By पं. नीलेश शर्मा
माघ कृष्ण अष्टमी पर लड्डू गोपाल का जन्मोत्सव, निशीथ काल पूजा और चंद्र शुक्र के शुभ संयोग का महत्व।

मासिक कृष्ण जन्माष्टमी जनवरी 2027 शुक्रवार, 29 जनवरी को माघ कृष्ण अष्टमी पर है। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था, इसलिए मुख्य पूजा निशीथ काल में की जाती है, जो दिल्ली में रात लगभग 12:05 से 1:00 बजे तक रहेगा। व्रत का पारण अगले दिन, 30 जनवरी की सुबह किया जाएगा।
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की स्मृति में रखा जाने वाला व्रत है।
भाद्रपद मास की कृष्ण जन्माष्टमी वर्ष का सबसे बड़ा कृष्ण उत्सव है। लेकिन कृष्ण भक्त हर महीने की कृष्ण अष्टमी को भी लड्डू गोपाल का जन्मोत्सव मनाते हैं। इसे मासिक जन्माष्टमी कहा जाता है। इससे वर्ष भर भक्ति का क्रम बना रहता है और हर महीने भगवान के बाल स्वरूप की सेवा का अवसर मिलता है।
| पंचांग तत्व | विवरण |
|---|---|
| व्रत का नाम | मासिक कृष्ण जन्माष्टमी |
| दिनांक | 29 जनवरी 2027, शुक्रवार |
| हिंदू मास | माघ मास, कृष्ण पक्ष (पूर्णिमांत) |
| तिथि | अष्टमी |
| निशीथ काल पूजा (दिल्ली) | रात लगभग 12:05 से 1:00 बजे तक |
| व्रत का पारण | 30 जनवरी 2027, सूर्योदय के बाद |
| दिल्ली में सूर्योदय | प्रातः लगभग 7:10 बजे |
| राहु काल (दिल्ली) | प्रातः लगभग 11:10 से दोपहर 12:35 बजे तक |
| मुख्य आराध्य | भगवान श्रीकृष्ण, लड्डू गोपाल स्वरूप |
| उसी दिन का अन्य पर्व | कालाष्टमी |
मासिक जन्माष्टमी उसी रात मनाई जाती है जिसमें अष्टमी तिथि उपस्थित हो। निशीथ काल और पारण का सटीक समय अपने शहर के स्थानीय पंचांग से अवश्य देख लें।
श्रीमद्भागवत के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा के कारागार में भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की मध्यरात्रि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। उनके माता पिता देवकी और वसुदेव को कंस ने कैद कर रखा था। जन्म के बाद वसुदेव उन्हें यमुना पार करके गोकुल में नंद और यशोदा के घर छोड़ आए।
लड्डू गोपाल भगवान श्रीकृष्ण का वह बाल स्वरूप है जिसमें वे घुटनों के बल बैठे हैं और हाथ में लड्डू लिए हुए हैं।
मथुरा का राजा कंस अत्यंत अत्याचारी था। जब उसने आकाशवाणी सुनी कि उसकी बहन देवकी का आठवां पुत्र उसका वध करेगा, तो उसने देवकी और वसुदेव को कारागार में डाल दिया। उसने उनकी 6 संतानों को जन्म लेते ही मार डाला। सातवें गर्भ को योगमाया ने रोहिणी के गर्भ में पहुंचाया, जिससे बलराम का जन्म हुआ।
आठवें पुत्र के रूप में भगवान विष्णु स्वयं प्रकट हुए। उनके जन्म के समय कारागार के द्वार अपने आप खुल गए और पहरेदार सो गए। वसुदेव बालक को टोकरी में रखकर उफनती यमुना पार कर गोकुल पहुंचे। शेषनाग ने अपने फनों से बालक को वर्षा से बचाया। गोकुल में यशोदा ने उसी समय एक कन्या को जन्म दिया था, जिसे वसुदेव मथुरा ले आए।
मासिक जन्माष्टमी हर महीने यह याद दिलाती है कि अंधकार के सबसे गहरे क्षण में भी ईश्वर प्रकट होते हैं। कृष्ण पक्ष की अष्टमी की अंधेरी रात में कृष्ण का जन्म इस बात का प्रतीक है कि जब जीवन में निराशा गहरी हो, तब भी भक्ति का दीप आशा जगा सकता है।
कारागार की कथा का भी गहरा आध्यात्मिक अर्थ है। मनुष्य का मन भी इच्छाओं और भय के कारागार में बंद रहता है। जब भीतर कृष्ण यानी दिव्य चेतना का जन्म होता है, तब मन के सारे बंधन अपने आप खुल जाते हैं, जैसे कारागार के द्वार खुल गए थे।
इस व्रत की कुछ प्रमुख मान्यताएं इस प्रकार हैं।
मासिक जन्माष्टमी पर दिन भर व्रत रखकर मध्यरात्रि में लड्डू गोपाल का पंचामृत से अभिषेक किया जाता है। इसके बाद उन्हें नए वस्त्र, मोर मुकुट और बांसुरी से सजाकर माखन मिश्री का भोग लगाया जाता है। आरती और भजन के बाद अगले दिन सुबह व्रत का पारण होता है।
जन्माष्टमी पर धनिया पंजीरी का विशेष भोग लगाया जाता है। भुने हुए धनिये के चूर्ण में घी, मिश्री और मेवे मिलाकर यह प्रसाद बनाया जाता है। व्रत में अन्न नहीं लिया जाता, इसलिए धनिया पंजीरी फलाहारी प्रसाद के रूप में भी उपयुक्त मानी जाती है।
| मंत्र | उद्देश्य | जप संख्या |
|---|---|---|
| ॐ नमो भगवते वासुदेवाय | भगवान श्रीकृष्ण को समर्पण | 108 बार |
| कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने, प्रणतः क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः | क्लेश और दुखों का नाश | 11 बार |
| ॐ क्लीं कृष्णाय नमः | प्रेम, आकर्षण और कृपा | 108 बार |
| ॐ देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते, देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः | संतान गोपाल मंत्र | 108 बार |
दूसरे मंत्र का अर्थ है, वासुदेव के पुत्र, हरि और परमात्मा श्रीकृष्ण को नमस्कार, जो शरणागत के क्लेश नष्ट करते हैं, उन गोविंद को बार बार नमस्कार।
बृहत् पराशर होरा शास्त्र में कृष्ण अवतार को चंद्रमा से जोड़ा गया है। भगवान श्रीकृष्ण चंद्रवंश में जन्मे थे और उनका जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था, जो चंद्रमा का सबसे प्रिय नक्षत्र है। इसलिए मासिक जन्माष्टमी पर कृष्ण उपासना चंद्रमा को बल देने और मन को शांत करने वाली मानी जाती है।
परंपरागत मान्यता के अनुसार श्रीकृष्ण के जन्म के समय वृषभ लग्न था और चंद्रमा वृषभ राशि में उच्च के थे। वृषभ राशि के स्वामी शुक्र हैं। 2027 में मासिक जन्माष्टमी शुक्रवार को पड़ रही है, जो शुक्र का दिन है। यह संयोग प्रेम, सौंदर्य, संगीत और आनंद के देवता श्रीकृष्ण की उपासना के लिए विशेष अर्थपूर्ण है।
| ग्रह | संभावित समस्या | मासिक जन्माष्टमी पर उपाय |
|---|---|---|
| चंद्रमा | मानसिक तनाव और अनिद्रा | लड्डू गोपाल का दूध और मिश्री से अभिषेक करें |
| शुक्र | दांपत्य कलह और आर्थिक अस्थिरता | श्रीकृष्ण को सफेद पुष्प और इत्र अर्पित करें |
| बृहस्पति | संतान प्राप्ति में देरी | संतान गोपाल मंत्र का 108 बार जप करें |
| राहु और केतु | भय और भ्रम | "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का 108 बार जप करें |
| बुध | पढ़ाई में मन न लगना | बच्चों से श्रीकृष्ण को माखन मिश्री का भोग लगवाएं |
मासिक जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल की सेवा, पंचामृत अभिषेक, तुलसी युक्त भोग, भजन और रात्रि जागरण शुभ हैं। इस दिन अन्न ग्रहण, तामसिक भोजन, क्रोध और दिन में सोना वर्जित माना गया है। भगवान के हर भोग में तुलसी दल अवश्य होना चाहिए।
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी हर महीने याद दिलाती है कि ईश्वर सबसे अंधेरी रात में भी जन्म लेते हैं। जिस प्रकार मथुरा के कारागार के द्वार खुल गए थे, उसी प्रकार भक्ति से मन के सारे बंधन खुल सकते हैं।
29 जनवरी 2027 की रात, जब माघ मास की कृष्ण अष्टमी पर लड्डू गोपाल का जन्मोत्सव होगा, तब पंचामृत की हर बूंद और माखन मिश्री का हर भोग घर में प्रेम और आनंद भर सकता है। जहां कान्हा का स्वागत होता है, वहां हर दिन उत्सव बन जाता है।
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी जनवरी 2027 कब है?
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी शुक्रवार, 29 जनवरी 2027 को माघ कृष्ण अष्टमी पर है। इसी दिन कालाष्टमी भी है।
मासिक जन्माष्टमी पर पूजा का शुभ समय क्या है?
मुख्य पूजा निशीथ काल में होती है, जो दिल्ली में रात लगभग 12:05 से 1:00 बजे तक रहेगा। अपने शहर का सटीक समय स्थानीय पंचांग से देखें।
मासिक जन्माष्टमी का व्रत कब खोलें?
व्रत का पारण 30 जनवरी 2027 को सूर्योदय के बाद पूजा करके प्रसाद से किया जाता है। सटीक पारण समय स्थानीय पंचांग से देखें।
मासिक जन्माष्टमी पर क्या भोग लगाएं?
लड्डू गोपाल को माखन मिश्री, धनिया पंजीरी, फल और पंचामृत का भोग लगाया जाता है। हर भोग में तुलसी दल अवश्य रखें।
मासिक जन्माष्टमी और भाद्रपद जन्माष्टमी में क्या अंतर है?
भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को श्रीकृष्ण का वार्षिक जन्मोत्सव मनाया जाता है। मासिक जन्माष्टमी हर महीने की कृष्ण अष्टमी को उसी स्मृति में रखा जाने वाला व्रत है।
पाएं अपनी सटीक कुंडली
कुंडली बनाएंअनुभव: 20
इनसे पूछें: Family Planning, Career
इनके क्लाइंट: Punjab, Haryana, Delhi
इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें
ज़ोडियाक (ZODIAQ) एक ऑनलाइन वैदिक ज्योतिष प्लेटफॉर्म है। जिन यूज़र्स को ज्योतिषीय सलाह की आवश्यकता है उन्हें ये अनुभवी ज्योतिषियों से जोड़ता है। हमारे यूज़र्स निशुल्क कुंडली भी बनाते हैं और कुंडली मिलान करते हैं। साथ ही ज़ोडियाक (ZODIAQ) ज्योतिषियों को भी कई उपयोगी सेवाएँ प्रदान करता है। ज्योतिषी ज़ोडियाक (ZODIAQ) की विभिन्न सुविधाओं का उपयोग कर अपने ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करते हैं।
अनुभवी ज्योतिषियों से सलाह लें और उनका मार्गदर्शन प्राप्त करें। आप हमारे प्लेटफॉर्म से अनुभवी ज्योतिषियों द्वारा तैयार की गई हस्तलिखित जन्म पत्रिका और जीवन भविष्यवाणी रिपोर्ट भी मंगवा सकते हैं। सटीक कुंडली बनाएं, कुंडली मिलान करें और राशिफल व मुहूर्त की जानकारी प्राप्त करें। हमारी ऑनलाइन लाइब्रेरी का उपयोग करें जहां आपको सभी जरूरी ज्योतिषीय और आध्यात्मिक जानकारी एक जगह मिलेगी।
अपने ग्राहकों के लिए सटीक कुंडली बनाएं और एक बार में 5 लोगों तक का कुंडली मिलान करें। ज़ोडियाक (ZODIAQ) की मदद से अपने ग्राहकों के लिए विस्तृत जन्म पत्रिका रिपोर्ट तैयार करें। क्लाइंट डायरेक्टरी में ग्राहकों का विवरण सेव करके किसी भी समय उन्हें एक्सेस करें। हर दिन आपने कितने लोगों को परामर्श दिया यह ट्रैक कर के अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाएं।
WELCOME TO
Right Decisions at the right time with ZODIAQ