विवेकानंद जयंती 2027 तिथि अनुसार कब है?

By पं. नरेंद्र शर्मा

माघ कृष्ण सप्तमी पर स्वामी विवेकानंद की जन्म तिथि, उनके जीवन संदेश और युवाओं के लिए अमर प्रेरणा।

विवेकानंद जयंती 2027 तिथि और जीवन संदेश

तिथि अनुसार विवेकानंद जयंती 2027 कब है?

हिंदू पंचांग की तिथि के अनुसार स्वामी विवेकानंद जयंती 2027 गुरुवार, 28 जनवरी को माघ कृष्ण सप्तमी पर मनाई जाएगी। अंग्रेजी तिथि के अनुसार उनकी जयंती हर वर्ष 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाई जाती है। 2027 में स्वामी जी की 164वीं जयंती है।

तिथि अनुसार विवेकानंद जयंती वह दिन है जब स्वामी विवेकानंद के जन्म की हिंदू तिथि, माघ कृष्ण सप्तमी, पर उनकी जयंती मनाई जाती है।

स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता में हुआ था। उस दिन मकर संक्रांति थी और पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार माघ कृष्ण सप्तमी तिथि थी। बंगाल में प्रचलित अमांत पंचांग में इसी तिथि को पौष कृष्ण सप्तमी कहा जाता है। रामकृष्ण मठ और मिशन हर वर्ष इसी तिथि पर स्वामी जी की जन्म तिथि पूजा करते हैं।

विवरण जानकारी
अवसर स्वामी विवेकानंद जयंती (तिथि अनुसार)
दिनांक 28 जनवरी 2027, गुरुवार
तिथि माघ कृष्ण सप्तमी (पूर्णिमांत)
अमांत पंचांग में तिथि पौष कृष्ण सप्तमी
अंग्रेजी तिथि अनुसार जयंती 12 जनवरी, राष्ट्रीय युवा दिवस
जयंती क्रम 164वीं जयंती
जन्म 12 जनवरी 1863, कलकत्ता
बचपन का नाम नरेंद्रनाथ दत्त
गुरु श्री रामकृष्ण परमहंस
दिल्ली में सूर्योदय प्रातः लगभग 7:11 बजे
राहु काल (दिल्ली) दोपहर लगभग 1:55 से 3:15 बजे तक

रामकृष्ण मठ और मिशन की शाखाओं में इस दिन मंगल आरती, विशेष पूजा, होम, भजन और नारायण सेवा होती है। अपने निकट के रामकृष्ण मठ के कार्यक्रम का समय वहां की सूचना से देख लें।

स्वामी विवेकानंद की जयंती दो दिन क्यों मनाई जाती है?

स्वामी विवेकानंद की जयंती अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 12 जनवरी को और हिंदू पंचांग के अनुसार माघ कृष्ण सप्तमी को मनाई जाती है। चंद्र तिथियां हर वर्ष अलग अंग्रेजी तारीख पर पड़ती हैं, इसलिए तिथि अनुसार जयंती की तारीख हर वर्ष बदलती रहती है।

राष्ट्रीय युवा दिवस 12 जनवरी को मनाया जाता है, जिसकी घोषणा भारत सरकार ने 1984 में की थी और जो 1985 से मनाया जा रहा है।

आधार अंग्रेजी तिथि अनुसार हिंदू तिथि अनुसार
तिथि 12 जनवरी माघ कृष्ण सप्तमी
2027 में दिनांक 12 जनवरी 2027 28 जनवरी 2027
प्रमुख रूप राष्ट्रीय युवा दिवस जन्म तिथि पूजा
मुख्य आयोजन विद्यालय, कॉलेज और युवा कार्यक्रम रामकृष्ण मठ और मिशन में पूजा और सेवा

स्वामी विवेकानंद कौन थे?

स्वामी विवेकानंद श्री रामकृष्ण परमहंस के प्रमुख शिष्य और भारत के महान आध्यात्मिक गुरु थे। 1893 में शिकागो की विश्व धर्म महासभा में दिए उनके भाषण ने दुनिया को वेदांत और भारतीय संस्कृति से परिचित कराया। उन्होंने 1897 में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की।

वेदांत भारतीय दर्शन की वह धारा है जो उपनिषदों पर आधारित है और आत्मा तथा ब्रह्म की एकता का संदेश देती है।

नरेंद्रनाथ दत्त का जन्म कलकत्ता के एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ। उनके पिता विश्वनाथ दत्त वकील थे और माता भुवनेश्वरी देवी अत्यंत धार्मिक स्वभाव की थीं। नरेंद्र बचपन से ही तेजस्वी, निडर और सत्य के खोजी थे।

जीवन की प्रमुख घटनाएं

वर्ष घटना
1863 12 जनवरी को कलकत्ता में जन्म
1881 दक्षिणेश्वर में श्री रामकृष्ण परमहंस से पहली भेंट
1886 श्री रामकृष्ण की महासमाधि के बाद संन्यास जीवन
1892 कन्याकुमारी में समुद्र के बीच शिला पर ध्यान
1893 11 सितंबर को शिकागो की विश्व धर्म महासभा में ऐतिहासिक भाषण
1897 1 मई को रामकृष्ण मिशन की स्थापना
1902 4 जुलाई को बेलूर मठ में महासमाधि, आयु 39 वर्ष

नरेंद्र ने श्री रामकृष्ण से पूछा था कि क्या आपने ईश्वर को देखा है। श्री रामकृष्ण ने उत्तर दिया कि हां, मैंने देखा है, जैसे तुम्हें देख रहा हूं बल्कि उससे भी अधिक स्पष्ट रूप से। इस उत्तर ने नरेंद्र के जीवन की दिशा बदल दी।

शिकागो भाषण इतना प्रसिद्ध क्यों हुआ?

11 सितंबर 1893 को शिकागो की विश्व धर्म महासभा में स्वामी विवेकानंद ने "अमेरिका के बहनों और भाइयों" संबोधन से भाषण शुरू किया, जिस पर सभा में देर तक तालियां बजती रहीं। उन्होंने सभी धर्मों के प्रति सहिष्णुता और स्वीकार्यता का भारतीय संदेश दुनिया के सामने रखा।

उस भाषण में उन्होंने कहा कि भारत ने सदा सभी धर्मों को सत्य मानकर स्वीकार किया है। उन्होंने कट्टरता और धार्मिक संकीर्णता के अंत की कामना की। इस एक भाषण ने पश्चिम में भारत और वेदांत के प्रति नई दृष्टि पैदा की।

  • स्वामी जी ने वेदांत को सरल और व्यावहारिक भाषा में प्रस्तुत किया
  • उन्होंने योग को केवल आसन नहीं बल्कि जीवन दर्शन के रूप में समझाया
  • उन्होंने राजयोग, कर्मयोग, भक्तियोग और ज्ञानयोग पर ग्रंथ रचे
  • उन्होंने भारतीय युवाओं में आत्मविश्वास और गौरव का भाव जगाया

स्वामी विवेकानंद का प्रमुख संदेश क्या था?

स्वामी विवेकानंद का मूल संदेश था कि हर आत्मा में ईश्वर है और मनुष्य की सेवा ही ईश्वर की सच्ची पूजा है। उन्होंने युवाओं से निर्भय होकर, आत्मविश्वास के साथ और चरित्र निर्माण पर ध्यान देते हुए राष्ट्र और मानवता की सेवा का आह्वान किया।

रामकृष्ण मिशन का आदर्श वाक्य है "आत्मनो मोक्षार्थं जगद्धिताय च", यानी अपनी मुक्ति और संसार के कल्याण के लिए।

स्वामी जी का सबसे प्रसिद्ध आह्वान कठोपनिषद के इस मंत्र पर आधारित है।

मंत्र अर्थ
उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत उठो, जागो और श्रेष्ठ जनों के पास जाकर ज्ञान प्राप्त करो
आत्मनो मोक्षार्थं जगद्धिताय च अपनी मुक्ति और संसार के कल्याण के लिए

श्री रामकृष्ण ने सिखाया था कि जीव पर दया नहीं बल्कि शिव मानकर जीव की सेवा करनी चाहिए। स्वामी विवेकानंद ने इसी विचार को अपने जीवन और मिशन का आधार बनाया। उनके लिए गरीब, रोगी और अशिक्षित व्यक्ति की सेवा ही नारायण की सेवा थी।

विवेकानंद जयंती कैसे मनाएं?

तिथि अनुसार विवेकानंद जयंती पर स्वामी जी के चित्र पर पुष्प अर्पित करके उनके ग्रंथों का पाठ, ध्यान और जरूरतमंदों की सेवा की जाती है। रामकृष्ण मठ और मिशन में इस दिन मंगल आरती, पूजा, होम, भजन और नारायण सेवा का आयोजन होता है।

  1. प्रातः स्नान करके स्वामी विवेकानंद और श्री रामकृष्ण के चित्र पर पुष्प अर्पित करें
  2. घी का दीपक जलाकर कुछ समय शांत बैठकर ध्यान करें
  3. स्वामी जी के किसी ग्रंथ, जैसे कर्मयोग या राजयोग, का एक अध्याय पढ़ें
  4. कठोपनिषद का मंत्र "उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत" 11 बार दोहराएं
  5. परिवार के युवाओं को स्वामी जी के जीवन प्रसंग सुनाएं
  6. किसी गरीब, रोगी या जरूरतमंद को भोजन, वस्त्र या पुस्तकें दें
  7. संभव हो तो निकट के रामकृष्ण मठ में पूजा और भजन में भाग लें
  8. अपने जीवन में अनुशासन, सेवा या अध्ययन से जुड़ा एक संकल्प लें

इस दिन का ज्योतिषीय संदर्भ क्या है?

स्वामी विवेकानंद का जन्म मकर संक्रांति के दिन, सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के समय हुआ था। सप्तमी तिथि के स्वामी सूर्य माने जाते हैं। 2027 में तिथि अनुसार जयंती गुरुवार को पड़ रही है, जो गुरु यानी बृहस्पति का दिन है। एक महान गुरु की जयंती का गुरुवार को आना अत्यंत अर्थपूर्ण संयोग है।

वैदिक ज्योतिष में सूर्य आत्मा, तेज, नेतृत्व और आत्मविश्वास के कारक हैं। बृहस्पति ज्ञान, गुरु, धर्म और शिक्षा के कारक हैं। स्वामी जी के व्यक्तित्व में सूर्य का तेज और बृहस्पति का ज्ञान, दोनों स्पष्ट दिखाई देते हैं। इसलिए इस दिन विद्या, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक उन्नति के लिए साधना शुभ मानी जा सकती है।

ज्योतिषीय तत्व संकेत
जन्म के समय मकर संक्रांति सूर्य का तेज और नई शुरुआत
सप्तमी तिथि सूर्य की तिथि, आत्मबल
गुरुवार ज्ञान, गुरु और धर्म
माघ मास तप और साधना
ग्रह संभावित समस्या उपाय
सूर्य आत्मविश्वास की कमी प्रातः सूर्य को अर्घ्य दें और "ॐ घृणि सूर्याय नमः" जपें
बृहस्पति पढ़ाई और करियर में दिशा का अभाव किसी विद्यार्थी को पुस्तकें दान करें
बुध एकाग्रता की कमी प्रतिदिन 15 मिनट ध्यान का नियम लें
चंद्रमा मानसिक अशांति स्वामी जी के प्रेरक प्रसंग पढ़ें और मौन रहें

इस दिन क्या करें और क्या न करें?

विवेकानंद जयंती पर अध्ययन, ध्यान, सेवा और चरित्र निर्माण का संकल्प सबसे महत्वपूर्ण है। इस दिन किसी का अपमान, आलस्य, निराशा भरी बातें और धर्म के नाम पर कट्टरता का प्रदर्शन स्वामी जी के संदेश के विरुद्ध है।

  • स्वामी जी के चित्र पर पुष्प अर्पित करें और ध्यान करें
  • उनके किसी ग्रंथ का एक अध्याय अवश्य पढ़ें
  • युवाओं को उनके जीवन से प्रेरित करें
  • किसी जरूरतमंद की सेवा को ईश्वर की पूजा मानकर करें
  • किसी भी धर्म या व्यक्ति का अपमान न करें
  • निराशा और हीन भावना से भरी बातें न करें
  • दिन को केवल औपचारिकता न बनने दें
  • आलस्य छोड़कर कोई सार्थक कार्य अवश्य करें

जब एक युवा संन्यासी ने विश्व को जगाया

स्वामी विवेकानंद ने केवल 39 वर्ष के जीवन में वह कर दिखाया जो सदियों तक प्रेरणा देता रहेगा। उन्होंने सिखाया कि शक्ति, आत्मविश्वास और सेवा ही जीवन का सच्चा धर्म है।

28 जनवरी 2027 को, गुरुवार के पावन दिन, जब माघ कृष्ण सप्तमी पर उनकी जन्म तिथि आएगी, तब "उठो, जागो" का वह उपनिषदिक आह्वान हर युवा के मन में फिर से गूंज सकता है। जो स्वयं पर विश्वास करता है, उसके लिए कोई लक्ष्य असंभव नहीं।

FAQ

तिथि अनुसार विवेकानंद जयंती 2027 कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार विवेकानंद जयंती गुरुवार, 28 जनवरी 2027 को माघ कृष्ण सप्तमी पर है। अंग्रेजी तिथि के अनुसार यह 12 जनवरी को मनाई जाती है।

राष्ट्रीय युवा दिवस कब मनाया जाता है?
राष्ट्रीय युवा दिवस हर वर्ष 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद के जन्मदिवस पर मनाया जाता है। इसकी घोषणा 1984 में हुई थी और यह 1985 से मनाया जा रहा है।

स्वामी विवेकानंद का जन्म कब और कहां हुआ?
स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता में हुआ था। उनका बचपन का नाम नरेंद्रनाथ दत्त था।

स्वामी विवेकानंद के गुरु कौन थे?
स्वामी विवेकानंद के गुरु श्री रामकृष्ण परमहंस थे। उनकी पहली भेंट 1881 में दक्षिणेश्वर में हुई थी।

स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में भाषण कब दिया?
स्वामी विवेकानंद ने 11 सितंबर 1893 को शिकागो की विश्व धर्म महासभा में ऐतिहासिक भाषण दिया था। उन्होंने "अमेरिका के बहनों और भाइयों" संबोधन से भाषण शुरू किया था।

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लेखक

पं. नरेंद्र शर्मा

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