By पं. अभिषेक शर्मा
माघ संकष्टी पर भगवान गणेश के लंबोदर स्वरूप की उपासना, क्रोधासुर की कथा और क्रोध शांति के वैदिक उपाय।

लंबोदर संकष्टी चतुर्थी 2027 सोमवार, 25 जनवरी को माघ कृष्ण चतुर्थी पर है। इस दिन भगवान गणेश के लंबोदर स्वरूप की पूजा की जाती है। व्रत सूर्योदय से चंद्रोदय तक रखा जाता है और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर खोला जाता है। दिल्ली में चंद्रोदय रात लगभग 8:45 से 9:15 बजे के बीच होने की संभावना है।
लंबोदर संकष्टी माघ मास की संकष्टी चतुर्थी है, जिसमें बड़े उदर वाले भगवान गणेश के लंबोदर स्वरूप की उपासना की जाती है।
हर महीने की संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश के एक अलग स्वरूप की पूजा का विधान है। माघ मास की संकष्टी में लंबोदर स्वरूप की पूजा होती है। इसी दिन उत्तर भारत में सकट चौथ भी मनाई जाती है, इसलिए यह चतुर्थी वर्ष की सबसे बड़ी संकष्टी मानी जाती है।
| पंचांग तत्व | विवरण |
|---|---|
| व्रत का नाम | लंबोदर संकष्टी चतुर्थी |
| दिनांक | 25 जनवरी 2027, सोमवार |
| हिंदू मास | माघ मास, कृष्ण पक्ष (पूर्णिमांत) |
| तिथि | चतुर्थी |
| गणेश स्वरूप | लंबोदर |
| चंद्रोदय (दिल्ली) | रात लगभग 8:45 से 9:15 बजे के बीच |
| दिल्ली में सूर्योदय | प्रातः लगभग 7:12 बजे |
| राहु काल (दिल्ली) | प्रातः लगभग 8:30 से 9:50 बजे तक |
| सूर्य की स्थिति | मकर राशि |
| व्रत का पारण | चंद्र अर्घ्य के बाद |
| उसी दिन का अन्य पर्व | सकट चौथ, तिलकुट चौथ |
अमांत पंचांग वाले क्षेत्रों, जैसे महाराष्ट्र और कर्नाटक में, इसी तिथि को पौष कृष्ण चतुर्थी कहा जाता है, लेकिन व्रत उसी दिन होता है। चंद्रोदय का सटीक समय अपने शहर के स्थानीय पंचांग से अवश्य देखें।
लंबोदर का अर्थ है बड़े या विशाल उदर वाले। मान्यता है कि भगवान गणेश के उदर में संपूर्ण ब्रह्मांड समाया है। उनका विशाल उदर यह सिखाता है कि जीवन के अच्छे और बुरे, दोनों अनुभवों को धैर्य से पचाकर शांत रहना चाहिए।
लंबोदर शब्द "लंब" यानी बड़ा और "उदर" यानी पेट से मिलकर बना है।
भगवान गणेश के 12 प्रसिद्ध नामों में लंबोदर नाम पांचवां है। इन 12 नामों का स्मरण हर शुभ कार्य से पहले करने की परंपरा है।
भगवान गणेश के बड़े कान सिखाते हैं कि अधिक सुनें, छोटा मुख सिखाता है कि कम बोलें और विशाल उदर सिखाता है कि सब कुछ सहन करें। इस दृष्टि से लंबोदर स्वरूप धैर्य और सहनशीलता का प्रतीक है।
मुद्गल पुराण में भगवान गणेश के 8 अवतारों का वर्णन है, जिनमें लंबोदर पांचवां अवतार है। इस अवतार में भगवान गणेश ने क्रोधासुर नाम के असुर को पराजित किया था। इसलिए लंबोदर स्वरूप की पूजा क्रोध पर विजय पाने के लिए विशेष मानी जाती है।
कथा के अनुसार क्रोधासुर ने कठोर तप करके शक्तियां प्राप्त कीं और तीनों लोकों में आतंक फैला दिया। उसका स्वभाव ही क्रोध था, जो जहां जाता वहां विनाश फैलाता। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान गणेश लंबोदर रूप में प्रकट हुए। उनके तेज के सामने क्रोधासुर टिक नहीं सका और अंत में उसने भगवान की शरण ली।
मुद्गल पुराण के 8 अवतार वास्तव में मनुष्य के भीतर के 8 दोषों पर विजय के प्रतीक हैं।
| गणेश अवतार | पराजित असुर | असुर किस दोष का प्रतीक |
|---|---|---|
| वक्रतुंड | मत्सरासुर | ईर्ष्या |
| एकदंत | मदासुर | मद या घमंड |
| महोदर | मोहासुर | मोह |
| गजानन | लोभासुर | लोभ |
| लंबोदर | क्रोधासुर | क्रोध |
| विकट | कामासुर | काम |
| विघ्नराज | ममासुर | ममता या आसक्ति |
| धूम्रवर्ण | अहंतासुर | अहंकार |
यह तालिका बताती है कि भगवान गणेश केवल बाहरी विघ्न ही नहीं, भीतर के विघ्न भी दूर करते हैं। लंबोदर संकष्टी इसलिए क्रोध को शांत करने और मन को स्थिर करने की साधना का दिन है।
लंबोदर संकष्टी पर प्रातः स्नान करके व्रत का संकल्प लिया जाता है। संध्या को भगवान गणेश के लंबोदर स्वरूप की पूजा करके 21 दूर्वा, मोदक और लाल पुष्प अर्पित किए जाते हैं। गणपति अथर्वशीर्ष या संकष्टी कथा के पाठ के बाद चंद्रोदय पर चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है।
गणेश पुराण में अनलासुर की कथा आती है। अनलासुर अग्नि के समान जलाने वाला असुर था। भगवान गणेश ने उसे निगल लिया, जिससे उनके उदर में तीव्र जलन होने लगी। तब ऋषियों ने उन्हें 21 दूर्वा अर्पित कीं, जिससे जलन शांत हुई। तभी से गणेश जी को दूर्वा अर्पित करने की परंपरा है। यह कथा लंबोदर स्वरूप से विशेष रूप से जुड़ी मानी जाती है, क्योंकि इसमें उदर की ही बात है।
| मंत्र | उद्देश्य | जप संख्या |
|---|---|---|
| ॐ लम्बोदराय नमः | लंबोदर स्वरूप की कृपा और क्रोध शांति | 108 बार |
| ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्ती प्रचोदयात् | गणेश गायत्री, बुद्धि और विवेक | 108 बार |
| सुमुखश्चैकदन्तश्च कपिलो गजकर्णकः, लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो विनायकः | गणेश के 12 नामों का स्मरण | 3 बार |
| ॐ सों सोमाय नमः | चंद्र अर्घ्य के समय | 11 बार |
लंबोदर संकष्टी 2027 सोमवार को है, जो चंद्रमा का दिन है और इस व्रत में चंद्र अर्घ्य का केंद्रीय स्थान है। ज्योतिष में भगवान गणेश को केतु और बुध से जोड़ा जाता है। लंबोदर स्वरूप क्रोध पर विजय का प्रतीक है, इसलिए यह दिन मंगल से जुड़े क्रोध और अशांति को शांत करने के लिए विशेष माना जा सकता है।
ज्योतिष में क्रोध, आवेश और जल्दबाजी का संबंध मुख्य रूप से मंगल से है। चंद्रमा मन के कारक हैं और जब मन अशांत होता है, तब क्रोध जल्दी आता है। सोमवार को चंद्र अर्घ्य और लंबोदर उपासना, दोनों मिलकर मन को शांत और क्रोध को नियंत्रित करने में सहायक माने जाते हैं।
| ग्रह | संभावित समस्या | लंबोदर संकष्टी पर उपाय |
|---|---|---|
| मंगल | अधिक क्रोध और आवेश | "ॐ लम्बोदराय नमः" का 108 बार जप करें |
| चंद्रमा | मानसिक अशांति और चिड़चिड़ापन | चंद्रोदय पर दूध मिला जल अर्पित करें |
| केतु | अचानक बाधाएं और भ्रम | गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करें |
| बुध | निर्णय में उलझन और वाणी दोष | गणेश जी को 21 दूर्वा अर्पित करें |
| राहु | नकारात्मक विचार और भय | गणेश गायत्री का 108 बार जप करें |
लंबोदर संकष्टी पर गणेश पूजा, 21 दूर्वा, मोदक का भोग, अथर्वशीर्ष पाठ और चंद्र अर्घ्य शुभ हैं। इस दिन विशेष रूप से क्रोध, कटु वचन और विवाद से दूर रहना चाहिए, क्योंकि लंबोदर क्रोध पर विजय के देवता हैं। गणेश जी को तुलसी अर्पित नहीं की जाती।
लंबोदर स्वरूप याद दिलाता है कि सच्ची शक्ति सहन करने में है। जो व्यक्ति जीवन के कटु अनुभवों को भी शांति से पचा लेता है, वही क्रोधासुर जैसे भीतरी शत्रु पर विजय पाता है।
25 जनवरी 2027 को, सोमवार की रात, जब चंद्रमा उदय होगा और भक्त लंबोदर का स्मरण करेंगे, तब यह व्रत क्रोध के स्थान पर धैर्य और अशांति के स्थान पर स्थिरता का संकल्प बन सकता है। जहां लंबोदर की कृपा है, वहां मन का हर तूफान शांत हो जाता है।
लंबोदर संकष्टी 2027 कब है?
लंबोदर संकष्टी चतुर्थी सोमवार, 25 जनवरी 2027 को माघ कृष्ण चतुर्थी पर है। इसी दिन सकट चौथ भी मनाई जाती है।
लंबोदर संकष्टी पर चंद्रोदय कब होगा?
दिल्ली में चंद्रोदय रात लगभग 8:45 से 9:15 बजे के बीच होने की संभावना है। अपने शहर का सटीक समय स्थानीय पंचांग से देखें।
भगवान गणेश को लंबोदर क्यों कहते हैं?
लंबोदर का अर्थ है विशाल उदर वाले। मान्यता है कि उनके उदर में संपूर्ण ब्रह्मांड समाया है और यह स्वरूप धैर्य और सहनशीलता का प्रतीक है।
लंबोदर अवतार ने किस असुर को पराजित किया था?
मुद्गल पुराण के अनुसार लंबोदर अवतार ने क्रोधासुर को पराजित किया था। इसलिए लंबोदर की पूजा क्रोध पर विजय के लिए विशेष मानी जाती है।
लंबोदर संकष्टी पर कौन सा मंत्र जपें?
इस दिन "ॐ लम्बोदराय नमः" का 108 बार जप सबसे शुभ माना जाता है। गणेश गायत्री और गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ भी किया जा सकता है।
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