विजयादशमी 2026 शुभ मुहूर्त

By पं. नीलेश शर्मा

रावण दहन, शमी पत्र पूजा और नीलकंठ दर्शन का धार्मिक महत्व

विजयादशमी 2026: रावण दहन और शमी पूजा मुहूर्त

पहले जानें तिथि और समय

विजयादशमी 2026 में मंगलवार, 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी। दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर लगभग 12:50 बजे आरंभ होकर 21 अक्टूबर को दोपहर लगभग 2:11 बजे समाप्त होगी। स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में कुछ अंतर संभव है, इसलिए अपने शहर के पंचांग से अंतिम पुष्टि करना आवश्यक है।

नई दिल्ली के आधार पर विजय मुहूर्त दोपहर 1:59 बजे से 2:45 बजे तक माना जा रहा है। अपराह्न पूजा का समय लगभग 1:14 बजे से 3:30 बजे तक रहेगा। शमी पूजा, अपराजिता पूजा और सीमोल्लंघन इसी अवधि में किए जा सकते हैं। रावण दहन सामान्यतः सूर्यास्त के बाद किया जाता है, लेकिन सार्वजनिक कार्यक्रमों का समय शहर और आयोजन स्थल के अनुसार बदलता है। [81][82][86]

विजयादशमी 2026 की प्राथमिक जानकारी

  1. पर्व: विजयादशमी और दशहरा
  2. दिन: मंगलवार
  3. तारीख: 20 अक्टूबर 2026
  4. पक्ष: आश्विन शुक्ल पक्ष
  5. तिथि: दशमी
  6. विजय मुहूर्त: दोपहर 1:59 बजे से 2:45 बजे तक
  7. अपराह्न पूजा: दोपहर 1:14 बजे से 3:30 बजे तक
  8. शमी पूजा: अपराह्न काल और विजय मुहूर्त में
  9. रावण दहन: स्थानीय सूर्यास्त के बाद
  10. मुख्य पूजा: श्रीराम, माँ दुर्गा, शमी वृक्ष, आयुध और अपराजिता देवी
  11. प्रमुख सामग्री: शमी पत्र, रोली, अक्षत, पुष्प, दीपक, धूप, नैवेद्य और जल
  12. मूल भाव: अधर्म पर धर्म, अहंकार पर विवेक और भय पर साहस की विजय
अनुष्ठान उपयुक्त समय प्रमुख सामग्री
शमी पत्र पूजा अपराह्न काल शमी पत्र, रोली, अक्षत, पुष्प
अपराजिता पूजा विजय मुहूर्त दीपक, पुष्प, जल और नैवेद्य
आयुध पूजा विजय मुहूर्त या अपराह्न अस्त्र, शस्त्र, औजार या कार्य उपकरण
सीमोल्लंघन अपराह्न काल शमी पत्र और विजय संकल्प
रावण दहन सूर्यास्त के बाद सार्वजनिक आयोजन और सुरक्षा व्यवस्था
घर की विजय पूजा संध्या समय दीपक, श्रीराम चित्र, प्रसाद और आरती

विजयादशमी का आध्यात्मिक अर्थ

नवरात्रि के नौ दिनों में शक्ति की उपासना की जाती है और दसवें दिन विजयादशमी आती है। यह दिन केवल उत्सव का समापन नहीं है। यह साधना, संयम और आत्मचिंतन के बाद प्राप्त आंतरिक विजय का प्रतीक है।

रामायण परंपरा में भगवान श्रीराम द्वारा रावण पर विजय को धर्म की अधर्म पर विजय के रूप में देखा जाता है। देवी परंपरा में माँ दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध का स्मरण किया जाता है। दोनों कथाएं अलग होते हुए भी एक ही सत्य की ओर संकेत करती हैं। शक्ति का उपयोग लोककल्याण के लिए होना चाहिए और ज्ञान के बिना शक्ति अहंकार में बदल सकती है।

रावण दहन बाहरी पुतले का दहन है, लेकिन उसका गहरा अर्थ भीतर के अहंकार, क्रोध, लोभ, मोह, ईर्ष्या और अन्यायपूर्ण प्रवृत्तियों को पहचानना है। यदि व्यक्ति केवल पुतला जलाए और अपने व्यवहार में कटुता बनाए रखे, तो पर्व का आध्यात्मिक संदेश अधूरा रह जाता है।

शमी पत्र पूजा की परंपरा

विजयादशमी पर शमी पत्र का आदान प्रदान अनेक क्षेत्रों में शुभ माना जाता है। शमी वृक्ष को धैर्य, सहनशीलता, रक्षा और विजय से जोड़ा जाता है। लोक परंपरा में इसे सोने के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। परिवार के सदस्य एक दूसरे को शमी पत्र देकर समृद्धि, दीर्घायु और मंगल की शुभकामना देते हैं।

महाभारत से जुड़ी मान्यता के अनुसार अज्ञातवास के समय पांडवों ने अपने अस्त्र शमी वृक्ष पर छिपाए थे। समय आने पर उन्होंने शमी वृक्ष से अस्त्र निकालकर धर्म की रक्षा के लिए युद्ध किया। इसी कारण शमी पत्र पूजा को छिपी हुई शक्ति के जागरण और उचित समय पर सामर्थ्य के उपयोग से जोड़ा जाता है।

शमी पत्र पूजा की सरल विधि

  1. अपराह्न काल में शमी वृक्ष या उसकी उपलब्ध शाखा के पास जाएं।
  2. वृक्ष को प्रणाम करके जल अर्पित करें।
  3. रोली, अक्षत और पुष्प चढ़ाएं।
  4. दीपक जलाकर शमी देवता का स्मरण करें।
  5. शमी पत्र तोड़ने से पहले क्षमा और अनुमति का भाव रखें।
  6. केवल आवश्यक मात्रा में पत्र लें।
  7. पत्र घर के पूजा स्थान में रखें।
  8. परिवार के सदस्यों को शमी पत्र देकर मंगलकामना करें।
  9. पत्र को धन के स्थान, कार्यालय या कार्य उपकरण के पास श्रद्धा से रखा जा सकता है।
  10. वृक्ष को नुकसान पहुंचाने से बचें।

शमी पत्र का अर्थ वास्तविक सोना नहीं है। यह उस समृद्धि का प्रतीक है जो धर्मपूर्ण कर्म, संयम और सही समय पर किए गए प्रयास से प्राप्त होती है। किसी भी वृक्ष की शाखा को अनावश्यक रूप से तोड़ना पूजा की भावना के विपरीत है।

नीलकंठ पक्षी के दर्शन का महत्व

विजयादशमी पर नीलकंठ पक्षी के दर्शन को कई लोक परंपराओं में शुभ संकेत माना जाता है। नीलकंठ नाम सामान्यतः भारतीय रोलर पक्षी के लिए प्रयोग किया जाता है। ग्रामीण और पारंपरिक समाज में इसके दर्शन को यात्रा, युद्ध या महत्वपूर्ण कार्य में विजय से जोड़ा गया है।

इस विश्वास का संबंध भगवान शिव के नीलकंठ रूप से भी जोड़ा जाता है। समुद्र मंथन के समय शिव ने विष धारण करके लोक की रक्षा की थी। नीलकंठ पक्षी का स्मरण त्याग, धैर्य और संकट सहने की क्षमता का प्रतीक बन गया।

नीलकंठ दर्शन के संबंध में सही भाव

  1. पक्षी को देखने के लिए उसके प्राकृतिक निवास में जाएं।
  2. उसे पकड़ने या परेशान करने का प्रयास न करें।
  3. कृत्रिम रूप से पक्षी दिखाने वाले आयोजनों से बचें।
  4. दर्शन हो जाए तो शांत मन से प्रणाम करें।
  5. दर्शन न हो तो इसे अशुभ संकेत न मानें।
  6. पक्षियों को सुरक्षित रखना भी धर्म और करुणा का भाग है।

नीलकंठ पक्षी के दर्शन को शुभ मानना लोकविश्वास है। किसी व्यक्ति की सफलता केवल पक्षी के दर्शन पर निर्भर नहीं होती। सही तैयारी, धर्मपूर्ण कर्म और विवेकपूर्ण निर्णय ही जीवन की वास्तविक विजय का आधार बनते हैं।

शमी पूजा और विजय मुहूर्त

विजय मुहूर्त को विजयादशमी का विशेष समय माना जाता है। इस अवधि में नए संकल्प, शस्त्र पूजा, आयुध पूजा, शमी पूजा और अपराजिता देवी की आराधना की जाती है। व्यापार, शिक्षा, प्रशासन, सेना, तकनीकी काम और हस्तशिल्प से जुड़े लोग अपने कार्य उपकरणों की पूजा करते हैं।

विजय मुहूर्त में पूजा का उद्देश्य बाहरी विजय के साथ आंतरिक शक्ति का जागरण है। साधक यह संकल्प लेता है कि प्राप्त सामर्थ्य का उपयोग न्याय, सुरक्षा और सेवा के लिए किया जाएगा।

अपराजिता पूजा का भाव

अपराजिता देवी का अर्थ है वह शक्ति जिसे अधर्म पराजित नहीं कर सकता। यह पूजा व्यक्ति को अपने भय और आत्मसंशय से ऊपर उठने का संदेश देती है।

  1. स्वच्छ स्थान पर चौकी रखें।
  2. लाल या पीला वस्त्र बिछाएं।
  3. देवी का चित्र या प्रतीक स्थापित करें।
  4. दीपक, पुष्प, रोली और अक्षत अर्पित करें।
  5. विजय और सद्बुद्धि की प्रार्थना करें।
  6. परिवार तथा कार्यक्षेत्र की सुरक्षा का संकल्प लें।
  7. प्रसाद वितरित करें।

आयुध पूजा और कार्य उपकरणों का सम्मान

विजयादशमी पर शस्त्र और औजारों की पूजा की परंपरा प्राचीन है। आज के समय में आयुध पूजा का अर्थ केवल तलवार या धनुष की पूजा नहीं है। किसान के औजार, चालक का वाहन, विद्यार्थी की पुस्तकें, कलाकार के वाद्य, कारीगर के उपकरण और कार्यालय में उपयोग होने वाले साधन भी इस पूजा के योग्य माने जा सकते हैं।

आयुध पूजा की सरल विधि

  1. काम में आने वाले उपकरणों को साफ करें।
  2. उन्हें पूजा स्थान के पास व्यवस्थित रखें।
  3. रोली, अक्षत और पुष्प अर्पित करें।
  4. दीपक और धूप जलाएं।
  5. उपकरणों के सुरक्षित और सदुपयोग का संकल्प लें।
  6. कार्य में ईमानदारी और दक्षता की प्रार्थना करें।
  7. पूजा के बाद उपकरणों का सम्मानपूर्वक उपयोग करें।

किसी उपकरण की पूजा करके उसका गलत उपयोग करना परंपरा के उद्देश्य को कमजोर करता है। आयुध पूजा श्रम, कौशल और जिम्मेदारी का सम्मान है।

रावण दहन का सही समय

रावण दहन सामान्यतः सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में किया जाता है। 2026 में प्रमुख शहरों में सार्वजनिक रावण दहन शाम के बाद अलग अलग समय पर आयोजित हो सकता है। कहीं कार्यक्रम 6 बजे से शुरू होंगे और कहीं वास्तविक दहन 7 बजे से 8 बजे के बीच हो सकता है। स्थानीय आयोजन समिति और प्रशासन द्वारा घोषित समय को ही अंतिम मानना चाहिए।

रावण दहन के समय सावधानियां

  1. केवल अधिकृत और सुरक्षित आयोजन स्थल पर जाएं।
  2. बच्चों को भीड़ और आतिशबाजी से दूर रखें।
  3. पुतले के पास जाने का प्रयास न करें।
  4. धुएं और आग से पर्याप्त दूरी रखें।
  5. वाहन निर्धारित स्थान पर ही खड़ा करें।
  6. आपातकालीन मार्ग अवरुद्ध न करें।
  7. आतिशबाजी के समय कान और आंखों की सुरक्षा रखें।
  8. पर्यावरण और पशुओं की सुरक्षा का ध्यान रखें।
  9. जलते अवशेषों को छूने से बचें।
  10. प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

रावण दहन का समय पूरे भारत में एक समान नहीं हो सकता। स्थानीय सूर्यास्त, आयोजन स्थल, दशमी तिथि और प्रशासनिक व्यवस्था के अनुसार समय बदलता है। इसलिए किसी सामान्य समय को अपने शहर का निश्चित मुहूर्त न मानें।

दशहरा पूजा की घर पर सरल विधि

जो परिवार सार्वजनिक रावण दहन में शामिल नहीं हो सकते, वे घर पर सरल विजयादशमी पूजा कर सकते हैं।

  1. सुबह घर और पूजा स्थान की सफाई करें।
  2. भगवान श्रीराम, माँ दुर्गा या अपने इष्ट देव का चित्र स्थापित करें।
  3. दीपक, धूप, पुष्प और नैवेद्य अर्पित करें।
  4. शमी पत्र को पूजा में रखें।
  5. श्रीराम नाम या दुर्गा मंत्र का जाप करें।
  6. अपने दोषों और गलत आदतों की समीक्षा करें।
  7. एक बुरी आदत छोड़ने का संकल्प लें।
  8. परिवार के बड़े सदस्यों का आशीर्वाद लें।
  9. जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन या वस्त्र दें।
  10. शाम को आरती करके प्रसाद वितरित करें।

दशहरा पूजा में सबसे मूल्यवान अर्पण अपनी आदतों में किया गया सुधार है। यदि व्यक्ति क्रोध कम करने, सत्य बोलने, ऋण चुकाने, माता पिता की सेवा करने या परिश्रम बढ़ाने का संकल्प लेता है, तो पर्व का संदेश जीवन में उतरता है।

ज्योतिषीय दृष्टि से विजयादशमी

वैदिक ज्योतिष में विजयादशमी को ऐसे समय के रूप में देखा जाता है जब साहस, संकल्प और कर्म शक्ति को दिशा दी जा सकती है। दशमी तिथि पूर्णता और कार्य सिद्धि से जुड़ी है। सूर्य आत्मबल का, मंगल साहस का, गुरु धर्म और मार्गदर्शन का तथा शनि अनुशासन और कर्मफल का संकेत देता है।

शमी पूजा में शनि से जुड़े धैर्य और कर्म का भाव दिखाई देता है। आयुध पूजा मंगल की ऊर्जा को संयमित करती है। श्रीराम पूजा सूर्य के आत्मबल और धर्मनिष्ठ नेतृत्व को स्मरण कराती है। इस प्रकार विजयादशमी का पर्व अनेक जीवन मूल्यों को एक साथ जोड़ता है।

विजयादशमी पर कौन से संकल्प लें

  1. क्रोध में निर्णय न लेने का संकल्प
  2. ऋण और आर्थिक जिम्मेदारियों को व्यवस्थित करने का संकल्प
  3. स्वास्थ्य और दिनचर्या सुधारने का संकल्प
  4. कार्य में ईमानदारी और समयपालन का संकल्प
  5. परिवार में कटु वाणी घटाने का संकल्प
  6. किसी कमजोर व्यक्ति की सहायता करने का संकल्प
  7. अनावश्यक भय और आत्मसंशय से ऊपर उठने का संकल्प

विजय का शांत प्रकाश

विजयादशमी का दिन केवल रावण का पुतला जलाने का दिन नहीं है। यह अपने भीतर छिपे अहंकार को पहचानने, शक्ति का सदुपयोग करने और सही समय पर धर्मपूर्ण निर्णय लेने का अवसर है। शमी पत्र हमें धैर्य और छिपी हुई सामर्थ्य का स्मरण कराता है। नीलकंठ पक्षी का लोकविश्वास करुणा और संकट सहने की भावना से जुड़ा है। विजय मुहूर्त कर्म को दिशा देने का अवसर देता है।

20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी मनाते समय पंचांग आधारित स्थानीय समय का सम्मान करें। शमी पूजा, आयुध पूजा और रावण दहन को केवल बाहरी परंपरा न रहने दें। जब घर, कार्य और व्यवहार में सत्य, साहस और संयम दिखाई देने लगे तब दशहरा वास्तव में जीवन में विजय का प्रकाश बन जाता है।

FAQ

विजयादशमी 2026 कब मनाई जाएगी?

विजयादशमी 2026 में मंगलवार, 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी। स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथि और पूजा समय में थोड़ा अंतर संभव है।

2026 में विजय मुहूर्त कब है?

नई दिल्ली के अनुसार विजय मुहूर्त दोपहर 1:59 बजे से 2:45 बजे तक माना जा रहा है। अपने शहर के पंचांग से अंतिम पुष्टि करें।

दशहरा 2026 में रावण दहन किस समय होगा?

रावण दहन सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में किया जाता है। सार्वजनिक आयोजन का वास्तविक समय शहर और आयोजन स्थल के अनुसार अलग हो सकता है।

विजयादशमी पर शमी पत्र क्यों बांटे जाते हैं?

शमी पत्र को विजय, समृद्धि, धैर्य और रक्षा का प्रतीक माना जाता है। इसे परिवार और मित्रों में मंगलकामना के साथ बांटने की परंपरा है।

नीलकंठ पक्षी के दर्शन का क्या फल माना जाता है?

लोकविश्वास में नीलकंठ दर्शन को शुभ और विजय का संकेत माना जाता है। पक्षी को परेशान किए बिना दर्शन करना चाहिए और दर्शन न होने पर इसे अशुभ नहीं मानना चाहिए।

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पं. नीलेश शर्मा

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