नवरात्रि विसर्जन विधि 2026

By पं. नरेंद्र शर्मा

कलश, ज्वार और प्रतिमा का सम्मानजनक तथा पर्यावरण अनुकूल विसर्जन

नवरात्रि विसर्जन विधि 2026: कलश और प्रतिमा

सामग्री तालिका

पहले जानें तिथि और आवश्यक नियम

नवरात्रि की पूजा समाप्त होने के बाद कलश, ज्वार, नारियल, पूजा सामग्री और प्रतिमा का विसर्जन श्रद्धा तथा सम्मान के साथ किया जाता है। विसर्जन का अर्थ पूजा का अंत नहीं बल्कि देवी शक्ति को हृदय में स्थापित करके बाहरी प्रतीकों को प्रकृति को वापस सौंपना है।

चैत्र नवरात्रि 2026 में 19 मार्च से 27 मार्च तक मानी गई थी। कई पंचांगों में नवमी के बाद 27 मार्च को दशमी आरंभ होने पर विसर्जन का समय बताया गया है, जबकि पूरे 9 दिन का व्रत रखने वाले साधक 28 मार्च की सुबह दशमी तिथि में विसर्जन कर सकते हैं। स्थानीय पंचांग और पूजा परंपरा के अनुसार समय में अंतर हो सकता है। [141][143][144]

शारदीय नवरात्रि 2026 में 11 अक्टूबर से 19 अक्टूबर तक मानी जाती है और विजयादशमी 20 अक्टूबर को होगी। शारदीय नवरात्रि में कलश तथा ज्वार का विसर्जन नवमी पूजा के बाद या दशमी तिथि में स्थानीय पंचांग के अनुसार किया जा सकता है। [81][83]

नवरात्रि विसर्जन 2026 की प्राथमिक जानकारी

  1. चैत्र नवरात्रि आरंभ: 19 मार्च 2026
  2. चैत्र नवरात्रि नवमी: 27 मार्च 2026
  3. चैत्र कलश विसर्जन: 27 मार्च को नवमी के बाद या 28 मार्च को दशमी में
  4. शारदीय नवरात्रि आरंभ: 11 अक्टूबर 2026
  5. शारदीय नवमी: 19 अक्टूबर 2026
  6. शारदीय कलश विसर्जन: 19 अक्टूबर की पूजा के बाद या 20 अक्टूबर को दशमी में
  7. उपयुक्त समय: प्रातः पूजा के बाद या स्थानीय पंचांग में दिए गए शुभ काल में
  8. मुख्य सामग्री: कलश, ज्वार, नारियल, मौली, पुष्प, अक्षत और जल
  9. विसर्जन का स्थान: स्वच्छ जल, गमला, बगीचे की मिट्टी या घर की पवित्र भूमि
  10. मुख्य भाव: देवी से क्षमा, कृतज्ञता और पुनः आगमन की प्रार्थना
  11. आवश्यक सावधानी: प्लास्टर, रसायन, प्लास्टिक और रंगीन सामग्री को जल में न डालें
  12. व्रत पारण: अपने परिवार की परंपरा और तिथि के अनुसार करें
पूजित सामग्री पारंपरिक विधि पर्यावरण अनुकूल विकल्प
कलश का जल पवित्र जल में अर्पण पौधों या मिट्टी में डालें
ज्वार या जवारे जल या मिट्टी में विसर्जन गमले, बगीचे या खेत की मिट्टी में मिलाएं
नारियल प्रसाद के रूप में ग्रहण परिवार में बांटें या भोजन में उपयोग करें
सुपारी और सिक्का पूजा में सुरक्षित रखें अगली पूजा में उपयोग करें
पुष्प और पत्तियां जल में अर्पण खाद या मिट्टी में डालें
मिट्टी का कलश परंपरा अनुसार विसर्जन साफ करके पौधों के लिए उपयोग करें
प्रतिमा स्वच्छ जल में विसर्जन मिट्टी की प्रतिमा को घर की मिट्टी में मिलाएं

विसर्जन का वास्तविक आध्यात्मिक अर्थ

नवरात्रि के दिनों में कलश को देवी शक्ति का आसन माना जाता है। उसमें रखा जल जीवन का, नारियल चेतना का, मौली संकल्प का और ज्वार विकास का प्रतीक बनता है। जब पूजा समाप्त होती है तब इन प्रतीकों का विसर्जन साधक को याद दिलाता है कि कोई भी बाहरी रूप स्थायी नहीं होता।

देवी को विदा करना वास्तव में देवी को दूर भेजना नहीं है। यह पूजा के दौरान जाग्रत हुई शक्ति को अपने विचारों, कर्मों और व्यवहार में बनाए रखने का संकल्प है। जल में विसर्जन इसी परिवर्तन का प्रतीक है। जो वस्तु पूजा के दिनों में पवित्र मानी गई, उसे विसर्जन के बाद भी सम्मान से संभालना चाहिए।

विसर्जन के समय मन में यह भाव रखा जा सकता है कि माँ दुर्गा परिवार को शक्ति, विवेक, स्वास्थ्य और सद्भाव प्रदान करें। अगले वर्ष फिर से देवी आराधना का अवसर मिले, ऐसी प्रार्थना के साथ पूजा का समापन किया जाता है।

कलश विसर्जन से पहले की तैयारी

कलश विसर्जन अचानक नहीं करना चाहिए। पूजा समाप्त होने के बाद सभी सामग्री को क्रम से अलग करना उचित रहता है।

तैयारी के चरण

  1. अंतिम दिन देवी की पूजा और आरती पूरी करें।
  2. यदि परंपरा हो तो हवन और कन्या पूजन करें।
  3. देवी से किसी भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करें।
  4. कलश के सामने दीपक जलाकर अंतिम नमस्कार करें।
  5. नारियल को सावधानी से उतारें।
  6. कलश का जल अलग स्वच्छ पात्र में लें।
  7. कलश में रखे चावल, सुपारी, सिक्का और अन्य सामग्री अलग करें।
  8. ज्वार को जड़ सहित सावधानी से निकालें।
  9. पूजा के पुष्प और पत्तियों को अलग रखें।
  10. विसर्जन के लिए जल या मिट्टी का उचित स्थान चुनें।

कलश पर रखे नारियल को सामान्यतः प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जा सकता है। यदि नारियल पूजा के दौरान खराब हो गया हो, दुर्गंध दे रहा हो या भीतर से सड़ा हुआ हो तो उसे खाने के बजाय मिट्टी में सम्मानपूर्वक दबाना उचित है।

घर पर कलश विसर्जन की सरल विधि

जलाशय तक जाना संभव न हो तो घर पर भी सम्मानपूर्वक कलश विसर्जन किया जा सकता है। यह विधि अपार्टमेंट, वृद्ध साधकों और ऐसे परिवारों के लिए उपयोगी है जहां सार्वजनिक विसर्जन संभव नहीं।

घर पर विसर्जन के चरण

  1. एक बड़े गमले, मिट्टी के पात्र या स्वच्छ बगीचे की मिट्टी का चयन करें।
  2. पूजा स्थान के सामने कलश रखें।
  3. दीपक जलाकर माँ दुर्गा का ध्यान करें।
  4. दोनों हाथ जोड़कर विसर्जन की अनुमति और क्षमा प्रार्थना करें।
  5. कलश का जल पौधे की मिट्टी में धीरे धीरे डालें।
  6. ज्वार को मिट्टी में दबाएं या पौधे के पास रखें।
  7. पुष्प और पत्तियों को खाद या मिट्टी में मिलाएं।
  8. कलश को साफ करके दोबारा उपयोग के लिए रखें।
  9. सुपारी, सिक्का और उपयोगी पूजा सामग्री को सुरक्षित रखें।
  10. अंत में आरती और प्रसाद वितरण करें।

गमले में विसर्जन करते समय जल इतना अधिक न डालें कि पौधा खराब हो जाए। यदि कलश का जल बहुत अधिक हो तो उसे कई पौधों में थोड़ा थोड़ा डालें। स्वच्छ जल को नाली या गंदे स्थान पर बहाना उचित नहीं माना जाता।

ज्वार या जवारे का विसर्जन

नवरात्रि में ज्वार बोना उर्वरता, जीवन, वृद्धि और शुभ परिणामों का प्रतीक माना जाता है। नौ दिनों में ज्वार का बढ़ना साधक को याद दिलाता है कि नियमित साधना का परिणाम धीरे धीरे दिखाई देता है।

ज्वार विसर्जन की विधि

  1. ज्वार को पूजा स्थान से सम्मानपूर्वक उठाएं।
  2. देवी के चरणों से स्पर्श कराकर माथे से लगाएं।
  3. परिवार के सदस्यों को थोड़ा ज्वार आशीर्वाद रूप में दें।
  4. शेष ज्वार को गमले या बगीचे की मिट्टी में दबाएं।
  5. खेत उपलब्ध हो तो कृषि भूमि में मिलाएं।
  6. जलाशय में डालना हो तो केवल प्राकृतिक और जैविक ज्वार डालें।
  7. प्लास्टिक, धागा, कपड़ा या सजावटी वस्तु साथ में न डालें।

कई परिवार ज्वार को घर के सदस्यों के कान या सिर पर रखकर विजय और मंगल की शुभकामना देते हैं। यह परंपरा क्षेत्र के अनुसार बदल सकती है। ज्वार को पैरों के नीचे या कूड़े में फेंकना उचित नहीं है।

कलश की सामग्री का क्या करें

कलश में रखी हर वस्तु का उपयोग एक जैसा नहीं होता। कुछ सामग्री प्रसाद होती है, कुछ अगली पूजा में रखी जा सकती है और कुछ मिट्टी में मिलाई जा सकती है।

सामग्री का सम्मानजनक उपयोग

  1. कलश का जल पौधों, तुलसी या स्वच्छ मिट्टी में डालें।
  2. नारियल को परिवार में प्रसाद के रूप में बांटें।
  3. चावल को पक्षियों के लिए या भोजन में उपयोग करें।
  4. सुपारी को अगली पूजा में रख सकते हैं।
  5. सिक्के को पूजा स्थान या धन रखने के स्थान पर रखें।
  6. मौली को पेड़ की शाखा पर बांधने से पहले स्थानीय परंपरा देखें।
  7. पुष्प और पत्तियों को खाद में मिलाएं।
  8. मिट्टी के दीपक को साफ करके फिर उपयोग करें।
  9. कपड़े को धोकर पूजा या घरेलू उपयोग में लें।
  10. रासायनिक रंग, प्लास्टिक और चमकीली सजावट को अलग कचरे में दें।

पूजा सामग्री को पवित्र मानने का अर्थ यह नहीं है कि उसे बिना विचार के जल में डाल दिया जाए। प्रकृति भी देवी का ही रूप है। जल को प्रदूषित करना देवी के प्रति सम्मान नहीं माना जा सकता।

प्रतिमा का विसर्जन कैसे करें

यदि नवरात्रि में मिट्टी की छोटी प्रतिमा स्थापित की गई हो, तो उसका विसर्जन स्वच्छ जल या घर की मिट्टी में किया जा सकता है। प्लास्टर, रासायनिक रंग और धातु से बनी प्रतिमाओं का जल में विसर्जन पर्यावरण के लिए हानिकारक हो सकता है।

पर्यावरण अनुकूल प्रतिमा विसर्जन

  1. मिट्टी की प्रतिमा चुनें।
  2. प्रतिमा से सजावटी प्लास्टिक और धातु निकालें।
  3. अंतिम आरती और क्षमा प्रार्थना करें।
  4. बड़े पात्र में स्वच्छ जल भरें।
  5. प्रतिमा को धीरे धीरे जल में रखें।
  6. मिट्टी घुलने के बाद उस जल को पौधे या मिट्टी में डालें।
  7. प्रतिमा को तोड़कर या पैरों के नीचे रखकर विसर्जित न करें।
  8. यदि प्रतिमा बड़ी हो तो नगर निकाय के निर्धारित केंद्र का उपयोग करें।

घर पर प्रतिमा विसर्जन के लिए बाल्टी या टब का उपयोग किया जा सकता है। बाद में मिट्टी को गमले में डालें। यदि सार्वजनिक विसर्जन करना हो तो प्रशासन द्वारा बनाए गए कृत्रिम तालाब या निर्धारित स्थान को प्राथमिकता दें।

अखंड ज्योति का क्या करें

नवरात्रि में अखंड ज्योति रखने वाले परिवारों के लिए अंतिम दिन दीपक को लेकर अलग परंपराएं होती हैं। कुछ परिवार पूजा समाप्त होने तक ज्योति जलाते हैं और कुछ उसे देवी आरती के बाद शांत होने देते हैं।

अखंड ज्योति के नियम

  1. अंतिम पूजा और आरती पूरी करें।
  2. ज्योति को अचानक फूंक मारकर न बुझाएं।
  3. यदि घी या तेल समाप्त हो रहा हो तो सुरक्षित रूप से दीपक को शांत होने दें।
  4. दीपक पूरी तरह ठंडा होने के बाद साफ करें।
  5. बचा हुआ घी या तेल अगली पूजा में उपयोग कर सकते हैं।
  6. दीपक को बच्चों और ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें।
  7. अग्नि सुरक्षा को किसी भी परंपरा से ऊपर रखें।

अखंड ज्योति का आध्यात्मिक अर्थ साधना की निरंतरता है। दीपक बुझने के बाद भी साधना का प्रकाश सत्य, संयम और सेवा के रूप में जीवन में बना रहना चाहिए।

विसर्जन मंत्र और प्रार्थना

विसर्जन के समय लंबा मंत्र पढ़ना अनिवार्य नहीं है। सरल और श्रद्धापूर्ण प्रार्थना पर्याप्त है।

सरल प्रार्थना क्रम

  1. ॐ दुर्गायै नमः
  2. ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
  3. या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता
  4. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः
  5. हे माँ दुर्गा, पूजा में हुई भूलों के लिए क्षमा करें
  6. परिवार को शक्ति, स्वास्थ्य, विवेक और शांति प्रदान करें
  7. अगले नवरात्रि में पुनः आपकी आराधना का अवसर दें

प्रार्थना के बाद विसर्जन सामग्री को धीरे और सम्मान से प्रकृति को सौंपें। मंत्र का उच्चारण स्पष्ट न हो तो सरल हिंदी प्रार्थना करें। भाव और विनम्रता को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है।

कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए

विसर्जन पूजा का अंतिम चरण है, इसलिए इसमें असावधानी से बचना चाहिए।

  1. कलश या प्रतिमा को कूड़े में न डालें।
  2. प्लास्टिक की थैली सहित कोई सामग्री जल में न डालें।
  3. नदी, तालाब या झील में रसायन और रंग न डालें।
  4. जीवित वृक्ष की शाखा तोड़कर पूजा सामग्री न लटकाएं।
  5. ज्वार को सड़क या पैरों के नीचे न छोड़ें।
  6. नारियल को बिना जांचे खाने से बचें।
  7. बच्चों को जलाशय के किनारे अकेला न जाने दें।
  8. तेज बहाव वाले जल में प्रवेश न करें।
  9. स्थानीय प्रशासन के नियमों की अनदेखी न करें।
  10. विसर्जन को जल्दबाजी या मनोरंजन का कार्यक्रम न बनाएं।

व्रत पारण और पूजा समापन

व्रत रखने वाले साधक विसर्जन और पारण का समय अपनी परंपरा के अनुसार तय करें। कई परिवार नवमी पूजा और कन्या पूजन के बाद पारण करते हैं, जबकि कुछ परिवार दशमी तिथि में कलश विसर्जन के बाद व्रत खोलते हैं।

पारण में हल्का और सात्विक भोजन लेना चाहिए। लंबे उपवास के बाद अत्यधिक तला, बहुत मसालेदार या बहुत अधिक भोजन स्वास्थ्य के लिए उचित नहीं होता।

पारण की सरल व्यवस्था

  1. देवी को पहले नैवेद्य अर्पित करें।
  2. जल या पंचामृत ग्रहण करें।
  3. फल, खिचड़ी, दही या हल्का भोजन लें।
  4. स्वास्थ्य के अनुसार भोजन की मात्रा रखें।
  5. वृद्ध, बच्चे और रोगी सदस्य विशेष सावधानी रखें।
  6. प्रसाद परिवार के साथ बांटें।
  7. किसी जरूरतमंद को भोजन कराएं।

विसर्जन का पर्यावरणीय और ज्योतिषीय संदेश

विसर्जन प्रकृति चक्र की याद दिलाता है। मिट्टी से बना रूप मिट्टी में लौटता है। जल पूजा को आगे ले जाता है। ज्वार मिट्टी में मिलकर फिर जीवन का आधार बनता है। यह प्रक्रिया सृष्टि, पालन और विलय के सिद्धांत को सरल रूप में समझाती है।

ज्योतिषीय दृष्टि से विसर्जन आसक्ति कम करने का अभ्यास है। चंद्रमा मन का, शनि कर्म और धैर्य का तथा केतु वैराग्य का संकेत देता है। पूजा के बाद सामग्री को सम्मानपूर्वक छोड़ना व्यक्ति को यह सिखाता है कि श्रद्धा बनाए रखते हुए वस्तुओं से अत्यधिक चिपकाव कम किया जा सकता है।

विदाई में छिपा हुआ आगमन

नवरात्रि विसर्जन देवी को विदा करने की बाहरी विधि है, लेकिन भीतर यह देवी शक्ति को जीवन में बनाए रखने का संकल्प है। कलश का जल मिट्टी में जाता है, ज्वार धरती में लौटता है और प्रतिमा अपने मूल तत्व में विलीन होती है। यही विसर्जन का प्राकृतिक और आध्यात्मिक क्रम है।

2026 में चाहे चैत्र नवरात्रि का विसर्जन हो या शारदीय नवरात्रि का, स्थानीय पंचांग और परिवार की परंपरा का सम्मान करें। जल उपलब्ध न हो तो गमला, बगीचा या स्वच्छ मिट्टी अपनाएं। पूजा सामग्री को प्रकृति के लिए बोझ नहीं, सेवा और संरक्षण का अवसर बनाएं।

देवी की विदाई तब पूर्ण मानी जाती है जब घर में पूजा के बाद भी मधुर वाणी, संयमित जीवन, स्वच्छता, करुणा और सत्य का दीपक जलता रहे।

FAQ

नवरात्रि 2026 में कलश विसर्जन कब करना चाहिए?

चैत्र नवरात्रि में 27 मार्च को नवमी के बाद या 28 मार्च को दशमी तिथि में विसर्जन किया जा सकता है। शारदीय नवरात्रि में 19 अक्टूबर की पूजा के बाद या 20 अक्टूबर को स्थानीय पंचांग अनुसार विसर्जन करें।

ज्वार या जवारे का विसर्जन कैसे करें?

ज्वार को सम्मानपूर्वक उठाकर थोड़ा प्रसाद रूप में परिवार में बांटें और शेष को गमले, बगीचे या खेत की मिट्टी में मिला दें।

क्या कलश का जल घर में पौधों को दे सकते हैं?

हां, कलश का स्वच्छ जल पौधों, तुलसी या मिट्टी में डाला जा सकता है। अधिक जल एक ही पौधे में न डालें।

जल में प्रतिमा विसर्जन न कर सकें तो क्या करें?

मिट्टी की प्रतिमा को बड़े पात्र में स्वच्छ जल में घोलकर उस मिट्टी को गमले या बगीचे में डालें। बड़ी प्रतिमा के लिए निर्धारित कृत्रिम विसर्जन केंद्र का उपयोग करें।

क्या नारियल और सुपारी का विसर्जन करना जरूरी है?

नहीं। नारियल को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जा सकता है और सुपारी को अगली पूजा में रखा जा सकता है। पूजा सामग्री का सम्मानजनक उपयोग विसर्जन से अधिक महत्वपूर्ण है।

पाएं अपनी सटीक कुंडली

कुंडली बनाएं

क्या आपको यह पसंद आया?

लेखक

पं. नरेंद्र शर्मा

पं. नरेंद्र शर्मा (63)


अनुभव: 20

इनसे पूछें: Family Planning, Career

इनके क्लाइंट: Punjab, Haryana, Delhi

इस लेख को परिवार और मित्रों के साथ साझा करें

ZODIAQ के बारे में

ज़ोडियाक (ZODIAQ) एक ऑनलाइन वैदिक ज्योतिष प्लेटफॉर्म है। जिन यूज़र्स को ज्योतिषीय सलाह की आवश्यकता है उन्हें ये अनुभवी ज्योतिषियों से जोड़ता है। हमारे यूज़र्स निशुल्क कुंडली भी बनाते हैं और कुंडली मिलान करते हैं। साथ ही ज़ोडियाक (ZODIAQ) ज्योतिषियों को भी कई उपयोगी सेवाएँ प्रदान करता है। ज्योतिषी ज़ोडियाक (ZODIAQ) की विभिन्न सुविधाओं का उपयोग कर अपने ग्राहकों को बेहतर सेवा प्रदान करते हैं।

यदि आप एक उपयोगकर्ता हैं

अनुभवी ज्योतिषियों से सलाह लें और उनका मार्गदर्शन प्राप्त करें। आप हमारे प्लेटफॉर्म से अनुभवी ज्योतिषियों द्वारा तैयार की गई हस्तलिखित जन्म पत्रिका और जीवन भविष्यवाणी रिपोर्ट भी मंगवा सकते हैं। सटीक कुंडली बनाएं, कुंडली मिलान करें और राशिफल व मुहूर्त की जानकारी प्राप्त करें। हमारी ऑनलाइन लाइब्रेरी का उपयोग करें जहां आपको सभी जरूरी ज्योतिषीय और आध्यात्मिक जानकारी एक जगह मिलेगी।

यदि आप एक ज्योतिषी हैं

अपने ग्राहकों के लिए सटीक कुंडली बनाएं और एक बार में 5 लोगों तक का कुंडली मिलान करें। ज़ोडियाक (ZODIAQ) की मदद से अपने ग्राहकों के लिए विस्तृत जन्म पत्रिका रिपोर्ट तैयार करें। क्लाइंट डायरेक्टरी में ग्राहकों का विवरण सेव करके किसी भी समय उन्हें एक्सेस करें। हर दिन आपने कितने लोगों को परामर्श दिया यह ट्रैक कर के अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाएं।

WELCOME TO

ZODIAQ

Right Decisions at the right time with ZODIAQ