By पं. सुव्रत शर्मा
20 फरवरी 2027 का शुभ मुहूर्त श्रीयंत्र पूजा विधि और ज्योतिषीय लाभ

माघ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को ललिता जयंती 20 फरवरी 2027 शनिवार के दिन बहुत ही भव्यता के साथ मनाई जाएगी। माता ललिता दस महाविद्याओं में से एक प्रमुख देवी हैं जिनकी पूजा से साधक के जीवन में अपार सुख और अखंड समृद्धि आती है।
ललिता जयंती माता त्रिपुर सुंदरी के अलौकिक प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाने वाला पावन पर्व है जो साधक को भौतिक भोग और आध्यात्मिक मोक्ष दोनों एक साथ प्रदान करता है।
हिंदू धर्म की मान्यताओं में माघ पूर्णिमा का दिन तंत्र और मंत्र साधना के लिए अत्यंत पवित्र और चमत्कारी माना गया है। इसी शुभ और मंगलकारी तिथि पर माता त्रिपुर सुंदरी का प्राकट्य हुआ था। शनिवार का दिन कर्मफल दाता शनिदेव का होता है जो माता की कृपा से साधक को उसके अच्छे कर्मों का त्वरित फल प्रदान करते हैं।
| पंचांग तत्व | शास्त्रोक्त विवरण |
|---|---|
| पावन जयंती पर्व | ललिता जयंती |
| निर्धारित दिनांक | 20 फरवरी 2027 शनिवार |
| हिंदू पंचांग मास | माघ मास शुक्ल पक्ष |
| पंचांग तिथि | पूर्णिमा तिथि |
| मुख्य आराध्य | माता ललिता त्रिपुर सुंदरी |
| पूजा का स्वरूप | श्रीयंत्र पूजा और ललिता सहस्रनाम पाठ |
| परम जीवन संदेश | भौतिक और आध्यात्मिक जीवन में पूर्ण संतुलन |
इस पावन दिन श्रीयंत्र की स्थापना और देवी की उपासना करने से मनुष्य के सभी जन्म जन्मांतर के पाप पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं। भक्तगण इस दिन लाल वस्त्र धारण करके माता के महान मंत्रों का स्मरण करते हैं। यह विशेष पर्व साधक को दरिद्रता से मुक्त करके राजसी सुख प्रदान करने का सच्चा मार्ग दिखाता है।
माता ललिता त्रिपुर सुंदरी संपूर्ण ब्रह्मांड की सर्वोच्च स्त्री ऊर्जा और अलौकिक सौंदर्य का सबसे बड़ा प्रतीक हैं। पूर्णिमा के दिन प्राकट्य लेने वाली यह परम शक्ति पूरे ब्रह्मांड में प्रेम और शुद्ध चेतना की पूर्णता स्थापित करती है।
माता ललिता जी ने भंडासुर नामक महा भयंकर असुर का वध करने के लिए यह सुंदर रूप धारण किया था। वे श्री विद्या की अधिष्ठात्री देवी हैं और उनके इसी रूप में साक्षात शिव और शक्ति का पूर्ण मिलन होता है। उनका प्राकट्य यह प्रमाणित करता है कि ईश्वरीय शक्ति अत्यंत कोमल होने के साथ साथ अत्यंत संहारक भी हो सकती है।
माघ मास की पूर्णिमा तिथि पर चंद्रमा अपनी सभी सोलह कलाओं से पूर्ण होकर पृथ्वी पर आध्यात्मिक अमृत की वर्षा करता है। वैदिक तंत्र के अनुसार यह खगोलीय स्थिति मनुष्य के मन को अत्यंत शुद्ध और एकाग्र बनाती है। इस पावन दिन श्री चक्र की पूजा करने से साधक की प्रार्थना सीधे परब्रह्म तक पहुंचती है।
यह खगोलीय अवस्था साधक के भीतर एक नई ऊर्जा का तीव्र संचार करती है। जो व्यक्ति इस दिन निष्काम भाव से भगवती का स्मरण करता है उसे देवी लोक की प्राप्ति होती है। माता ललिता त्रिपुर सुंदरी की महिमा इसी अलौकिक चेतना का साक्षात प्रमाण है।
प्रातःकाल पवित्र जल से स्नान करके माता ललिता जी के चित्र और श्रीयंत्र पर ताजे लाल पुष्प अर्पित करें। इसके पश्चात माता की उपासना करते हुए ललिता सहस्रनाम का पाठ करें तथा सुहागिन महिलाओं को लाल श्रृंगार की सामग्री का दान करें।
शास्त्र सम्मत नियमों के अनुसार की गई पूजा साधक को माता भवानी की विशेष कृपा प्रदान करती है।
इन सभी नियमों का पूर्ण पालन करने से मनुष्य के भीतर अपार सकारात्मक ऊर्जा का विकास होता है। सच्ची भक्ति के साथ किया गया यह तांत्रिक और सात्विक अनुष्ठान जीवन के सभी कष्टों को जड़ से मिटा देता है।
शनिवार को माघ पूर्णिमा पड़ने से शुक्र शनि और चंद्रमा का एक अत्यंत दुर्लभ खगोलीय संयोजन बनता है। यह उत्तम ग्रह योग वैवाहिक जीवन के तनाव को दूर करता है और साधक को असाधारण भौतिक सफलता प्रदान करता है।
ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का स्वामी और शुक्र को विलासिता तथा सौंदर्य का अधिपति ग्रह माना जाता है। जब पूर्णिमा के दिन देवी ललिता की पूजा होती है तब व्यक्ति को शुक्र ग्रह के अत्यंत शुभ फल प्राप्त होने लगते हैं। यह पावन समय दांपत्य जीवन की निराशा को पूरी तरह नष्ट कर देता है।
| ग्रह और दोष स्थिति | जीवन पर पड़ने वाला प्रभाव | अनुशंसित ज्योतिषीय और आध्यात्मिक उपाय |
|---|---|---|
| शुक्र दोष | दांपत्य सुख में बाधा और भौतिक सुखों की भारी कमी | माता ललिता को लाल चुनरी और सुगंधित इत्र अर्पित करें |
| चंद्र दोष | मानसिक उद्वेग भय और अनावश्यक चिंता | श्रीयंत्र का गाय के दूध से अभिषेक करें |
| शनि दोष | करियर में भयंकर बाधा और कार्यों में भारी विलंब | जरूरतमंद महिलाओं को लाल वस्त्र और उड़द का दान करें |
| गुरु ग्रह दोष | ज्ञान की कमी और उच्च शिक्षा में रुकावट | पीले और लाल पुष्पों की माला माता को अर्पित करें |
माता ललिता शुक्र ग्रह की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं और जब पूर्णिमा का प्रकाश धरती पर पड़ता है तो यह साधक के लिए अनंत सिद्धियों का द्वार खोल देता है। यह पवित्र समय व्यक्ति को उसके पूर्व जन्मों के शुभ कर्मों का उत्तम फल प्रदान करने के लिए पूरी तरह सक्षम है।
जो लोग लंबे समय से आर्थिक उलझनों या व्यापारिक नुकसान से परेशान हैं उनके लिए यह दिन एक नया सवेरा लेकर आता है। चंद्रमा की सोलह कलाएं मानव मन के अंधकार को मिटाकर वहां ईश्वरीय प्रकाश को भर देती हैं। सच्चे मन से किए गए श्री विद्या के उपाय इस दिन कभी विफल नहीं होते हैं।
इस दिन पूर्ण सात्विक जीवन शैली अपनाएं और माता की मानसिक साधना में अपना अधिक से अधिक समय व्यतीत करें। किसी भी महिला का अपमान करने असत्य बोलने या तामसिक वस्तुओं का सेवन करने से पूरी तरह बचें।
आध्यात्मिक उन्नति के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना सबसे आवश्यक माना गया है।
इन नियमों का पालन करने से घर में सुख शांति और अपार समृद्धि का निरंतर वास होता है। भगवती की कृपा केवल उन्हीं घरों में बरसती है जहां स्त्री शक्ति का पूर्ण सम्मान होता है।
माता ललिता त्रिपुर सुंदरी का सबसे बड़ा संदेश यही है कि मनुष्य भौतिक सुखों का आनंद लेते हुए भी आध्यात्मिक ऊंचाइयों को छू सकता है। निर्मल हृदय और पवित्र विचार ही ईश्वरीय शक्ति को जाग्रत करने का सबसे सच्चा मार्ग है।
उन्होंने संसार को सिखाया कि शक्ति का उपयोग हमेशा ब्रह्मांड के कल्याण और दुष्ट प्रवृत्तियों के नाश के लिए होना चाहिए। उनका स्पष्ट मानना है कि जिस व्यक्ति का मन भीतर से पूरी तरह साफ है वह गृहस्थ जीवन में रहकर भी परमहंस की अवस्था प्राप्त कर सकता है। यह विचार आज भी मानव जाति के लिए सबसे बड़ा मार्गदर्शन है।
प्राचीन काल में जब समाज भोग और वैराग्य के बीच उलझा हुआ था तब उन्होंने श्री विद्या के माध्यम से आनंद और वैराग्य का अद्भुत समन्वय स्थापित किया। आज के युग में भी उनके तांत्रिक विचार हमें एक मजबूत और समृद्ध समाज बनाने की सबसे बड़ी प्रेरणा देते हैं। उनकी शिक्षाएं मानव जीवन के हर क्षेत्र में पूरी तरह प्रासंगिक हैं।
आज के समय में जब मनुष्य केवल भौतिक सुखों की अंधी दौड़ में भाग रहा है तब माता की शिक्षाएं हमें आत्मिक शांति की ओर ले जाती हैं। उनकी उपासना हमें सिखाती है कि ईश्वर की प्राप्ति के लिए संसार छोड़ने की नहीं बल्कि संसार में रहते हुए अनासक्त रहने की परम आवश्यकता होती है।
ललिता जयंती 2027 में कब मनाई जाएगी?
ललिता जयंती 20 फरवरी 2027 को शनिवार के दिन संपूर्ण भारत में अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जाएगी।
माता ललिता का प्राकट्य किस हिंदू तिथि को हुआ था?
माता ललिता त्रिपुर सुंदरी का प्राकट्य माघ मास के शुक्ल पक्ष की पवित्र पूर्णिमा तिथि को हुआ था।
माता ललिता त्रिपुर सुंदरी का सबसे प्रसिद्ध मंत्र कौन सा है?
माता का सबसे प्रसिद्ध और अत्यंत प्रभावशाली मंत्र पंचदशी मंत्र है जिसका जाप गुरु दीक्षा के बाद ही करना चाहिए।
इस जयंती पर कौन सा दान सबसे अधिक फलदायी होता है?
इस पावन अवसर पर सुहागिन महिलाओं को लाल वस्त्र कुमकुम और श्रृंगार की सामग्री का दान करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है।
ललिता जयंती पर किस यंत्र की पूजा अनिवार्य रूप से की जाती है?
ललिता जयंती के दिन श्रीयंत्र अथवा श्री चक्र की पूजा करना अत्यंत अनिवार्य और विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
पाएं अपनी सटीक कुंडली
कुंडली बनाएं
अनुभव: 20
इनसे पूछें: Family Planning, Career
इनके क्लाइंट: Punjab, Haryana, Delhi
इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें
ज़ोडियाक (ZODIAQ) एक ऑनलाइन वैदिक ज्योतिष प्लेटफॉर्म है। जिन यूज़र्स को ज्योतिषीय सलाह की आवश्यकता है उन्हें ये अनुभवी ज्योतिषियों से जोड़ता है। हमारे यूज़र्स निशुल्क कुंडली भी बनाते हैं और कुंडली मिलान करते हैं। साथ ही ज़ोडियाक (ZODIAQ) ज्योतिषियों को भी कई उपयोगी सेवाएँ प्रदान करता है। ज्योतिषी ज़ोडियाक (ZODIAQ) की विभिन्न सुविधाओं का उपयोग कर अपने ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करते हैं।
अनुभवी ज्योतिषियों से सलाह लें और उनका मार्गदर्शन प्राप्त करें। आप हमारे प्लेटफॉर्म से अनुभवी ज्योतिषियों द्वारा तैयार की गई हस्तलिखित जन्म पत्रिका और जीवन भविष्यवाणी रिपोर्ट भी मंगवा सकते हैं। सटीक कुंडली बनाएं, कुंडली मिलान करें और राशिफल व मुहूर्त की जानकारी प्राप्त करें। हमारी ऑनलाइन लाइब्रेरी का उपयोग करें जहां आपको सभी जरूरी ज्योतिषीय और आध्यात्मिक जानकारी एक जगह मिलेगी।
अपने ग्राहकों के लिए सटीक कुंडली बनाएं और एक बार में 5 लोगों तक का कुंडली मिलान करें। ज़ोडियाक (ZODIAQ) की मदद से अपने ग्राहकों के लिए विस्तृत जन्म पत्रिका रिपोर्ट तैयार करें। क्लाइंट डायरेक्टरी में ग्राहकों का विवरण सेव करके किसी भी समय उन्हें एक्सेस करें। हर दिन आपने कितने लोगों को परामर्श दिया यह ट्रैक कर के अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाएं।
WELCOME TO
Right Decisions at the right time with ZODIAQ