मट्टू पोंगल 2027 पर गौ पूजा क्यों?

By पं. अभिषेक शर्मा

नंदी की कथा, कनु पिडी, जल्लीकट्टू और शनिवार के शनि संयोग का गहरा अर्थ

मट्टू पोंगल 2027: तिथि, पूजा विधि और महत्व

जब खेतों के मौन साथी उत्सव के केंद्र में आते हैं

तमिलनाडु के गांवों में थाई मास की दूसरी सुबह एक अलग ही दृश्य लेकर आती है। आंगन में रंगोली जैसे कोलम बने होते हैं, हवा में हल्दी और गुड़ की सुगंध घुली होती है और हर घर के सामने गाय, बैल और बछड़े नहाए धोए, सजे संवरे खड़े होते हैं। उनके सींगों पर चमकीले रंग चढ़े होते हैं, गले में घंटियां और फूलों की मालाएं होती हैं और माथे पर कुमकुम लगा होता है। यह दिन मट्टू पोंगल है, जो उन पशुओं को समर्पित है जिनके बिना खेती की कल्पना भी नहीं की जा सकती।

वर्ष 2027 में मट्टू पोंगल शनिवार, 16 जनवरी को मनाया जाएगा। यह चार दिनों के पोंगल पर्व का तीसरा दिन है और तमिल सौर पंचांग के थाई मास का दूसरा दिन होता है।

विवरण जानकारी
पर्व का नाम मट्टू पोंगल
तिथि 16 जनवरी 2027
वार शनिवार
तमिल मास थाई मास का दूसरा दिन
पंचांग का आधार सौर पंचांग
चंद्र मास और पक्ष पौष मास, शुक्ल पक्ष
चंद्र तिथि अष्टमी
सूर्य की स्थिति मकर राशि
चेन्नई में सूर्योदय प्रातः लगभग 6:35 बजे
चेन्नई में सूर्यास्त सायं लगभग 6:05 बजे
राहु काल (चेन्नई) प्रातः लगभग 9:25 से 10:55 बजे तक
पूजा का श्रेष्ठ समय सूर्योदय के बाद, राहु काल से पहले

मट्टू पोंगल सौर पंचांग पर आधारित है, इसलिए इसका कोई अलग चंद्र मुहूर्त नहीं होता। परंपरा के अनुसार पशु पूजा सुबह स्नान के बाद की जाती है। शनिवार को राहु काल सुबह के समय पड़ता है, इसलिए अच्छा रहेगा कि पूजा सूर्योदय के तुरंत बाद आरंभ कर दी जाए। सटीक समय के लिए स्थानीय पंचांग अवश्य देखें।

एक नज़र में मुख्य अनुष्ठान

  • भोर में गाय, बैल और बछड़ों को नहलाना
  • सींगों को रंगना और उन पर पीतल की टोपियां या रंगीन कपड़ा लगाना
  • गले में घंटियां, फूलों की मालाएं और नई रस्सी बांधना
  • पशुओं के माथे पर हल्दी और कुमकुम लगाना
  • पशुओं के सामने मीठा पोंगल बनाकर उन्हें भोग लगाना
  • आरती उतारना और पशुओं की परिक्रमा करना
  • कनु पिडी का अनुष्ठान, जिसमें पक्षियों को रंगीन चावल अर्पित किए जाते हैं
  • कुछ क्षेत्रों में नियमों के अंतर्गत जल्लीकट्टू का आयोजन

पोंगल के चार दिन और मट्टू पोंगल का स्थान

पोंगल तमिलनाडु का सबसे बड़ा फसल उत्सव है। यह चार दिनों तक चलता है और हर दिन का अपना अलग अर्थ है। चारों दिन मिलकर कृतज्ञता की एक पूरी यात्रा बनाते हैं, जिसमें पहले पुराने का त्याग होता है, फिर सूर्य को धन्यवाद दिया जाता है, फिर पशुओं को और अंत में परिवार तथा समाज को।

दिन पर्व 2027 की तिथि मुख्य भाव
पहला दिन भोगी 14 जनवरी, गुरुवार पुरानी वस्तुओं का त्याग, इंद्र देव की पूजा
दूसरा दिन थाई पोंगल 15 जनवरी, शुक्रवार सूर्य देव की पूजा, नए चावल का पोंगल
तीसरा दिन मट्टू पोंगल 16 जनवरी, शनिवार गाय और बैलों की पूजा
चौथा दिन कानुम पोंगल 17 जनवरी, रविवार परिवार से मिलना, घूमना, मेलजोल

थाई पोंगल के दिन सूर्य को धन्यवाद दिया जाता है, क्योंकि उनकी ऊर्जा से फसल पकती है। लेकिन तमिल किसान यह भी जानता है कि सूर्य की कृपा अकेले काफी नहीं है। खेत की जुताई करने वाले बैल, दूध देने वाली गाय और गोबर से धरती को उपजाऊ बनाने वाले पशु भी उतने ही बड़े साथी हैं। इसीलिए सूर्य पूजा के ठीक अगले दिन इन मौन साथियों का सम्मान किया जाता है। "मट्टू" तमिल शब्द है, जिसका अर्थ है पशु, विशेष रूप से गाय और बैल।

तमिल समाज में एक प्रसिद्ध कहावत है, "थाई पिरंदाल वழि पिरक्कुम"। इसका अर्थ है कि जब थाई मास जन्म लेता है, तो नया रास्ता भी जन्म लेता है। मट्टू पोंगल इस नए रास्ते की नींव को सम्मान देने का दिन है।

मट्टू पोंगल की पौराणिक कथा क्या है?

मट्टू पोंगल से एक बहुत रोचक कथा जुड़ी है। कहा जाता है कि एक बार भगवान शिव ने अपने वाहन नंदी को पृथ्वी पर भेजा और कहा कि जाकर मनुष्यों को संदेश दो कि वे प्रतिदिन तेल मालिश करके स्नान करें और महीने में केवल एक बार भोजन करें। नंदी पृथ्वी पर आए, लेकिन संदेश देते समय उनसे भूल हो गई। उन्होंने मनुष्यों से कह दिया कि प्रतिदिन भोजन करो और महीने में एक बार स्नान करो।

जब भगवान शिव को यह पता चला तो वे अप्रसन्न हुए। उन्होंने नंदी से कहा कि अब मनुष्यों को प्रतिदिन भोजन की आवश्यकता होगी और इतना अन्न उगाने के लिए उन्हें बहुत अधिक परिश्रम करना पड़ेगा। इसलिए अब तुम्हें पृथ्वी पर रहकर खेत जोतने में मनुष्यों की सहायता करनी होगी। तभी से बैल किसान के साथ खेतों में काम करते हैं।

इस कथा को केवल एक दंड की कहानी समझना ठीक नहीं होगा। इसका गहरा अर्थ यह है कि मनुष्य का भोजन किसी और के परिश्रम पर टिका है। नंदी, जो स्वयं शिव के सबसे निकट हैं, मनुष्य के लिए धरती पर उतरकर हल खींचते हैं। जब किसान मट्टू पोंगल पर बैल की पूजा करता है, तो वह वास्तव में उस दैवी सेवा को प्रणाम करता है।

गौ माता का वैदिक स्थान

वैदिक परंपरा में गाय को अत्यंत पवित्र माना गया है। शास्त्रों में कहा गया है "गावो विश्वस्य मातरः", यानी गाय संपूर्ण विश्व की माता है। समुद्र मंथन से निकली कामधेनु को सभी इच्छाएं पूरी करने वाली दिव्य गाय माना गया है। पुराणों के अनुसार गाय के शरीर में अनेक देवताओं का वास है। भगवान कृष्ण का गोपाल रूप भी इसी परंपरा का प्रतीक है, जहां गाय की सेवा को स्वयं भगवान की सेवा माना गया।

बैल को धर्म का प्रतीक भी माना गया है। श्रीमद्भागवत में धर्म को चार पैरों वाले बैल के रूप में दिखाया गया है, जिसके चार पैर तप, शौच, दया और सत्य हैं। इस दृष्टि से मट्टू पोंगल पर बैल की पूजा, धर्म के चारों स्तंभों का सम्मान भी है।

मट्टू पोंगल की पूजा विधि

मट्टू पोंगल की पूजा घर के आंगन या पशुशाला में की जाती है। पूरा परिवार इसमें भाग लेता है और बच्चे विशेष उत्साह से पशुओं को सजाने में मदद करते हैं।

  1. सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  2. गाय, बैल और बछड़ों को नदी, तालाब या घर पर पानी से अच्छी तरह नहलाएं।
  3. पशुशाला को साफ करें और आंगन में कोलम बनाएं।
  4. पशुओं के सींगों को रंगें। कई जगह सींगों पर पीतल की टोपियां लगाई जाती हैं।
  5. पशुओं के गले में घंटियां, फूलों और आम के पत्तों की मालाएं तथा नई रस्सियां बांधें।
  6. पशुओं के माथे और शरीर पर हल्दी और कुमकुम लगाएं।
  7. पशुशाला के पास मिट्टी के नए बर्तन में दूध, नए चावल और गुड़ से मीठा पोंगल बनाएं। जब पोंगल उबलकर बाहर गिरने लगे तब परिवार मिलकर "पोंगलो पोंगल" कहता है, जो समृद्धि के उमड़ने का प्रतीक है।
  8. पोंगल को पहले भगवान गणेश और फिर पशुओं को भोग लगाएं।
  9. पशुओं को केले, गन्ना, गुड़ और हरा चारा खिलाएं।
  10. दीपक या कपूर से पशुओं की आरती उतारें और उनकी परिक्रमा करें।
  11. पूजा के बाद कई घरों में पशुओं को गांव में घुमाया जाता है।

पूजा में प्रयुक्त सामग्री

सामग्री उपयोग
हल्दी और कुमकुम पशुओं के माथे पर तिलक के लिए
रंग या पेंट सींगों को सजाने के लिए
घंटियां और मालाएं पशुओं के श्रृंगार के लिए
नए चावल, दूध और गुड़ मीठा पोंगल बनाने के लिए
केले और गन्ना पशुओं को खिलाने के लिए
कपूर और दीपक आरती के लिए
आम के पत्ते तोरण और मालाओं के लिए

पूजा का मंत्र

मंत्र उद्देश्य जप संख्या
ॐ सुरभ्यै नमः गौ माता की कृपा और समृद्धि 108 बार
ॐ नन्दिकेश्वराय नमः नंदी और भगवान शिव का आशीर्वाद 108 बार
ॐ गं गणपतये नमः पूजा का शुभ आरंभ 11 बार

कनु पिडी क्या होता है?

मट्टू पोंगल की सुबह घर की महिलाएं एक सुंदर अनुष्ठान करती हैं, जिसे कनु पिडी कहा जाता है। पिछले दिन बने पोंगल के चावल को हल्दी, कुमकुम, दही और गुड़ के साथ मिलाकर अलग अलग रंगों के छोटे छोटे गोले बनाए जाते हैं। इन्हें घर की छत या आंगन में हल्दी के पत्तों पर रखा जाता है ताकि कौए और दूसरे पक्षी उन्हें खा सकें।

यह अनुष्ठान बहनें अपने भाइयों की लंबी आयु और सुख समृद्धि के लिए करती हैं। इसे उत्तर भारत के भाई दूज जैसे भाव से भी समझा जा सकता है। पक्षियों को भोजन देना यह भी दर्शाता है कि उत्सव का आनंद केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं है। हिंदू परंपरा में कौए को पितरों का दूत भी माना जाता है, इसलिए इस अनुष्ठान में पूर्वजों के प्रति सम्मान का भाव भी छिपा है।

जल्लीकट्टू की परंपरा

मट्टू पोंगल के आसपास तमिलनाडु के कई गांवों में जल्लीकट्टू का आयोजन होता है। यह एक प्राचीन खेल है, जिसमें युवक दौड़ते हुए सांड के कूबड़ को पकड़कर कुछ दूरी तक उसके साथ टिके रहने का प्रयास करते हैं। मदुरै के आसपास अलंगानल्लूर, पालमेडु और अवनियापुरम के आयोजन विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं।

"जल्ली" का अर्थ है सिक्के और "कट्टू" का अर्थ है बांधना। प्राचीन समय में सांड के सींगों पर सिक्कों की पोटली बांधी जाती थी और जो युवक उसे निकाल लेता, वही विजेता माना जाता था। यह खेल साहस का प्रतीक है और देशी नस्लों के सांडों को सुरक्षित रखने की परंपरा से भी जुड़ा है। आज जल्लीकट्टू कानूनी नियमों और पशु कल्याण के मानकों के तहत ही आयोजित किया जाता है, ताकि न पशु को कष्ट हो और न मनुष्य को।

मट्टू पोंगल का ज्योतिषीय महत्व

मट्टू पोंगल के दिन सूर्य मकर राशि में होते हैं। मकर शनि की राशि है और ज्योतिष में शनि को परिश्रम, सेवा, किसान, श्रमिक और भार उठाने वाले जीवों का कारक माना जाता है। बैल, जो पूरे वर्ष बिना शिकायत के खेत में भार खींचता है, शनि के गुणों का जीवंत प्रतीक है। इसलिए मकर राशि में सूर्य के रहते हुए बैल और गाय की सेवा करना शनि को प्रसन्न करने वाला कर्म माना जा सकता है।

2027 में यह संयोग और भी विशेष है, क्योंकि मट्टू पोंगल शनिवार को पड़ रहा है। शनि का दिन, शनि की राशि में सूर्य और श्रम करने वाले पशुओं की पूजा, ये तीनों बातें एक साथ आ रही हैं। जिन लोगों की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैया या शनि महादशा चल रही हो, उनके लिए इस दिन पशुओं की सेवा करना, उन्हें चारा खिलाना और पशु पालकों की सहायता करना बहुत शुभ माना जाएगा।

ज्योतिषीय परंपरा में गाय को भोजन कराना कई ग्रहों की शांति का सरल उपाय माना जाता है।

ग्रह गौ सेवा से जुड़ा उपाय
सूर्य गाय को गुड़ खिलाना
चंद्रमा गाय को चावल या दूध से बनी वस्तु खिलाना
बुध गाय को हरा चारा खिलाना
शुक्र सफेद गाय की सेवा करना
शनि काली गाय या बैल को रोटी और चारा खिलाना
राहु और केतु पशुओं को भोजन और जल की व्यवस्था करना

इस दिन चंद्रमा शुक्ल पक्ष की अष्टमी पर होंगे। शुक्ल पक्ष बढ़ते प्रकाश का समय है, जो वृद्धि और नई शुरुआत का संकेत देता है। साथ ही इसी दिन बनदा अष्टमी और मासिक दुर्गाष्टमी भी है। देवी शाकम्भरी अन्न की दात्री हैं और मट्टू पोंगल अन्न उगाने वाले पशुओं का पर्व है। इस तरह 16 जनवरी 2027 का पूरा दिन अन्न, प्रकृति और कृतज्ञता के भाव से भरा हुआ है।

मट्टू पोंगल मनाने के लाभ

  • पशुधन के स्वास्थ्य और वृद्धि का आशीर्वाद
  • खेती और दूध उत्पादन में समृद्धि की मान्यता
  • शनि से जुड़े कष्टों में राहत
  • परिवार में प्रेम, विशेषकर भाई बहन के संबंधों में मधुरता
  • प्रकृति और जीवों के प्रति करुणा का विकास
  • बच्चों में पशुओं के प्रति सम्मान का संस्कार

आज के समय में मट्टू पोंगल का संदेश

आज बहुत से लोग शहरों में रहते हैं, जहां न खेत हैं और न पशुशाला। ऐसे में यह प्रश्न स्वाभाविक है कि शहर में रहने वाला व्यक्ति मट्टू पोंगल कैसे मनाए। इसका उत्तर सरल है। इस पर्व का सार पशु के प्रति कृतज्ञता है और यह कृतज्ञता कहीं भी व्यक्त की जा सकती है।

  • पास की गौशाला में जाकर चारा या गुड़ दान करें
  • सड़क पर रहने वाले पशुओं के लिए पानी और भोजन रखें
  • किसी पशु चिकित्सा या पशु कल्याण संस्था की सहायता करें
  • बच्चों को इस पर्व की कथा सुनाएं और उन्हें गौशाला ले जाएं
  • घर की छत पर पक्षियों के लिए दाना और पानी रखें

मनोवैज्ञानिक दृष्टि से भी यह पर्व बहुत अर्थपूर्ण है। जब मनुष्य किसी ऐसे जीव को धन्यवाद देता है जो बदले में कुछ नहीं मांगता तब उसके भीतर विनम्रता जन्म लेती है। आधुनिक जीवन में, जहां हर चीज को उपयोग और लाभ से तौला जाता है, मट्टू पोंगल सिखाता है कि जो हमारी सेवा करते हैं, उनका सम्मान करना भी धर्म है।

क्या करें और क्या न करें

क्या करें क्या न करें
पशुओं को प्रेम से नहलाएं और सजाएं पशुओं पर हानिकारक रासायनिक रंग न लगाएं
उन्हें भरपेट चारा और गुड़ खिलाएं पशुओं को मारें या डराएं नहीं
पूजा सूर्योदय के बाद, राहु काल से पहले करें पशुओं से इस दिन भारी काम न लें
पक्षियों को कनु पिडी अर्पित करें भोजन की बर्बादी न करें
गौशाला में दान करें पशुओं के प्रति क्रूरता वाले खेलों में भाग न लें

जब घंटियों की ध्वनि में बसता है आभार

मट्टू पोंगल की शाम जब सजे हुए बैल गांव की गलियों से गुजरते हैं और उनके गले की घंटियां बजती हैं, तो वह ध्वनि केवल उत्सव की नहीं होती। वह उस आभार की ध्वनि होती है जो एक किसान अपने साथी को देता है। 16 जनवरी 2027 को, शनिवार के दिन, जब सूर्य मकर राशि में होंगे और चंद्रमा शुक्ल पक्ष में बढ़ रहे होंगे तब इस पर्व को सच्चे मन से मनाना जीवन में स्थिरता, समृद्धि और करुणा लेकर आ सकता है। जो हाथ पशु को चारा देता है, उस हाथ को धरती कभी खाली नहीं रखती।

FAQ

मट्टू पोंगल 2027 कब है?
मट्टू पोंगल 2027 शनिवार, 16 जनवरी को मनाया जाएगा। यह चार दिनों के पोंगल पर्व का तीसरा दिन और तमिल थाई मास का दूसरा दिन है।

मट्टू पोंगल पर किसकी पूजा होती है?
इस दिन गाय, बैल और बछड़ों की पूजा होती है। उन्हें नहलाकर, सजाकर, तिलक लगाकर मीठा पोंगल खिलाया जाता है।

मट्टू पोंगल की कथा क्या है?
कथा के अनुसार नंदी ने भगवान शिव का संदेश गलत सुना दिया, जिसके कारण उन्हें पृथ्वी पर रहकर खेत जोतने में मनुष्यों की सहायता करनी पड़ी।

कनु पिडी क्या है?
कनु पिडी में महिलाएं रंगीन चावल के गोले बनाकर पक्षियों को अर्पित करती हैं और भाइयों की लंबी आयु की कामना करती हैं।

मट्टू पोंगल का ज्योतिषीय महत्व क्या है?
इस दिन सूर्य शनि की राशि मकर में होते हैं और 2027 में दिन भी शनिवार है। इसलिए पशु सेवा शनि को प्रसन्न करने वाला शुभ कर्म मानी जाती है।

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लेखक

पं. अभिषेक शर्मा

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