बुध प्रदोष व्रत जनवरी 2027 कैसे करें?

By पं. नीलेश शर्मा

प्रदोष काल में शिव का आनंद तांडव, बुध ग्रह की कृपा और विवेक जगाने का व्रत

बुध प्रदोष व्रत जनवरी 2027: मुहूर्त, विधि और कथा

जब संध्या की लाली में महादेव नृत्य करते हैं

दिन और रात के मिलन का वह क्षण, जब सूर्य अस्त हो रहा होता है और आकाश में हल्की लालिमा बिखरी होती है, सनातन परंपरा में अत्यंत पवित्र माना गया है। इसी संध्या काल को प्रदोष कहते हैं। मान्यता है कि त्रयोदशी तिथि के प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर आनंद तांडव करते हैं और सभी देवता उनकी स्तुति के लिए वहां उपस्थित रहते हैं। इसीलिए इस समय की गई शिव उपासना को अत्यंत फलदायी माना गया है।

जब प्रदोष व्रत बुधवार को पड़ता है, तो उसे बुध प्रदोष या सौम्य प्रदोष कहा जाता है। वर्ष 2027 में पौष शुक्ल त्रयोदशी पर बुध प्रदोष व्रत बुधवार, 20 जनवरी को रखा जाएगा। यह व्रत भगवान शिव की कृपा के साथ साथ बुध ग्रह से जुड़े शुभ फल, यानी बुद्धि, वाणी, शिक्षा और व्यापार में उन्नति के लिए विशेष माना जाता है।

विवरण जानकारी
व्रत का नाम बुध प्रदोष व्रत (सौम्य प्रदोष)
तिथि 20 जनवरी 2027
वार बुधवार
हिंदू मास पौष
पक्ष शुक्ल पक्ष
तिथि त्रयोदशी
प्रदोष पूजा मुहूर्त (दिल्ली) सायं लगभग 5:50 से रात 8:25 बजे तक
दिल्ली में सूर्योदय प्रातः लगभग 7:15 बजे
दिल्ली में सूर्यास्त सायं लगभग 5:50 बजे
राहु काल (दिल्ली) दोपहर लगभग 12:30 से 1:50 बजे तक
सूर्य की स्थिति मकर राशि
आराध्य देव भगवान शिव और माता पार्वती

प्रदोष व्रत की मुख्य पूजा सूर्यास्त के आसपास के प्रदोष काल में ही की जाती है। प्रदोष काल का सटीक समय हर शहर में सूर्यास्त के अनुसार बदलता है, इसलिए अपने शहर का स्थानीय पंचांग अवश्य देखें। इसी दिन सुबह द्वादशी तिथि कुछ समय तक रहेगी, इसलिए जो वैष्णव भक्त एकादशी का पारण कर रहे हैं, वे द्वादशी समाप्त होने से पहले पारण कर लें।

एक नज़र में मुख्य अनुष्ठान

  • प्रातः स्नान और भगवान शिव के सामने व्रत का संकल्प
  • दिन भर उपवास या फलाहार
  • सूर्यास्त से पहले दोबारा स्नान और स्वच्छ वस्त्र
  • प्रदोष काल में शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक
  • बेलपत्र, धतूरा, सफेद पुष्प, चंदन और अक्षत का अर्पण
  • नंदी जी की पूजा
  • बुध प्रदोष व्रत कथा का पाठ और शिव आरती
  • हरी वस्तुओं और मूंग का दान

प्रदोष व्रत क्या है?

प्रदोष व्रत हर महीने दो बार आता है, एक बार शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को और एक बार कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को। इस प्रकार वर्ष में लगभग 24 प्रदोष व्रत होते हैं। यह व्रत भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और स्कंद पुराण सहित कई ग्रंथों में इसकी महिमा का वर्णन मिलता है।

प्रदोष व्रत का नाम उस दिन के वार के अनुसार बदल जाता है और हर वार के प्रदोष का अपना विशेष फल माना गया है।

वार प्रदोष का नाम मान्य फल
रविवार रवि प्रदोष स्वास्थ्य, दीर्घायु और यश
सोमवार सोम प्रदोष मनोकामना पूर्ति और मन की शांति
मंगलवार भौम प्रदोष रोग मुक्ति और ऋण से छुटकारा
बुधवार बुध या सौम्य प्रदोष बुद्धि, शिक्षा और कार्य सिद्धि
गुरुवार गुरु प्रदोष शत्रु पर विजय और पितृ कृपा
शुक्रवार शुक्र प्रदोष सौभाग्य और दांपत्य सुख
शनिवार शनि प्रदोष संतान सुख और शनि शांति

बुध प्रदोष को सौम्य प्रदोष इसलिए भी कहा जाता है क्योंकि बुध ग्रह को ज्योतिष में सौम्य यानी कोमल और शुभ ग्रह माना गया है। इस व्रत का स्वभाव भी शांत, बुद्धिमत्ता से भरा और कार्यों को सरल बनाने वाला माना जाता है।

प्रदोष काल इतना पवित्र क्यों है?

प्रदोष काल की पवित्रता से कई पौराणिक प्रसंग जुड़े हैं। सबसे प्रसिद्ध प्रसंग समुद्र मंथन का है। जब मंथन से भयंकर हलाहल विष निकला, तो उसकी ज्वाला से तीनों लोक जलने लगे। तब सभी देवताओं की प्रार्थना पर भगवान शिव ने उस विष को पीकर अपने कंठ में धारण कर लिया और नीलकंठ कहलाए। परंपरा के अनुसार यह घटना त्रयोदशी के प्रदोष काल से जोड़ी जाती है, जब देवताओं ने कृतज्ञता से शिव की स्तुति की और शिव ने प्रसन्न होकर नंदी के सींगों के बीच आनंद तांडव किया।

चंद्रमा की कथा

प्रदोष व्रत से चंद्रमा की एक सुंदर कथा भी जुड़ी है। प्रजापति दक्ष ने अपनी 27 पुत्रियों का विवाह चंद्रमा से किया था। ये 27 पुत्रियां ही 27 नक्षत्र हैं। चंद्रमा इन सबमें रोहिणी से सबसे अधिक प्रेम करते थे और बाकी पत्नियों की उपेक्षा करते थे। दुखी पुत्रियों ने अपने पिता से शिकायत की। दक्ष ने चंद्रमा को कई बार समझाया, लेकिन जब वे नहीं माने, तो दक्ष ने उन्हें क्षय रोग का श्राप दे दिया।

श्राप के कारण चंद्रमा का तेज घटने लगा। तब उन्होंने प्रभास क्षेत्र में भगवान शिव की कठोर तपस्या की। शिव ने प्रसन्न होकर उन्हें श्राप से मुक्ति का मार्ग दिया, जिससे चंद्रमा 15 दिन घटते और 15 दिन बढ़ते हैं। शिव ने चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारण किया और चंद्रशेखर कहलाए। मान्यता है कि यह कृपा भी प्रदोष काल में ही हुई थी। इसी कारण प्रदोष व्रत को रोग मुक्ति और जीवन के अंधकार से निकलने का व्रत भी माना जाता है।

बुध प्रदोष व्रत की कथा

बुध प्रदोष से जुड़ी एक लोक कथा प्रचलित है। एक व्यक्ति का नया विवाह हुआ था। कुछ समय बाद उसकी पत्नी अपने मायके चली गई। एक दिन वह व्यक्ति अपनी पत्नी को लेने ससुराल पहुंचा। वह बुधवार का दिन था। ससुराल वालों ने समझाया कि बुधवार को पत्नी को विदा कराकर ले जाना शुभ नहीं माना जाता, इसलिए एक दिन रुक जाएं। लेकिन वह व्यक्ति नहीं माना और पत्नी को लेकर उसी दिन चल पड़ा।

रास्ते में पत्नी को प्यास लगी। पति पानी लेने गया। जब वह लौटा, तो उसने देखा कि उसकी पत्नी एक ऐसे व्यक्ति के साथ हंसकर बातें कर रही है, जिसकी शक्ल बिल्कुल उसी जैसी थी, यहां तक कि वस्त्र भी वैसे ही थे। दोनों में विवाद हुआ और बात राजा तक पहुंची। पत्नी भी पहचान नहीं पा रही थी कि उसका असली पति कौन है।

तब वह व्यक्ति घबराकर भगवान शिव का स्मरण करने लगा। उसने प्रार्थना की कि हे भोलेनाथ, मुझसे भूल हुई जो मैंने बड़ों की बात नहीं मानी। मेरी रक्षा करें। मैं बुध प्रदोष का व्रत करूंगा। उसकी सच्ची प्रार्थना सुनते ही वह दूसरा व्यक्ति अदृश्य हो गया। पति पत्नी सकुशल घर लौटे और उन्होंने नियम से बुध प्रदोष का व्रत करना आरंभ किया।

कथा का संदेश

यह कथा बताती है कि अहंकार और जल्दबाजी में लिए गए निर्णय भ्रम पैदा करते हैं। भ्रम का विषय बुद्धि से जुड़ा है और बुद्धि के कारक बुध हैं। जब बुद्धि भ्रमित हो, सत्य और असत्य में अंतर न दिखे तब शिव की शरण में जाने से विवेक लौट आता है। बुध प्रदोष का व्रत इसी विवेक की रक्षा का व्रत है।

बुध प्रदोष व्रत की पूजा विधि

  1. सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। बुधवार होने के कारण हरे रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।
  2. भगवान शिव के सामने जल, अक्षत और पुष्प लेकर व्रत का संकल्प लें।
  3. दिन भर उपवास रखें। जो पूरा उपवास न कर सकें, वे फल और दूध ले सकते हैं।
  4. सूर्यास्त से लगभग एक घंटा पहले दोबारा स्नान करें और पूजा की तैयारी करें।
  5. पूजा स्थान को साफ करके उत्तर पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  6. शिवलिंग पर पहले जल, फिर दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल से अभिषेक करें।
  7. शिवलिंग पर चंदन, भस्म, अक्षत, बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और सफेद पुष्प अर्पित करें।
  8. माता पार्वती को लाल चुनरी और श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करें।
  9. नंदी जी की पूजा करें। परंपरा में भक्त अपनी मनोकामना नंदी जी के कान में कहते हैं।
  10. "ॐ नमः शिवाय" का 108 बार जप करें।
  11. बुध प्रदोष व्रत कथा पढ़ें या सुनें और शिव चालीसा का पाठ करें।
  12. घी के दीपक से शिव आरती करें।
  13. पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोलें या अपनी परंपरा के अनुसार अगले दिन पारण करें।

पूजा सामग्री

सामग्री महत्व
बेलपत्र शिव को सबसे प्रिय, तीन पत्तियां त्रिदेव का प्रतीक
धतूरा और आक के फूल शिव के वैराग्य स्वरूप को प्रिय
पंचामृत दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से अभिषेक
भस्म नश्वरता और वैराग्य का प्रतीक
चंदन शीतलता और शांति का प्रतीक
हरी मूंग बुध ग्रह की प्रसन्नता के लिए
घी का दीपक आरती और प्रकाश के लिए

बुध प्रदोष के प्रमुख मंत्र

मंत्र उद्देश्य जप संख्या
ॐ नमः शिवाय शिव कृपा और मन की शुद्धि 108 बार
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्, उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् महामृत्युंजय मंत्र, रोग और भय से मुक्ति 108 बार
ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः बुध का बीज मंत्र, बुद्धि और वाणी 108 बार
ॐ गं गणपतये नमः बुध के अधिष्ठाता गणेश की कृपा 21 बार

बुध प्रदोष का ज्योतिषीय महत्व

वैदिक ज्योतिष में बुध ग्रह बुद्धि, तर्क, वाणी, शिक्षा, गणित, लेखन, व्यापार, संचार, त्वचा और तंत्रिका तंत्र के कारक हैं। मिथुन और कन्या राशि के स्वामी बुध हैं और कन्या राशि में वे उच्च के होते हैं। जब कुंडली में बुध कमजोर हो, पाप ग्रहों से पीड़ित हो या अस्त हो तब व्यक्ति को निर्णय लेने में कठिनाई, बोलने में संकोच, पढ़ाई में मन न लगना, व्यापार में हानि या त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

बुधवार को प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव की कृपा के साथ बुध ग्रह भी प्रसन्न होते हैं, ऐसी मान्यता है। शिव को ज्ञान का आदि स्रोत माना गया है। वे आदि गुरु हैं और दक्षिणामूर्ति रूप में मौन से ही ज्ञान देते हैं। इसलिए बुद्धि से जुड़ी समस्याओं के लिए बुध प्रदोष पर शिव उपासना को विशेष रूप से उपयोगी माना जाता है।

2027 में बुध प्रदोष पौष शुक्ल त्रयोदशी को है। शुक्ल त्रयोदशी पर चंद्रमा लगभग पूर्ण होने की ओर होते हैं और प्रदोष काल में आकाश में उज्ज्वल दिखाई देते हैं। चंद्रशेखर शिव की पूजा के समय आकाश में बढ़ता हुआ चंद्रमा इस व्रत को और भी मनोहर बना देता है। सूर्य इस समय मकर राशि में हैं और परंपरा के अनुसार उत्तरायण का पुण्य काल चल रहा है।

बुध से जुड़ी समस्याओं के उपाय

समस्या बुध प्रदोष पर उपाय
पढ़ाई में मन न लगना शिवलिंग पर दूध चढ़ाएं और "ॐ नमः शिवाय" जपें
वाणी दोष या बोलने में संकोच बुध बीज मंत्र का 108 बार जप करें
व्यापार में हानि हरी मूंग और हरे वस्त्र का दान करें
त्वचा संबंधी परेशानी शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाएं, महामृत्युंजय जप करें
निर्णय में भ्रम बुध प्रदोष कथा पढ़ें और गणेश जी को दूर्वा चढ़ाएं
बुध की महादशा या अंतर्दशा गाय को हरा चारा खिलाएं

बुध प्रदोष व्रत के लाभ

  • बुद्धि, स्मरण शक्ति और एकाग्रता में वृद्धि
  • विद्यार्थियों के लिए शिक्षा और परीक्षा में सफलता की मान्यता
  • वाणी में मधुरता और संवाद कौशल
  • व्यापार और लेखन से जुड़े कार्यों में उन्नति
  • भ्रम और मानसिक उलझन से मुक्ति
  • भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा से परिवार में सुख शांति

क्या करें और क्या न करें

क्या करें क्या न करें
प्रदोष काल में ही मुख्य पूजा करें राहु काल में पूजा का आरंभ न करें
हरे वस्त्र पहनें और हरी वस्तुओं का दान करें शिवलिंग पर तुलसी, हल्दी और केतकी न चढ़ाएं
बेलपत्र उल्टा करके चिकनी सतह शिवलिंग की ओर रखें कटे फटे बेलपत्र न चढ़ाएं
नंदी जी की पूजा करें शिवलिंग की पूरी परिक्रमा न करें, आधी परिक्रमा करें
विद्यार्थियों को पुस्तकें दान करें झूठ, कटु वचन और विवाद से बचें

शिवलिंग की परिक्रमा के समय जलाधारी, यानी जिस स्थान से अभिषेक का जल बहता है, उसे लांघा नहीं जाता। इसलिए शिवलिंग की आधी परिक्रमा करके वापस लौटने की परंपरा है।

जब विवेक की ज्योति शिव की कृपा से जगती है

बुध प्रदोष व्रत केवल उपवास का दिन नहीं बल्कि बुद्धि को शुद्ध और विवेक को जागृत करने का अवसर है। जिस संध्या में महादेव आनंद में नृत्य करते हैं, उसी संध्या में भक्त का मन भी हल्का होकर शिव के चरणों में स्थिर हो सकता है। 20 जनवरी 2027 को, बुधवार की संध्या, जब शुक्ल पक्ष का चंद्रमा आकाश में चमक रहा होगा तब बेलपत्र की हर पत्ती और "ॐ नमः शिवाय" का हर जप जीवन के भ्रम को दूर करके सही मार्ग दिखा सकता है। जहां शिव की कृपा होती है, वहां बुद्धि कभी भटकती नहीं।

FAQ

बुध प्रदोष व्रत जनवरी 2027 कब है?

जनवरी 2027 का बुध प्रदोष व्रत बुधवार, 20 जनवरी को पौष शुक्ल त्रयोदशी पर है।

बुध प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?

दिल्ली में प्रदोष पूजा का समय सायं लगभग 5:50 से रात 8:25 बजे तक रहेगा। अपने शहर का समय स्थानीय पंचांग से देखें।

बुध प्रदोष व्रत से क्या लाभ मिलता है?

बुध प्रदोष व्रत बुद्धि, शिक्षा, वाणी और व्यापार में उन्नति के लिए शुभ माना जाता है। इससे भगवान शिव और बुध ग्रह दोनों की कृपा मिलती है।

प्रदोष व्रत में शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं?

शिवलिंग पर जल, पंचामृत, बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, सफेद पुष्प, चंदन और भस्म चढ़ाएं। तुलसी और हल्दी न चढ़ाएं।

प्रदोष काल क्या होता है?

सूर्यास्त के आसपास का संध्या समय प्रदोष काल कहलाता है। मान्यता है कि इस समय भगवान शिव कैलाश पर आनंद तांडव करते हैं।

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पं. नीलेश शर्मा

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