रामलला प्रतिष्ठा दिवस 2027 कैसे मनाएं?

By अपर्णा पाटनी

अयोध्या प्राण प्रतिष्ठा की तीसरी वर्षगांठ पर राम उपासना की विधि और पौष पूर्णिमा का शुभ संयोग।

रामलला प्रतिष्ठा दिवस 2027 पूजा विधि और महत्व

रामलला प्रतिष्ठा दिवस 2027 कब है और इसका शुभ समय क्या है?

रामलला प्रतिष्ठा दिवस 2027 शुक्रवार, 22 जनवरी को मनाया जाएगा। यह अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की तीसरी वर्षगांठ है। इस दिन पौष पूर्णिमा का पावन संयोग भी है। पूजा के लिए अभिजीत मुहूर्त दोपहर लगभग 11:55 से 12:40 बजे तक श्रेष्ठ रहेगा।

रामलला प्रतिष्ठा दिवस वह पावन दिन है जब 22 जनवरी 2024 को अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में भगवान राम के बाल स्वरूप की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी।

सरयू तट पर बसी अयोध्या करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। 22 जनवरी 2024 को जब गर्भगृह में रामलला के नेत्र खुले, तब देश और विदेश में करोड़ों घरों में दीप जलाए गए। तभी से यह दिन भक्तों के लिए एक नए आध्यात्मिक उत्सव के रूप में स्थापित हो गया है।

पंचांग तत्व विवरण
पर्व का नाम रामलला प्रतिष्ठा दिवस
दिनांक 22 जनवरी 2027, शुक्रवार
वर्षगांठ तीसरी वर्षगांठ
मूल प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024
हिंदू तिथि अनुसार वर्षगांठ पौष शुक्ल द्वादशी, जिसे प्रतिष्ठा द्वादशी कहते हैं
22 जनवरी 2027 का पंचांग पौष शुक्ल पक्ष, चतुर्दशी से पूर्णिमा
चंद्रमा की स्थिति कर्क राशि
सूर्य की स्थिति मकर राशि
अभिजीत मुहूर्त (अयोध्या) दोपहर लगभग 11:55 से 12:40 बजे तक
राहु काल (अयोध्या) प्रातः लगभग 10:55 से दोपहर 12:15 बजे तक
मुख्य आराध्य भगवान राम का बाल स्वरूप, रामलला

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट प्राण प्रतिष्ठा की वर्षगांठ हिंदू पंचांग के अनुसार पौष शुक्ल द्वादशी पर मनाता है, जो 2027 में 19 जनवरी के आसपास पड़ रही है। वहीं देश भर के भक्त अंग्रेजी तिथि 22 जनवरी को भी उत्सव मनाते हैं। अयोध्या के कार्यक्रमों का सटीक समय मंदिर ट्रस्ट की घोषणा से अवश्य देख लें।

रामलला प्रतिष्ठा दिवस का आध्यात्मिक महत्व क्या है?

रामलला प्रतिष्ठा दिवस धैर्य, आस्था और मर्यादा का उत्सव है। यह दिन बताता है कि सच्ची श्रद्धा कभी व्यर्थ नहीं जाती। इस दिन राम नाम का जप, रामायण पाठ और दीपदान करने से मन में शांति, परिवार में प्रेम और जीवन में धर्म के प्रति निष्ठा बढ़ती है।

रामलला का अर्थ है भगवान राम का बाल स्वरूप, जिसमें वे लगभग 5 वर्ष के बालक के रूप में पूजे जाते हैं।

"लला" शब्द अवधी भाषा में प्यारे बालक के लिए प्रयोग होता है। जन्मभूमि पर भगवान का बाल रूप में पूजा जाना स्वाभाविक है। जिस प्रकार भगवान राम ने 14 वर्ष का वनवास धैर्य से स्वीकार किया, उसी प्रकार करोड़ों भक्तों ने पीढ़ियों तक अपनी आस्था को जीवित रखा।

भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। इस दिन केवल पूजा ही नहीं बल्कि उनके गुणों को अपनाने का संकल्प लेना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।

  • माता पिता का सम्मान और उनकी आज्ञा का पालन
  • परिवार और भाइयों के प्रति प्रेम और त्याग
  • दिए गए वचन को हर स्थिति में निभाना
  • शत्रु के प्रति भी न्याय और मर्यादा
  • समाज के कल्याण को सर्वोपरि रखना

प्राण प्रतिष्ठा क्या होती है?

प्राण प्रतिष्ठा वह वैदिक और आगम विधि है जिसके द्वारा पत्थर या धातु की मूर्ति में देवता की दिव्य चेतना का आवाहन किया जाता है। इसके बाद मूर्ति को जीवंत विग्रह माना जाता है, जिसकी प्रतिदिन सेवा, भोग और आरती की जाती है।

प्राण प्रतिष्ठा का अर्थ है मूर्ति में प्राण यानी दिव्य चेतना की स्थापना करना।

आगम शास्त्रों में प्राण प्रतिष्ठा से पहले कई अधिवास अनुष्ठानों का विधान है, जिनसे मूर्ति की शुद्धि की जाती है।

अनुष्ठान अर्थ
जलाधिवास मूर्ति को जल में रखना
अन्नाधिवास मूर्ति को अन्न में रखना
फलाधिवास मूर्ति को फलों के बीच रखना
शय्याधिवास मूर्ति को शय्या पर विश्राम कराना
नेत्रोन्मीलन मूर्ति के नेत्रों का अनावरण
प्राण प्रतिष्ठा मंत्र वैदिक मंत्रों से चेतना का आवाहन

22 जनवरी 2024 को मुख्य अनुष्ठान अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 12:29:08 से 12:30:32 तक, केवल 84 सेकंड के सूक्ष्म शुभ मुहूर्त में संपन्न हुआ था। उस दिन पौष शुक्ल द्वादशी तिथि और मृगशिरा नक्षत्र था। उस समय मेष लग्न में बृहस्पति स्थित थे, जिसे स्थापना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

रामलला की मूर्ति और राम मंदिर की विशेषताएं क्या हैं?

रामलला की मूर्ति 51 इंच ऊंची है और काली कृष्ण शिला से बनी है, जिसे मैसूरु के मूर्तिकार अरुण योगीराज ने गढ़ा है। अयोध्या का राम मंदिर नागर शैली में बना तीन मंजिला मंदिर है, जिसकी ऊंचाई 161 फुट है और जिसमें 392 स्तंभ तथा 44 द्वार हैं।

51 इंच की ऊंचाई इसलिए चुनी गई ताकि रामनवमी पर सूर्य की किरणें रामलला के मस्तक पर पड़ सकें। इसे सूर्य तिलक कहते हैं, जो भगवान राम के सूर्यवंशी होने का सुंदर प्रतीक है।

विशेषता विवरण
मूर्ति की ऊंचाई 51 इंच
मूर्ति का पत्थर काली कृष्ण शिला, मैसूरु क्षेत्र से
मूर्तिकार अरुण योगीराज
स्वरूप 5 वर्ष के बालक, हाथ में धनुष बाण
मंदिर शैली नागर शैली
मंदिर की लंबाई और चौड़ाई 380 फुट और 250 फुट
मंदिर की ऊंचाई 161 फुट
स्तंभ और द्वार 392 स्तंभ, 44 द्वार
भूतल रामलला का गर्भगृह
पहली मंजिल राम दरबार

घर पर रामलला प्रतिष्ठा दिवस की पूजा विधि क्या है?

इस दिन प्रातः स्नान करके रामलला या राम दरबार का पूजन किया जाता है। भगवान को तुलसी, पीले पुष्प और माखन मिश्री अर्पित की जाती है। इसके बाद राम नाम का जप, सुंदरकांड या राम रक्षा स्तोत्र का पाठ किया जाता है और संध्या को दीपदान किया जाता है।

विधि का क्रमबद्ध पालन करने से पूजा का पूर्ण फल मिलता है।

  1. ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ पीले वस्त्र पहनें
  2. पूजा स्थान पर पीला वस्त्र बिछाकर रामलला या राम दरबार का चित्र स्थापित करें
  3. भगवान को गंगाजल और पंचामृत से स्नान कराने का भाव करें
  4. चंदन, अक्षत, पीले पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें
  5. बाल रूप होने के कारण माखन मिश्री, खीर या पंजीरी का भोग लगाएं
  6. "श्री राम जय राम जय जय राम" की कम से कम एक माला जपें
  7. सुंदरकांड, राम रक्षा स्तोत्र या हनुमान चालीसा का पाठ करें
  8. घी के दीपक से आरती करें और परिवार में प्रसाद बांटें
  9. संध्या को घर के मुख्य द्वार और आंगन में दीप जलाएं
  10. पौष पूर्णिमा होने के कारण अन्न, तिल और कंबल का दान करें
  11. रात्रि में चंद्रोदय के बाद चंद्र देव को दूध मिला जल अर्पित करें

इस दिन के प्रमुख मंत्र

मंत्र उद्देश्य जप संख्या
श्री राम जय राम जय जय राम मन की शांति और भक्ति 108 बार या अधिक
ॐ श्री रामाय नमः भगवान राम की कृपा 108 बार
राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे, सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने राम नाम की महिमा 3 बार

पद्म पुराण के इस श्लोक में भगवान शिव माता पार्वती से कहते हैं कि एक बार राम नाम लेना विष्णु सहस्रनाम के पाठ के बराबर है।

इस दिन का ज्योतिषीय प्रभाव क्या है?

22 जनवरी 2027 को चंद्रमा कर्क राशि में होंगे, जो वाल्मीकि रामायण के अनुसार भगवान राम का जन्म लग्न है। पूर्णिमा का पूर्ण चंद्रमा और मकर राशि का सूर्य इस दिन को सूर्य और चंद्र दोनों की कृपा के लिए शुभ बनाते हैं। बृहत् पराशर होरा शास्त्र में राम अवतार को सूर्य से जोड़ा गया है।

वाल्मीकि रामायण के अनुसार भगवान राम का जन्म चैत्र शुक्ल नवमी को पुनर्वसु नक्षत्र और कर्क लग्न में हुआ था। उनके भाई भरत का जन्म पुष्य नक्षत्र में हुआ था। 22 जनवरी 2027 को चंद्रमा पुष्य नक्षत्र में होंगे, इसलिए यह दिन भरत जैसी अनन्य भक्ति का स्मरण भी कराता है।

ग्रह संभावित समस्या रामलला प्रतिष्ठा दिवस पर उपाय
सूर्य आत्मविश्वास की कमी, पिता से तनाव सूर्योदय पर अर्घ्य दें और आदित्य हृदय स्तोत्र पढ़ें
चंद्रमा मानसिक तनाव और अस्थिरता पूर्णिमा की रात चंद्रमा को दूध मिला जल अर्पित करें
शनि साढ़ेसाती और कार्य में बाधा सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ करें
मंगल क्रोध और पारिवारिक कलह राम दरबार की पूजा और सामूहिक राम नाम जप करें
राहु और केतु भय और मानसिक भ्रम "श्री राम जय राम जय जय राम" का 108 बार जप करें

इस दिन क्या करें और क्या न करें?

रामलला प्रतिष्ठा दिवस पर सात्विकता, राम नाम और सेवा का विशेष महत्व है। इस दिन पूजा, रामायण पाठ, दीपदान और दान शुभ हैं। तामसिक भोजन, कटु वचन, राहु काल में पूजा का आरंभ और अयोध्या यात्रा में अनुशासन तोड़ना वर्जित माना गया है।

  • सुबह स्नान करके राम पूजा और राम नाम जप करें
  • संध्या को घर के द्वार पर दीप अवश्य जलाएं
  • पौष पूर्णिमा होने से तिल, अन्न और कंबल का दान करें
  • परिवार के साथ बैठकर रामायण की कोई कथा पढ़ें
  • घर में प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा का प्रयोग न करें
  • किसी का अपमान या असत्य भाषण न करें
  • राहु काल में पूजा का आरंभ न करें
  • अयोध्या जाएं तो मंदिर के नियमों और कतार का पालन करें

जब हर हृदय में अयोध्या बसती है

रामलला प्रतिष्ठा दिवस याद दिलाता है कि अयोध्या केवल सरयू के तट पर नहीं बल्कि हर उस हृदय में बसती है जहां राम नाम गूंजता है। इस दिन जलाया गया एक दीप भीतर के अंधकार को दूर करने का संकल्प बन सकता है।

22 जनवरी 2027 को जब पौष पूर्णिमा का चंद्रमा भगवान राम के जन्म लग्न कर्क में चमकेगा, तब श्रद्धा से लिया गया एक राम नाम जीवन को मर्यादा, शांति और आनंद से भर सकता है। जहां राम हैं, वहां अंधकार टिक नहीं पाता।

FAQ

रामलला प्रतिष्ठा दिवस 2027 कब है?
अंग्रेजी तिथि के अनुसार रामलला प्रतिष्ठा दिवस शुक्रवार, 22 जनवरी 2027 को है। यह प्राण प्रतिष्ठा की तीसरी वर्षगांठ है।

रामलला की प्राण प्रतिष्ठा कब और किस मुहूर्त में हुई थी?
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में हुई थी। मुख्य अनुष्ठान अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 12:29:08 से 12:30:32 तक 84 सेकंड में संपन्न हुआ था।

रामलला की मूर्ति किसने बनाई और कितनी ऊंची है?
रामलला की मूर्ति मैसूरु के मूर्तिकार अरुण योगीराज ने बनाई है। यह 51 इंच ऊंची है और काली कृष्ण शिला से बनी है।

घर पर रामलला प्रतिष्ठा दिवस कैसे मनाएं?
सुबह स्नान के बाद राम दरबार या रामलला का पूजन करें और माखन मिश्री का भोग लगाएं। राम नाम का जप करें, सुंदरकांड पढ़ें और संध्या को दीप जलाएं।

प्रतिष्ठा द्वादशी क्या है?
प्रतिष्ठा द्वादशी रामलला प्राण प्रतिष्ठा की हिंदू तिथि के अनुसार वर्षगांठ है। यह पौष शुक्ल द्वादशी को मनाई जाती है, क्योंकि 22 जनवरी 2024 को यही तिथि थी।

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अपर्णा पाटनी

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