सकट चौथ 2027 व्रत कैसे करें?

By अपर्णा पाटनी

माघ कृष्ण चतुर्थी पर संतान की रक्षा के लिए गणेश पूजा, तिलकुट भोग और चंद्र अर्घ्य की संपूर्ण विधि।

सकट चौथ 2027 चंद्रोदय समय और पूजा विधि

सकट चौथ 2027 कब है और चंद्रोदय का समय क्या है?

सकट चौथ 2027 सोमवार, 25 जनवरी को माघ कृष्ण चतुर्थी पर मनाई जाएगी। इस दिन माताएं संतान की दीर्घायु और सुख के लिए निर्जल या फलाहार व्रत रखती हैं। रात में चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है। दिल्ली में चंद्रोदय रात लगभग 8:45 से 9:15 बजे के बीच होने की संभावना है।

सकट चौथ माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाने वाला वह व्रत है जिसमें भगवान गणेश और सकट माता की पूजा करके संतान की रक्षा की कामना की जाती है।

सकट चौथ को तिलकुट चौथ, तिल चौथ, संकट चौथ और माघी चौथ भी कहा जाता है। "सकट" शब्द "संकट" से बना माना जाता है, यानी यह व्रत जीवन के संकटों को दूर करने वाला है। उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और हरियाणा में यह व्रत बड़ी श्रद्धा से किया जाता है।

पंचांग तत्व विवरण
व्रत का नाम सकट चौथ, तिलकुट चौथ
दिनांक 25 जनवरी 2027, सोमवार
हिंदू मास माघ मास, कृष्ण पक्ष (पूर्णिमांत)
तिथि चतुर्थी
चंद्रोदय (दिल्ली) रात लगभग 8:45 से 9:15 बजे के बीच
दिल्ली में सूर्योदय प्रातः लगभग 7:12 बजे
राहु काल (दिल्ली) प्रातः लगभग 8:30 से 9:50 बजे तक
सूर्य की स्थिति मकर राशि
व्रत का पारण चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद
मुख्य आराध्य भगवान गणेश और सकट माता
उसी दिन का अन्य पर्व लंबोदर संकष्टी चतुर्थी

चंद्रोदय का समय हर शहर में अलग होता है। व्रत खोलने से पहले अपने शहर का सटीक चंद्रोदय समय स्थानीय पंचांग से अवश्य देख लें। बादल होने पर पंचांग में दिए चंद्रोदय समय पर चंद्रमा की दिशा में अर्घ्य दिया जा सकता है।

सकट चौथ का महत्व क्या है?

सकट चौथ माताओं का अपनी संतान के लिए रखा जाने वाला सबसे प्रिय व्रत है। मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश और सकट माता की पूजा करने से संतान पर आने वाले संकट दूर होते हैं, उसकी आयु बढ़ती है और घर में सुख समृद्धि आती है।

संकष्टी चतुर्थी हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को भगवान गणेश के लिए रखा जाने वाला व्रत है और माघ मास की संकष्टी को सकट चौथ कहते हैं।

वर्ष भर की संकष्टी चतुर्थियों में माघ मास की सकट चौथ को सबसे बड़ा माना जाता है। माघ मास स्वयं अत्यंत पवित्र है और इस समय तिल का विशेष महत्व होता है। इसीलिए इस दिन तिल और गुड़ से बने तिलकुट का भोग और प्रसाद सबसे प्रमुख है।

इस व्रत की कुछ प्रमुख मान्यताएं इस प्रकार हैं।

  • संतान की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की रक्षा
  • घर से संकटों और बाधाओं का निवारण
  • संतान की शिक्षा और उन्नति में आने वाली रुकावटों का दूर होना
  • परिवार में सुख, शांति और समृद्धि
  • भगवान गणेश की कृपा से बुद्धि और विवेक की प्राप्ति

सकट चौथ की कथा क्या है?

सकट चौथ की सबसे प्रचलित कथा एक बूढ़ी माता और कुम्हार के आवे से जुड़ी है। इस कथा में एक माता ने सकट माता की पूजा करके अपने इकलौते पुत्र के प्राण बचाए। इसी कारण यह व्रत संतान की रक्षा के लिए किया जाता है।

कथा के अनुसार एक नगर में एक कुम्हार रहता था। एक बार उसने बर्तन पकाने के लिए आवा लगाया, लेकिन बर्तन पके ही नहीं। उसने राजा के पुरोहित से उपाय पूछा। पुरोहित ने कहा कि आवे में एक बालक की बलि देने से बर्तन पक जाएंगे। राजा ने आदेश दिया कि हर परिवार से बारी बारी एक बालक दिया जाएगा।

कुछ समय बाद एक बूढ़ी माता के इकलौते पुत्र की बारी आई। उस दिन सकट चौथ थी। दुखी माता ने सकट माता की पूजा की और अपने पुत्र को तिल और सुपारी देकर कहा कि सकट माता तुम्हारी रक्षा करेंगी। बालक को आवे में बिठा दिया गया।

अगली सुबह जब कुम्हार ने आवा खोला, तो सारे बर्तन पक चुके थे और बालक सुरक्षित बैठा था। इतना ही नहीं, पहले बलि दिए गए सभी बालक भी जीवित हो गए। यह देखकर पूरे नगर ने सकट माता की महिमा को स्वीकार किया और तभी से माताएं अपनी संतान के लिए यह व्रत करने लगीं।

गणेश जी की परिक्रमा कथा

सकट चौथ से भगवान गणेश की एक प्रसिद्ध कथा भी जुड़ी है। एक बार भगवान शिव और माता पार्वती ने अपने पुत्रों गणेश और कार्तिकेय से कहा कि जो पहले पृथ्वी की परिक्रमा करके लौटेगा, वही श्रेष्ठ माना जाएगा। कार्तिकेय अपने मोर पर बैठकर निकल पड़े।

गणेश जी ने अपने माता पिता की सात परिक्रमा की और कहा कि माता पिता में ही संपूर्ण संसार है। उनकी बुद्धिमत्ता से प्रसन्न होकर शिव और पार्वती ने उन्हें प्रथम पूज्य होने का आशीर्वाद दिया। यह कथा सिखाती है कि माता पिता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।

सकट चौथ की पूजा विधि क्या है?

सकट चौथ पर प्रातः स्नान करके व्रत का संकल्प लिया जाता है। संध्या को भगवान गणेश और सकट माता की पूजा करके तिलकुट, दूर्वा और मोदक अर्पित किए जाते हैं। कथा सुनने के बाद रात में चंद्रोदय पर चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है।

  1. ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें
  2. हाथ में जल, अक्षत और दूर्वा लेकर संतान की रक्षा के लिए व्रत का संकल्प लें
  3. दिन भर अपनी क्षमता के अनुसार निर्जल या फलाहार व्रत रखें
  4. संध्या को पूजा स्थान पर चौकी बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें
  5. सकट माता के प्रतीक के रूप में मिट्टी या गोबर से छोटी आकृति बनाएं या कलश स्थापित करें
  6. भगवान गणेश को रोली, अक्षत, लाल पुष्प और दूर्वा अर्पित करें
  7. तिल और गुड़ को कूटकर बनाया गया तिलकुट, मोदक, शकरकंद और फल का भोग लगाएं
  8. सकट चौथ की कथा पढ़ें या सुनें
  9. गणेश जी की आरती करें
  10. चंद्रोदय होने पर लोटे में जल, दूध, अक्षत और तिल डालकर चंद्रमा को अर्घ्य दें
  11. अर्घ्य के बाद तिलकुट का प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोलें और परिवार में प्रसाद बांटें

तिलकुट का महत्व

तिलकुट सकट चौथ का सबसे प्रमुख प्रसाद है। तिल को भुनकर और गुड़ के साथ कूटकर तिलकुट बनाया जाता है। कई परिवारों में तिलकुट से एक छोटी आकृति बनाकर घर का बेटा या बेटी उसे काटते हैं, जिसे प्रतीकात्मक रूप से संकट को काटने का भाव माना जाता है। माघ मास में तिल शनि और पितरों से जुड़े होने के कारण भी शुभ माना जाता है।

सकट चौथ के प्रमुख मंत्र

मंत्र उद्देश्य जप संख्या
ॐ गं गणपतये नमः भगवान गणेश की कृपा और विघ्न निवारण 108 बार
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ, निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा सभी कार्यों में बाधा दूर होना 11 बार
ॐ सों सोमाय नमः चंद्र अर्घ्य के समय चंद्र देव की कृपा 11 बार

दूसरे मंत्र का अर्थ है, हे टेढ़ी सूंड और विशाल शरीर वाले, करोड़ों सूर्यों के समान तेज वाले देव, मेरे सभी कार्यों को सदा बिना बाधा के पूर्ण करें।

सकट चौथ का ज्योतिषीय प्रभाव क्या है?

सकट चौथ 2027 सोमवार को पड़ रही है, जो चंद्रमा का दिन है। इस व्रत में चंद्र अर्घ्य का विशेष महत्व होने से यह संयोग अत्यंत शुभ है। ज्योतिष में भगवान गणेश को केतु और बुध से जोड़ा जाता है, इसलिए इस दिन की पूजा बुद्धि, संतान सुख और मानसिक शांति के लिए विशेष मानी जाती है।

चतुर्थी तिथि के स्वामी स्वयं भगवान गणेश माने जाते हैं। सोमवार और चंद्र अर्घ्य का मेल मन के कारक चंद्रमा को बल देता है, जो माताओं के लिए विशेष रूप से शुभ है, क्योंकि ज्योतिष में चंद्रमा माता के भी कारक हैं। सूर्य इस समय मकर राशि में हैं और माघ मास का पुण्य काल चल रहा है।

ग्रह संभावित समस्या सकट चौथ पर उपाय
चंद्रमा मानसिक तनाव, माता से जुड़े कष्ट चंद्रोदय पर दूध और तिल मिला जल अर्पित करें
बुध संतान की पढ़ाई में बाधा गणेश जी को दूर्वा की 21 गांठें अर्पित करें
केतु अचानक संकट और भय "ॐ गं गणपतये नमः" का 108 बार जप करें
बृहस्पति संतान प्राप्ति में देरी गणेश जी को पीले लड्डू अर्पित करें
शनि कार्य में रुकावट तिल और गुड़ का दान करें

सकट चौथ पर क्या करें और क्या न करें?

सकट चौथ पर गणेश पूजा, तिलकुट का भोग, कथा श्रवण और चंद्र अर्घ्य सबसे महत्वपूर्ण हैं। इस दिन चंद्रोदय से पहले भोजन, गणेश जी को तुलसी अर्पित करना, क्रोध और कटु वचन वर्जित माने गए हैं। व्रत अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही रखना चाहिए।

  • प्रातः स्नान करके संतान की रक्षा का संकल्प लें
  • गणेश जी को दूर्वा और तिलकुट अवश्य अर्पित करें
  • संध्या को सकट चौथ की कथा अवश्य सुनें
  • चंद्रोदय के बाद ही चंद्र अर्घ्य देकर व्रत खोलें
  • गणेश जी को तुलसी दल अर्पित न करें
  • चंद्रोदय से पहले अन्न ग्रहण न करें
  • घर में कलह, क्रोध और कटु वचन से बचें
  • गर्भवती महिलाएं और रोगी कठोर निर्जल व्रत न रखें, फलाहार करें

जब मां की प्रार्थना में संकट भी हार जाते हैं

सकट चौथ याद दिलाती है कि माता की प्रार्थना से बड़ी कोई रक्षा नहीं होती। कथा की उस बूढ़ी माता की तरह, जो श्रद्धा से सकट माता की शरण में गई, हर मां अपनी संतान के लिए विश्वास का दीप जलाती है।

25 जनवरी 2027 को, सोमवार की रात, जब चंद्रमा उदय होगा और माताएं तिल मिले जल से अर्घ्य देंगी, तब भगवान गणेश का आशीर्वाद हर संतान के जीवन से संकटों को दूर करने का संकल्प बन जाएगा। जहां मां का विश्वास है, वहां विघ्न टिक नहीं पाते।

FAQ

सकट चौथ 2027 कब है?
सकट चौथ सोमवार, 25 जनवरी 2027 को माघ कृष्ण चतुर्थी पर है। इसे तिलकुट चौथ और संकट चौथ भी कहा जाता है।

सकट चौथ 2027 पर चंद्रोदय कब होगा?
दिल्ली में चंद्रोदय रात लगभग 8:45 से 9:15 बजे के बीच होने की संभावना है। अपने शहर का सटीक समय स्थानीय पंचांग से अवश्य देखें।

सकट चौथ का व्रत कैसे खोलते हैं?
चंद्रोदय के बाद जल, दूध, अक्षत और तिल से चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद तिलकुट का प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोला जाता है।

सकट चौथ पर क्या भोग लगाया जाता है?
सकट चौथ पर भगवान गणेश को तिल और गुड़ से बना तिलकुट, मोदक, शकरकंद और फल का भोग लगाया जाता है। तिलकुट इस दिन का सबसे प्रमुख प्रसाद है।

सकट चौथ का व्रत कौन रखता है?
सकट चौथ का व्रत मुख्य रूप से माताएं अपनी संतान की दीर्घायु और रक्षा के लिए रखती हैं। कई परिवारों में पूरा परिवार भी भगवान गणेश की पूजा में भाग लेता है।

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