्षण है जिसमें साधक के जीवन का अंधकार समाप्त होता है और शिव कृपा का प्रकाश फैलता है। 8 जून 2025 को श्रद्धा से प्रदोष व्रत करने पर जीवन में शांति स्थिरता और सौभाग्य का अनुभव अवश्य होता है।
1. जून 2025 का पहला प्रदोष किस दिन है
8 जून 2025 रविवार को रवि प्रदोष है।
2. प्रदोष काल कितने समय का होता है
लगभग 2 घंटे का समय सूर्यास्त से पहले और बाद का संयुक्त काल पवित्र माना जाता है।
3. क्या प्रदोष व्रत में फलाहार कर सकते हैं
हाँ फलाहार स्वीकार्य है निर्जला व्रत अनिवार्य नहीं।
4. रवि प्रदोष किसके लिए शुभ है
सूर्य दोष शांति स्वास्थ्य आत्मबल और ऊर्जा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
5. क्या इस दिन नए कार्य शुरू करना चाहिए
यह दिन विशेष रूप से शिव उपासना का है नए कार्य का आरंभ अनुशंसित नहीं माना जाता।
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