By अपर्णा पाटनी
प्याज लहसुन बिना 5 अनोखे व्रत व्यंजन और बनाने की विधि

नवरात्रि में कई साधक व्रत रखते हैं और कई परिवार सात्विक भोजन अपनाते हैं। प्याज और लहसुन के बिना भी भोजन स्वादिष्ट, पौष्टिक और संतोषजनक बन सकता है। मुख्य बात है सही सामग्री का चयन, मसालों का संतुलन और पकाने की विधि में धैर्य।
व्रत और सात्विक भोजन की परंपरा क्षेत्र तथा परिवार के अनुसार बदल सकती है। कुछ घर केवल फलाहार करते हैं, कुछ सिंघाड़ा, कुट्टू, समा और साबूदाना का उपयोग करते हैं और कुछ सामान्य शाकाहारी भोजन से प्याज लहसुन हटाकर सात्विक थाली बनाते हैं। इसलिए नीचे दी गई विधियां अपनी परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार अपनाई जा सकती हैं।
| व्यंजन | मुख्य सामग्री | उपयुक्त समय | स्वाद का स्वरूप |
|---|---|---|---|
| सिंघाड़ा पनीर कचौरी | सिंघाड़ा आटा, पनीर, आलू | नाश्ता या संध्या | कुरकुरा और भरपूर |
| समा नारियल खिचड़ी | समा चावल, नारियल, मखाना | दोपहर भोजन | हल्का और सुगंधित |
| कुट्टू पनीर टिक्की | कुट्टू आटा, पनीर, आलू | शाम का नाश्ता | सुनहरा और मसालेदार |
| मखाना मलाई सब्जी | मखाना, टमाटर, काजू | मुख्य थाली | मलाईदार और समृद्ध |
| शकरकंद अनार चाट | शकरकंद, अनार, दही | व्रत नाश्ता | खट्टा मीठा और ताजा |
प्याज और लहसुन भोजन को तीखा और गहरा स्वाद देते हैं, लेकिन सात्विक रसोई में स्वाद के अन्य मार्ग भी उपलब्ध हैं। भुना जीरा, कसा अदरक, हरी मिर्च, टमाटर का गूदा, नारियल, काजू पेस्ट, तिल, सेंधा नमक और ताजे धनिए से व्यंजन में गहराई आती है।
सात्विक भोजन का उद्देश्य केवल वर्जना नहीं है। इसका भाव मन को हल्का, शरीर को सुपाच्य और साधना को अनुकूल बनाना है। अत्यधिक मिर्च, अत्यधिक तलने और बहुत अधिक मिठास से भी सात्विकता प्रभावित हो सकती है। इसलिए संतुलन सबसे महत्वपूर्ण है।
जब आटा गूंथते समय घी की सुगंध आती है, जीरा तड़क में खिलता है और टमाटर धीरे धीरे गाढ़ा होता है तब बिना प्याज लहसुन के भी रसोई में पूर्ण स्वाद जागता है। जल्दबाजी में पकाया गया भोजन फीका लगता है। धीमी आंच और सही क्रम स्वाद का असली आधार है।
यह व्यंजन व्रत नाश्ते को साधारण आलू पूरी से आगे ले जाता है। बाहर से कुरकुरा आवरण और भीतर मुलायम मसालेदार पनीर का मिश्रण भोजन को विशेष बनाता है।
यह कचौरी यात्रा, व्रत सभा और संध्या आरती के बाद हल्के नाश्ते के लिए उपयुक्त है। भरावन में थोड़े कुचले मखाने मिला देने से कुरकुराहट और बढ़ जाती है।
समा के चावल हल्के और जल्दी पकने वाले होते हैं। नारियल और मखाना मिलाने से खिचड़ी साधारण व्रत भोजन से उठकर सुगंधित और संतोषजनक व्यंजन बन जाती है।
इस खिचड़ी के साथ लौकी रायता या सादा दही अत्यंत सुपाच्य संयोजन बनाता है। यदि गाढ़ी खिचड़ी चाहिए तो पानी की मात्रा थोड़ी कम रखें।
कुट्टू का आटा व्रत में लोकप्रिय है, लेकिन केवल रोटी या पकौड़े तक सीमित रखने की जरूरत नहीं। पनीर और आलू से बनी टिक्की बच्चों तथा वयस्कों दोनों को रुचिकर लगती है।
टिक्की को तुरंत सेंकना बेहतर रहता है। मिश्रण को देर तक खुला छोड़ने पर आलू पानी छोड़ सकता है। यदि मिश्रण ढीला लगे तो थोड़ा और कुट्टू आटा मिलाएं।
यह व्यंजन नवरात्रि की थाली को उत्सव जैसा बना देता है। मखाना हल्का होता है और काजू टमाटर का रस उसे मलाईदार रूप देता है। प्याज लहसुन के बिना भी यह सब्जी गहरी और संतुलित लगती है।
मखाने बहुत देर तक उबालने पर अधिक नरम होकर आकार खो सकते हैं। इसलिए सब्जी बनाने के अंतिम चरण में ही उन्हें मिलाएं। मेहमानों की थाली में यह व्यंजन विशेष स्थान पाता है।
व्रत के दिनों में भारी भोजन के बीच हल्की और ताजगी देने वाली चाट संतुलन बनाती है। शकरकंद स्वाभाविक मिठास देता है, दही ठंडक देता है और अनार रसीला स्वाद जोड़ता है।
यह चाट उपवास तोड़ते समय भी अनुकूल रहती है क्योंकि यह अधिक तली हुई नहीं होती। पाचन को सहज रखने के लिए दही ताजा और गाढ़ा होना चाहिए।
नवरात्रि में भोजन केवल पेट भरने का माध्यम नहीं माना जाता। सात्विक आहार मन की चंचलता को कम करने और साधना में स्थिरता लाने में सहायक माना गया है। प्याज और लहसुन को कई परंपराओं में रजस तथा तमस बढ़ाने वाला समझा जाता है, इसलिए व्रत काल में उन्हें हटाया जाता है।
भोजन बनाते समय रसोई की स्वच्छता, शांत मन और कृतज्ञ भाव भी सात्विकता का भाग हैं। यदि व्यंजन उत्तम बने लेकिन वाणी कठोर रहे, तो साधना का संतुलन अधूरा रह जाता है। परिवार के लिए भोजन परोसना भी एक प्रकार की सेवा है।
वैदिक परंपरा में नवरात्रि साधना काल है। हल्का और सात्विक भोजन चंद्रमा से जुड़े मन को शांत रखने में सहायक माना जाता है। पित्त संतुलन के लिए अत्यधिक तीखा भोजन कम करना और वात संतुलन के लिए अति शुष्क भोजन से बचना उपयोगी हो सकता है।
भोजन की सुंदर थाली व्यक्ति के मन में संतोष उत्पन्न करती है। जब साधक को लगता है कि व्रत का अर्थ केवल त्याग है तब मन में अभाव भाव आता है। विविध और स्वादिष्ट सात्विक व्यंजन यह सिखाते हैं कि अनुशासन के साथ आनंद भी संभव है।
प्याज और लहसुन के बिना नवरात्रि का भोजन फीका नहीं होता। सही विधि से बनी सिंघाड़ा पनीर कचौरी, समा नारियल खिचड़ी, कुट्टू पनीर टिक्की, मखाना मलाई सब्जी और शकरकंद अनार चाट यह सिद्ध करती हैं कि सात्विकता और स्वाद साथ साथ रह सकते हैं।
नवरात्रि की रसोई तब सफल होती है जब वह शरीर को पोषण दे, मन को हल्का रखे और परिवार को एक थाली के आसपास जोड़े। व्यंजन जितने सरल और शुद्ध होंगे, साधना उतनी ही सहज बनेगी। स्वाद का रहस्य महंगी सामग्री में नहीं, ध्यान से किए गए तैयारी के भाव में छिपा होता है।
क्या नवरात्रि में प्याज लहसुन के बिना भोजन स्वादिष्ट बन सकता है?
हां, जीरा, अदरक, टमाटर, नारियल, काजू, सेंधा नमक और घी के संतुलित उपयोग से बिना प्याज लहसुन के भी स्वादिष्ट भोजन बन सकता है।
व्रत में कौन से आटे उपयोग किए जा सकते हैं?
सिंघाड़ा आटा, कुट्टू आटा, राजगिरा आटा और समा चावल जैसी सामग्री अनेक व्रत परंपराओं में उपयोग की जाती है। परिवार की परंपरा देखकर चयन करें।
मखाना मलाई सब्जी किसके साथ परोसें?
मखाना मलाई सब्जी समा चावल, कुट्टू पूरी या सादे व्रत रोटी जैसे विकल्पों के साथ परोसी जा सकती है।
क्या ये व्यंजन बच्चों के लिए उपयुक्त हैं?
हां, मिर्च कम रखकर और तली हुई मात्रा नियंत्रित रखकर ये व्यंजन बच्चों के लिए भी अनुकूल बनाए जा सकते हैं।
सात्विक भोजन बनाते समय सबसे महत्वपूर्ण बात क्या है?
स्वच्छ सामग्री, संयमित मसाले, सही पकाने की विधि और शांत भाव सबसे महत्वपूर्ण हैं। भोजन को साधना का सहयोगी मानना चाहिए।
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