By पं. अमिताभ शर्मा
पौष कृष्ण त्रयोदशी पर कर्ज मुक्ति और उत्तम स्वास्थ्य के लिए भगवान शिव और मंगल देव की चमत्कारी पूजा विधि।

वैदिक पंचांग के अनुसार पौष मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को भौम प्रदोष व्रत के रूप में मनाया जाता है। आगामी वर्ष में यह परम फलदायी व्रत 5 जनवरी 2027 मंगलवार के दिन रखा जाएगा। मंगलवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को भौम प्रदोष कहा जाता है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना के साथ साथ मंगल ग्रह की शांति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। नीचे इस पावन व्रत से जुड़ी मुख्य जानकारी दी गई है।
वैदिक ज्योतिष में मंगल ग्रह को ऊर्जा साहस और रक्त का कारक माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार मंगल देव की उत्पत्ति भगवान शिव के पसीने की बूंद से हुई थी। इसी कारण मंगलवार के दिन जब त्रयोदशी तिथि का संयोग बनता है तो शिव पूजा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। कुंडली में यदि मंगल दोष हो या मंगल कमजोर अवस्था में हो तो भौम प्रदोष का व्रत अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है। इस दिन सच्चे भाव से शिव आराधना करने से मंगल जनित सभी दोष शांत हो जाते हैं और जातक को कर्ज से शीघ्र मुक्ति मिलती है।
प्रदोष काल वह समय है जब दिन और रात का मिलन होता है। यह सूर्यास्त के तुरंत बाद का समय होता है। शिव पुराण के अनुसार इस समय भगवान शिव कैलाश पर्वत पर आनंद तांडव करते हैं और सभी देवता उनकी स्तुति करते हैं। इस ब्रह्मांडीय बेला में प्रकृति की ऊर्जा अत्यंत शांत और ग्रहणशील होती है। जो साधक इस समय भगवान शिव का ध्यान करता है उसकी प्रार्थना सीधे ईश्वरीय चेतना तक पहुंचती है। यह समय सांसारिक उलझनों को भूलकर अपनी आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का एक दुर्लभ अवसर प्रदान करता है।
इस दिन की ऊर्जा का पूरा लाभ उठाने के लिए प्रामाणिक वैदिक विधि से पूजा करना आवश्यक है। साधक को दिन भर सात्विक विचार रखने चाहिए।
भौम प्रदोष व्रत केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं है बल्कि यह व्यक्ति के जीवन में अनुशासन लाता है। व्रत के दौरान जब मनुष्य अपनी इंद्रियों और आहार पर नियंत्रण रखता है तो उसकी इच्छा शक्ति मजबूत होती है। यह इच्छा शक्ति जीवन की हर बाधा को पार करने में सहायता करती है। मंगल देव साहस के प्रतीक हैं और शिव कल्याण के देवता हैं। इन दोनों की संयुक्त ऊर्जा व्यक्ति के भीतर के भय और क्रोध को नष्ट कर देती है। सांसारिक सफलताओं के साथ साथ यह व्रत अंतर्मन की शांति और आध्यात्मिक उन्नति भी प्रदान करता है।
भौम प्रदोष व्रत 2027 में किस दिन है?
यह पवित्र व्रत 5 जनवरी 2027 मंगलवार के दिन मनाया जाएगा।
प्रदोष काल का समय क्या होता है?
सूर्यास्त के तुरंत बाद के लगभग ढाई घंटे के समय को प्रदोष काल कहा जाता है।
इस व्रत का सबसे बड़ा लाभ क्या है?
इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को कर्ज से मुक्ति मिलती है और शारीरिक स्वास्थ्य प्राप्त होता है।
भौम प्रदोष के दिन शिवलिंग पर क्या चढ़ाना चाहिए?
इस दिन शिवलिंग पर लाल चंदन और लाल पुष्प चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
क्या इस दिन हनुमान जी की पूजा की जा सकती है?
हाँ मंगल ग्रह की शांति के लिए इस दिन भगवान शिव के साथ हनुमान जी की पूजा भी फलदायी होती है।
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