By पं. नीलेश शर्मा
12 जनवरी 2027 को राष्ट्रीय युवा दिवस पर अपार सफलता और नवग्रह शांति के अचूक वैदिक उपाय।

वैदिक ज्योतिष और सनातन धर्म की अत्यंत प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा में समय का प्रत्येक क्षण अपने भीतर एक विशिष्ट ऊर्जा समेटे रहता है। जब किसी महान सिद्ध पुरुष और युग प्रवर्तक का धरती पर जन्म होता है तब आकाश मंडल में ग्रहों की गतियां एक अत्यंत विशेष और शुभ कोण पर विराजमान होती हैं। बारह जनवरी का पावन दिन संपूर्ण राष्ट्र में युवा चेतना के महान पर्व के रूप में अत्यंत श्रद्धा और पूर्ण ऊर्जा के साथ मनाया जाता है। यह पवित्र अवसर केवल महापुरुषों को स्मरण करने का दिन मात्र नहीं है बल्कि यह मानव चेतना को अज्ञानता के भारी अंधकार से निकालकर आत्मज्ञान की अनंत गहराइयों में ले जाने वाला एक दुर्लभ आध्यात्मिक द्वार है। सांसारिक मोह और अनेक प्रकार की इच्छाओं के जटिल जाल में उलझा हुआ युवा जब इस पवित्र दिन पर वेदांत के शाश्वत सूत्रों का निष्ठापूर्वक स्मरण करता है तो उसके भीतर की सुप्त कुंडलिनी शक्ति स्वतः ही जाग्रत होने लगती है।
इस अत्यंत सिद्ध और पावन पर्व से जुड़ी मुख्य पंचांग जानकारी तथा शुभ अनुष्ठान का सटीक विवरण नीचे प्रस्तुत किया गया है
साधकों और युवाओं के लिए इस पावन दिन के प्राथमिक नियम और आवश्यक कर्तव्य अत्यंत कड़े और फलदायी होते हैं
ब्रह्मांड में सूर्य देव को ऊर्जा तेज और असीम ज्ञान का शाश्वत स्रोत माना गया है। राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करने की तैयारी कर रहे होते हैं जिसे वैदिक ज्योतिष में अत्यंत शुभ समय माना जाता है। सूर्य का यह गोचर युवाओं के भीतर एक नई चेतना और नेतृत्व क्षमता का संचार करता है। युवा अवस्था मानव जीवन का वह स्वर्णिम कालखंड है जब शरीर में प्राण ऊर्जा अपने सर्वोच्च स्तर पर होती है। यदि इस प्रचंड ऊर्जा को सही आध्यात्मिक दिशा न मिले तो यह विनाशकारी रूप ले सकती है।
वैदिक ऋषियों ने इसी कारण से ब्रह्मचर्य और ध्यान को युवा जीवन का आधार बताया था। जब एक युवा इस पावन दिन पर अपनी समस्त इच्छाओं को ईश्वरीय कार्य में लगा देता है तो ब्रह्मांड की समस्त शक्तियां उसकी सहायता के लिए तत्पर हो जाती हैं। यह दिन संकल्प लेने का है कि हम अपनी शारीरिक और मानसिक शक्ति का उपयोग केवल समाज के कल्याण और अपने आत्मिक उत्थान के लिए ही करेंगे।
वर्ष 2027 के जनवरी मास की 12 तारीख को पड़ने वाला यह राष्ट्रीय युवा दिवस मंगलवार के दिन आ रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार जब युवा चेतना का यह पावन पर्व मंगलवार के दिन पड़ता है तो यह एक अत्यंत दुर्लभ और कल्याणकारी ब्रह्मांडीय संयोग का निर्माण करता है। मंगलवार के स्वामी मंगल देव हैं जो पराक्रम असीम ऊर्जा अदम्य साहस और जीवन शक्ति के मुख्य कारक हैं। युवाओं का संपूर्ण जीवन और उनके विचार मंगल ग्रह की इसी प्रचंड ऊर्जा का साक्षात प्रतिनिधित्व करते हैं। अज्ञानता की नींद से जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए यह महान सूत्र मंगल ग्रह की सर्वोच्च आध्यात्मिक अवस्था को पूरी तरह दर्शाता है।
सामान्यतः मंगल की ऊर्जा युवाओं में अनेक प्रकार के उग्र विचार और भटकाव उत्पन्न कर सकती है। परंतु जब यह ऊर्जा आध्यात्मिक चेतना और वेदांत के ज्ञान से जुड़ती है तो यह मंगल अत्यंत शुभ और कल्याणकारी बन जाता है। जो युवा भारी मानसिक भ्रम भयंकर अवसाद एकाग्रता की कमी या जीवन में बार बार आने वाले अज्ञात संकटों से जूझ रहे हैं उनके लिए यह मंगलवार का पावन दिन किसी बड़े ईश्वरीय वरदान से कम नहीं है। इस दिन की गई सूर्य और मंगल की संयुक्त उपासना से मन को असीम शक्ति मिलती है और राहु जनित समस्त मानसिक बाधाएं स्वतः ही दूर होने लगती हैं।
भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मनुष्य के जीवन में आने वाले समस्त सुख और दुख उसकी जन्म कुंडली में स्थित नौ ग्रहों के गोचर तथा दशाओं का सीधा परिणाम होते हैं। ग्रहों के अशुभ प्रभाव को शांत करने के लिए आत्मज्ञान और ध्यान को सबसे श्रेष्ठ और त्वरित फलदायी उपाय माना गया है। वेदों में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जो मनुष्य अपनी आत्मा के वास्तविक स्वरूप को पहचान लेता है उस पर किसी भी ग्रह का अशुभ प्रभाव लागू नहीं होता। महान संन्यासियों ने राज योग कर्म योग और ज्ञान योग के माध्यम से नवग्रहों को अपने अनुकूल बनाने का अत्यंत सूक्ष्म मार्ग प्रशस्त किया था।
मंगलवार के दिन जब विशेष मंत्रों और प्राणायाम से शरीर की नाड़ियों को शुद्ध किया जाता है तो वातावरण में एक विशेष प्रकार की रासायनिक और आध्यात्मिक ऊर्जा फैलती है। यह अमोघ ऊर्जा साधक के आभामंडल में चिपके हुए अत्यंत नकारात्मक ग्रह दोषों को तुरंत साफ कर देती है। यदि कुंडली में सूर्य और मंगल ग्रह नीच के हों या राहु केतु के भयंकर प्रभाव से पीड़ित हों तो व्यक्ति की बुद्धि और निर्णय क्षमता पूरी तरह भ्रमित हो जाती है। इस पवित्र दिन उगते हुए सूर्य को तांबे के पात्र से जल अर्पित करने और लाल चंदन का तिलक मस्तक पर लगाने से सूर्य और मंगल का भारी दोष हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है। यह अति पवित्र समय साधक को उसके प्रारब्ध के अत्यंत कठोर दंड से बचाता है और अचूक नवग्रह शांति सुनिश्चित करता है।
वैदिक दर्शन और योग शास्त्र के अनुसार मानव शरीर में सात प्रमुख ऊर्जा चक्र विद्यमान हैं। इनमें से सबसे महत्वपूर्ण चक्र आज्ञा चक्र है जो दोनों भौंहों के मध्य में स्थित होता है। आज्ञा चक्र का सीधा संबंध ईश्वरीय ज्ञान दूरदर्शिता और असीम मानसिक एकाग्रता से होता है। महान सिद्ध पुरुषों की समस्त सिद्धियों का केंद्र उनका अत्यधिक जाग्रत आज्ञा चक्र ही होता है। जब तक किसी साधक का यह चक्र जाग्रत और संतुलित नहीं होता तब तक वह आध्यात्मिक मार्ग पर एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकता है और भौतिक जगत के भ्रम में ही उलझा रहता है।
इस पावन अवसर पर ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रवाह सीधा पृथ्वी की ओर होता है। जब कोई निष्ठावान युवा इस दिन पूर्ण एकाग्रता के साथ ध्यान का अभ्यास करता है तो ध्वनि की वे अत्यंत सूक्ष्म तरंगें सीधे उसके आज्ञा चक्र पर प्रहार करती हैं। इस वैज्ञानिक और आध्यात्मिक प्रक्रिया से सुप्त पड़ी हुई कुंडलिनी शक्ति ऊर्ध्वगामी होने लगती है। साधक के भीतर से भय असुरक्षा की भावना और भौतिक लालसा का समूल नाश हो जाता है। यह दिव्य चेतना मनुष्य को अज्ञानता के भारी अंधकार से निकालकर प्रज्ञा और विवेक के शाश्वत प्रकाश की ओर ले जाती है।
पुराणों और प्राचीन वैदिक ग्रंथों में कर्म की अत्यंत गूढ़ और मर्मस्पर्शी व्याख्या का विस्तृत वर्णन मिलता है। श्रीमद्भगवद्गीता के कर्म योग का पालन करना आधुनिक युग के युवाओं के लिए अत्यंत आवश्यक है। मनुष्य का प्रत्येक विचार और कार्य ब्रह्मांड में एक विशिष्ट तरंग उत्पन्न करता है जो भविष्य में उसके प्रारब्ध का निर्माण करती है। जो युवा बिना किसी फल की भारी आसक्ति के अपने कर्तव्यों का पूर्ण निष्ठा से पालन करते हैं वे ईश्वर के सबसे निकट होते हैं।
जब कोई मनुष्य केवल अपने स्वार्थ और भारी अहंकार से प्रेरित होकर कार्य करता है तो वह कर्म बंधनों के भारी जाल में उलझता चला जाता है। परंतु जब वही कार्य परमात्मा को पूर्ण रूप से समर्पित कर दिया जाता है तो वह यज्ञ बन जाता है। इस महान दिवस के अवसर पर प्रत्येक साधक को यह दृढ़ संकल्प लेना चाहिए कि वह अपने जीवन की समस्त ऊर्जा को किसी रचनात्मक और कल्याणकारी कार्य में लगाएगा। भगवान के असीम तेज और शक्ति के सामने संसार की कोई भी बाधा टिक नहीं सकती। मृत्यु के भय और असफलता की चिंता को पूरी तरह त्याग कर पूर्ण आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना ही सच्ची वैदिक साधना है।
12 जनवरी 2027 को मंगलवार के इस अत्यंत महान संयोग पर यदि जातक अपनी चंद्र राशि के अनुसार विशेष वैदिक उपाय करता है तो उसे ग्रहों की पूर्ण अनुकूलता और मनोवांछित फलों की सहज प्राप्ति होती है।
जनवरी मास की इस पवित्र तिथि पर मनाया जाने वाला यह पर्व हमें अपनी गहरी जड़ों और महान ऋषियों की प्राचीन वैज्ञानिक परंपरा से जोड़ने का एक अत्यंत पावन सेतु है। जब हम पूर्ण समर्पण के साथ परब्रह्म के समक्ष नतमस्तक होते हैं तो वास्तव में हम अपने भीतर के भारी अहंकार को मिटाने का अत्यंत सच्चा प्रयास कर रहे होते हैं। यह पावन दिन हमें रुकने आत्मनिरीक्षण करने और अपने भीतर सत्य तथा ज्ञान का शाश्वत प्रकाश भरने की महान शिक्षा देता है। जो भी मनुष्य इस पवित्र दिन कठोर नियम पूर्ण संयम और सच्ची श्रद्धा के साथ अपनी संपूर्ण जीवन ऊर्जा को उच्च आदर्शों के श्री चरणों में समर्पित कर देता है उसके लिए इस संसार की कोई भी बाधा अजेय नहीं रह जाती है और उसे जीवन के हर क्षेत्र में शाश्वत सफलता प्राप्त होती है।
प्रश्न 1 वर्ष 2027 में राष्ट्रीय युवा दिवस कब मनाया जाएगा
उत्तर वैदिक पंचांग और ग्रेगोरियन कैलेंडर की अत्यंत सटीक गणना के अनुसार यह महान पावन पर्व 12 जनवरी 2027 को मंगलवार के दिन पूरे उत्साह और ऊर्जा के साथ मनाया जाएगा।
प्रश्न 2 इस पावन दिन मुख्य रूप से किस ग्रह की उपासना करनी चाहिए
उत्तर मंगलवार का दिन होने के कारण इस दिन असीम ऊर्जा के स्वामी मंगल देव और ज्ञान के कारक देव गुरु बृहस्पति की मानसिक उपासना करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
प्रश्न 3 युवाओं के लिए इस पावन दिन का सबसे बड़ा आध्यात्मिक उपाय क्या है
उत्तर इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर ध्यान करना और वेदांत दर्शन के किसी ग्रंथ का एकाग्रता से अध्ययन करना युवाओं के लिए सबसे बड़ा और अचूक उपाय है।
प्रश्न 4 नवग्रहों में कौन से ग्रह हमारी बौद्धिक क्षमता को सर्वाधिक प्रभावित करते हैं
उत्तर मानव जीवन में बौद्धिक क्षमता और निर्णय लेने की शक्ति को मुख्य रूप से सूर्य बुध और मंगल ग्रह सर्वाधिक प्रभावित करते हैं जिनकी शुद्धि योग और ध्यान से ही संभव है।
प्रश्न 5 इस दिन दान करने के लिए सबसे पवित्र और उत्तम सामग्री क्या है
उत्तर ज्ञान का दान ही संसार में सबसे बड़ा दान है इसलिए इस पवित्र दिन पर शिक्षा सामग्री धार्मिक पुस्तकें और सात्विक अन्न का दान अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है।
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