पोंगल 2027 पर सूर्य पूजा कैसे करें?

By पं. नरेंद्र शर्मा

मकर संक्रांति पर उफनते दूध, नए चावल और सूर्य देव के प्रति कृतज्ञता का पर्व

पोंगल 2027: तिथि, शुभ समय और सूर्य पूजा विधि

जब उबलते दूध के साथ समृद्धि भी उमड़ पड़ती है

तमिलनाडु के घरों में थाई मास की पहली सुबह एक अनोखी प्रतीक्षा से भरी होती है। सूर्योदय से पहले ही आंगन में चावल के आटे से सुंदर कोलम बन जाता है। गन्ने के ऊंचे डंठल दरवाजे के दोनों ओर खड़े किए जाते हैं। मिट्टी का नया बर्तन, जिसके गले में हल्दी और अदरक के हरे पौधे बंधे होते हैं, खुले आसमान के नीचे चूल्हे पर चढ़ाया जाता है। पूरा परिवार उस बर्तन के चारों ओर खड़ा होकर उस एक पल का इंतजार करता है जब दूध उबलकर बाहर छलकेगा। और जैसे ही दूध उफनता है, सबके मुंह से एक साथ निकलता है, "पोंगलो पोंगल"।

यही थाई पोंगल है, तमिल समाज का सबसे बड़ा फसल उत्सव और सूर्य देव के प्रति कृतज्ञता का पर्व। वर्ष 2027 में पोंगल शुक्रवार, 15 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन मनाया जाएगा।

विवरण जानकारी
पर्व का नाम थाई पोंगल
तिथि 15 जनवरी 2027
वार शुक्रवार
तमिल मास थाई मास का पहला दिन
पंचांग का आधार सौर पंचांग, मकर संक्रांति
सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी 2027 की रात्रि
पुण्य काल 15 जनवरी को सूर्योदय से मध्याह्न तक
चंद्र मास और पक्ष पौष मास, शुक्ल पक्ष
चंद्र तिथि शुक्ल सप्तमी के आसपास
चेन्नई में सूर्योदय प्रातः लगभग 6:35 बजे
चेन्नई में सूर्यास्त सायं लगभग 6:05 बजे
पोंगल बनाने का श्रेष्ठ समय सूर्योदय से प्रातः लगभग 10:50 बजे तक
राहु काल (चेन्नई) प्रातः लगभग 10:55 से दोपहर 12:20 बजे तक
आराध्य देव सूर्य देव

सूर्य का राशि परिवर्तन 14 जनवरी की रात को होने के कारण संक्रांति का पुण्य काल अगले दिन यानी 15 जनवरी की सुबह माना जाएगा। पोंगल बनाने और सूर्य को भोग लगाने का कार्य सूर्योदय के बाद और राहु काल से पहले पूरा कर लेना सबसे शुभ रहेगा। अपने शहर के लिए सटीक समय स्थानीय पंचांग से अवश्य देख लें।

एक नज़र में मुख्य अनुष्ठान

  • भोर में स्नान और नए वस्त्र धारण
  • आंगन में चावल के आटे से कोलम बनाना
  • दरवाजे पर गन्ने, आम के पत्तों और केले के तनों की सजावट
  • हल्दी और अदरक के पौधे बंधे नए मिट्टी के बर्तन में पोंगल बनाना
  • दूध के उफनने पर "पोंगलो पोंगल" का उद्घोष
  • केले के पत्ते पर सूर्य देव को पोंगल, गन्ना, केले और नारियल का भोग
  • सूर्य को अर्घ्य और आरती
  • परिवार के साथ भोजन और बड़ों का आशीर्वाद

पोंगल क्या है और इसका नाम कैसे पड़ा?

"पोंगल" तमिल शब्द है, जिसका अर्थ है उबलना, उफनना या भरकर बहना। यह नाम उस व्यंजन से आया है जो इस दिन नए चावल, दूध और गुड़ से बनाया जाता है। लेकिन इस शब्द का एक गहरा भाव भी है। जैसे बर्तन में दूध उबलकर बाहर बहता है, वैसे ही परिवार के जीवन में सुख, अन्न और समृद्धि भी भरकर बहे, यही इस पर्व की कामना है।

पोंगल चार दिनों का उत्सव है, जिसमें थाई पोंगल दूसरा और मुख्य दिन है।

दिन पर्व 2027 की तिथि मुख्य भाव
पहला दिन भोगी 14 जनवरी, गुरुवार पुरानी वस्तुओं का त्याग, इंद्र देव की पूजा
दूसरा दिन थाई पोंगल 15 जनवरी, शुक्रवार सूर्य देव की पूजा, नए चावल का पोंगल
तीसरा दिन मट्टू पोंगल 16 जनवरी, शनिवार गाय और बैलों की पूजा
चौथा दिन कानुम पोंगल 17 जनवरी, रविवार परिवार से मिलना, मेलजोल

तमिल परंपरा में एक बहुत प्रसिद्ध कहावत है, "थाई पिरन्दाल वळि पिरक्कुम"। इसका अर्थ है कि जब थाई मास जन्म लेता है तब नया रास्ता भी जन्म लेता है। किसान के लिए थाई मास कटाई के बाद का समय है, जब घर में अनाज होता है, कर्ज चुकाए जाते हैं, विवाह तय होते हैं और नई योजनाएं बनती हैं। इसीलिए थाई का पहला दिन आशा और नई शुरुआत का दिन माना जाता है।

प्राचीन तमिल संगम साहित्य में भी थाई मास के स्नान, व्रत और उत्सव का उल्लेख मिलता है। इससे पता चलता है कि यह पर्व हजारों वर्षों से तमिल जीवन का हिस्सा रहा है। आज यह तमिलनाडु के साथ साथ पुडुचेरी, श्रीलंका, मलेशिया, सिंगापुर और दुनिया भर में बसे तमिल समाज द्वारा बड़े उत्साह से मनाया जाता है।

भोगी से पोंगल तक की कथा

पोंगल से एक दिन पहले भोगी मनाई जाती है। इस दिन घर की सफाई की जाती है और पुरानी, टूटी या बेकार वस्तुओं को अलाव में जलाया जाता है। दरवाजे पर नीम, आम के पत्ते और अवारम के फूल बांधे जाते हैं, जिसे काप्पु कट्टु कहते हैं। इसे घर की रक्षा का प्रतीक माना जाता है।

भोगी से एक सुंदर कथा जुड़ी है। कहा जाता है कि ब्रजवासी हर वर्ष वर्षा के देवता इंद्र की पूजा करते थे। भगवान कृष्ण ने उन्हें समझाया कि वर्षा, धरती और गोवर्धन पर्वत ही उनके पशुओं और खेतों का पालन करते हैं, इसलिए उन्हें प्रकृति की पूजा करनी चाहिए। इससे इंद्र क्रोधित हो गए और उन्होंने भयंकर वर्षा शुरू कर दी। तब कृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर सबको बचाया। इंद्र का अहंकार टूटा और उन्होंने क्षमा मांगी। कृष्ण ने उन्हें क्षमा करते हुए कहा कि कटाई के समय इंद्र का भी सम्मान किया जाता रहेगा। इसीलिए भोगी पर इंद्र को वर्षा के लिए धन्यवाद दिया जाता है।

इस क्रम का अर्थ बहुत सुंदर है। पहले दिन वर्षा के देवता को धन्यवाद, दूसरे दिन सूर्य देव को, तीसरे दिन पशुओं को और चौथे दिन परिवार तथा समाज को। फसल किसी एक की देन नहीं होती। वर्षा, धूप, पशु और मनुष्य, सबके सहयोग से अन्न घर तक पहुंचता है। पोंगल का चार दिनों का क्रम इसी सत्य का उत्सव है।

थाई पोंगल की पूजा विधि

  1. सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। संभव हो तो जल में थोड़े तिल डाल लें।
  2. नए या स्वच्छ वस्त्र पहनें। तमिल परंपरा में इस दिन नए कपड़े पहनना शुभ माना जाता है।
  3. आंगन को धोकर चावल के आटे से कोलम बनाएं। कई घरों में कोलम में सूर्य, गन्ना या पोंगल के बर्तन की आकृति बनाई जाती है।
  4. दरवाजे पर आम के पत्तों का तोरण बांधें और गन्ने के डंठल खड़े करें।
  5. नए मिट्टी के बर्तन के गले में हल्दी का पौधा और अदरक का पौधा बांधें। बर्तन पर हल्दी, चंदन और कुमकुम से तिलक करें।
  6. खुले आंगन में, जहां सूर्य की रोशनी पड़ती हो, लकड़ी या गोबर के कंडों का चूल्हा जलाएं और बर्तन चढ़ाएं।
  7. बर्तन में दूध और पानी डालें और उसके उबलने का इंतजार करें।
  8. जैसे ही दूध उफनकर बाहर बहे, पूरा परिवार "पोंगलो पोंगल" कहे और शंख बजाएं।
  9. इसके बाद नए चावल, मूंग दाल और गुड़ डालकर मीठा पोंगल बनाएं। अंत में घी, काजू, किशमिश और इलायची मिलाएं।
  10. केले के पत्ते पर पोंगल, गन्ना, केले, नारियल, हल्दी और पान सुपारी रखकर सूर्य देव को भोग लगाएं।
  11. तांबे के लोटे से सूर्य को अर्घ्य दें और नीचे दिए गए मंत्रों का जप करें।
  12. कपूर से आरती करें, फिर बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लें और परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करें।

दूध किस दिशा में उफने, इसकी मान्यता

लोक परंपरा में यह देखा जाता है कि बर्तन से दूध किस दिशा में उफनता है। पूर्व दिशा में उफनना सबसे शुभ माना जाता है, क्योंकि पूर्व सूर्य की दिशा है। यह आने वाले वर्ष में सुख और समृद्धि का संकेत माना जाता है। यह मान्यता परिवार के लिए उत्साह और आशा का क्षण बन जाती है।

पोंगल के प्रमुख व्यंजन

व्यंजन मुख्य सामग्री विशेषता
सक्करै पोंगल नए चावल, मूंग दाल, गुड़, घी, इलायची सूर्य को अर्पित होने वाला मीठा पोंगल
वेन पोंगल चावल, मूंग दाल, काली मिर्च, जीरा, घी नमकीन पोंगल, सुबह का मुख्य भोजन
गन्ना ताजा गन्ना मिठास और समृद्धि का प्रतीक
वडै उड़द दाल पर्व के भोजन का हिस्सा
पायसम दूध, चावल या सेवई, गुड़ मीठा व्यंजन

पोंगल के प्रमुख मंत्र

मंत्र उद्देश्य जप संख्या
ॐ घृणि सूर्याय नमः सूर्य देव की कृपा, स्वास्थ्य और यश 108 बार
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः सूर्य का बीज मंत्र, आत्मबल और नेतृत्व 108 बार
ॐ आदित्याय विद्महे दिवाकराय धीमहि, तन्नो सूर्यः प्रचोदयात् सूर्य गायत्री, बुद्धि और तेज 11 बार

जो लोग अधिक समय दे सकें, वे इस दिन आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं। रामायण के अनुसार ऋषि अगस्त्य ने युद्ध से पहले भगवान राम को यह स्तोत्र सुनाया था, जिससे उन्हें विजय की शक्ति मिली।

पोंगल का ज्योतिषीय महत्व

थाई पोंगल का आधार है सूर्य का मकर राशि में प्रवेश। वैदिक ज्योतिष में सूर्य आत्मा, पिता, स्वास्थ्य, यश, सरकार और नेतृत्व के कारक हैं। मकर संक्रांति से परंपरा के अनुसार उत्तरायण आरंभ होता है, जिसे देवताओं का दिन कहा गया है। इस काल में सूर्य उपासना का फल कई गुना माना जाता है।

मकर शनि की राशि है और शनि को सूर्य का पुत्र माना जाता है। मकर संक्रांति पर सूर्य अपने पुत्र के घर जाते हैं, जो पिता और पुत्र के बीच के मतभेद मिटने का प्रतीक है। इसीलिए इस दिन तिल और गुड़ का महत्व है, जो शनि और सूर्य दोनों को प्रसन्न करते हैं।

2027 में यह पर्व एक विशेष संयोग के साथ आ रहा है। इस दिन सूर्योदय के समय शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि के आसपास का समय होगा और परंपरागत रूप से सप्तमी तिथि के स्वामी स्वयं सूर्य देव माने जाते हैं। यानी सूर्य का पर्व, सूर्य की तिथि के निकट आ रहा है। इसके साथ ही दिन शुक्रवार है, जो शुक्र ग्रह का दिन है। शुक्र मिठास, भोग, सौंदर्य, उत्सव और पारिवारिक सुख के कारक हैं। मीठे पोंगल, गन्ने, नए वस्त्र और परिवार के सामूहिक भोजन वाले इस पर्व पर शुक्र का दिन होना इसे और आनंदमय बना देता है।

सूर्य को मजबूत करने के उपाय

स्थिति पोंगल पर उपाय
कुंडली में सूर्य कमजोर हो सूर्योदय के समय तांबे के लोटे से लाल फूल और गुड़ डालकर अर्घ्य दें
पिता से संबंध में तनाव हो पिता के पैर छूकर आशीर्वाद लें और उन्हें मीठा पोंगल खिलाएं
सरकारी कार्य में बाधा हो गेहूं, गुड़ और तांबे का दान करें
आत्मविश्वास की कमी हो आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें
स्वास्थ्य कमजोर रहता हो सूर्य नमस्कार करें और सूर्य बीज मंत्र का जप करें
शनि की साढ़ेसाती या ढैया हो काले तिल और गुड़ का दान करें

पोंगल का आध्यात्मिक और सामाजिक संदेश

पोंगल का सबसे बड़ा संदेश है कृतज्ञता। जिस सूर्य के बिना एक दाना भी नहीं उगता, उसे वर्ष में एक दिन पूरे परिवार के साथ धन्यवाद देना मनुष्य को उसकी सीमाओं और प्रकृति पर उसकी निर्भरता की याद दिलाता है। उबलता हुआ दूध केवल रसोई का दृश्य नहीं है। यह उस भावना का प्रतीक है कि जब मन कृतज्ञता से भरता है, तो वह भी उफनकर दूसरों तक पहुंचता है।

पोंगल खुले आंगन में, सूर्य के सामने बनाया जाता है, बंद रसोई में नहीं। इसके पीछे एक सुंदर विचार है। जो भोजन सूर्य की कृपा से उगा है, उसे पहले सूर्य के सामने ही पकाया और अर्पित किया जाए। यह परंपरा मनुष्य को प्रकृति के साथ सीधा संबंध जोड़ने का अवसर देती है।

सामाजिक दृष्टि से पोंगल पूरे समुदाय को जोड़ता है। इस दिन पड़ोसियों के बीच पोंगल बांटा जाता है, किसान अपने खेतिहर मजदूरों को नए वस्त्र और अनाज देते हैं और परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठकर भोजन करते हैं। आज के व्यस्त जीवन में, जहां परिवार के लोग अलग अलग शहरों में रहते हैं, पोंगल उन्हें एक आंगन में वापस लाने का बहाना बन जाता है।

पोंगल मनाने के लाभ

  • सूर्य देव की कृपा से स्वास्थ्य, यश और आत्मबल
  • घर में अन्न और धन की वृद्धि की मान्यता
  • पिता और पुत्र के संबंधों में मधुरता
  • शनि के कष्टों में राहत
  • परिवार में प्रेम और एकता
  • नए कार्यों और योजनाओं के लिए शुभ आरंभ

क्या करें और क्या न करें

क्या करें क्या न करें
सूर्योदय से पहले स्नान करें सूर्योदय के बाद देर तक न सोएं
पोंगल खुले आंगन में सूर्य के सामने बनाएं राहु काल में पोंगल न चढ़ाएं
नए मिट्टी के बर्तन का उपयोग करें पुराने या टूटे बर्तन का उपयोग न करें
पहला भोग सूर्य देव को लगाएं भोग से पहले पोंगल न खाएं
पड़ोसियों और जरूरतमंदों के साथ पोंगल बांटें भोजन की बर्बादी न करें
तिल, गुड़ और अन्न का दान करें किसी से कटु वचन न बोलें

जब सूर्य की पहली किरण आंगन में आशीर्वाद बनकर उतरती है

थाई पोंगल की सुबह जब सूर्य की पहली किरण कोलम से सजे आंगन पर पड़ती है और मिट्टी के बर्तन से दूध उफनकर बहता है तब वह क्षण केवल एक परंपरा नहीं रह जाता। वह मनुष्य, प्रकृति और ईश्वर के बीच एक मौन संवाद बन जाता है। 15 जनवरी 2027 को, शुक्रवार के दिन, जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर चुके होंगे और थाई मास का पहला सूरज उगेगा तब सच्चे मन से दिया गया एक अर्घ्य और प्रेम से बांटा गया एक दोना पोंगल पूरे वर्ष के लिए नया रास्ता खोल सकता है। जिस घर में कृतज्ञता उफनती है, वहां समृद्धि कभी नहीं रुकती।

FAQ

पोंगल 2027 कब है?
थाई पोंगल 2027 शुक्रवार, 15 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन मनाया जाएगा। भोगी 14 जनवरी, मट्टू पोंगल 16 जनवरी और कानुम पोंगल 17 जनवरी को होगा।

पोंगल बनाने का शुभ समय क्या है?
15 जनवरी को सूर्योदय से प्रातः लगभग 10:50 बजे तक, यानी राहु काल से पहले पोंगल बनाना और सूर्य को भोग लगाना श्रेष्ठ है।

पोंगल पर किस देवता की पूजा होती है?
थाई पोंगल पर सूर्य देव की पूजा होती है। उन्हें नए चावल का मीठा पोंगल, गन्ना, केले और नारियल अर्पित किए जाते हैं।

पोंगलो पोंगल क्यों बोलते हैं?
जब बर्तन में दूध उबलकर बाहर बहता है तब परिवार "पोंगलो पोंगल" कहता है। यह जीवन में सुख और समृद्धि के उमड़ने की कामना है।

पोंगल का ज्योतिषीय महत्व क्या है?
यह पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश और उत्तरायण के आरंभ से जुड़ा है। इस दिन सूर्य उपासना से आत्मबल, स्वास्थ्य और यश की प्राप्ति मानी जाती है।

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पं. नरेंद्र शर्मा

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