By पं. सुव्रत शर्मा
जानिए क्यों सावन में महिलाएं पहनती हैं हरी चूड़ियां और इसके पीछे छुपे आध्यात्मिक और ज्योतिषीय लाभ

सावन का माह जैसे ही आरंभ होता है वातावरण में शिव भक्ति की सुगंध फैल जाती है। उपवास पूजा रुद्राभिषेक और कांवड़ यात्रा के बीच एक परंपरा हर वर्ष सबसे अधिक नजर आती है। विवाहित महिलाएं हरी चूड़ियां पहनती हैं। यह केवल श्रृंगार नहीं बल्कि प्राचीन आध्यात्मिक प्रतीक है। इस परंपरा के पीछे संस्कृति ज्योतिष और मनोविज्ञान की गहरी परतें छिपी हैं। सावन का समय प्रकृति की नवऊर्जा का प्रतीक है और हरा रंग उसी ऊर्जा का सूक्ष्म रूप माना जाता है।
हरा रंग प्रकृति की ताजगी और समृद्धि का सूचक है। शिवलिंग पर चढ़ाए जाने वाले बेलपत्र धतूरा और भांग सभी हरे रंग से जुड़े हैं। देवी पार्वती को भी हरा रंग अत्यंत प्रिय माना गया है। उनके सोलह श्रृंगार में हरी चूड़ियों का विशेष स्थान है। जब महिला सावन में हरी चूड़ियां पहनती है तो माना जाता है कि वह शिव और पार्वती दोनों का आशीर्वाद प्राप्त करती है। इससे दांपत्य जीवन में शांति प्रेम और स्थिरता का प्रवाह बढ़ता है।
भारतीय परंपरा में हरी चूड़ियां अखंड सौभाग्य का प्रतीक मानी जाती हैं। विवाहित महिलाएं इन्हें पति की दीर्घायु और परिवार की रक्षा की प्रार्थना के रूप में पहनती हैं। चूड़ियों की टंकार घर के वातावरण में सकारात्मकता उत्पन्न करती है। यह परंपरा दांपत्य जीवन की शुभकामना और गृहस्थ के सौंदर्य को दर्शाती है। जब महिला सावन में हरी चूड़ियां धारण करती है तो उसके मन में श्रद्धा और सौभाग्य की अनुभूति और भी गहरी हो जाती है।
हरी चूड़ियां केवल धार्मिक प्रतीक नहीं बल्कि भावनात्मक सामंजस्य का माध्यम भी हैं। हरियाली तीज जैसे उत्सवों में महिलाएं हरे वस्त्र आभूषण और चूड़ियां पहनकर विशेष पूजा करती हैं। इन पर्वों का अर्थ है रिश्तों में मधुरता और परिवार में प्रसन्नता बनाए रखना। सावन के हरे रंग में जीवन की कोमलता और प्रेम के भाव को विशेष महत्व दिया गया है। यह परंपरा परिवार में एकता और सद्भाव का संदेश देती है।
ज्योतिष शास्त्र में हरा रंग बुध ग्रह का प्रतिनिधि है। बुध बुद्धि वाणी व्यापार संवाद और संतानों का कारक माना जाता है। सावन में हरी चूड़ियां पहनने से जन्म कुंडली में बुध की शुभता बढ़ती है। इससे निर्णय क्षमता में सुधार संवाद में सहजता करियर में सफलता और दांपत्य जीवन में स्थिरता बढ़ती है। हरा रंग मानसिक तनाव को कम करता है और नकारात्मक ग्रहों के प्रभाव को भी शांत करता है।
हरा रंग आंखों को शीतलता देता है और मन को स्थिर करता है। जब सावन की हरियाली के बीच महिलाएं हरी चूड़ियां पहनती हैं तो यह शरीर और प्रकृति के बीच एक सुंदर समन्वय उत्पन्न करता है। चूड़ियों की चमक और ध्वनि सकारात्मक ऊर्जा को सक्रिय करती है। यह परंपरा मनोवैज्ञानिक रूप से भी सुख भावना और आत्मविश्वास को बढ़ाती है।
हर बार जब साध्वी या गृहिणी सावन में हरी चूड़ियां पहनती है तो वह केवल अपने सौभाग्य की कामना नहीं करती बल्कि पूरे परिवार की सुख समृद्धि का आशीर्वाद भी मांगती है। यह परंपरा परिवार के प्रति समर्पण प्रेम और कृतज्ञता को व्यक्त करती है। हरी चूड़ियां पहनने का क्षण स्त्री शक्ति का सूक्ष्म उत्सव है जहां सौंदर्य आध्यात्मिकता और संस्कार एक साथ अनुभव होते हैं।
सावन में हरी चूड़ियां पहनना केवल श्रृंगार नहीं बल्कि भक्ति प्रेम सौभाग्य और आंतरिक ऊर्जा का प्रतीक है। यह परंपरा हमें प्रकृति के साथ तालमेल सिखाती है और याद दिलाती है कि जीवन में सौंदर्य तभी प्रकट होता है जब मन शांत और हृदय पवित्र हो। इस सावन जब भी आप हरी चूड़ियां पहनें उस क्षण को समर्पण और सकारात्मकता के साथ अपनाएं क्योंकि यही चूड़ियां स्त्री शक्ति और शिव पार्वती के आशीर्वाद का प्रतीक बन जाती हैं।
1. सावन में हरी चूड़ियां ही क्यों पहनी जाती हैं
क्योंकि हरा रंग शिव पार्वती का प्रिय माना गया है और यह समृद्धि शांति और प्रेम का प्रतीक है।
2. क्या हरी चूड़ियां पहनने से सौभाग्य बढ़ता है
हाँ यह विवाहित महिलाओं के लिए सौभाग्य और दांपत्य स्थिरता का शुभ संकेत माना जाता है।
3. क्या हरा रंग ज्योतिष में भी महत्वपूर्ण है
हाँ यह बुध ग्रह का प्रतिनिधि है जो बुद्धि संवाद और समृद्धि का कारक माना जाता है।
4. क्या अविवाहित महिलाएं भी हरी चूड़ियां पहन सकती हैं
हाँ वे भी पहन सकती हैं क्योंकि यह सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति देता है।
5. क्या हरी चूड़ियां स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी मानी जाती हैं
हाँ यह रंग मन को शांत करता है और तनाव को कम करने में सहायता करता है।
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