By पं. संजीव शर्मा
9 दिन कमजोरी से बचने और वजन नियंत्रित रखने का मार्ग

नवरात्रि का व्रत शरीर को कमजोर करने के लिए नहीं बल्कि उसे हल्का, संयमित और साधना के योग्य बनाने के लिए रखा जाता है। यदि व्रत में केवल आलू, साबूदाना, तली हुई पूरी और अधिक मिठाई का सेवन किया जाए, तो व्यक्ति धार्मिक नियम निभाने के बाद भी भारीपन, अम्लता और थकान अनुभव कर सकता है।
संतुलित व्रत आहार में पर्याप्त पानी, हल्का प्रोटीन, मौसमी फल, मेवे, सीमित मात्रा में अनाज के विकल्प और प्राकृतिक ऊर्जा स्रोत शामिल होने चाहिए। कुट्टू, मखाना और सेंधा नमक उपयोगी हो सकते हैं, पर इनका सेवन भी मात्रा और शरीर की प्रकृति के अनुसार होना चाहिए।
| समय | उपयुक्त आहार |
|---|---|
| प्रातः | गुनगुना पानी, फल या नारियल पानी |
| मध्य प्रातः | भीगे मेवे या मखाने |
| दोपहर | कुट्टू रोटी, सब्जी और दही |
| शाम | फल, छाछ या हल्का पेय |
| रात्रि | सामक खिचड़ी या हल्का भोजन |
| सोने से पहले | आवश्यकता अनुसार गुनगुना दूध |
व्रत के दौरान कमजोरी कई कारणों से हो सकती है। भोजन की मात्रा अचानक कम हो जाना, पानी की कमी, पर्याप्त प्रोटीन न लेना, बहुत अधिक चाय या कॉफी पीना और तले हुए भोजन का अधिक सेवन शरीर को असंतुलित कर सकता है।
कई लोग भोजन तो कम करते हैं, पर ऊर्जा देने वाले खाद्य पदार्थों का चयन ठीक नहीं करते। केवल आलू और साबूदाना खाने से पेट भर सकता है, पर शरीर को सभी आवश्यक पोषक तत्व नहीं मिलते।
| कारण | संभावित प्रभाव |
|---|---|
| पानी की कमी | सिरदर्द और चक्कर |
| प्रोटीन की कमी | थकान और मांसपेशियों में कमजोरी |
| लंबे समय तक भूख | चिड़चिड़ापन |
| अधिक चाय | अम्लता और बेचैनी |
| तला भोजन | भारीपन और आलस्य |
कुट्टू व्रत में सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले खाद्य पदार्थों में से एक है। इसमें जटिल कार्बोहाइड्रेट, कुछ प्रोटीन और खनिज तत्व पाए जाते हैं। यह लंबे समय तक ऊर्जा देने में सहायता कर सकता है।
परंतु कुट्टू की पूरी को अधिक घी या तेल में तलकर खाने से उसका संतुलित लाभ कम हो जाता है। कुट्टू की रोटी, चीला या हल्की टिक्की अधिक उपयुक्त विकल्प हो सकते हैं।
कुट्टू कुछ लोगों को भारी लग सकता है। पहली बार व्रत में इसका सेवन करने वाले व्यक्ति कम मात्रा से शुरुआत करें। यदि पेट फूलना, खुजली या असुविधा हो, तो इसका सेवन रोककर विशेषज्ञ सलाह लें।
मखाना हल्का, पौष्टिक और लंबे समय तक तृप्ति देने वाला खाद्य पदार्थ माना जाता है। इसे हल्का भूनकर या दूध के साथ लिया जा सकता है। मखाने में व्रत के दौरान उपयोगी ऊर्जा और कुछ खनिज तत्व मिलते हैं।
मखाना भोजन का विकल्प नहीं बल्कि संतुलित आहार का एक भाग है।
व्रत में सामान्य नमक के स्थान पर सेंधा नमक का प्रयोग किया जाता है। यह परंपरा और भोजन नियम का हिस्सा है। सेंधा नमक भी नमक ही है, इसलिए इसका सेवन असीमित मात्रा में नहीं करना चाहिए।
अधिक नमक से प्यास, जल धारण, रक्तचाप और शरीर में असुविधा बढ़ सकती है।
| करें | न करें |
|---|---|
| थोड़ी मात्रा लें | हर व्यंजन में अधिक न डालें |
| ताजा भोजन में प्रयोग करें | पैकेट वाले नमकीन में निर्भर न रहें |
| शरीर की प्रतिक्रिया देखें | उच्च रक्तचाप में लापरवाही न करें |
प्रातः गुनगुना पानी और एक फल लें। दोपहर में कुट्टू की रोटी, लौकी की सब्जी और दही लिया जा सकता है। शाम को मखाने या नारियल पानी का सेवन करें। रात में हल्की सामक खिचड़ी लें।
सुबह भीगे बादाम और एक मौसमी फल लें। दोपहर में सिंघाड़े के आटे का चीला और दही लें। शाम को छाछ या नींबू पानी लें। रात में शकरकंद और हल्की सब्जी उपयोगी हो सकती है।
प्रातः नारियल पानी लें। दोपहर में कुट्टू की रोटी और कद्दू की सब्जी लें। शाम को फल लें। रात में दूध के साथ मखाने की सीमित मात्रा ली जा सकती है।
सुबह पपीता या सेब लें। दोपहर में सामक चावल की खिचड़ी और दही लें। शाम को सूखे मेवों की थोड़ी मात्रा लें। रात में हल्का सूप या सब्जी लें।
प्रातः गुनगुना पानी और केला लें। दोपहर में कुट्टू चीला और हरी सब्जी लें। शाम को नारियल पानी लें। रात में शकरकंद या सामक की हल्की खिचड़ी लें।
सुबह मौसमी फल और भीगे अखरोट लें। दोपहर में सिंघाड़े के आटे की रोटी और लौकी लें। शाम को मखाना लें। रात में दही के साथ हल्का भोजन लें।
प्रातः नारियल पानी लें। दोपहर में कुट्टू की रोटी और कद्दू की सब्जी लें। शाम को फल लें। रात में हल्की खिचड़ी या दूध लिया जा सकता है।
सुबह सेब या अनार लें। दोपहर में सामक चावल, दही और हल्की सब्जी लें। शाम को मखाना या छाछ लें। रात में कम मात्रा में भोजन करें।
प्रातः फल और पानी लें। कन्या पूजन के प्रसाद में हलवा, पूरी और चना लेते समय मात्रा का ध्यान रखें। रात में हल्का भोजन लें ताकि व्रत के बाद शरीर पर अचानक भार न पड़े।
व्रत के दौरान प्रोटीन की उपेक्षा करने से थकान बढ़ सकती है। दूध, दही, मखाना, मेवे और कुछ परिवारों में अपनाए जाने वाले अन्य सात्विक स्रोत भोजन को संतुलित बनाने में सहायता कर सकते हैं।
यदि किसी व्यक्ति को दूध से असुविधा होती है, तो उसे जबरदस्ती दूध नहीं लेना चाहिए।
फल शरीर को प्राकृतिक जल, रेशा और कुछ आवश्यक पोषक तत्व देते हैं। लौकी, कद्दू, शकरकंद और हल्की हरी सब्जियां व्रत के भोजन में संतुलन ला सकती हैं।
व्रत के दौरान सबसे बड़ी भूल यह है कि व्यक्ति सामान्य भोजन छोड़कर अत्यधिक कैलोरी वाला व्रत भोजन शुरू कर देता है।
व्रत में वजन नियंत्रित रखने के लिए भोजन की मात्रा, तेल और मिठास पर ध्यान दें। तले हुए पदार्थों के स्थान पर उबले, भाप में पकाए या हल्के भुने भोजन चुनें।
नौ दिनों के बाद तुरंत पूरी, पकौड़े, मिठाई और भारी भोजन लेना उचित नहीं है। पहले पानी या नारियल पानी लें। फिर फल, हल्का सूप या खिचड़ी लें। शरीर की प्रतिक्रिया देखकर धीरे धीरे सामान्य भोजन अपनाएं।
मधुमेह, गर्भावस्था, स्तनपान, गुर्दे की बीमारी, यकृत की बीमारी, कम रक्तचाप, बार बार चक्कर या नियमित औषधि लेने वाले लोगों को कठोर व्रत से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
धार्मिक भावना बनाए रखने के लिए भोजन छोड़ना आवश्यक नहीं है। कुछ लोग केवल तामसिक भोजन छोड़कर सात्विक भोजन लेते हैं। यह भी व्रत का सम्मानजनक रूप हो सकता है।
भोजन का प्रभाव शरीर के साथ मन पर भी पड़ता है। हल्का और सात्विक भोजन व्यक्ति को पूजा, जप और ध्यान में स्थिर रखने में सहायता कर सकता है। बहुत अधिक तला और मीठा भोजन आलस्य तथा चंचलता बढ़ा सकता है।
नवरात्रि व्रत का वास्तविक उद्देश्य शरीर को कष्ट देना नहीं बल्कि भोजन, वाणी, विचार और इंद्रियों पर संतुलित अनुशासन लाना है।
नवरात्रि व्रत का आहार चार्ट शरीर को हल्का, मन को शांत और साधना को स्थिर रखने का माध्यम बन सकता है। कुट्टू, मखाना और सेंधा नमक उपयोगी हैं, पर इनका संतुलित सेवन ही लाभकारी है।
जो व्यक्ति फल, पानी, हल्के भोजन, पर्याप्त नींद और अपनी प्रकृति का ध्यान रखता है, वह नवरात्रि में कमजोरी से बचते हुए श्रद्धा और स्वास्थ्य दोनों को साथ लेकर चल सकता है।
नवरात्रि व्रत में कमजोरी से कैसे बचें
पर्याप्त पानी, फल, मेवे, मखाना, दूध, दही और हल्के भोजन का संतुलित सेवन करें।
क्या कुट्टू रोज खा सकते हैं
यदि शरीर को अनुकूल लगे तो सीमित मात्रा में खा सकते हैं। पेट में असुविधा हो तो इसका सेवन कम करें।
क्या मखाना व्रत में अच्छा है
हाँ, हल्का भुना हुआ मखाना तृप्ति और ऊर्जा देने में सहायता कर सकता है।
क्या सेंधा नमक अधिक मात्रा में ले सकते हैं
नहीं, सेंधा नमक भी सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए।
व्रत खोलते समय क्या खाना चाहिए
पहले पानी, फल, हल्का सूप या खिचड़ी लें और धीरे धीरे सामान्य भोजन अपनाएं।
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