नवरात्रि में लौंग बताशा अर्पण

By पं. अमिताभ शर्मा

मनोकामना अनुसार लौंग जोड़ा और बताशा चढ़ाने की सरल विधि

नवरात्रि में लौंग और बताशा अर्पण विधि

सामग्री तालिका

पहले जान लें विधि और नियम

नवरात्रि में माँ दुर्गा को लौंग का जोड़ा और बताशा अर्पित करने की परंपरा अनेक परिवारों में श्रद्धा से निभाई जाती है। लौंग को तीखी सुगंध, शुद्धता और साधना की तीव्रता का प्रतीक माना जाता है। बताशा को सादगी, मिठास और मंगल भाव का संकेत समझा जाता है। यह अर्पण तभी सार्थक होता है जब श्रद्धा, स्वच्छता, स्पष्ट संकल्प और संयमित आचरण साथ हों।

यह उपाय किसी चमत्कार की निश्चित गारंटी नहीं है। यह देवी के चरणों में मनोकामना समर्पित करने की भक्ति पद्धति है। साधक को पूजा के साथ परिश्रम, धैर्य, स्वास्थ्य अनुशासन और पारिवारिक सदाचार का भी पालन करना चाहिए।

लौंग और बताशा अर्पण की प्राथमिक जानकारी

  1. उपयुक्त समय: प्रातः स्नान के बाद या संध्या आरती के समय
  2. विशेष दिन: सप्तमी, अष्टमी और नवमी
  3. सामान्य अर्पण: लौंग का 1 जोड़ा यानी 2 साबुत लौंग
  4. साथ में अर्पण: स्वच्छ बताशे, लाल पुष्प और अक्षत
  5. पात्र: स्वच्छ थाली, लाल वस्त्र या पूजा पत्र
  6. भाव: एक स्पष्ट मनोकामना मन में रखकर अर्पण करें
  7. नियम: टूटी, गंदी या बासी सामग्री न चढ़ाएं
  8. आरती के बाद: प्रसाद का सम्मानपूर्वक वितरण करें
  9. स्वास्थ्य: बताशा मिठाई है, मात्रा संयमित रखें
  10. सावधानी: उपाय को भय, द्वेष या हानि की कामना से न जोड़ें
मनोकामना लौंग की संख्या बताशा उपयुक्त दिन
सामान्य मंगल कामना 2 लौंग का जोड़ा 5 या 11 बताशे किसी भी शुभ दिन
मानसिक शांति 5 लौंग 5 बताशे प्रतिदिन या शुक्रवार
ऋण मुक्ति का संकल्प 11 लौंग 11 बताशे सप्तमी या अष्टमी
नौकरी या कार्य सिद्धि 21 लौंग 11 बताशे बुधवार युक्त शुभ दिन या सप्तमी
स्वास्थ्य सुधार की प्रार्थना 9 लौंग 9 बताशे नवमी या नियमित आरती
परिवार में सद्भाव 7 लौंग 7 बताशे शुक्रवार या अष्टमी
विशेष शक्ति साधना 108 लौंग 27 या 51 बताशे अष्टमी अथवा नवमी

संख्या की यह रूपरेखा लोक परंपरा और भक्ति अभ्यास पर आधारित है। अलग अलग क्षेत्रों में विधि में अंतर हो सकता है। परिवार की परंपरा और गुरु निर्देश का सम्मान करना उचित है।

लौंग माँ दुर्गा को क्यों प्रिय माना जाता है

लौंग छोटी वस्तु है, किंतु उसकी सुगंध तीव्र और स्थिर होती है। भक्ति दृष्टि से लौंग उस साधना का संकेत देती है जो दिखने में साधारण हो, पर प्रभाव में गहरी हो। माँ दुर्गा को शक्ति, तेज और विघ्नहारी रूप में स्मरण किया जाता है। लौंग की तीक्ष्णता साधक को याद दिलाती है कि जीवन के संकटों का सामना कोमलता के साथ दृढ़ता से करना चाहिए।

कई परंपराओं में लौंग को बुध से भी जोड़ा जाता है। बुध बुद्धि, वाणी, लेनदेन और व्यावहारिक समझ का कारक माना जाता है। इसलिए नौकरी, पढ़ाई, ऋण व्यवस्था और कार्य सिद्धि की कामना में लौंग अर्पण को विशेष रूप से अपनाया जाता है। यह संबंध प्रतीकात्मक है। इसका अर्थ यह नहीं कि केवल लौंग चढ़ाने से बिना प्रयास के परिणाम मिल जाएगा।

बताशा में मिठास होती है। मिठास वाणी, व्यवहार और मन की कोमलता का संकेत है। जब साधक लौंग के साथ बताशा चढ़ाता है तब संदेश यह बनता है कि जीवन में शक्ति कठोरता न बने और सफलता अहंकार न बने। शक्ति और मधुरता का संतुलन ही गृहस्थ जीवन को स्थिर रखता है।

लौंग का जोड़ा चढ़ाने की सरल विधि

नवरात्रि में सबसे प्रचलित प्रयोग लौंग का जोड़ा चढ़ाना है। जोड़ा समग्रता का प्रतीक माना जाता है। इसमें भक्त और भगवती, संकल्प और समर्पण, इच्छा और कर्म का संयोग दिखाई देता है।

चरणबद्ध अर्पण विधि

  1. स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा स्थान को साफ करके दीपक जलाएं।
  3. माँ दुर्गा की प्रतिमा या चित्र के सामने बैठें।
  4. दो साबुत लौंग और कुछ बताशे थाली में रखें।
  5. इन्हें जल, अक्षत और पुष्प से संस्कारित करें।
  6. मन में एक ही मनोकामना स्पष्ट रूप से रखें।
  7. लौंग का जोड़ा माँ के चरणों में अर्पित करें।
  8. बताशे नैवेद्य के रूप में सामने रखें।
  9. दुर्गा मंत्र, दुर्गा चालीसा या सरल प्रार्थना का उच्चारण करें।
  10. आरती के बाद प्रसाद परिवार में बांटें।

यदि साधक चाहे तो लौंग के जोड़े को छोटे लाल कपड़े में बांधकर चरणों में रख सकता है। कपड़ा स्वच्छ और नया होना चाहिए। मनोकामना पूरी होने के बाद कृतज्ञता का भाव रखते हुए वस्त्र और सामग्री का सम्मानपूर्वक विसर्जन या पूजा स्थान पर उचित व्यवस्था करनी चाहिए।

किस मनोकामना के लिए कैसे करें प्रयोग

एक ही विधि सबके लिए एक जैसा फल नहीं देती। मनोकामना के अनुसार संख्या, दिन और सहायक भाव बदल सकते हैं। नीचे व्यावहारिक दिशा दी गई है।

ऋण मुक्ति के लिए

ऋण मुक्ति की कामना में केवल पूजा पर्याप्त नहीं है। आय व्यय का हिसाब, अनावश्यक खर्चों में कटौती और नियमित भुगतान का संकल्प आवश्यक है। पूजा में 11 लौंग और 11 बताशे माँ के चरणों में अर्पित किए जा सकते हैं। प्रार्थना में यह भाव रखें कि बुद्धि सही निर्णय ले, आय के मार्ग खुलें और ऋण चुकाने का अनुशासन बना रहे।

सप्तमी या अष्टमी को यह अर्पण विशेष श्रद्धा से किया जा सकता है। उसी दिन किसी जरूरतमंद को भोजन, फल या छोटी दक्षिणा देना संकल्प को मजबूत करता है।

नौकरी और कार्य सिद्धि के लिए

नौकरी या व्यवसाय से जुड़ी कामना में 21 लौंग और 11 बताशे अर्पित करने की परंपरा कुछ परिवारों में देखी जाती है। साथ में यह प्रार्थना की जाती है कि वाणी में स्पष्टता आए, कर्म में लगन बने और योग्य अवसर प्राप्त हों।

केवल अर्पण करके बैठे रहना पर्याप्त नहीं है। आवेदन, कौशल विकास, समयपालन और व्यवहारिक तैयारी जारी रखनी चाहिए। देवी कृपा प्रयास करने वाले मन पर अधिक स्पष्ट रूप से अनुभव होती है।

बीमारी से राहत की प्रार्थना के लिए

स्वास्थ्य संबंधी प्रार्थना में 9 लौंग और 9 बताशे अर्पित किए जा सकते हैं। भाव यह होना चाहिए कि शरीर में बल आए, मन स्थिर रहे और उपचार का सही मार्ग मिले। इस उपाय को चिकित्सा, पथ्य और विश्राम का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

यदि कोई गंभीर बीमारी हो तो चिकित्सक की सलाह अनिवार्य है। पूजा मानसिक बल और परिवार के आशा भाव को सहारा दे सकती है।

परिवारिक क्लेश और मानसिक बोझ के लिए

जब घर में कटुता, अशांति या भारीपन अनुभव हो तब 7 लौंग और 7 बताशे अर्पित कर परिवार में मधुरता की प्रार्थना की जा सकती है। लौंग की तीक्ष्णता पुरानी कटुता को पहचानने का संकेत देती है और बताशा व्यवहार में कोमलता लाने का संदेश देता है।

इसके साथ कठोर वाणी कम करनी चाहिए। क्षमा, सुनने का अभ्यास और छोटे छोटे सहयोग के कार्य घर का वातावरण बदलने में सहायक होते हैं।

विशेष मनोकामना के लिए 108 लौंग

कुछ साधक नवरात्रि की अष्टमी या नवमी को 108 लौंग अर्पित करते हैं। 108 संख्या को पूर्णता, जप परंपरा और समग्र समर्पण से जोड़ा जाता है। यह अर्पण धैर्य और एकाग्रता से करना चाहिए। जल्दबाजी में गिनती पूरी करना पर्याप्त नहीं है।

108 लौंग चढ़ाते समय प्रत्येक नाम या प्रत्येक छोटी गिनती के साथ माँ दुर्गा का स्मरण किया जा सकता है। अंत में बताशे और सात्विक प्रसाद अवश्य अर्पित करें।

बताशा चढ़ाने का आध्यात्मिक भाव

बताशा देखने में हल्की और साधारण मिठाई है। ठीक इसी गुण में उसका रहस्य छिपा है। भक्ति में बड़ी सामग्री से अधिक शुद्ध भाव का मूल्य है। बताशा साधक को सिखाती है कि ईश्वर के सामने जटिल प्रदर्शन की जरूरत नहीं, सरल समर्पण पर्याप्त है।

नैवेद्य में बताशा चढ़ाने के बाद उसे प्रसाद मानकर वितरित करना चाहिए। प्रसाद ग्रहण करते समय मन में कृतज्ञता रखें। यदि मधुमेह या कोई स्वास्थ्य सीमा हो तो बताशा स्वयं अधिक मात्रा में न खाएं। दूसरों में वितरण और भाव की शुद्धता ही मुख्य है।

बताशा अर्पण के सरल रूप

  1. 5 बताशे सामान्य नित्य पूजा में
  2. 11 बताशे विशेष मनोकामना में
  3. 21 बताशे अष्टमी या नवमी की आरती में
  4. बताशे के साथ थोड़ा सा भोग या फल
  5. बच्चों और सुवासिनी सदस्यों में प्रसाद वितरण

दिन के अनुसार अर्पण का भाव

नवरात्रि के प्रत्येक दिन देवी के अलग रूप की उपासना होती है। लौंग और बताशा किसी भी दिन चढ़ाए जा सकते हैं, किंतु भाव को दिन की शक्ति के अनुसार जोड़ा जा सकता है।

  1. प्रतिपदा: स्थिरता और नए संकल्प के लिए 2 लौंग
  2. द्वितीया: संयम और साधना के लिए 5 लौंग
  3. तृतीया: ऊर्जा और उत्साह के लिए 7 लौंग
  4. चतुर्थी: विघ्न दूर करने की प्रार्थना के साथ 9 लौंग
  5. पंचमी: संतान सुख और वात्सल्य भाव के लिए 7 लौंग
  6. षष्ठी: साहस और रक्षा भाव के लिए 11 लौंग
  7. सप्तमी: कार्य सिद्धि और प्रकाश के लिए 21 लौंग
  8. अष्टमी: शक्ति और संकट निवारण के लिए 27 या 108 लौंग
  9. नवमी: पूर्णता और कृतज्ञता के लिए 9 या 108 लौंग

यह विभाजन कठोर नियम नहीं, साधना को व्यवस्थित करने की सहज रूपरेखा है। साधक अपनी परिस्थिति और कुल परंपरा के अनुसार संख्या घटा या बढ़ा सकता है।

ज्योतिषीय और मनोवैज्ञानिक दृष्टि

वैदिक ज्योतिष में किसी भी उपाय का मूल उद्देश्य मन को स्थिर करना, कर्म को शुद्ध करना और ग्रहजनित प्रवृत्तियों को संतुलित करना है। लौंग की सुगंध ध्यान को वर्तमान में लाती है। बताशा का मधुर स्वाद प्रसाद भाव जगाता है। दोनों मिलकर पूजा को इंद्रियों तक सीमित न रखकर भाव साधना बना देते हैं।

संबंधित ग्रह संकेत

  1. बुध: बुद्धि, नौकरी, हिसाब और संवाद
  2. शुक्र: सुख, मधुरता, पारिवारिक ras और समृद्धि भाव
  3. गुरु: शुभ संकल्प, धर्म और सही मार्गदर्शन
  4. चंद्रमा: मन की शांति और भावनात्मक स्थिरता
  5. सूर्य: आत्मबल, नेतृत्व और स्पष्ट निर्णय
  6. शनि: ऋण, कर्म और दीर्घ अनुशासन
  7. मंगल: साहस, ऊर्जा और संकट का सामना

यदि साधक आर्थिक दबाव में हो तो केवल लौंग चढ़ाना पर्याप्त नहीं। बजट बनाना, व्यय नियंत्रित करना और आवश्यक परामर्श लेना भी साधना का हिस्सा है। यदि मन अत्यंत अशांत हो तो जप के साथ विश्राम, संवाद और आवश्यकता पड़ने पर योग्य सहायता लेनी चाहिए।

अर्पण करते समय कौन सी गलतियां न करें

भक्ति में भाव प्रधान है, फिर भी कुछ व्यावहारिक शुद्धता आवश्यक रहती है।

  1. टूटी या कीट लगी लौंग न चढ़ाएं
  2. अधिक मात्रा में लौंग जलाकर घर को धुंए से न भरें
  3. एक साथ अनेक उलझी मनोकामनाएं न रखें
  4. दूसरों की हानि की कामना से अर्पण न करें
  5. कर्ज चुकाने का प्रयास किए बिना केवल उपाय पर निर्भर न रहें
  6. बीमारी में चिकित्सा छोड़कर अंधविश्वास न करें
  7. बच्चों या दुर्बल व्यक्तियों पर जबरन व्रत या प्रयोग न थोपें
  8. पूजा सामग्री को फेंकने के बजाय सम्मान से विसर्जित करें
  9. बाजारू प्रदर्शन और तुलना से बचें
  10. उपाय के बाद कृतज्ञता और सदाचार को न भूलें

समर्पण का मधुर अनुशासन

नवरात्रि में लौंग का जोड़ा और बताशा चढ़ाने का रहस्य वस्तुओं की कीमत में नहीं, साधक के भाव में छिपा है। लौंग याद दिलाती है कि जीवन की समस्याएं तीखी हो सकती हैं। बताशा सिखाती है कि उत्तर मधुरता, धैर्य और श्रद्धा से भी आ सकता है। दोनों का संयोग शक्ति और करुणा का संतुलन है।

जो साधक माँ दुर्गा के चरणों में लौंग और बताशा अर्पित करता है, उसे केवल मनोकामना की पूर्ति नहीं मांगनी चाहिए। उसे यह भी मांगना चाहिए कि सही कर्म की शक्ति मिले, गलत लालसा रुके और प्राप्त उपलब्धियों का उपयोग परिवार तथा समाज के कल्याण में हो। यही अर्पण को सामान्य रीति से उठाकर जीवित साधना बना देता है।

FAQ

नवरात्रि में माँ दुर्गा को कितनी लौंग चढ़ानी चाहिए?

सामान्य रूप से लौंग का 1 जोड़ा अर्थात 2 साबुत लौंग चढ़ाए जा सकते हैं। विशेष मनोकामना में 5, 7, 9, 11, 21 या 108 लौंग की परंपरा भी प्रचलित है।

लौंग के साथ बताशा क्यों चढ़ाते हैं?

बताशा सादगी, मंगल और मधुर भाव का प्रतीक माना जाता है। लौंग की तीक्ष्णता के साथ बताशा चढ़ाने से शक्ति और कोमलता का संतुलन व्यक्त होता है।

ऋण मुक्ति के लिए लौंग कैसे चढ़ाएं?

सप्तमी या अष्टमी को 11 लौंग और 11 बताशे माँ के चरणों में अर्पित कर ऋण मुक्ति का संकल्प लिया जा सकता है। साथ में खर्च नियंत्रण और नियमित भुगतान आवश्यक है।

क्या नौकरी के लिए लौंग बताशा का उपाय किया जा सकता है?

हां, 21 लौंग और 11 बताशे अर्पित कर कार्य सिद्धि की प्रार्थना की जा सकती है। आवेदन, कौशल और परिश्रम को जारी रखना भी जरूरी है।

अष्टमी या नवमी को 108 लौंग चढ़ाना कैसा रहता है?

अष्टमी और नवमी को 108 लौंग अर्पण विशेष समर्पण का प्रतीक माना जाता है। इसे स्वच्छता, एकाग्रता और कृतज्ञता के साथ करना चाहिए।

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लेखक

पं. अमिताभ शर्मा

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