By पं. सुव्रत शर्मा
पौर्णमास इष्टि की प्राचीन वैदिक विधि, ऋत्विजों की भूमिका और हर आहुति में छिपा जीवन का गहरा संदेश।

इष्टि शनिवार, 23 जनवरी 2027 को पौष शुक्ल पूर्णिमा पर है। यह पौर्णमास इष्टि है, जो एक दिन पहले, 22 जनवरी को हुए अन्वाधान के बाद संपन्न होती है। इष्टि सामान्यतः सूर्योदय के बाद दिन के पूर्वार्ध में की जाती है, जिसमें अग्नि और सोम देवता को पुरोडाश और घी की आहुति दी जाती है।
इष्टि वह वैदिक श्रौत यज्ञ है जिसमें पवित्र अग्नि के माध्यम से देवताओं को पुरोडाश, घी और अन्य हवि की आहुतियां अर्पित की जाती हैं।
इष्टि शब्द संस्कृत की "यज्" धातु से बना है, जिसका अर्थ है पूजा करना या अर्पित करना। वैदिक परंपरा में पूर्णिमा और अमावस्या पर होने वाली इष्टि को दर्श पौर्णमास इष्टि कहा जाता है। श्रौत सूत्रों में इसे सभी इष्टियों का मूल आदर्श माना गया है और अग्निहोत्री गृहस्थ के लिए इसे आजीवन करने का विधान बताया गया है।
| पंचांग तत्व | विवरण |
|---|---|
| अनुष्ठान का नाम | इष्टि (पौर्णमास इष्टि) |
| दिनांक | 23 जनवरी 2027, शनिवार |
| हिंदू मास | पौष मास, शुक्ल पक्ष |
| तिथि | पूर्णिमा, जिसके बाद प्रतिपदा आरंभ |
| पूर्व अनुष्ठान | अन्वाधान, 22 जनवरी 2027 |
| दिल्ली में सूर्योदय | प्रातः लगभग 7:13 बजे |
| राहु काल (दिल्ली) | प्रातः लगभग 9:50 से 11:10 बजे तक |
| चंद्रमा की स्थिति | कर्क राशि |
| सूर्य की स्थिति | मकर राशि |
| मुख्य देवता | अग्नि और अग्नि सोम |
| उसी दिन का पंचांग संदर्भ | उत्तर भारत में माघ मास का आरंभ |
इष्टि की सटीक तिथि पर्व संधि, यानी पूर्णिमा के समाप्त होने के समय के आधार पर श्रौत पंचांग से निश्चित की जाती है। वैदिक परिवार अपने कुल पुरोहित के मार्गदर्शन में ही इसका समय तय करते हैं।
दर्श पौर्णमास इष्टि महीने में दो बार होने वाला वैदिक यज्ञ है। अमावस्या के बाद होने वाली इष्टि को दर्श इष्टि और पूर्णिमा के बाद होने वाली इष्टि को पौर्णमास इष्टि कहते हैं। दोनों में देवता और आहुतियां अलग होती हैं, लेकिन विधि का ढांचा लगभग एक जैसा रहता है।
दर्श का अर्थ है अमावस्या, जब चंद्रमा केवल सूर्य के साथ दिखाई देता है और पौर्णमास का अर्थ है पूर्णिमा से संबंधित।
| आधार | पौर्णमास इष्टि | दर्श इष्टि |
|---|---|---|
| समय | पूर्णिमा के बाद | अमावस्या के बाद |
| प्रथम प्रधान आहुति | अग्नि के लिए पुरोडाश | अग्नि के लिए पुरोडाश |
| द्वितीय प्रधान आहुति | अग्नि और सोम के लिए पुरोडाश | इंद्र और अग्नि के लिए पुरोडाश, या इंद्र के लिए दूध दही का हवि |
| उपांशु याज | मौन जप के साथ आहुति | परंपरा के अनुसार |
चंद्रमा की बढ़ती और घटती कलाओं के साथ यह यज्ञ समय के प्राकृतिक चक्र से जुड़ा रहता है। इस प्रकार इष्टि केवल पूजा नहीं बल्कि मनुष्य के जीवन को ब्रह्मांड की लय के साथ जोड़ने का एक वैदिक विधान है।
दर्श पौर्णमास इष्टि में यजमान, उसकी पत्नी और 4 ऋत्विज भाग लेते हैं। ये ऋत्विज अध्वर्यु, होता, ब्रह्मा और आग्नीध्र हैं। हर ऋत्विज का कार्य निश्चित होता है और सभी मिलकर यज्ञ को पूर्ण विधि से संपन्न करते हैं।
ऋत्विज वह योग्य वैदिक ब्राह्मण है जो यजमान की ओर से यज्ञ के निश्चित कर्म संपन्न करता है।
| भागीदार | वेद या भूमिका | मुख्य कार्य |
|---|---|---|
| यजमान | यज्ञ का आयोजक | संकल्प लेना और यज्ञ का फल प्राप्त करना |
| यजमान पत्नी | सहधर्मिणी | पत्नी संयाज जैसे विशेष कर्मों में सहभागिता |
| अध्वर्यु | यजुर्वेद | यज्ञ के सभी हस्त कर्म, सामग्री और आहुति |
| होता | ऋग्वेद | देवताओं के आवाहन के लिए ऋचाओं का पाठ |
| ब्रह्मा | अथर्ववेद और समग्र ज्ञान | यज्ञ का मौन निरीक्षण और त्रुटियों का सुधार |
| आग्नीध्र | सहायक | अग्नि की देखभाल और अध्वर्यु की सहायता |
यजमान पत्नी की भागीदारी यह बताती है कि वैदिक यज्ञ में पति और पत्नी दोनों समान रूप से धर्म के सहभागी माने गए हैं। अकेला पुरुष श्रौत यज्ञ का पूर्ण अधिकारी नहीं माना गया।
इष्टि में पहले हवि तैयार की जाती है, फिर वेदी पर कुशा बिछाई जाती है। इसके बाद 5 प्रयाज आहुतियां, मुख्य देवताओं को प्रधान आहुतियां, स्विष्टकृत आहुति, इडा भक्षण और 3 अनुयाज आहुतियां दी जाती हैं। अंत में दक्षिणा देकर यज्ञ पूर्ण होता है।
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| पुरोडाश | चावल या जौ के आटे से बनी पवित्र रोटी, जो देवताओं को अर्पित होती है |
| कपाल | मिट्टी के खपरे, जिन पर पुरोडाश पकाया जाता है |
| बर्हि | वेदी पर बिछाई जाने वाली कुशा |
| प्रयाज | प्रधान आहुतियों से पहले की आहुतियां |
| स्विष्टकृत | वह अग्नि जो यज्ञ को सही रूप से पूर्ण करती है |
| इडा | यज्ञ के बाद ग्रहण किया जाने वाला पवित्र शेष भाग |
| अनुयाज | प्रधान आहुतियों के बाद की आहुतियां |
| दक्षिणा | ऋत्विजों को दिया जाने वाला सम्मान और दान |
इष्टि का हर कर्म जीवन का एक गहरा संदेश देता है। स्विष्टकृत आहुति सिखाती है कि हर कर्म में त्रुटि स्वीकार करनी चाहिए, इडा सिखाती है कि प्रसाद को बांटकर ग्रहण करना चाहिए और दक्षिणा सिखाती है कि ज्ञान देने वालों के प्रति कृतज्ञ रहना चाहिए।
स्विष्टकृत आहुति का भाव अत्यंत सुंदर है। यज्ञ करने वाला मानता है कि मनुष्य से भूल हो सकती है, इसलिए वह अग्नि से प्रार्थना करता है कि जो कमी रह गई हो, उसे पूरा करें। यह विनम्रता का पाठ है।
पूर्ण श्रौत इष्टि केवल अग्निहोत्री परिवार योग्य ऋत्विजों के साथ करते हैं। फिर भी कोई भी गृहस्थ इस दिन इसके भाव को सरल रूप में अपना सकता है।
| मंत्र | अर्थ | प्रयोग |
|---|---|---|
| ॐ अग्नये स्वाहा, इदं अग्नये न मम | यह आहुति अग्नि के लिए है, मेरी नहीं | अग्नि को आहुति |
| ॐ अग्नीषोमाभ्यां स्वाहा, इदं अग्नीषोमाभ्यां न मम | यह आहुति अग्नि और सोम के लिए है, मेरी नहीं | पौर्णमास की द्वितीय आहुति |
| ॐ अग्नये स्विष्टकृते स्वाहा, इदं अग्नये स्विष्टकृते न मम | यह आहुति यज्ञ को पूर्ण करने वाली अग्नि के लिए है, मेरी नहीं | स्विष्टकृत आहुति |
| ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् | हम सविता देव के श्रेष्ठ तेज का ध्यान करते हैं, वे हमारी बुद्धि को प्रेरित करें | गृहस्थों के सरल हवन में |
23 जनवरी 2027 को चंद्रमा कर्क राशि में और सूर्य मकर राशि में होंगे। पूर्णिमा पर सूर्य और चंद्रमा आमने सामने होते हैं, जिसे वैदिक परंपरा में सोम के पूर्ण होने का समय माना गया है। इसीलिए पौर्णमास इष्टि में अग्नि के साथ सोम को भी आहुति दी जाती है।
वैदिक दृष्टि में अग्नि सूर्य के तेज का और सोम चंद्रमा के अमृत का प्रतीक है। पौर्णमास इष्टि में अग्नि और सोम दोनों की उपासना सूर्य और चंद्र के बीच संतुलन का भाव है। इस वर्ष यह दिन शनिवार है, जो अनुशासन और नियमित कर्म के कारक शनि का दिन है और श्रौत यज्ञ भी नियमितता और अनुशासन का ही दूसरा नाम है।
| ग्रह | संभावित समस्या | इष्टि के दिन उपाय |
|---|---|---|
| सूर्य | आत्मबल की कमी | प्रातः सूर्य को अर्घ्य दें और हवन में गायत्री आहुति दें |
| चंद्रमा | मानसिक अस्थिरता | चंद्र देव का स्मरण करके दूध से बनी वस्तु का दान करें |
| शनि | कर्म में रुकावट और आलस्य | काले तिल से आहुति दें और तिल का दान करें |
| बृहस्पति | गुरु कृपा में कमी | किसी वैदिक विद्वान को दक्षिणा दें |
| मंगल | ऊर्जा की कमी | घी के दीपक से अग्नि उपासना करें |
इष्टि के दिन पवित्रता, संयम और कृतज्ञता सबसे महत्वपूर्ण हैं। इस दिन हवन, गायत्री जप, प्रसाद को बांटना और विद्वानों का सम्मान शुभ है। अग्नि का अनादर, तामसिक भोजन, अहंकार और यज्ञ को केवल दिखावा बनाना इस दिन वर्जित माना गया है।
इष्टि यज्ञ याद दिलाता है कि वैदिक जीवन का केंद्र त्याग और कृतज्ञता है। हर आहुति के साथ बोला गया "न मम" का भाव मनुष्य को अपने अहंकार से मुक्त करता है और उसे ब्रह्मांड की विशाल व्यवस्था का एक विनम्र भागीदार बनाता है।
23 जनवरी 2027 को, जब पौष पूर्णिमा के बाद माघ मास का पवित्र आरंभ होगा, तब घर में दी गई एक छोटी सी आहुति भी उसी प्राचीन यज्ञ परंपरा से जोड़ सकती है, जो हजारों वर्षों से पूर्णिमा और अमावस्या पर अग्नि को प्रज्वलित रखती आई है।
इष्टि 2027 कब है?
इष्टि शनिवार, 23 जनवरी 2027 को पौष शुक्ल पूर्णिमा पर है। यह पौर्णमास इष्टि है, जो 22 जनवरी के अन्वाधान के बाद होती है।
इष्टि यज्ञ क्या होता है?
इष्टि वह वैदिक श्रौत यज्ञ है जिसमें पवित्र अग्नि के माध्यम से देवताओं को पुरोडाश और घी की आहुतियां दी जाती हैं। यह हर पूर्णिमा और अमावस्या के बाद किया जाता है।
पौर्णमास इष्टि में किन देवताओं को आहुति दी जाती है?
पौर्णमास इष्टि में मुख्य रूप से अग्नि और अग्नि सोम को पुरोडाश की आहुति दी जाती है। इसके साथ उपांशु याज और स्विष्टकृत आहुति भी दी जाती है।
इष्टि में कितने ऋत्विज होते हैं?
दर्श पौर्णमास इष्टि में 4 ऋत्विज होते हैं, जो अध्वर्यु, होता, ब्रह्मा और आग्नीध्र हैं। यजमान और उसकी पत्नी भी यज्ञ में सहभागी होते हैं।
स्विष्टकृत आहुति का क्या अर्थ है?
स्विष्टकृत आहुति उस अग्नि को दी जाती है जो यज्ञ को सही रूप से पूर्ण करती है। इसका भाव है कि यज्ञ में रह गई किसी भी भूल को अग्नि देव सुधार दें।
पाएं अपनी सटीक कुंडली
कुंडली बनाएं
अनुभव: 20
इनसे पूछें: Family Planning, Career
इनके क्लाइंट: Punjab, Haryana, Delhi
इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें
ज़ोडियाक (ZODIAQ) एक ऑनलाइन वैदिक ज्योतिष प्लेटफॉर्म है। जिन यूज़र्स को ज्योतिषीय सलाह की आवश्यकता है उन्हें ये अनुभवी ज्योतिषियों से जोड़ता है। हमारे यूज़र्स निशुल्क कुंडली भी बनाते हैं और कुंडली मिलान करते हैं। साथ ही ज़ोडियाक (ZODIAQ) ज्योतिषियों को भी कई उपयोगी सेवाएँ प्रदान करता है। ज्योतिषी ज़ोडियाक (ZODIAQ) की विभिन्न सुविधाओं का उपयोग कर अपने ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करते हैं।
अनुभवी ज्योतिषियों से सलाह लें और उनका मार्गदर्शन प्राप्त करें। आप हमारे प्लेटफॉर्म से अनुभवी ज्योतिषियों द्वारा तैयार की गई हस्तलिखित जन्म पत्रिका और जीवन भविष्यवाणी रिपोर्ट भी मंगवा सकते हैं। सटीक कुंडली बनाएं, कुंडली मिलान करें और राशिफल व मुहूर्त की जानकारी प्राप्त करें। हमारी ऑनलाइन लाइब्रेरी का उपयोग करें जहां आपको सभी जरूरी ज्योतिषीय और आध्यात्मिक जानकारी एक जगह मिलेगी।
अपने ग्राहकों के लिए सटीक कुंडली बनाएं और एक बार में 5 लोगों तक का कुंडली मिलान करें। ज़ोडियाक (ZODIAQ) की मदद से अपने ग्राहकों के लिए विस्तृत जन्म पत्रिका रिपोर्ट तैयार करें। क्लाइंट डायरेक्टरी में ग्राहकों का विवरण सेव करके किसी भी समय उन्हें एक्सेस करें। हर दिन आपने कितने लोगों को परामर्श दिया यह ट्रैक कर के अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाएं।
WELCOME TO
Right Decisions at the right time with ZODIAQ