माघ मास 2027 कब से शुरू है?

By पं. नीलेश शर्मा

पूर्णिमांत और अमांत पंचांग का अंतर, माघ स्नान की विधि और पूरे मास के प्रमुख व्रत त्योहारों की संपूर्ण जानकारी।

माघ मास 2027 आरंभ तिथि और प्रमुख त्योहार

उत्तर भारत में माघ मास 2027 कब से आरंभ होगा?

उत्तर भारत में प्रचलित पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार माघ मास 2027 शनिवार, 23 जनवरी को माघ कृष्ण प्रतिपदा से आरंभ होगा। यह मास पौष पूर्णिमा के अगले दिन शुरू होकर माघ पूर्णिमा पर, फरवरी 2027 के तीसरे सप्ताह में, पूर्ण होगा। इसे स्नान, दान और तप का सबसे पवित्र मास माना जाता है।

माघ मास हिंदू पंचांग का 11वां चंद्र मास है, जिसकी पूर्णिमा पर चंद्रमा प्रायः मघा नक्षत्र में होते हैं और इसी नक्षत्र के नाम पर इस मास का नाम पड़ा है।

पद्म पुराण सहित अनेक ग्रंथों में माघ मास की महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है। इस मास में प्रतिदिन सूर्योदय से पहले पवित्र स्नान, जिसे माघ स्नान कहते हैं, विशेष पुण्यदायी माना गया है। प्रयागराज का माघ मेला और कल्पवास भी इसी मास की पहचान हैं।

पंचांग तत्व विवरण
मास का नाम माघ मास
आरंभ (पूर्णिमांत, उत्तर भारत) 23 जनवरी 2027, शनिवार
आरंभ की तिथि माघ कृष्ण प्रतिपदा
समापन माघ पूर्णिमा, फरवरी 2027 का तीसरा सप्ताह
आरंभ (अमांत, दक्षिण और पश्चिम भारत) मौनी अमावस्या के अगले दिन, फरवरी 2027 के आरंभ में
सूर्य की स्थिति मकर राशि, फरवरी के मध्य में कुंभ राशि में प्रवेश
मास के अधिष्ठाता भगवान विष्णु का माधव स्वरूप
ऋतु शिशिर ऋतु
मुख्य साधना माघ स्नान, दान, कल्पवास, तिल का प्रयोग
दिल्ली में सूर्योदय (23 जनवरी) प्रातः लगभग 7:14 बजे

माघ मास के अंतर्गत आने वाले प्रमुख व्रत और पर्वों की सटीक तिथियां अपने क्षेत्र के पंचांग से अवश्य देखें, क्योंकि पूर्णिमांत और अमांत गणना में मास का नाम और आरंभ अलग हो सकता है।

पूर्णिमांत और अमांत पंचांग में माघ मास कैसे अलग होता है?

पूर्णिमांत पंचांग में मास पूर्णिमा के अगले दिन से शुरू होता है, जबकि अमांत पंचांग में मास अमावस्या के अगले दिन से शुरू होता है। इसलिए उत्तर भारत में माघ मास 23 जनवरी 2027 से और दक्षिण तथा पश्चिम भारत में लगभग 15 दिन बाद मौनी अमावस्या के पश्चात शुरू होगा।

पूर्णिमांत का अर्थ है वह मास जो पूर्णिमा पर समाप्त होता है और अमांत का अर्थ है वह मास जो अमावस्या पर समाप्त होता है।

दोनों पद्धतियों में शुक्ल पक्ष का नाम समान रहता है। अंतर केवल कृष्ण पक्ष के नाम में आता है। उत्तर भारत जिस कृष्ण पक्ष को माघ कृष्ण पक्ष कहता है, उसे अमांत पंचांग में पौष कृष्ण पक्ष कहा जाता है।

आधार पूर्णिमांत पंचांग अमांत पंचांग
मास का अंत पूर्णिमा पर अमावस्या पर
प्रमुख क्षेत्र उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हिमाचल महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना
माघ मास का आरंभ 2027 23 जनवरी 2027 फरवरी 2027 के आरंभ में
मौनी अमावस्या किस मास में माघ मास के बीच में पौष मास के अंत में
शुक्ल पक्ष का नाम माघ शुक्ल पक्ष माघ शुक्ल पक्ष

इस अंतर के कारण कोई पर्व, जैसे मौनी अमावस्या, एक ही दिन पड़ता है, लेकिन उसे अलग अलग मास के नाम से पुकारा जाता है। इसलिए पर्व की तारीख वही रहती है, बस मास का नाम बदल जाता है।

माघ मास का धार्मिक महत्व क्या है?

माघ मास को स्नान, दान और तप का सर्वश्रेष्ठ मास माना गया है। मान्यता है कि इस मास में सभी देवता और तीर्थ प्रयाग के संगम पर निवास करते हैं। प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान, भगवान माधव की पूजा और तिल का दान करने से पापों का क्षय और पुण्य की वृद्धि होती है।

हिंदू परंपरा में वर्ष के 12 मासों में भगवान विष्णु के 12 अलग नाम माने गए हैं। माघ मास के अधिष्ठाता भगवान माधव हैं। माधव का अर्थ है माता लक्ष्मी के स्वामी। इसलिए इस मास में विष्णु और लक्ष्मी की संयुक्त उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है।

  • इस मास में संगम पर कल्पवास किया जाता है
  • प्रतिदिन माघ स्नान का विधान है
  • तिल, गुड़, कंबल और अन्न का दान विशेष पुण्यदायी है
  • भगवान सूर्य और भगवान विष्णु की उपासना का विशेष महत्व है
  • इसी मास में गुप्त नवरात्रि, वसंत पंचमी और रथ सप्तमी जैसे बड़े पर्व आते हैं

माघ मास 2027 में कौन से प्रमुख व्रत और पर्व आएंगे?

माघ मास 2027 में सकट चौथ, षटतिला एकादशी, मौनी अमावस्या, गुप्त नवरात्रि, वसंत पंचमी, रथ सप्तमी, भीष्म अष्टमी, जया एकादशी और माघ पूर्णिमा जैसे प्रमुख पर्व आएंगे। मास के आरंभ में ही 25 जनवरी को सकट चौथ और 29 जनवरी को कालाष्टमी पड़ेगी।

पर्व तिथि मुख्य महत्व
सकट चौथ 25 जनवरी 2027, माघ कृष्ण चतुर्थी संतान की रक्षा के लिए भगवान गणेश का व्रत
स्वामी विवेकानंद जयंती (संवत) 28 जनवरी 2027, माघ कृष्ण सप्तमी हिंदू तिथि के अनुसार जयंती
कालाष्टमी 29 जनवरी 2027, माघ कृष्ण अष्टमी भगवान काल भैरव की उपासना
षटतिला एकादशी माघ कृष्ण एकादशी तिल के 6 प्रकार से प्रयोग का व्रत
मौनी अमावस्या माघ अमावस्या मौन व्रत और संगम स्नान
गुप्त नवरात्रि माघ शुक्ल प्रतिपदा से नवमी शक्ति की गुप्त साधना
वसंत पंचमी माघ शुक्ल पंचमी माता सरस्वती की पूजा
रथ सप्तमी माघ शुक्ल सप्तमी सूर्य देव की जयंती
भीष्म अष्टमी माघ शुक्ल अष्टमी भीष्म पितामह का निर्वाण दिवस
जया एकादशी माघ शुक्ल एकादशी पापों से मुक्ति का व्रत
माघ पूर्णिमा माघ शुक्ल पूर्णिमा कल्पवास की पूर्णाहुति

अंतिम 8 पर्वों की सटीक तारीखें अपने स्थानीय पंचांग से देखें। ये सभी पर्व माघ मास को धार्मिक दृष्टि से वर्ष का सबसे व्यस्त और पवित्र मास बनाते हैं।

माघ मास में कौन से नियम पालन करने चाहिए?

माघ मास में प्रतिदिन सूर्योदय से पहले स्नान, सूर्य को अर्घ्य, भगवान माधव की पूजा, तिल का प्रयोग और दान सबसे महत्वपूर्ण नियम हैं। इस मास में सात्विक भोजन, संयम और सत्य का पालन करने से शरीर, मन और कर्म तीनों की शुद्धि मानी जाती है।

  1. प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र नदी या घर पर गंगाजल मिले जल से स्नान करें
  2. स्नान के जल में थोड़े काले तिल मिलाएं
  3. तांबे के लोटे से सूर्य देव को जल, लाल पुष्प और अक्षत अर्पित करें
  4. भगवान विष्णु के माधव स्वरूप की पूजा करें और तुलसी दल अर्पित करें
  5. "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का प्रतिदिन कम से कम 108 बार जप करें
  6. भोजन में तिल और गुड़ का प्रयोग करें
  7. जरूरतमंदों को तिल, गुड़, कंबल और गर्म वस्त्र दान करें
  8. पूरे मास सात्विक भोजन करें और तामसिक भोजन से दूर रहें
  9. संध्या को तुलसी के पास घी का दीपक जलाएं
  10. संभव हो तो पूरे मास भगवद्गीता या विष्णु सहस्रनाम का नियमित पाठ करें

तिल का महत्व क्यों है?

माघ मास में तिल का विशेष महत्व है। षटतिला एकादशी पर तिल का 6 प्रकार से प्रयोग बताया गया है।

  • तिल मिले जल से स्नान
  • तिल का उबटन
  • तिल से हवन
  • तिल मिला जल अर्पण
  • तिल का भोजन
  • तिल का दान

आयुर्वेद की दृष्टि से भी तिल शीत ऋतु में शरीर को ऊष्मा देता है और त्वचा तथा जोड़ों के लिए लाभकारी माना जाता है।

माघ मास का ज्योतिषीय प्रभाव क्या है?

माघ मास का नाम मघा नक्षत्र से बना है, जिसके देवता पितर और स्वामी केतु हैं। इस मास में सूर्य अधिकांश समय मकर राशि में रहते हैं, जो शनि की राशि है। इसलिए माघ मास पितृ कृपा, कर्म शुद्धि और शनि शांति के लिए विशेष अनुकूल माना जाता है।

मघा नक्षत्र सिंह राशि में स्थित 10वां नक्षत्र है, जिसका प्रतीक राजसिंहासन है और जिसके देवता पितर माने जाते हैं।

माघ मास का आरंभ 2027 में शनिवार से हो रहा है। शनिवार शनि का दिन है और सूर्य भी शनि की राशि मकर में हैं। यह संयोग इस मास को शनि शांति के उपायों और कर्म सुधार के संकल्पों के लिए विशेष बनाता है। फरवरी के मध्य में सूर्य कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे, जो भी शनि की ही राशि है।

ग्रह या तत्व माघ मास में स्थिति संकेत और उपाय
सूर्य मकर राशि, फिर कुंभ राशि प्रतिदिन सूर्य अर्घ्य से आत्मबल और स्वास्थ्य
शनि सूर्य दोनों मासों में शनि की राशियों में काले तिल और कंबल के दान से शनि शांति
मघा नक्षत्र मास का नाम, देवता पितर पितरों के नाम से तिल मिला जल अर्पण
केतु मघा नक्षत्र के स्वामी मौन, ध्यान और आध्यात्मिक साधना
बृहस्पति ज्ञान और धर्म के कारक गीता पाठ और विद्वानों का सम्मान

माघ मास में क्या करें और क्या न करें?

माघ मास में प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त स्नान, सूर्य अर्घ्य, विष्णु पूजा, तिल का प्रयोग और दान शुभ हैं। इस मास में देर तक सोना, तामसिक भोजन, कटु वचन और आलस्य से बचना चाहिए। मौनी अमावस्या पर मौन रहना इस मास की विशेष साधना है।

  • प्रतिदिन सूर्योदय से पहले स्नान का नियम लें
  • भोजन और दान में तिल और गुड़ को सम्मिलित करें
  • पितरों के नाम से तिल मिला जल अर्पित करें
  • जरूरतमंदों को गर्म वस्त्र और कंबल दें
  • सूर्योदय के बाद देर तक न सोएं
  • मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन से दूर रहें
  • किसी का अपमान या असत्य भाषण न करें
  • पवित्र नदियों को प्रदूषित न करें

जब माघ की शीतल भोर में आत्मा जागती है

माघ मास सिखाता है कि जीवन की सबसे बड़ी तपस्या कठिन परिस्थितियों में भी नियम न छोड़ना है। जनवरी की ठिठुरती भोर में स्नान करना शरीर को कष्ट देने के लिए नहीं बल्कि मन को आलस्य से मुक्त करने के लिए है।

23 जनवरी 2027 से आरंभ हो रहा यह पावन मास हर साधक को एक अवसर देता है कि वह प्रतिदिन एक छोटा सा नियम लेकर अपने जीवन में अनुशासन, दान और भक्ति का प्रकाश भर सके। जो माघ में जागता है, उसका पूरा वर्ष प्रकाशित रहता है।

FAQ

माघ मास 2027 कब से शुरू है?
उत्तर भारत के पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार माघ मास शनिवार, 23 जनवरी 2027 से शुरू होगा। अमांत पंचांग में यह फरवरी 2027 के आरंभ में मौनी अमावस्या के बाद शुरू होगा।

माघ मास 2027 कब समाप्त होगा?
पूर्णिमांत पंचांग में माघ मास माघ पूर्णिमा पर समाप्त होगा, जो फरवरी 2027 के तीसरे सप्ताह में पड़ेगी। सटीक तिथि स्थानीय पंचांग से देखें।

माघ मास में क्या करना चाहिए?
माघ मास में प्रतिदिन सूर्योदय से पहले स्नान, सूर्य अर्घ्य, भगवान विष्णु की पूजा और तिल का दान करना चाहिए। सात्विक भोजन और संयम का पालन भी आवश्यक है।

माघ मास का नाम कैसे पड़ा?
माघ मास की पूर्णिमा पर चंद्रमा प्रायः मघा नक्षत्र में होते हैं। इसी नक्षत्र के नाम पर इस मास का नाम माघ पड़ा।

माघ मास में कौन से बड़े पर्व आते हैं?
माघ मास में सकट चौथ, षटतिला एकादशी, मौनी अमावस्या, गुप्त नवरात्रि, वसंत पंचमी, रथ सप्तमी, जया एकादशी और माघ पूर्णिमा जैसे बड़े पर्व आते हैं।

पाएं अपनी सटीक कुंडली

कुंडली बनाएं

क्या आपको यह पसंद आया?

लेखक

पं. नीलेश शर्मा

पं. नीलेश शर्मा (63)


अनुभव: 20

इनसे पूछें: Family Planning, Career

इनके क्लाइंट: Punjab, Haryana, Delhi

इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें

ZODIAQ के बारे में

ज़ोडियाक (ZODIAQ) एक ऑनलाइन वैदिक ज्योतिष प्लेटफॉर्म है। जिन यूज़र्स को ज्योतिषीय सलाह की आवश्यकता है उन्हें ये अनुभवी ज्योतिषियों से जोड़ता है। हमारे यूज़र्स निशुल्क कुंडली भी बनाते हैं और कुंडली मिलान करते हैं। साथ ही ज़ोडियाक (ZODIAQ) ज्योतिषियों को भी कई उपयोगी सेवाएँ प्रदान करता है। ज्योतिषी ज़ोडियाक (ZODIAQ) की विभिन्न सुविधाओं का उपयोग कर अपने ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करते हैं।

यदि आप एक उपयोगकर्ता हैं

अनुभवी ज्योतिषियों से सलाह लें और उनका मार्गदर्शन प्राप्त करें। आप हमारे प्लेटफॉर्म से अनुभवी ज्योतिषियों द्वारा तैयार की गई हस्तलिखित जन्म पत्रिका और जीवन भविष्यवाणी रिपोर्ट भी मंगवा सकते हैं। सटीक कुंडली बनाएं, कुंडली मिलान करें और राशिफल व मुहूर्त की जानकारी प्राप्त करें। हमारी ऑनलाइन लाइब्रेरी का उपयोग करें जहां आपको सभी जरूरी ज्योतिषीय और आध्यात्मिक जानकारी एक जगह मिलेगी।

यदि आप एक ज्योतिषी हैं

अपने ग्राहकों के लिए सटीक कुंडली बनाएं और एक बार में 5 लोगों तक का कुंडली मिलान करें। ज़ोडियाक (ZODIAQ) की मदद से अपने ग्राहकों के लिए विस्तृत जन्म पत्रिका रिपोर्ट तैयार करें। क्लाइंट डायरेक्टरी में ग्राहकों का विवरण सेव करके किसी भी समय उन्हें एक्सेस करें। हर दिन आपने कितने लोगों को परामर्श दिया यह ट्रैक कर के अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाएं।

WELCOME TO

ZODIAQ

Right Decisions at the right time with ZODIAQ