गणतंत्र दिवस 2027 क्यों मनाया जाता है?

By पं. अमिताभ शर्मा

78वें गणतंत्र दिवस पर संविधान का इतिहास, परेड की परंपराएं और वैदिक काल से जुड़ी गणतंत्र की जड़ें।

गणतंत्र दिवस 2027 इतिहास और महत्व

गणतंत्र दिवस 2027 कब है और यह कौन सा गणतंत्र दिवस है?

गणतंत्र दिवस 2027 मंगलवार, 26 जनवरी को मनाया जाएगा। यह भारत का 78वां गणतंत्र दिवस है। 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ था और भारत एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य बना था। इस दिन नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर भव्य परेड होती है।

गणतंत्र दिवस वह राष्ट्रीय पर्व है जो 26 जनवरी 1950 को भारत के संविधान के लागू होने और देश के गणराज्य बनने की स्मृति में हर वर्ष मनाया जाता है।

गणतंत्र का अर्थ है वह शासन व्यवस्था जिसमें राष्ट्र का प्रमुख जनता द्वारा चुना जाता है, वंश परंपरा से नहीं। 26 जनवरी 1950 से भारत में सर्वोच्च सत्ता किसी राजा या विदेशी शासक के पास नहीं बल्कि संविधान और जनता के पास है। यही कारण है कि यह दिन हर भारतीय के लिए गौरव का दिन है।

विवरण जानकारी
अवसर गणतंत्र दिवस
दिनांक 26 जनवरी 2027, मंगलवार
क्रम 78वां गणतंत्र दिवस
संविधान लागू हुआ 26 जनवरी 1950
संविधान अपनाया गया 26 नवंबर 1949
मुख्य समारोह कर्तव्य पथ, नई दिल्ली
ध्वज फहराने वाले भारत के राष्ट्रपति
समापन समारोह बीटिंग रिट्रीट, 29 जनवरी
पंचांग (उत्तर भारत) माघ कृष्ण पक्ष, पंचमी के आसपास
सूर्य की स्थिति मकर राशि
दिल्ली में सूर्योदय प्रातः लगभग 7:12 बजे

परेड और समारोह का सटीक समय हर वर्ष आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार घोषित किया जाता है। आमतौर पर मुख्य समारोह सुबह के समय आरंभ होता है।

26 जनवरी को ही गणतंत्र दिवस क्यों चुना गया?

26 जनवरी को गणतंत्र दिवस इसलिए चुना गया क्योंकि 26 जनवरी 1930 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज का संकल्प मनाया था। उस दिन देश भर में पूर्ण स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा ली गई थी। इसी ऐतिहासिक तिथि का सम्मान करने के लिए संविधान को 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया।

पूर्ण स्वराज का अर्थ है ब्रिटिश शासन से पूर्ण स्वतंत्रता, जिसकी मांग दिसंबर 1929 के लाहौर अधिवेशन में स्वीकार की गई थी।

संविधान 26 नवंबर 1949 को ही बनकर तैयार हो गया था और संविधान सभा ने इसे उसी दिन अपनाया था। लेकिन इसे लागू करने के लिए लगभग 2 महीने प्रतीक्षा की गई, ताकि पूर्ण स्वराज दिवस की 20वीं वर्षगांठ पर भारत गणराज्य बने। आज 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है।

तिथि ऐतिहासिक घटना
26 जनवरी 1930 पूर्ण स्वराज दिवस का आयोजन
9 दिसंबर 1946 संविधान सभा की पहली बैठक
26 नवंबर 1949 संविधान सभा द्वारा संविधान अपनाया गया
24 जनवरी 1950 संविधान सभा के सदस्यों ने संविधान पर हस्ताक्षर किए
26 जनवरी 1950 संविधान लागू हुआ और भारत गणराज्य बना

भारत का संविधान किसने और कितने समय में बनाया?

भारत का संविधान संविधान सभा ने लगभग 2 वर्ष 11 महीने और 18 दिनों में तैयार किया। डॉ. भीमराव अंबेडकर संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे, इसलिए उन्हें संविधान का प्रमुख शिल्पकार कहा जाता है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के अध्यक्ष थे और वे देश के पहले राष्ट्रपति बने।

संविधान सभा वह निर्वाचित निकाय थी जिसका गठन स्वतंत्र भारत का संविधान बनाने के लिए किया गया था।

भारत का संविधान विश्व के सबसे लंबे लिखित संविधानों में गिना जाता है। मूल संविधान हाथ से सुंदर अक्षरों में लिखा गया था और उसके पन्नों को कलाकारों ने भारतीय संस्कृति से जुड़े चित्रों से सजाया था। इन चित्रों में रामायण, महाभारत और भारतीय इतिहास के प्रसंग भी शामिल हैं।

  • संविधान की प्रस्तावना "हम भारत के लोग" से शुरू होती है
  • संविधान भारत को संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित करता है
  • यह हर नागरिक को न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता का वचन देता है
  • मूल अधिकारों के साथ नागरिकों के मूल कर्तव्य भी इसमें दिए गए हैं

गणतंत्र दिवस कैसे मनाया जाता है?

गणतंत्र दिवस पर नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर राष्ट्रपति राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं, जिसके बाद 21 तोपों की सलामी दी जाती है और राष्ट्रगान होता है। इसके बाद तीनों सेनाओं की टुकड़ियां, राज्यों की झांकियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाते हैं।

कर्तव्य पथ नई दिल्ली का वह प्रमुख मार्ग है जहां गणतंत्र दिवस की परेड होती है, जिसे पहले राजपथ कहा जाता था।

गणतंत्र दिवस समारोह की प्रमुख परंपराएं इस प्रकार हैं।

  1. राष्ट्रपति कर्तव्य पथ पर राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं
  2. ध्वज फहराने के साथ 21 तोपों की सलामी दी जाती है
  3. राष्ट्रगान "जन गण मन" गाया जाता है
  4. थल सेना, नौसेना और वायु सेना की टुकड़ियां मार्च पास्ट करती हैं
  5. विभिन्न राज्यों और मंत्रालयों की झांकियां भारत की विविधता को दिखाती हैं
  6. स्कूली बच्चे सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं
  7. वीरता पुरस्कार पाने वाले बहादुर बच्चों और सैनिकों का सम्मान होता है
  8. वायु सेना के विमानों का फ्लाईपास्ट समारोह का समापन करता है

हर वर्ष किसी विदेशी राष्ट्र प्रमुख को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने की परंपरा भी है। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों की घोषणा होती है। 29 जनवरी को विजय चौक पर बीटिंग रिट्रीट समारोह के साथ गणतंत्र दिवस उत्सव का औपचारिक समापन होता है।

ध्वजारोहण और ध्वज फहराने में क्या अंतर है?

स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री लाल किले पर ध्वजारोहण करते हैं, जिसमें ध्वज को नीचे से ऊपर खींचा जाता है। गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति ध्वज फहराते हैं, जिसमें ध्वज पहले से ऊपर बंधा होता है और उसे खोला जाता है। स्वतंत्रता दिवस नए राष्ट्र के उदय का प्रतीक है, जबकि गणतंत्र दिवस पहले से स्वतंत्र राष्ट्र के अपने संविधान को अपनाने का प्रतीक है।

आधार स्वतंत्रता दिवस गणतंत्र दिवस
तिथि 15 अगस्त 26 जनवरी
मुख्य स्थान लाल किला कर्तव्य पथ
ध्वज कौन फहराता है प्रधानमंत्री राष्ट्रपति
ध्वज की विधि ध्वजारोहण, नीचे से ऊपर ध्वज फहराना, ऊपर बंधे ध्वज को खोलना
किसकी स्मृति 1947 में स्वतंत्रता 1950 में संविधान का लागू होना

वैदिक परंपरा में गणतंत्र की जड़ें कहां हैं?

भारत में सामूहिक निर्णय और जनसभा की परंपरा अत्यंत प्राचीन है। अथर्ववेद में सभा और समिति नाम की दो संस्थाओं का उल्लेख मिलता है, जिनमें समाज के लोग मिलकर निर्णय लेते थे। प्राचीन भारत में वैशाली जैसे गणराज्य भी थे, जहां शासन सामूहिक रूप से चलता था।

सभा और समिति वैदिक काल की वे संस्थाएं थीं जिनमें लोग मिलकर समाज और शासन से जुड़े निर्णय लेते थे।

ऋग्वेद का अंतिम सूक्त एकता और सामूहिक विचार का सुंदर संदेश देता है। इसे संज्ञान सूक्त कहा जाता है।

मंत्र अर्थ
संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम् साथ चलो, साथ बोलो और तुम्हारे मन एक समान विचार करें
माता भूमिः पुत्रो अहं पृथिव्याः भूमि मेरी माता है और मैं पृथ्वी का पुत्र हूं
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः सभी सुखी हों और सभी निरोगी हों

दूसरा मंत्र अथर्ववेद के भूमि सूक्त का है, जो मातृभूमि के प्रति प्रेम का सबसे प्राचीन उद्घोष माना जाता है। ये मंत्र बताते हैं कि एकता, समानता और सबके कल्याण का भाव भारतीय चेतना में हजारों वर्षों से रहा है।

गणतंत्र दिवस का ज्योतिषीय संदर्भ क्या है?

26 जनवरी को सूर्य मकर राशि में होते हैं, जो शनि की राशि है। शनि अनुशासन, कर्तव्य, न्याय और जनता के कारक माने जाते हैं। 2027 में गणतंत्र दिवस मंगलवार को पड़ रहा है, जो साहस, सेना और पराक्रम के कारक मंगल का दिन है।

वैदिक ज्योतिष में शनि को न्यायाधीश ग्रह कहा जाता है और वे आम जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं। संविधान भी न्याय और जनता की सत्ता का ही प्रतीक है। सूर्य राज्य और शासन के कारक हैं। शनि की राशि में सूर्य का होना शासन के जनता और न्याय के अधीन होने का सुंदर प्रतीक माना जा सकता है।

ज्योतिषीय तत्व संकेत
मकर राशि में सूर्य अनुशासन, कर्तव्य और व्यवस्था
शनि न्याय और जनता का प्रतिनिधित्व
मंगलवार सेना, साहस और पराक्रम
माघ मास तप, संकल्प और सेवा

गणतंत्र दिवस पर नागरिक क्या करें?

गणतंत्र दिवस पर नागरिक राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करें, संविधान की प्रस्तावना पढ़ें और अपने मूल कर्तव्यों का स्मरण करें। इस दिन बच्चों को संविधान और स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में बताना और समाज सेवा का संकल्प लेना इस पर्व को सार्थक बनाता है।

  • सुबह परिवार के साथ परेड का सीधा प्रसारण देखें
  • बच्चों के साथ बैठकर संविधान की प्रस्तावना पढ़ें
  • राष्ट्रीय ध्वज संहिता के अनुसार ही ध्वज का प्रयोग करें
  • किसी जरूरतमंद, पूर्व सैनिक या शहीद परिवार की सहायता करें
  • प्लास्टिक के झंडों का प्रयोग न करें और ध्वज को जमीन पर न गिरने दें
  • कटे फटे या उल्टे ध्वज का प्रयोग न करें
  • राष्ट्रगान के समय सावधान मुद्रा में खड़े रहें
  • इस दिन किसी भी प्रकार के विवाद या अपमानजनक व्यवहार से बचें

जब संविधान की ज्योति हर नागरिक के हाथ में होती है

गणतंत्र दिवस याद दिलाता है कि भारत की असली शक्ति उसकी जनता और उसका संविधान है। "हम भारत के लोग" केवल तीन शब्द नहीं बल्कि यह वचन है कि इस देश की सत्ता हर नागरिक के हाथ में है।

26 जनवरी 2027 को, जब कर्तव्य पथ पर तिरंगा फहराएगा, तब हर भारतीय के मन में यह संकल्प जागे कि अधिकारों के साथ कर्तव्य भी निभाने हैं। ऋग्वेद का वह प्राचीन संदेश, साथ चलो और साथ बोलो, आज भी इस गणराज्य की आत्मा है।

FAQ

गणतंत्र दिवस 2027 कब है?
गणतंत्र दिवस मंगलवार, 26 जनवरी 2027 को मनाया जाएगा। यह भारत का 78वां गणतंत्र दिवस है।

गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है?
26 जनवरी 1930 को पूर्ण स्वराज दिवस मनाया गया था। इसी ऐतिहासिक तिथि के सम्मान में 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू किया गया।

भारत के संविधान के निर्माता कौन थे?
डॉ. भीमराव अंबेडकर संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे, इसलिए उन्हें संविधान का प्रमुख शिल्पकार कहा जाता है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के अध्यक्ष थे।

गणतंत्र दिवस पर ध्वज कौन फहराता है?
गणतंत्र दिवस पर भारत के राष्ट्रपति कर्तव्य पथ पर राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं। स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री लाल किले पर ध्वजारोहण करते हैं।

बीटिंग रिट्रीट समारोह कब होता है?
बीटिंग रिट्रीट समारोह 29 जनवरी को नई दिल्ली के विजय चौक पर होता है। इसके साथ गणतंत्र दिवस उत्सव का औपचारिक समापन होता है।

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लेखक

पं. अमिताभ शर्मा

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