मासिक दुर्गाष्टमी 2027 क्यों मनाते हैं?

By पं. संजीव शर्मा

माघ शुक्ल अष्टमी का शुभ मुहूर्त, भगवती दुर्गा पूजा विधि, रविवार का संयोग और ज्योतिषीय महत्व

मासिक दुर्गाष्टमी 2027: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और उपाय

माघ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर शक्ति की अधिष्ठात्री देवी भगवती दुर्गा की आराधना का पावन पर्व मासिक दुर्गाष्टमी 14 फरवरी 2027 को रविवार के दिन अत्यंत श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। सनातन धर्म में प्रत्येक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवती दुर्गा के उग्र और कल्याणकारी स्वरूप की उपासना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। रविवार का दिन भगवान सूर्य को समर्पित है, जिससे इस वर्ष शक्ति और तेज के संचय का अत्यंत दुर्लभ संयोग बन गया है।

मासिक दुर्गाष्टमी वह परम कल्याणकारी तिथि है जिस दिन भगवती दुर्गा की आराधना करने से जीवन के सभी महान संकट, अज्ञात भय और गुप्त शत्रु पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं, तथा साधक को अदम्य साहस प्राप्त होता है।

सनातन धर्म की प्राचीन वैदिक परंपराओं में मासिक दुर्गाष्टमी को आध्यात्मिक ऊर्जा के संचय, आत्मिक शुद्धि और राहु दोष से मुक्ति का परम पवित्र अवसर माना गया है। वर्ष 2027 में 14 फरवरी को पड़ने वाले इस पर्व पर रविवार का अद्वितीय संयोग बन रहा है। इस दिन पूर्ण निष्ठा के साथ उपवास रखने, माता को लाल पुष्प अर्पित करने और दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से जन्म कुंडली के भारी दोष शांत हो जाते हैं तथा साधक को अपार भौतिक और आध्यात्मिक सुख प्राप्त होता है।

पंचांग तत्व शास्त्रोक्त विवरण
पावन पर्व मासिक दुर्गाष्टमी
निर्धारित दिनांक 14 फरवरी 2027 रविवार
हिंदू पंचांग मास माघ मास शुक्ल पक्ष
निर्धारित तिथि अष्टमी तिथि
मुख्य आराध्य भगवती दुर्गा (महागौरी और चामुंडा स्वरूप)
विशेष योग रविवार और माघ अष्टमी का शक्तिवर्धक संयोग
प्रमुख आध्यात्मिक कर्म दुर्गा पूजा, उपवास, लाल पुष्प अर्पण और कन्या पूजन
उत्तम फल संकटों से मुक्ति, शत्रुओं पर विजय और साहस में वृद्धि

गृहस्थ और आध्यात्मिक साधक इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर पवित्र स्नान का दृढ़ संकल्प लेते हैं। भगवती दुर्गा को ब्रह्मांड की संपूर्ण ऊर्जा (शक्ति) का स्रोत माना गया है। इस दिन माता को लाल चुनरी और हलवा चना का भोग लगाने से साधक को उत्तम जीवन शक्ति और असीम मानसिक शांति प्राप्त होती है। जिन व्यक्तियों को जीवन में निरंतर बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है, उनके लिए दुर्गाष्टमी का व्रत अत्यंत फलदायी सिद्ध होता है।

मासिक दुर्गाष्टमी का आध्यात्मिक महत्व क्या है?

मासिक दुर्गाष्टमी का मूल उद्देश्य मनुष्य के भीतर सोई हुई ऊर्जा को जाग्रत करना और आसुरी प्रवृत्तियों (काम, क्रोध, लोभ, मोह) का नाश करना है। पौराणिक कथाओं के अनुसार अष्टमी तिथि के दिन ही भगवती दुर्गा ने चंड, मुंड और महिषासुर जैसे भयंकर असुरों का वध करके देवताओं को स्वर्ग का राज्य पुनः लौटाया था। यह तिथि बुराई पर अच्छाई की शाश्वत विजय का परम प्रतीक है।

वैदिक शास्त्रों के अनुसार मासिक दुर्गाष्टमी के दिन लाल रंग के उपयोग का सबसे अधिक महत्व है। लाल रंग जीवन ऊर्जा, पराक्रम और माता के प्रति अगाध प्रेम का साक्षात प्रतीक है। इस दिन स्नान के पश्चात लाल वस्त्र पहनने, माता को कुमकुम अर्पित करने और नवार्ण मंत्र का जप करने से साधक के अंतर्मन का भय पूरी तरह मिट जाता है। जो श्रद्धालु इस पावन अवसर पर भक्ति भाव से कन्या पूजन करते हैं, उनके परिवार पर माता की अखंड कृपा बनी रहती है।

संसार में शक्ति की उपासना और धर्म की रक्षा ही सनातन धर्म का मूल आधार है। इस पावन दिन घर में भगवती दुर्गा की सुंदर प्रतिमा स्थापित करने और घी का अखंड दीपक जलाने से दैहिक और मानसिक विकारों का समूल नाश होता है। यह पावन पर्व व्यक्ति को अपनी आंतरिक शक्तियों से गहराई से जोड़ने का एक अत्यंत दिव्य अवसर प्रदान करता है।

मासिक दुर्गाष्टमी की संपूर्ण पूजा विधि क्या है?

इस पावन दिन प्रातः काल जल्दी उठकर जल में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करने के पश्चात मासिक दुर्गाष्टमी व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके पश्चात पूजा स्थल पर एक लाल वस्त्र बिछाकर भगवती दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाती है। दिनभर सात्विक आचरण रखते हुए माता को लाल पुष्प, श्रृंगार की सामग्री और नैवेद्य का भोग लगाना शास्त्र सम्मत विधान है।

शास्त्रोक्त विधि का शुद्ध अंतःकरण से पालन करने पर साधक को माता का अखंड तेज और असीम साहस प्राप्त होता है।

  • प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में जागकर स्वच्छ जल से स्नान करें और घर की पूर्ण सफाई करें
  • शुद्ध लाल या पीले रंग के सूती वस्त्र धारण करें और दाहिने हाथ में जल लेकर व्रत का आदरपूर्वक संकल्प लें
  • पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें और एक लकड़ी की चौकी पर नया लाल वस्त्र बिछाएं
  • चौकी पर भगवती दुर्गा की सुंदर प्रतिमा या चित्र पूर्ण श्रद्धा से स्थापित करें
  • माता को शुद्ध जल, गाय का दूध और गंगाजल से स्नान कराएं
  • स्नान के पश्चात माता को लाल चंदन, कुमकुम, अक्षत और लाल पुष्प (विशेषकर लाल गुड़हल या गुलाब) अर्पित करें
  • माता को लाल चुनरी, सिंदूर, मेहंदी, लाल चूड़ियां और सुहाग की संपूर्ण सामग्री अत्यंत भक्ति भाव से अर्पित करें
  • माता को विशेष रूप से हलवा, पूरी, काले चने और लाल फलों का नैवेद्य अर्पित करें
  • शुद्ध गाय के घी का दीपक प्रज्वलित करें और कपूर जलाकर माता की आरती करें
  • पूजा के समय एकाग्रचित्त होकर दुर्गा सप्तशती का पाठ करें अथवा नवार्ण मंत्र (ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे) का 108 बार जप करें
  • पूजन संपन्न होने के पश्चात छोटी कन्याओं को घर बुलाकर आदरपूर्वक भोजन कराएं और उन्हें दक्षिणा दें

पूजन क्रिया के समय मन में पूर्ण श्रद्धा, शौर्य और नम्रता का भाव होना अनिवार्य है। बिना सच्ची एकाग्रता के अर्पित की गई प्रार्थना माता द्वारा कभी स्वीकार नहीं की जाती है।

इस पावन तिथि का ज्योतिषीय प्रभाव क्या है?

वैदिक ज्योतिष में अष्टमी तिथि का विशेष महत्व है और भगवती दुर्गा को राहु तथा केतु जैसे मायावी ग्रहों का मुख्य नियंत्रक माना जाता है। वर्ष 2027 में रविवार के दिन मासिक दुर्गाष्टमी का पड़ना सूर्य ग्रह और राहु देव की शांति के लिए अत्यंत शक्तिशाली योग का निर्माण करता है। रविवार भगवान सूर्य (आत्मा और तेज) का दिन है और माता दुर्गा शक्ति की प्रतीक हैं।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में राहु नीच अवस्था में हो या सूर्य के साथ ग्रहण दोष बन रहा हो, तो व्यक्ति को समाज में अपमान, अज्ञात भय और कार्यों में भारी बाधाओं का सामना करना पड़ता है। मासिक दुर्गाष्टमी पर भगवती को लाल पुष्प और कुमकुम अर्पित करने से जन्मकुंडली का यह भारी दोष पूरी तरह शांत हो जाता है।

ग्रह एवं दोष ज्योतिषीय दुष्प्रभाव निवारण का वैदिक उपाय
राहु दोष अत्यधिक मानसिक भ्रम, अज्ञात भय, गुप्त शत्रु और जीवन में भारी भटकाव माता दुर्गा को लाल चुनरी अर्पित करें और नवार्ण मंत्र का एकाग्रता से जप करें
सूर्य दोष आत्मविश्वास में भारी कमी, राजकीय कार्यों में बाधा और नेत्र रोग रविवार होने के कारण माता की पूजा के साथ भगवान सूर्य को भी अर्घ्य दें
मंगल दोष अत्यधिक क्रोध, कर्ज, दुर्घटना का भय और रक्त संबंधी विकार भगवती को लाल पुष्पों की माला और लाल चंदन अत्यंत श्रद्धा से अर्पित करें
केतु दोष मन में वैराग्य, कार्यों में अचानक रुकावट और निर्णय न ले पाना दुर्गा सप्तशती के अर्गला स्तोत्र और कीलक स्तोत्र का पूर्ण निष्ठा से पाठ करें

जिन व्यक्तियों को मुकदमों में विजय प्राप्त करनी है अथवा जो लोग अपने करियर में शत्रुओं के कारण परेशान हैं, उन्हें इस दिन भगवती दुर्गा की विशेष आराधना अवश्य करनी चाहिए। ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है और असीम पराक्रम का स्थायी आगमन होता है।

इस पर्व और व्रत में क्या करें और क्या न करें?

मासिक दुर्गाष्टमी के दिन पूर्ण सात्विकता, ब्रह्मचर्य और मन की गहरी पवित्रता बनाए रखना अनिवार्य है। इस पावन अवसर पर कन्या पूजन करना, लाल वस्त्रों का दान करना और सुहाग सामग्री बांटना महापुण्य माना गया है। किसी भी प्रकार का तामसिक आहार ग्रहण करना, अपशब्द बोलना अथवा किसी स्त्री का अपमान करना इस दिन पूरी तरह वर्जित है।

नियमों का निष्ठापूर्वक पालन करने से ही इस पावन दिन की आध्यात्मिक ऊर्जा का पूर्ण लाभ प्राप्त होता है।

  • प्रातः काल जल्दी उठकर पवित्र स्नान शांतिपूर्वक संपन्न करें और घर को पूरी तरह स्वच्छ रखें
  • अपने सामर्थ्य के अनुसार छोटी कन्याओं को हलवा पूरी का भोजन कराएं और लाल वस्त्रों का दान करें
  • दिनभर शांत रहने का प्रयास करें और किसी से भी वाद विवाद या कटु शब्दों का प्रयोग न करें
  • माता के इस पावन व्रत में मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का प्रयोग पूर्णतः वर्जित रखें
  • इस दिन काले या गहरे नीले रंग के वस्त्र पहनने से पूरी तरह परहेज करें और लाल या पीले वस्त्र ही पहनें
  • अपनी माता, पत्नी और परिवार की सभी स्त्रियों का पूर्ण आदर करें
  • बिना स्नान किए भोजन ग्रहण न करें और सात्विक फलाहार ही लें
  • दिन का अधिक से अधिक समय दुर्गा सप्तशती के पठन और मंत्र जप में लगाएं

इन आचार नियमों का पालन करने से साधक का अंतःकरण शुद्ध होता है और परिवार पर भगवती दुर्गा की कृपा सदैव बनी रहती है।

शक्ति उपासना और अदम्य साहस का परम मार्ग

सनातन संस्कृति में शक्ति के बिना शिव को भी अपूर्ण माना गया है। मासिक दुर्गाष्टमी हमें यह याद दिलाती है कि संसार में सत्य और धर्म की स्थापना के लिए शक्ति का होना अत्यंत आवश्यक है। माता दुर्गा के हाथों में स्थित विभिन्न अस्त्र हमें यह दिव्य संदेश देते हैं कि जीवन में आने वाली हर बाधा से लड़ने के लिए मनुष्य को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से पूर्ण सशक्त होना चाहिए।

कलियुग में ऊर्जा और साहस के बिना किसी भी व्यक्ति की सर्वांगीण और स्थायी उन्नति संभव नहीं है। जब कोई साधक पूरी श्रद्धा और एकाग्रता के साथ माता को लाल पुष्प का एक छोटा सा अंश भी समर्पित करता है तब माता तृप्त होकर उसे अपार विजय और अभय का आशीर्वाद देती हैं। यह पावन पर्व केवल एक पारंपरिक कर्मकांड नहीं है बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में सफलता और सुरक्षा प्राप्त करने का प्रत्यक्ष अनुभव है।

संसार के सभी भौतिक साधन और धन संपदा यहीं छूट जाते हैं परंतु माता के निमित्त किया गया जप और निस्वार्थ कर्म अमर फल देता है। माघ मास की इस पुण्य अष्टमी पर भगवती दुर्गा का स्मरण करें, शुद्ध सात्विक आचरण अपनाएं और अपने जीवन को अदम्य साहस और मंगल से परिपूर्ण करें।

FAQ

मासिक दुर्गाष्टमी 2027 में किस तारीख को मनाई जाएगी?
मासिक दुर्गाष्टमी का पावन पर्व 14 फरवरी 2027 को रविवार के दिन वैदिक पंचांग के अनुसार अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा।

मासिक दुर्गाष्टमी का मुख्य आध्यात्मिक अर्थ क्या है?
यह प्रत्येक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि है जो भगवती दुर्गा को समर्पित है। इस दिन माता की पूजा करने से शत्रुओं का नाश होता है और अदम्य साहस प्राप्त होता है।

मासिक दुर्गाष्टमी पर लाल रंग का क्या महत्व है?
लाल रंग शक्ति, ऊर्जा, पराक्रम और माता दुर्गा के प्रति प्रेम का प्रतीक है। लाल रंग का प्रयोग करने से माता तुरंत प्रसन्न होती हैं और साधक में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

रविवार को दुर्गाष्टमी पड़ने से क्या विशेष लाभ प्राप्त होता है?
रविवार भगवान सूर्य का दिन है। इस दिन दुर्गाष्टमी का संयोग बनने से सूर्य और शक्ति का मिलन होता है, जिससे आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और यश में अपार वृद्धि होती है।

मासिक दुर्गाष्टमी के व्रत में कन्या पूजन क्यों किया जाता है?
सनातन धर्म में छोटी कन्याओं को साक्षात माता दुर्गा का स्वरूप माना गया है। कन्या पूजन और उन्हें भोजन कराने से माता अत्यंत प्रसन्न होती हैं और परिवार को सुख समृद्धि का वरदान देती हैं।

पाएं अपनी सटीक कुंडली

कुंडली बनाएं

क्या आपको यह पसंद आया?

लेखक

पं. संजीव शर्मा

पं. संजीव शर्मा (63)


अनुभव: 20

इनसे पूछें: Family Planning, Career

इनके क्लाइंट: Punjab, Haryana, Delhi

इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें

ZODIAQ के बारे में

ज़ोडियाक (ZODIAQ) एक ऑनलाइन वैदिक ज्योतिष प्लेटफॉर्म है। जिन यूज़र्स को ज्योतिषीय सलाह की आवश्यकता है उन्हें ये अनुभवी ज्योतिषियों से जोड़ता है। हमारे यूज़र्स निशुल्क कुंडली भी बनाते हैं और कुंडली मिलान करते हैं। साथ ही ज़ोडियाक (ZODIAQ) ज्योतिषियों को भी कई उपयोगी सेवाएँ प्रदान करता है। ज्योतिषी ज़ोडियाक (ZODIAQ) की विभिन्न सुविधाओं का उपयोग कर अपने ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करते हैं।

यदि आप एक उपयोगकर्ता हैं

अनुभवी ज्योतिषियों से सलाह लें और उनका मार्गदर्शन प्राप्त करें। आप हमारे प्लेटफॉर्म से अनुभवी ज्योतिषियों द्वारा तैयार की गई हस्तलिखित जन्म पत्रिका और जीवन भविष्यवाणी रिपोर्ट भी मंगवा सकते हैं। सटीक कुंडली बनाएं, कुंडली मिलान करें और राशिफल व मुहूर्त की जानकारी प्राप्त करें। हमारी ऑनलाइन लाइब्रेरी का उपयोग करें जहां आपको सभी जरूरी ज्योतिषीय और आध्यात्मिक जानकारी एक जगह मिलेगी।

यदि आप एक ज्योतिषी हैं

अपने ग्राहकों के लिए सटीक कुंडली बनाएं और एक बार में 5 लोगों तक का कुंडली मिलान करें। ज़ोडियाक (ZODIAQ) की मदद से अपने ग्राहकों के लिए विस्तृत जन्म पत्रिका रिपोर्ट तैयार करें। क्लाइंट डायरेक्टरी में ग्राहकों का विवरण सेव करके किसी भी समय उन्हें एक्सेस करें। हर दिन आपने कितने लोगों को परामर्श दिया यह ट्रैक कर के अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाएं।

WELCOME TO

ZODIAQ

Right Decisions at the right time with ZODIAQ