पौष पूर्णिमा 2027 पर क्या दान करें?

By पं. अमिताभ शर्मा

पुष्य नक्षत्र की पावन पूर्णिमा पर स्नान, दान और कल्पवास के आरंभ से अक्षय पुण्य पाने की संपूर्ण वैदिक विधि।

पौष पूर्णिमा 2027 स्नान दान और कल्पवास

पौष पूर्णिमा 2027 कब है और स्नान का शुभ समय क्या है?

पौष पूर्णिमा 2027 शुक्रवार, 22 जनवरी को है। पूर्णिमा तिथि 22 जनवरी को दिन में आरंभ होकर 23 जनवरी की सुबह तक रहेगी। पवित्र स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त, दिल्ली में प्रातः लगभग 5:30 से 6:20 बजे तक, सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। इसी दिन से माघ मेला और कल्पवास आरंभ होता है।

पौष पूर्णिमा पौष मास के शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि है, जिस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान और सूर्य उपासना का विशेष विधान है।

सनातन परंपरा में पौष मास को सूर्य उपासना का मास माना गया है और इसकी पूर्णिमा इस मास की पूर्णता का दिन है। इसी दिन से माघ मास का पुण्य काल आरंभ होता है, जिसे स्नान और दान के लिए वर्ष का सबसे पवित्र समय कहा गया है। प्रयागराज के संगम तट पर लाखों श्रद्धालु इस दिन पहली डुबकी लगाकर कल्पवास का संकल्प लेते हैं।

पंचांग तत्व विवरण
पर्व का नाम पौष पूर्णिमा
दिनांक 22 जनवरी 2027, शुक्रवार
हिंदू मास पौष मास, शुक्ल पक्ष
तिथि पूर्णिमा
पूर्णिमा तिथि 22 जनवरी को दिन में आरंभ, 23 जनवरी की सुबह समाप्त
स्नान का श्रेष्ठ समय (दिल्ली) ब्रह्म मुहूर्त, प्रातः लगभग 5:30 से 6:20 बजे तक
चंद्रमा की स्थिति कर्क राशि, पुष्य नक्षत्र
सूर्य की स्थिति मकर राशि
राहु काल (दिल्ली) प्रातः लगभग 11:10 से दोपहर 12:30 बजे तक
विशेष आयोजन माघ मेला और कल्पवास का आरंभ
मुख्य आराध्य सूर्य देव, भगवान विष्णु और चंद्र देव

पूर्णिमा तिथि 23 जनवरी की सुबह तक रहने के कारण कुछ क्षेत्रों में उदया तिथि के नियम से स्नान और दान 23 जनवरी की सुबह भी किया जाएगा। प्रयागराज में स्नान की मुख्य तिथि के लिए मेला प्रशासन की घोषणा और अपने स्थानीय पंचांग को अवश्य देखें।

पौष पूर्णिमा का धार्मिक महत्व क्या है?

पौष पूर्णिमा पापों के क्षय, पुण्य की वृद्धि और नए आध्यात्मिक संकल्प का दिन है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान, सूर्य को अर्घ्य और जरूरतमंदों को दान करने से शरीर और मन दोनों की शुद्धि मानी जाती है। यही दिन माघ स्नान और कल्पवास का प्रवेश द्वार है।

पौष मास का नाम पुष्य नक्षत्र से बना है। पुष्य का अर्थ है पोषण करने वाला। इसलिए पौष पूर्णिमा को पोषण, समृद्धि और कृपा की पूर्णिमा कहा जाता है। वर्ष 2027 में इस दिन चंद्रमा वास्तव में पुष्य नक्षत्र में होंगे, जो इस पूर्णिमा के नाम को पूर्ण रूप से सार्थक करता है।

वर्ष 2027 की पौष पूर्णिमा के साथ कई पावन पर्व जुड़ रहे हैं।

  • माघ मेला और कल्पवास का आरंभ
  • माता शाकम्भरी की जयंती
  • पौष पूर्णिमा व्रत और सत्यनारायण कथा
  • तमिल परंपरा का थाईपूसम पर्व
  • अयोध्या में रामलला प्रतिष्ठा दिवस

कल्पवास क्या है और यह पौष पूर्णिमा से क्यों शुरू होता है?

कल्पवास वह कठोर साधना है जिसमें श्रद्धालु पूरे माघ मास प्रयागराज के संगम तट पर रहकर प्रतिदिन स्नान, जप, सत्संग और संयम का पालन करते हैं। परंपरा के अनुसार यह साधना पौष पूर्णिमा से आरंभ होकर माघ पूर्णिमा पर पूर्ण होती है।

कल्पवास का अर्थ है एक निश्चित अवधि तक पवित्र तीर्थ पर रहकर तप और संयम का जीवन जीना।

पुराणों में माघ मास में प्रयाग स्नान की अपार महिमा बताई गई है। मान्यता है कि इस मास में सभी देवता और तीर्थ संगम पर निवास करते हैं। इसलिए कल्पवासी पूरे एक महीने के लिए घर का सुख छोड़कर संगम की रेती पर बने शिविरों में रहते हैं।

कल्पवास के नियम उद्देश्य
प्रतिदिन सूर्योदय से पहले संगम स्नान शरीर और मन की शुद्धि
दिन में एक बार सात्विक भोजन इंद्रिय संयम
भूमि पर शयन सादगी और त्याग
ब्रह्मचर्य का पालन आत्मिक बल
जप, कथा और सत्संग मन को ईश्वर में लगाना
शिविर के पास जौ बोना और तुलसी की सेवा प्रकृति और समृद्धि का सम्मान
झूठ, क्रोध और निंदा का त्याग वाणी और विचार की शुद्धि

जो लोग पूरा कल्पवास नहीं कर सकते, वे पौष पूर्णिमा से माघ पूर्णिमा तक घर पर ही प्रतिदिन सूर्योदय से पहले स्नान का नियम ले सकते हैं। इसे माघ स्नान कहा जाता है और इसका भी विशेष पुण्य माना गया है।

पौष पूर्णिमा पर स्नान की सही विधि क्या है?

पौष पूर्णिमा पर ब्रह्म मुहूर्त में पवित्र नदी या घर पर गंगाजल मिले जल से स्नान करें। स्नान के समय पवित्र नदियों का स्मरण करें, फिर सूर्य को अर्घ्य दें और दान का संकल्प लें। स्नान के बाद ही पूजा और दान करना शास्त्र सम्मत माना गया है।

  1. सूर्योदय से पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठें और मन में स्नान का संकल्प लें
  2. पवित्र नदी में स्नान करें, या घर पर जल में गंगाजल और थोड़े काले तिल मिलाकर स्नान करें
  3. स्नान करते समय "गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वति, नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु" मंत्र बोलें
  4. स्वच्छ वस्त्र पहनकर तांबे के लोटे में जल, लाल पुष्प, अक्षत और गुड़ डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें
  5. "ॐ घृणि सूर्याय नमः" का 11 बार जप करें
  6. भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करके तुलसी दल अर्पित करें
  7. हाथ में जल और तिल लेकर दान का संकल्प करें
  8. जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को तिल, गुड़, कंबल और अन्न का दान दें
  9. पितरों के नाम से तिल मिला जल अर्पित करें
  10. संध्या को किसी नदी, तालाब या घर के द्वार पर दीपदान करें

स्नान मंत्र का अर्थ है कि हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिंधु और कावेरी, आप सभी इस जल में उपस्थित हों। इस मंत्र के साथ घर पर किया गया स्नान भी तीर्थ स्नान के समान पुण्यदायी माना जाता है।

पौष पूर्णिमा पर क्या दान करना चाहिए?

पौष पूर्णिमा पर तिल, गुड़, कंबल, गर्म वस्त्र, अन्न, घी और खिचड़ी का दान सबसे शुभ माना जाता है। जनवरी की कड़ी ठंड में जरूरतमंदों को गर्म वस्त्र और भोजन देना सबसे बड़ा पुण्य है। दान हमेशा अपनी सामर्थ्य के अनुसार और सच्चे मन से करना चाहिए।

दान की वस्तु संबंधित ग्रह या देवता मान्य फल
काले तिल शनि शनि दोष की शांति और पितृ कृपा
गुड़ सूर्य आत्मविश्वास और सम्मान
कंबल और ऊनी वस्त्र शनि कष्टों से रक्षा
चावल और दूध चंद्रमा मानसिक शांति
घी सूर्य और शुक्र समृद्धि और तेज
खिचड़ी सूर्य और शनि अन्न और धन की वृद्धि
पीली दाल और हल्दी बृहस्पति ज्ञान और सौभाग्य
हरी सब्जियां और फल माता शाकम्भरी परिवार का स्वास्थ्य

शास्त्रों में कहा गया है कि माघ मास के आरंभ पर दिया गया दान अक्षय होता है, यानी उसका पुण्य कभी समाप्त नहीं होता। गुप्त दान, जिसमें दान देने वाला अपना नाम प्रकट नहीं करता, सबसे श्रेष्ठ माना गया है।

पौष पूर्णिमा का ज्योतिषीय प्रभाव क्या है?

22 जनवरी 2027 को पूर्ण चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में और पुष्य नक्षत्र में होंगे, जबकि सूर्य ठीक सामने मकर राशि में होंगे। पुष्य को सबसे शुभ नक्षत्र माना जाता है। शुक्रवार का दिन होने से यह पूर्णिमा मन की शांति, धन और पारिवारिक सुख के लिए अत्यंत अनुकूल है।

पुष्य नक्षत्र के देवता बृहस्पति हैं और इसके स्वामी शनि माने जाते हैं। मकर राशि भी शनि की है। इसलिए इस दिन शनि से जुड़ी वस्तुओं, जैसे काले तिल और कंबल, का दान विशेष फलदायी माना जाता है। पूर्ण बलवान चंद्रमा मन को स्थिर करता है, जो साधना और संकल्प के लिए आवश्यक है।

ग्रह संभावित समस्या पौष पूर्णिमा पर उपाय
सूर्य आत्मविश्वास की कमी, सरकारी कार्य में बाधा गुड़ मिले जल से सूर्य को अर्घ्य दें और गुड़ दान करें
चंद्रमा मानसिक तनाव और अनिद्रा रात में चंद्रमा को दूध मिला जल अर्पित करें
शनि साढ़ेसाती, ढैया और रुकावटें काले तिल और कंबल का दान करें
बृहस्पति विद्या और विवाह में बाधा पीली दाल और हल्दी का दान करें
शुक्र आर्थिक अस्थिरता माता लक्ष्मी को खीर अर्पित करें

पौष पूर्णिमा पर क्या करें और क्या न करें?

पौष पूर्णिमा पर सूर्योदय से पहले स्नान, सूर्य अर्घ्य, दान और दीपदान शुभ हैं। इस दिन तामसिक भोजन, देर तक सोना, कटु वचन और दान का दिखावा करना वर्जित माना गया है। नदी में स्नान करते समय जल को प्रदूषित न करना भी धर्म का ही हिस्सा है।

  • ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें और सूर्य को अर्घ्य दें
  • तिल, गुड़, कंबल और अन्न का दान अवश्य करें
  • पितरों के नाम से तिल मिला जल अर्पित करें
  • संध्या को नदी या घर के द्वार पर दीपदान करें
  • सूर्योदय के बाद देर तक न सोएं
  • प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा का सेवन न करें
  • नदी में साबुन, प्लास्टिक या पूजा सामग्री का कचरा न डालें
  • दान का प्रचार या दिखावा न करें

जब एक डुबकी नए संकल्प का द्वार खोलती है

पौष पूर्णिमा केवल एक तिथि नहीं बल्कि आत्म शुद्धि की एक नई यात्रा का आरंभ है। संगम में लगाई गई एक डुबकी या घर पर श्रद्धा से किया गया स्नान, पुराने बोझ को धोकर नए संकल्प के लिए मन को तैयार करता है।

22 जनवरी 2027 को, जब पूर्ण चंद्रमा पुष्य नक्षत्र को प्रकाशित करेगा, तब किसी ठिठुरते व्यक्ति को दिया गया एक कंबल और किसी भूखे को दिया गया एक थाल भोजन, जीवन में वह पुण्य जोड़ सकता है जो कभी समाप्त नहीं होता।

FAQ

पौष पूर्णिमा 2027 कब है?
पौष पूर्णिमा शुक्रवार, 22 जनवरी 2027 को है। पूर्णिमा तिथि 23 जनवरी की सुबह तक रहेगी, इसलिए कुछ क्षेत्रों में उदया तिथि के अनुसार स्नान 23 जनवरी को भी होगा।

पौष पूर्णिमा पर स्नान का शुभ समय क्या है?
पौष पूर्णिमा पर स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त सबसे श्रेष्ठ है। दिल्ली में यह प्रातः लगभग 5:30 से 6:20 बजे तक रहेगा।

पौष पूर्णिमा पर क्या दान करना चाहिए?
इस दिन तिल, गुड़, कंबल, गर्म वस्त्र, अन्न, घी और खिचड़ी का दान सबसे शुभ माना जाता है। शनि शांति के लिए काले तिल का दान विशेष फलदायी है।

कल्पवास कब से कब तक होता है?
परंपरा के अनुसार कल्पवास पौष पूर्णिमा से आरंभ होकर माघ पूर्णिमा पर पूर्ण होता है। इस दौरान श्रद्धालु प्रयागराज के संगम तट पर रहकर तप और संयम का पालन करते हैं।

घर पर पौष पूर्णिमा का स्नान कैसे करें?
घर पर जल में गंगाजल और काले तिल मिलाकर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें। स्नान के समय पवित्र नदियों का स्मरण मंत्र बोलें और फिर सूर्य को अर्घ्य दें।

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लेखक

पं. अमिताभ शर्मा

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